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GK24
भारतीय राजव्यवस्थामध्यमपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2023, GS Paper I

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन किसी देश के 'संविधान' के मुख्य उद्देश्य को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

  1. A.यह आवश्यक कानून बनाने का उद्देश्य निर्धारित करता है।
  2. B.यह राजनीतिक पदों और सरकार के सृजन को संभव बनाता है।
  3. C.यह सरकार की शक्तियों को परिभाषित और सीमित करता है।
  4. D.यह सामाजिक न्याय, सामाजिक समानता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

सही उत्तर

C. यह सरकार की शक्तियों को परिभाषित और सीमित करता है।

व्याख्या

सही उत्तर है C, यह सरकार की शक्तियों को परिभाषित और सीमित करता है। संविधान का मूल विचार संविधानवाद है: सरकार को शक्ति दी जाती है, पर केवल तय सीमाओं के भीतर।

संविधान राज्य के अंगों की स्थापना करता है और उनके बीच शक्ति बाँटता है, पर इसका मुख्य उद्देश्य उस शक्ति को मनमानी बनने से रोकना है। यह काम मौलिक अधिकारों से होता है जिनका उल्लंघन राज्य नहीं कर सकता, साथ ही शक्ति-पृथक्करण, संघीय विषय-विभाजन, न्यायिक पुनरावलोकन और संशोधन की प्रक्रिया से। भारत में केशवानंद भारती मामले (1973) से निकला मूल ढाँचा सिद्धांत संसद की संशोधन-शक्ति को भी सीमित करने का स्पष्ट उदाहरण है।

A गलत है: नीति निदेशक तत्वों के माध्यम से कानून-निर्माण को दिशा देना एक कार्य है, मुख्य उद्देश्य नहीं।

B गलत है: पद और सरकार बनाना साधन है; पहचान यह है कि उनकी शक्तियाँ सीमित हों।

D गलत है: सामाजिक न्याय और सुरक्षा कुछ संविधानों द्वारा जोड़े गए लक्ष्य हैं, हर संविधान का मूल उद्देश्य नहीं।

परीक्षा टिप: संविधानवाद = सीमित सरकार; संविधान शक्ति देता भी है और उसे सीमित भी करता है।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

निम्नलिखित में से किस संशोधन के लिए कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुसमर्थन आवश्यक है?

  1. A.आठवीं अनुसूची में नई भाषा जोड़ने वाला संशोधन
  2. B.राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति बदलने वाला संशोधन
  3. C.किसी राज्य का नाम बदलने वाला संशोधन
  4. D.मंत्रियों के वेतन में परिवर्तन करने वाला संशोधन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति बदलने वाला संशोधन

अनुच्छेद 368(2) उन प्रावधानों की सूची देता है जिनके संशोधन के लिए प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुसमर्थन भी आवश्यक है: राष्ट्रपति का निर्वाचन, संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार, उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय, संघ और राज्यों…

Q2.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

किस संशोधन ने मंत्रिपरिषद का आकार सदन की सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित किया?

  1. A.88वां संशोधन अधिनियम
  2. B.91वां संशोधन अधिनियम
  3. C.97वां संशोधन अधिनियम
  4. D.104वां संशोधन अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 91वां संशोधन अधिनियम

इसने अनुच्छेद 75 और 164 में खंड जोड़े, जिनके अनुसार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा अथवा राज्य विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, और राज्य में न्यूनतम सीमा बारह मंत्री है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संविधान की नौवीं अनुसूची, जो कुछ कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण देती है, किस संशोधन द्वारा जोड़ी गई?

  1. A.पहला संशोधन अधिनियम, 1951
  2. B.चौथा संशोधन अधिनियम, 1955
  3. C.सातवां संशोधन अधिनियम, 1956
  4. D.सत्रहवां संशोधन अधिनियम, 1964
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पहला संशोधन अधिनियम, 1951

इसने अनुच्छेद 31ख तथा नौवीं अनुसूची जोड़ी, जिससे राज्यों के जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार कानूनों को मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर अपास्त न किया जा सके; साथ ही इसने अनुच्छेद 19(2) में वाक् स्वातंत्र्य पर युक्तियुक्त निर्बंधन और पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए अनुच्छेद 15(4) जोड़ा।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

ग्यारहवीं अनुसूची, जिसमें पंचायतों के विषय दिए गए हैं, किस संशोधन द्वारा जोड़ी गई?

  1. A.73वां संशोधन अधिनियम
  2. B.74वां संशोधन अधिनियम
  3. C.65वां संशोधन अधिनियम
  4. D.97वां संशोधन अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 73वां संशोधन अधिनियम

इस अनुसूची में उनतीस विषय हैं जो राज्य पंचायतों को सौंप सकता है, जिनमें कृषि, लघु सिंचाई, ग्रामीण आवास, पेयजल और गरीबी उपशमन शामिल हैं।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संपत्ति का अधिकार मूल अधिकारों की सूची से किस संशोधन द्वारा हटाया गया?

  1. A.24वां संशोधन अधिनियम, 1971
  2. B.25वां संशोधन अधिनियम, 1971
  3. C.42वां संशोधन अधिनियम, 1976
  4. D.44वां संशोधन अधिनियम, 1978
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 44वां संशोधन अधिनियम, 1978

इसने अनुच्छेद 19(1)(च) और अनुच्छेद 31 को निरसित कर दिया और संपत्ति के अधिकार को भाग 12 के नए अनुच्छेद 300क में रख दिया, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।