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GK24
सामान्य विज्ञानआसानपूछा गया: UPSC CAPF · 20 Dec 2020

निम्नलिखित में से किस गैस में विद्युत प्रवाहित करने पर लाल प्रकाश उत्पन्न होता है?

  1. A.हीलियम
  2. B.आर्गन
  3. C.नाइट्रोजन
  4. D.नियॉन

सही उत्तर

D. नियॉन

व्याख्या

सही उत्तर है D, नियॉन। जब कम दबाव पर नियॉन भरी बंद नली में विद्युत प्रवाहित की जाती है, तो गैस के परमाणु उत्तेजित होकर चमकीला नारंगी-लाल प्रकाश देते हैं, इसीलिए विज्ञापन के साइनबोर्ड आज भी नियॉन साइन कहे जाते हैं। नियॉन एक अक्रिय गैस है, जिसकी खोज 1898 में रैम्से और ट्रैवर्स ने की थी; यह सामान्य यौगिक नहीं बनाती और वोल्टेज परीक्षकों, उच्च वोल्टता सूचकों तथा तड़ित निरोधकों में भी काम आती है। विसर्जन नली में हर गैस अपने ही रंग में चमकती है और यह रंग उसके परमाणु ऊर्जा स्तरों की पहचान होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि हीलियम हल्का गुलाबी-श्वेत प्रकाश देती है और वह गुब्बारों तथा वायुपोतों में भरने के लिए जानी जाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि आर्गन हल्के बैंगनी-नीले रंग में चमकती है और विद्युत बल्बों को भरने तथा वेल्डिंग में सुरक्षा कवच बनाने में काम आती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन नीलापन लिए चमकती है और इसका उपयोग अक्रिय पैकिंग गैस तथा द्रव शीतलक के रूप में होता है। परीक्षा टिप: विसर्जन नली में लाल प्रकाश नियॉन का, और साधारण बल्बों में भरी जाने वाली गैस आर्गन।

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Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC CGL · 01 Dec 2022, Shift 4मध्यम

निम्नलिखित में से किन जंतुओं के पाचन तंत्र में एक ही छिद्र होता है जो मुँह और गुदा दोनों का काम करता है?

  1. A.अरैक्निड
  2. B.इकाइनोडर्म
  3. C.प्लैटीहेल्मिंथीज
  4. D.आर्थ्रोपोड
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्लैटीहेल्मिंथीज

व्याख्या

सही उत्तर है C, प्लैटीहेल्मिंथीज। चपटे कृमियों के संघ प्लैटीहेल्मिंथीज में पाचन तंत्र अपूर्ण होता है और उसमें केवल एक ही छिद्र रहता है, इसलिए वही मुँह भोजन भीतर लेता है और अपशिष्ट बाहर निकालता है। उनकी आहारनाल एक बंद थैली जैसी होती है जिसमें गुदा नहीं होती। प्लेनेरिया, यकृत पर्णाभ कृमि और फीताकृमि इसी संघ में आते हैं, और फीताकृमि में तो आहारनाल ही नहीं होती, वह अपने शरीर की सतह से भोजन सोखता है। चपटे कृमि त्रिकोरकी, अप्रगुही और द्विपार्श्व सममित होते हैं, और इनमें से अनेक परजीवी हैं। अलग मुँह और गुदा वाला पूर्ण पाचन तंत्र गोल कृमियों से आगे दिखाई देता है। A गलत है क्योंकि मकड़ी और बिच्छू जैसे अरैक्निड आर्थ्रोपोड हैं और उनमें पूर्ण आहारनाल होती है। B गलत है क्योंकि तारामीन और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म में मुँह और गुदा दोनों होते हैं। D गलत है क्योंकि जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा पूर्ण आहारनाल रखता है। परीक्षा टिप: सीलेंटरेटा और प्लैटीहेल्मिंथीज में एक छिद्र, ऐस्केहेल्मिंथीज से आगे दो छिद्र।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 9 Aug 2018, Shift 1मध्यम

वायु में f फोकस दूरी वाले एक उत्तल दर्पण को 4/3 अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया जाता है। द्रव में इस दर्पण की फोकस दूरी क्या होगी?

  1. A.(4/3) f
  2. B.(3/4) f
  3. C.(7/3) f
  4. D.f
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. f

व्याख्या

सही उत्तर है D, f। दर्पण की फोकस दूरी उसके चारों ओर के माध्यम पर निर्भर नहीं करती, इसलिए वायु में f फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण की फोकस दूरी द्रव में भी f ही रहती है। दर्पण परावर्तन के नियम से काम करता है और गोलीय दर्पण के लिए f = R/2 होता है, जहाँ R उसकी सतह की वक्रता त्रिज्या है। R केवल दर्पण की बनावट से तय होता है, इसलिए वायु के स्थान पर जल, तेल या कोई भी द्रव आ जाए, फोकस दूरी नहीं बदलती। लेंस का मामला इसके उलट है, क्योंकि वह अपवर्तन से काम करता है - उसकी फोकस दूरी काँच के अपवर्तनांक और आसपास के माध्यम के अनुपात पर निर्भर करती है, इसलिए द्रव में लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है। A गलत है क्योंकि f को 4/3 से गुणा करना दर्पण को लेंस मान लेने जैसा है। B भी इसी कारण गलत है, वहाँ केवल गुणक उलट दिया गया है। C गलत है क्योंकि 7/3 का यहाँ कोई आधार नहीं है। परीक्षा टिप: दर्पण की फोकस दूरी R/2 होती है और हर माध्यम में वही रहती है, लेंस की नहीं।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 02 May, 2025, Shift 2मध्यम

समय के साथ ताँबा हरा पड़ जाने का मुख्य कारण क्या है?

  1. A.हाइड्रोजन भंगुरता
  2. B.वायु से नाइट्रोजन का अवशोषण
  3. C.पराबैंगनी प्रकाश से अभिक्रिया
  4. D.ऑक्साइड की परत बनना
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ऑक्साइड की परत बनना

व्याख्या

सही उत्तर है D, ऑक्साइड की परत बनना। ताँबा हरा इसलिए पड़ता है कि उसकी सतह धीरे-धीरे हवा से अभिक्रिया करके संक्षारण उत्पादों की परत से ढक जाती है, और वह परत हरे रंग की होती है। नम हवा में ताँबे पर पहले गहरे रंग का कॉपर ऑक्साइड बनता है; फिर कार्बन डाइऑक्साइड और नमी मिलकर उसे क्षारीय कॉपर कार्बोनेट में बदल देते हैं, जो पुरानी ताँबे की छतों, मंदिरों के गुंबदों और स्टैचू ऑफ लिबर्टी पर दिखने वाली हरी पर्त है। यह परत धातु से चिपकी रहती है और भीतर की धातु की रक्षा करती है, इसीलिए ताँबा लोहे की तरह जंग खाकर नष्ट नहीं होता। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन भंगुरता धातु को भुरभुरा और दरारयुक्त बनाती है, उसका रंग नहीं बदलती। B गलत है क्योंकि ताँबा हवा से नाइट्रोजन नहीं सोखता, नाइट्रोजन साधारण ताप पर लगभग निष्क्रिय रहती है। C गलत है क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश ताँबे से अभिक्रिया कर हरी परत नहीं बनाता। परीक्षा टिप: ताँबे की हरी परत क्षारीय कॉपर कार्बोनेट है, और इमली या नींबू का अम्ल इसी परत को घोलकर बर्तन साफ करता है।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · 30 Sept, 2023मध्यम

निम्नलिखित में से कौन अभिक्रिया की दर को धीमा करता है?

  1. A.उत्प्रेरक वर्धक (प्रोमोटर)
  2. B.समांगी उत्प्रेरक
  3. C.विषमांगी उत्प्रेरक
  4. D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. इनमें से कोई नहीं

व्याख्या

सही उत्तर है D, इनमें से कोई नहीं। दिए गए तीनों पदार्थों में से कोई भी अभिक्रिया की दर को धीमा नहीं करता; दर घटाने वाले पदार्थ को ऋणात्मक उत्प्रेरक या अवरोधक कहा जाता है। उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो स्वयं खर्च हुए बिना अभिक्रिया की दर बदल देता है, और यह सक्रियण ऊर्जा घटाकर काम करता है। धनात्मक उत्प्रेरक दर बढ़ाता है, जबकि ऋणात्मक उत्प्रेरक दर घटा देता है, जैसे ग्लिसरॉल हाइड्रोजन परॉक्साइड के विघटन को धीमा कर देता है। A गलत है क्योंकि उत्प्रेरक वर्धक उत्प्रेरक की सक्रियता बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है, इसलिए वह दर बढ़ाता है। B गलत है क्योंकि समांगी उत्प्रेरक अभिकारकों की ही अवस्था में रहता है और अभिक्रिया को तेज करता है। C गलत है क्योंकि विषमांगी उत्प्रेरक भिन्न अवस्था में रहता है, जैसे हैबर प्रक्रम में लोहा, और वह भी दर बढ़ाता है। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - वर्धक उत्प्रेरक की सक्रियता बढ़ाता है, विष या अवरोधक उसे घटाता है।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC MTS · 19 August 2019, Shift 3आसान

शुष्क बर्फ (ड्राई आइस) का रासायनिक नाम क्या है?

  1. A.कार्बन डाइऑक्साइड
  2. B.नाइट्रोजन ऑक्साइड
  3. C.ऑक्सिडेन
  4. D.सल्फर डाइऑक्साइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कार्बन डाइऑक्साइड

व्याख्या

सही उत्तर है A, कार्बन डाइऑक्साइड। शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है। साधारण दाब पर यह पिघलकर द्रव नहीं बनती, बल्कि लगभग शून्य से 78.5 डिग्री सेल्सियस नीचे सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है; इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। चूँकि इससे कोई द्रव नहीं बचता, इसलिए यह सूखी रहती है और इसी कारण इसका नाम शुष्क बर्फ पड़ा। इसका उपयोग आइसक्रीम, जमे हुए खाद्य पदार्थ, टीके और रक्त के नमूनों को ढोते समय ठंडा रखने में होता है, और मंच पर बनने वाला सफेद कोहरा ठंडी कार्बन डाइऑक्साइड गैस से हवा की नमी के संघनन से बनता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन के ऑक्साइड गैसें हैं, जिनमें नाइट्रस ऑक्साइड को हँसाने वाली गैस कहा जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि ऑक्सिडेन जल का व्यवस्थित नाम है, जिसका ठोस रूप साधारण बर्फ है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सल्फर डाइऑक्साइड तीखी गंध वाली गैस है, जो परिरक्षक और विरंजक के रूप में काम आती है। परीक्षा टिप: शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है और यह पिघलती नहीं, ऊर्ध्वपातित होती है।