न्यूटन के गति के तीसरे नियम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.प्रकृति में बल कभी अकेला नहीं होता
- B.जब पृथ्वी गुरुत्व के कारण किसी पत्थर को नीचे खींचती है, तो पत्थर भी पृथ्वी पर बल लगाता है
- C.तीसरे नियम में कारण-प्रभाव संबंध निहित है
- D.तीसरे नियम में कोई कारण-प्रभाव संबंध निहित नहीं है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C। तीसरा नियम एक बल को कारण और दूसरे को प्रभाव नहीं बनाता; क्रिया और प्रतिक्रिया एक ही क्षण में साथ-साथ पैदा होती हैं।
न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। ये दोनों बल दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं, परिमाण में बराबर, दिशा में विपरीत और एक साथ होते हैं। चूँकि कोई भी पहले नहीं आता, इसलिए क्रिया और प्रतिक्रिया केवल नाम हैं; किसी भी बल को क्रिया कहा जा सकता है। इसी कारण प्रकृति में बल सदा जोड़े में मिलते हैं।
A सही कथन है, इसलिए उत्तर नहीं: बल हमेशा दो वस्तुओं की पारस्परिक क्रिया है, वह अकेला नहीं होता।
B सही कथन है, इसलिए उत्तर नहीं: पत्थर भी पृथ्वी को उतने ही बल से ऊपर खींचता है; पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक होने से वह लगभग नहीं हिलती।
D सही कथन है, इसलिए उत्तर नहीं: नियम का यही सही अर्थ है कि दोनों बल एक साथ होते हैं, उनमें कारण-प्रभाव नहीं।
परीक्षा टिप: क्रिया-प्रतिक्रिया बराबर, विपरीत, एक साथ और अलग वस्तुओं पर, इसलिए एक-दूसरे को निरस्त नहीं करतीं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सी रासायनिक अभिक्रिया संभव नहीं है?
- A.Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu
- B.Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
- C.Cu + PbCl2 → CuCl2 + Pb
- D.Mg + CuSO4 → MgSO4 + Cu
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, Cu + PbCl2 → CuCl2 + Pb। ताँबा सीसे से कम सक्रिय है, इसलिए वह सीसे को उसके यौगिक से विस्थापित नहीं कर सकता।
विस्थापन अभिक्रिया में अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से हटाकर उसकी जगह ले लेती है। सक्रियता श्रेणी, अधिक से कम सक्रिय के क्रम में, इस प्रकार है: पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जस्ता, लोहा, सीसा, हाइड्रोजन, ताँबा, पारा, चाँदी, सोना। मैग्नीशियम, जस्ता और लोहा तीनों ताँबे से ऊपर हैं, इसलिए हर एक कॉपर सल्फ़ेट से ताँबे को विस्थापित करता है; नीला विलयन फीका पड़ता है और लाल-भूरा ताँबा जमा होता है। पर ताँबा सीसे से नीचे है, इसलिए वह लेड क्लोराइड से सीसे को नहीं हटा सकता।
A गलत है: लोहा ताँबे से अधिक सक्रिय है, इसलिए यह अभिक्रिया होती है; यह कॉपर सल्फ़ेट में लोहे की कील वाला प्रसिद्ध प्रयोग है।
B गलत है: श्रेणी में जस्ता ताँबे से ऊपर है और उसे आसानी से विस्थापित करता है।
D गलत है: मैग्नीशियम ताँबे से बहुत अधिक सक्रिय है और उसे आसानी से विस्थापित करता है।
परीक्षा टिप: कोई धातु केवल अपने से नीचे वाली धातुओं को विस्थापित करती है: K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Hg, Ag, Au।
कार्बन के निम्नलिखित अपरूपों में से कौन-सा/से विद्युत का/के सुचालक है/हैं? 1. हीरा 2. ग्रेफ़ाइट 3. फ़ुलरीन नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2
- D.केवल 1 और 3
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, केवल 2। ग्रेफ़ाइट में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं जो उसमें चल सकते हैं, इसलिए यह विद्युत का चालन करता है; हीरा और फ़ुलरीन अच्छे चालक नहीं हैं।
ग्रेफ़ाइट में हर कार्बन परमाणु केवल तीन अन्य परमाणुओं से जुड़ा होता है और षट्कोणों की समतल परतें बनती हैं। हर परमाणु का चौथा इलेक्ट्रॉन परतों के साथ-साथ घूमने के लिए मुक्त रहता है, जिससे ग्रेफ़ाइट धारा प्रवाहित करता है; इसीलिए इसका उपयोग शुष्क सेल और विद्युत आर्क के इलेक्ट्रोड में होता है। हीरे में हर कार्बन परमाणु चार अन्य परमाणुओं से कठोर त्रिविमीय जाल में जुड़ा होता है और कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बचता, इसलिए हीरा ऊष्मा का अच्छा चालक होते हुए भी विद्युत का कुचालक है। फ़ुटबॉल जैसे आकार वाले C60 जैसे फ़ुलरीन में इलेक्ट्रॉन अणु के भीतर बँधे रहते हैं, इसलिए यह खराब चालक है।
A गलत है: हीरा विद्युत का कुचालक है।
B गलत है: इसमें हीरा शामिल है, जो विद्युत का चालन नहीं करता।
D गलत है: न हीरा और न फ़ुलरीन अच्छा चालक है, और इसमें ग्रेफ़ाइट छूट गया है।
परीक्षा टिप: ग्रेफ़ाइट विद्युत का चालन करने वाली एकमात्र आम अधातु है; हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
लघुपथन (शॉर्ट-सर्किट) के समय परिपथ में विद्युत धारा:
- A.काफ़ी कम हो जाती है।
- B.नहीं बदलती।
- C.बहुत अधिक बढ़ जाती है।
- D.लगातार घटती-बढ़ती रहती है।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, बहुत अधिक बढ़ जाती है। लघुपथन में विद्युन्मय (लाइव) और उदासीन तार आपस में छू जाते हैं, रास्ते का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है और धारा तेज़ी से बढ़ जाती है।
ओम के नियम के अनुसार धारा I = V / R। सामान्य स्थिति में परिपथ के उपकरण प्रतिरोध देकर धारा को सुरक्षित सीमा में रखते हैं। जब खराब इन्सुलेशन के कारण लाइव तार सीधे उदासीन तार से छू जाता है, तो धारा उपकरणों को छोड़कर बहती है और प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है, इसलिए उसी वोल्टता पर धारा बहुत अधिक हो जाती है। इससे तार तेज़ी से गर्म होते हैं (ऊष्मा ∝ I²Rt) और आग लग सकती है। ऐसे में फ़्यूज़ या मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) परिपथ तोड़ देता है।
A गलत है: कम प्रतिरोध का अर्थ है अधिक धारा, कम नहीं।
B गलत है: प्रतिरोध तेज़ी से बदलता है, इसलिए धारा वही नहीं रह सकती।
D गलत है: धारा घटती-बढ़ती नहीं; वह बहुत ऊँचे मान तक पहुँचती है जब तक फ़्यूज़ या ब्रेकर उसे काट न दे।
परीक्षा टिप: लघुपथन = प्रतिरोध लगभग शून्य, धारा बहुत अधिक; अतिभारण = एक सॉकेट पर बहुत सारे उपकरण।
धूप वाले दिन एक पौधे से पत्ती तोड़कर 2 मिनट तक उबलते पानी में रखी गई। इसके बाद उसे उबलते ऐल्कोहॉल में डुबोया गया और आयोडीन विलयन से उपचारित किया गया। परीक्षण के बाद पत्ती का अंतिम रंग क्या होगा?
- A.रंगहीन
- B.हरा
- C.नीला
- D.सफ़ेद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, नीला। धूप वाले दिन की पत्ती में प्रकाश संश्लेषण से बना स्टार्च भरा होता है, और आयोडीन स्टार्च को नीला-काला कर देता है।
यह पत्ती में स्टार्च की जाँच का सामान्य स्कूली परीक्षण है। पत्ती को पानी में उबालने से उसकी कोशिकाएँ मर जाती हैं और वह नरम हो जाती है, ताकि विलयन अंदर जा सकें। फिर जल-ऊष्मक पर ऐल्कोहॉल में उबालने से क्लोरोफिल घुल जाता है और पत्ती फीकी या लगभग रंगहीन रह जाती है। इसके बाद आयोडीन विलयन डालने पर पत्ती में जमा स्टार्च उससे क्रिया करता है और पत्ती नीली-काली हो जाती है। परीक्षण से पहले दो दिन अँधेरे में रखी पत्ती नीली नहीं होती, जिससे सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।
A गलत है: पत्ती आयोडीन डालने से पहले ही रंगहीन होती है; उसके बाद स्टार्च उसे नीला कर देता है।
B गलत है: हरा क्लोरोफिल उबलते ऐल्कोहॉल से पहले ही निकल चुका है।
D गलत है: स्टार्च-रहित पत्ती आयोडीन का भूरा रंग दिखाती, सफ़ेद नहीं, और इस पत्ती में स्टार्च है।
परीक्षा टिप: आयोडीन परीक्षण में स्टार्च नीला-काला होता है; परीक्षण से पहले ऐल्कोहॉल क्लोरोफिल हटाता है।
ध्वनि बूम (सोनिक बूम) तब उत्पन्न होता है जब ध्वनि का स्रोत किस चाल से चलता है?
- A.ध्वनि की चाल से अधिक।
- B.प्रकाश की चाल से अधिक।
- C.ध्वनि की चाल से कम।
- D.ध्वनि की चाल के बराबर।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, ध्वनि की चाल से अधिक। ध्वनि से तेज़ चलने वाली वस्तु अपनी ही ध्वनि तरंगों से आगे निकल जाती है, जो इकट्ठी होकर प्रघाती तरंग बनाती हैं और ज़मीन पर ध्वनि बूम के रूप में सुनाई देती हैं।
कमरे के तापमान पर हवा में ध्वनि लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड चलती है। इससे तेज़ चलने वाला सुपरसोनिक विमान या गोली अपनी ध्वनि तरंगों को पीछे छोड़ देता है, और ये तरंगें वस्तु के पीछे शंकु के आकार की प्रघाती तरंग बना लेती हैं। जब इस शंकु का किनारा सुनने वाले के ऊपर से गुज़रता है, तो वायुदाब में अचानक बदलाव एक तेज़ धमाके जैसा सुनाई देता है। चाल को अक्सर मैक संख्या में बताते हैं, यानी वस्तु की चाल और ध्वनि की चाल का अनुपात; सुपरसोनिक का अर्थ है मैक 1 या अधिक।
B गलत है: कोई भौतिक वस्तु प्रकाश से तेज़ नहीं चल सकती।
C गलत है: ध्वनि से कम चाल पर तरंगें स्रोत के आगे फैल जाती हैं, इसलिए प्रघाती तरंग नहीं बनती।
D गलत है: ठीक ध्वनि की चाल पर तरंगें अगले सिरे पर इकट्ठी होती हैं, पर ज़मीन पर सुनाई देने वाला बूम सुपरसोनिक उड़ान से ही आता है।
परीक्षा टिप: मैक 1 = ध्वनि की चाल; मैक 1 से ऊपर सुपरसोनिक और मैक 5 से ऊपर हाइपरसोनिक।