निम्नलिखित में से कौन-सी अमेरिकी समाचार पत्रिका आरंभ में गांधीजी के दांडी मार्च को लेकर अत्यंत संशयवादी थी, परंतु एक सप्ताह के भीतर ही उसने अपनी राय पूरी तरह बदल दी और उन्हें संत और राजनेता कहकर सलाम किया?
- A.सैटरडे इवनिंग पोस्ट
- B.रीडर्स डाइजेस्ट
- C.टाइम
- D.लाइफ
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, टाइम। मार्च 1930 में नमक यात्रा शुरू हुई तो टाइम पत्रिका ने गांधी की दुबली काया का मजाक उड़ाया और संदेह जताया कि यात्रा दांडी तक पहुंचेगी; एक सप्ताह के भीतर, भारी भीड़ और जनसमर्थन देखकर, वही पत्रिका उन्हें संत और राजनेता कहने लगी।
गांधी 12 मार्च 1930 को 78 साथियों के साथ साबरमती आश्रम से निकले और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़ा, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ। इस यात्रा को यूरोप और अमेरिका के अखबारों में खूब जगह मिली और भारत का स्वतंत्रता संघर्ष दुनिया भर में जाना गया; टाइम ने गांधी को 1930 का "मैन ऑफ द ईयर" भी चुना।
A गलत है, क्योंकि राय बदलने वाली पत्रिका के रूप में सैटरडे इवनिंग पोस्ट का नाम दर्ज नहीं है।
B गलत है, क्योंकि लेखों का संकलन छापने वाली रीडर्स डाइजेस्ट इस प्रसंग की पत्रिका नहीं है।
D गलत है, क्योंकि लाइफ समाचार-फोटो साप्ताहिक के रूप में 1936 में शुरू हुई, यात्रा के कई साल बाद।
Exam tip: दांडी मार्च 12 मार्च–6 अप्रैल 1930; टाइम ने पहले मजाक उड़ाया, फिर संत और राजनेता कहा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसातवाहनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सातवाहन शासकों की पहचान मातृनाम (मेट्रोनिमिक्स) से होती थी 2. सातवाहनों में सिंहासन का उत्तराधिकार सामान्यतः पितृवंशीय था उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सातवाहन राजाओं के नाम उनकी माताओं के नाम से जुड़े होते थे, फिर भी सिंहासन सामान्यतः पिता से पुत्र को मिलता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 की विशेषता नहीं है?
- A.भारत डोमिनियन को सिंध, बलूचिस्तान, पश्चिमी पंजाब, पूर्वी बंगाल और उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत को छोड़कर भारत का शेष क्षेत्र मिला।
- B.अधिनियम ने ब्रिटिश संसद की विधायी इच्छा से एक संविधान निर्धारित करने का प्रयास किया।
- C.अधिनियम में दो स्वतंत्र डोमिनियन स्थापित करने का प्रस्ताव था।
- D.प्रत्येक डोमिनियन की संविधान सभा को कोई भी संविधान बनाने और अपनाने की असीमित शक्ति थी।
उत्तर देखें
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ने भारत के लिए कोई संविधान निर्धारित नहीं किया; संविधान बनाने का काम पूरी तरह नए डोमिनियनों की संविधान सभाओं पर छोड़ दिया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महात्मा गांधी के सत्याग्रह के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. दक्षिण अफ्रीका में नस्लवाद के विरुद्ध अपने अभियान के दौरान गांधीजी ने पहली बार सत्याग्रह का प्रयोग किया 2. सत्याग्रह के दो आवश्यक तत्व 'सत्य' और 'अहिंसा' हैं 3. सत्याग्रही बुराई का प्रतिरोध स्वयं कष्ट सहकर करता है, विरोधी को कष्ट देकर नहीं 4. भारत में गांधीजी ने सत्याग्रह का पहला प्रयोग चंपारण में किया नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A.केवल 1 और 4
- B.केवल 2
- C.केवल 4
- D.1, 2, 3 और 4
उत्तर देखें
चारों कथन गांधीजी की सत्याग्रह पद्धति का सही वर्णन करते हैं। गांधीजी ने सत्याग्रह का पहला प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में किया, 1906 में ट्रांसवाल में उस कानून के विरुद्ध जो भारतीयों को पंजीकरण कराने और पास रखने पर मजबूर करता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में उभरे आर्य समाज के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. व्यापारी जातियों में इसका बहुत मज़बूत समर्थन आधार था 2. इसने 'शुद्धि' या सामूहिक शुद्धिकरण की शुरुआत की 3. आर्य समाज के उदारवादियों का नेतृत्व हंसराज और लाजपत राय ने किया और उन्होंने दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेजों की शृंखला स्थापित की 4. आर्य समाज के सदस्य ब्रह्म समाज से कम थे नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A.केवल 1 और 2
- B.1, 2 और 3
- C.केवल 3 और 4
- D.1, 3 और 4
उत्तर देखें
कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है क्योंकि आर्य समाज ब्रह्म समाज से कहीं बड़ा संगठन बना।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1824 का बैरकपुर विद्रोह इसलिए भड़का कि 47वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने किस बात से इनकार कर दिया?
- A.पगड़ी पर चमड़े की कलगी पहनने से
- B.नए एनफ़ील्ड कारतूस के उपयोग से
- C.समुद्र पार कर बर्मा कूच करने से
- D.भारतीय अधिकारियों के अधीन सेवा से
उत्तर देखें
प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के समय बैरकपुर में तैनात 47वीं देशी पैदल सेना को बर्मा जाने का आदेश मिला। सिपाहियों ने आपत्ति की, क्योंकि समुद्र पार करने का अर्थ जाति भ्रष्ट होना था और सेवा परंपरा के अनुसार सामान की ढुलाई के लिए कोई भत्ता नहीं दिया गया था।
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