पक्षियों और पशुओं के चित्रण के लिए नादिर उल असर की उपाधि पाने वाले चित्रकार उस्ताद मंसूर किस मुगल शासक के दरबार में थे?
- A.हुमायूँ
- B.अकबर
- C.जहाँगीर
- D.औरंगजेब
सही उत्तर
C. जहाँगीर
व्याख्या
सही उत्तर C, जहाँगीर है। जहाँगीर प्रकृति का सूक्ष्म पर्यवेक्षक था और अपने चित्रकारों से असामान्य पक्षियों, पशुओं तथा फूलों का अंकन कराता था, जिससे भीड़ भरे पांडुलिपि पृष्ठ की जगह एकल अध्ययन ने ले ली। उस्ताद मंसूर उसके सर्वश्रेष्ठ प्रकृति चित्रकार थे और उन्हें नादिर उल असर अर्थात युग का आश्चर्य कहा गया; उनके साइबेरियाई सारस और टर्की मुर्ग मानक उदाहरण हैं। नादिर उज जमाँ की उपाधि पाए अबुल हसन और फारस भेजे गए बिशनदास भी उसी के दरबार में थे।
विकल्प A, हुमायूँ, मीर सैयद अली और अब्दुस समद को लाया और शैली का केवल आरंभ किया। विकल्प B, अकबर, ने चित्रशाला व्यवस्थित की तथा हम्जानामा, रज्मनामा और अकबरनामा बनवाए, परंतु उसकी रुचि कथात्मक ग्रंथों में थी और बसावन तथा दसवंत उसके चित्रकार थे। विकल्प D, औरंगजेब, ने संरक्षण हटा लिया, जिससे चित्रकार राजपूत और पहाड़ी दरबारों में बिखर गए।
पूरा लेख पढ़ें: भारतीय चित्रकला और शैलियां: भित्तिचित्र से लोककला तक
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें'मधुबनी' चित्रकला किस राज्य से संबंधित है?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.बिहार
- C.केरल
- D.तमिलनाडु
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बिहार
व्याख्या
सही उत्तर B, बिहार है। मधुबनी चित्रकला, जिसे मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है, उत्तरी बिहार के मधुबनी और दरभंगा जिलों के मिथिला क्षेत्र की परंपरा है। परंपरागत रूप से इसे स्त्रियाँ विवाह और त्योहारों पर घर की पुती दीवारों तथा आँगन पर प्राकृतिक रंगों और कपड़े में लिपटी बाँस की कलम से बनाती थीं, और अब यह कागज तथा कपड़े पर भी बनती है। इसकी शैलियाँ भरनी, कचनी, गोदना और तांत्रिक हैं, तथा सीता देवी, गंगा देवी और महासुंदरी देवी इसकी प्रसिद्ध चित्रकार हैं। इसे भौगोलिक संकेतक अर्थात जीआई टैग भी प्राप्त है।
विकल्प A, उत्तर प्रदेश, इसका क्षेत्र नहीं है, क्योंकि मिथिला संस्कृति नेपाल सीमा की ओर फैलती है, दोआब की ओर नहीं। विकल्प C, केरल, मंदिर भित्ति चित्रों और कथकली के लिए जाना जाता है। विकल्प D, तमिलनाडु, स्वर्ण पत्र वाली तंजौर चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए यह इस प्रश्न का सामान्य भ्रामक विकल्प है।
सुप्रसिद्ध चित्र बणी ठणी किस शैली से संबंधित है?
- A.बूँदी शैली
- B.जयपुर शैली
- C.कांगड़ा शैली
- D.किशनगढ़ शैली
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. किशनगढ़ शैली
व्याख्या
सही उत्तर D, किशनगढ़ शैली है। बणी ठणी को अठारहवीं शताब्दी में राजस्थान के किशनगढ़ में निहालचंद ने राजा सावंत सिंह के संरक्षण में बनाया, जो नागरी दास के नाम से भक्ति काव्य रचते थे। इस आकृति का मुख लंबा, गर्दन लंबी, भौंह तीव्र धनुषाकार और आँख खिंची हुई है, और यही शैलीबद्ध नायिका रूप इस शैली की पहचान बन गया। इस चित्र को प्रायः भारत की मोनालिसा कहा जाता है, और किशनगढ़ के चित्रों में नायक नायिका अक्सर कमल भरे सरोवरों के किनारे दिखाए जाते हैं।
विकल्प A, बूँदी शैली, घनी नीली हरी वनस्पति, जल और पशु जीवन से पहचानी जाती है, इस नायिका रूप से नहीं। विकल्प B, जयपुर या आम्बेर शैली, प्रबल मुगल प्रभाव में बड़े व्यक्तिचित्र बनाती थी। विकल्प C, कांगड़ा शैली, पर्वतीय पहाड़ी शैली है, कोमल और भावप्रधान, जो गीत गोविंद श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध है और राजस्थान से भौगोलिक रूप से दूर है।
बोधिसत्व पद्मपाणि का चित्र किस स्थल के सर्वाधिक प्रसिद्ध और बार बार प्रकाशित चित्रों में से एक है?
- A.अजंता
- B.बादामी
- C.बाघ
- D.एलोरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अजंता
व्याख्या
सही उत्तर A, अजंता है। नीला कमल धारण किए बोधिसत्व पद्मपाणि महाराष्ट्र के अजंता की गुफा संख्या एक के अंतराल की बाईं दीवार पर चित्रित हैं, और उनके सामने बोधिसत्व वज्रपाणि हैं। यह आकृति पाँचवीं शताब्दी के वाकाटक काल की है, और इसकी झुकी पलकें तथा शिथिल देह भारतीय भित्ति चित्रकला का श्रेष्ठतम उदाहरण मानी जाती हैं। अजंता के चित्र मिट्टी, गोबर और धान की भूसी की सतह पर टेम्पेरा विधि से बने हैं, और ये गुफाएँ वाघोरा नदी के ऊपर स्थित हैं।
विकल्प B, कर्नाटक का बादामी, अपनी गुफा तीन में चालुक्य राजकीय चित्रों के लिए जाना जाता है। विकल्प C, मध्य प्रदेश का बाघ, शैली में अजंता के अत्यंत निकट बौद्ध भित्ति चित्रों का स्थल है, इसलिए यही सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है, परंतु यह चित्र वहाँ नहीं है। विकल्प D, एलोरा, मुख्यतः शैलकृत मूर्तिकला और स्थापत्य का स्थल है, जहाँ चित्रकारी मुख्यतः कैलाश मंदिर में बची है।
वारली चित्रकला ______ की वारली जनजाति के लोगों द्वारा रची गई जनजातीय कला शैली है।
- A.बिहार
- B.केरल
- C.महाराष्ट्र
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महाराष्ट्र
व्याख्या
सही उत्तर C, महाराष्ट्र है। वारली उत्तरी महाराष्ट्र के पालघर और ठाणे जिलों की, गुजरात सीमा से लगी एक जनजातीय समुदाय है। उनकी चित्रकला गेरू और गोबर से पुती दीवार पर चावल के लेप की सफेदी से बनाई जाती है, और यह कुछ ही ज्यामितीय इकाइयों से बनती है: सूर्य और चंद्रमा के लिए वृत्त, पर्वतों तथा वृक्षों के लिए त्रिभुज, और चौक कहे जाने वाले पवित्र घेरे के लिए वर्ग। सबसे आम विषय तारपा नृत्य है, जिसमें वादक के चारों ओर नर्तकों का सर्पिल घेरा बनता है। जीव्या सोमा माशे वह चित्रकार थे जिन्होंने वारली कला को विश्व तक पहुँचाया।
विकल्प A, बिहार, मधुबनी का घर है। विकल्प B, केरल, अपने मंदिर भित्ति चित्रों के लिए जाना जाता है। विकल्प D, असम, में सत्रों की पांडुलिपि चित्रकला है, वारली कला नहीं।
निम्नलिखित में से कौन चित्रकला में निपुणता के लिए नहीं जाना जाता है?
- A.तैयब मेहता
- B.जामिनी रॉय
- C.हबीब तनवीर
- D.सतीश गुजराल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हबीब तनवीर
व्याख्या
सही उत्तर C, हबीब तनवीर है। वे आधुनिक भारतीय रंगमंच के नाटककार, निर्देशक और अभिनेता थे, जो चरणदास चोर के लिए और अपनी नया थिएटर मंडली में छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों के साथ काम करने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे नाट्य क्षेत्र के हैं, चित्रकला के नहीं, इसलिए वही इस सूची में भिन्न नाम हैं।
विकल्प A, तैयब मेहता, प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप की पीढ़ी के चित्रकार थे, जो अपने विकर्ण संयोजन तथा फॉलिंग फिगर और महिषासुर श्रृंखलाओं के लिए जाने जाते हैं। विकल्प B, जामिनी रॉय, बंगाल के चित्रकार थे जिन्होंने अकादमिक यथार्थवाद छोड़कर कालीघाट तथा बंगाल की लोककला की प्रखर सपाट रेखा अपनाई। विकल्प D, सतीश गुजराल, चित्रकार, मूर्तिकार और भित्तिकार थे, जिन्होंने नई दिल्ली में बेल्जियम दूतावास भवन का अभिकल्पन भी किया, अतः चित्रकला उनका एक क्षेत्र है। इस प्रकार के प्रश्नों में चित्रकारों की सूची में रंगमंच, संगीत या मूर्तिकला का एक नाम मिला दिया जाता है।