निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 कई पदों को 'लाभ का पद' के आधार पर निरर्हता से छूट देता है। 2. उपर्युक्त अधिनियम में पाँच बार संशोधन किया गया। 3. 'लाभ का पद' शब्द भारत के संविधान में भली-भाँति परिभाषित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 3
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, केवल 1 और 2। कथन 3 गलत है, क्योंकि संविधान में 'लाभ का पद' शब्द का प्रयोग तो है, परंतु उसकी परिभाषा कहीं नहीं दी गई है।
अनुच्छेद 102(1)(क) के अनुसार कोई व्यक्ति संसद सदस्य होने के लिए अयोग्य होगा यदि वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करता है, सिवाय उस पद के जिसे संसद ने कानून द्वारा निरर्हता से मुक्त घोषित किया हो। राज्य विधायकों के लिए अनुच्छेद 191 में यही नियम है। इसी शक्ति से संसद ने संसद (निरर्हता निवारण) अधिनियम, 1959 बनाया, जिसमें उन पदों की सूची है जिनके धारक अयोग्य नहीं होते। प्रश्न पूछे जाने के समय तक इस अधिनियम में पाँच बार संशोधन हो चुका था; सबसे चर्चित संशोधन 2006 में जया बच्चन मामले के बाद हुआ, जिसने बहुत से पदों को भूतलक्षी प्रभाव से छूट दी।
B गलत है क्योंकि कथन 3 असत्य है और कथन 1 तथा 2 सत्य हैं। C गलत है क्योंकि इसमें कथन 3 है और कथन 1 छूट गया है। D गलत है क्योंकि कथन 3 असत्य है; लाभ के पद का अर्थ न्यायालयों ने स्पष्ट किया है।
Exam tip: लाभ का पद: अनुच्छेद 102 और 191; संविधान में परिभाषित नहीं; 1959 का अधिनियम छूट देता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 के निरसन को किस माह और वर्ष के निर्णय में वैध ठहराया?
- A.अगस्त 2019
- B.मार्च 2020
- C.दिसंबर 2023
- D.जुलाई 2024
उत्तर देखें
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने इन री: आर्टिकल 370 ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन मामले का निर्णय 11 दिसंबर 2023 को दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग, जिसके 2022 के अंतिम आदेश ने नब्बे विधानसभा सीटें तय कीं, की अध्यक्षता किसने की?
- A.न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
- B.न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ
- C.न्यायमूर्ति आर. सी. लाहोटी
- D.न्यायमूर्ति दीपक वर्मा
उत्तर देखें
सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश के रूप में उन्होंने मार्च 2020 में जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश के लिए गठित परिसीमन आयोग की अध्यक्षता की, जिसका अंतिम आदेश मई 2022 में आया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 370 के प्रवर्तन में रहते हुए भारतीय संविधान के कौन-से उपबंध जम्मू-कश्मीर राज्य पर राज्य सरकार की सहमति के बिना सीधे लागू होते थे?
- A.अनुच्छेद 1 और 370
- B.अनुच्छेद 1 और 3
- C.अनुच्छेद 370 और 371
- D.अनुच्छेद 1, 3 और 370
उत्तर देखें
अनुच्छेद 370(1)(ग) के अनुसार अनुच्छेद 1, जो भारत को राज्यों का संघ घोषित करता है और पहली अनुसूची में उसका राज्यक्षेत्र गिनाता है, तथा स्वयं अनुच्छेद 370 राज्य पर लागू होते थे; शेष सब कुछ राज्य सरकार की सहमति से बने राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से ही पहुँच सकता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 370(3) के अंतर्गत राष्ट्रपति यह घोषित कर सकते थे कि अनुच्छेद प्रवर्तन में नहीं रहेगा, किसकी सिफारिश पर?
- A.संसद के दोनों सदन
- B.राज्य के राज्यपाल
- C.राज्य की संविधान सभा
- D.भारत का सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर देखें
अनुच्छेद 370(3) के परंतुक में कहा गया था कि राष्ट्रपति अनुच्छेद को समाप्त करने की लोक अधिसूचना केवल जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सिफारिश पर जारी कर सकते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जम्मू-कश्मीर की अपनी संविधान सभा द्वारा बनाया गया राज्य का संविधान कब लागू हुआ?
- A.17 नवंबर 1956
- B.26 जनवरी 1957
- C.14 मई 1954
- D.26 जनवरी 1950
उत्तर देखें
जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने राज्य का संविधान 17 नवंबर 1956 को अंगीकृत किया और वह 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ, जिस दिन वह सभा स्वयं भंग हो गई।
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