निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर विचार कीजिए: 1. शिमला समझौते पर हस्ताक्षर 2. भारत और पाकिस्तान के बीच आगरा शिखर सम्मेलन 3. प्रथम सार्क शिखर सम्मेलन में सार्क चार्टर पर हस्ताक्षर 4. भारत का पहला परमाणु परीक्षण। उपर्युक्त घटनाओं का सही कालानुक्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.1, 3, 4, 2
- B.4, 1, 3, 2
- C.1, 4, 3, 2
- D.4, 1, 2, 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1, 4, 3, 2। ये घटनाएँ क्रमशः 1972, 1974, 1985 और 2001 में हुईं; UPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी भी यही है।
शिमला समझौता 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई 1972 को इंदिरा गांधी और ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने किया; इसने कश्मीर की युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा बना दिया। भारत का पहला परमाणु परीक्षण, जिसका कूट नाम स्माइलिंग बुद्धा था, 18 मई 1974 को पोखरण में हुआ। सार्क चार्टर पर पहले शिखर सम्मेलन में 8 दिसंबर 1985 को ढाका में हस्ताक्षर हुए। अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़ का आगरा शिखर सम्मेलन जुलाई 2001 में हुआ और बिना संयुक्त घोषणा के समाप्त हुआ।
A गलत है: इसमें 1985 का सार्क चार्टर 1974 के परीक्षण से पहले रखा गया है।
B गलत है: यह 1974 के परीक्षण से शुरू होता है, जबकि शिमला समझौता उससे दो वर्ष पहले हुआ।
D गलत है: यह परीक्षण से शुरू होता है और 2001 के आगरा सम्मेलन को 1985 के सार्क चार्टर से पहले रखता है।
परीक्षा टिप: शिमला 1972, पोखरण-I 1974, सार्क ढाका 1985, लाहौर बस 1999, आगरा 2001।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंहड़प्पा की मुहरें बनाने में निम्नलिखित में से किस पदार्थ का प्रयोग किया गया था?
- A.बलुआ पत्थर
- B.लाजवर्द (लैपिस लाज़ुली)
- C.सूर्यकांत (जैस्पर)
- D.सेलखड़ी (स्टिएटाइट)
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, सेलखड़ी (स्टिएटाइट)। हड़प्पा की अधिकांश मुहरें सेलखड़ी से बनी थीं, जो एक नरम पत्थर है और पकाने पर कठोर हो जाता है।
सेलखड़ी को काटना आसान है, इसलिए कारीगर इस पर पशुओं की बारीक आकृतियाँ और हड़प्पा लिपि के चिह्न उकेर पाते थे। उकेरने के बाद मुहरों पर लेप लगाकर उन्हें गर्म किया जाता था, जिससे सतह कठोर और सफ़ेद हो जाती थी। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और लोथल से ऐसी हज़ारों चौकोर मुहरें मिली हैं; सबसे प्रसिद्ध में पशुओं से घिरी एक बैठी आकृति है, जिसे पशुपति मुहर कहा जाता है, और कई पर एकशृंगी पशु बना है। इनका प्रयोग संभवतः व्यापार में माल पर निशान लगाने के लिए होता था।
A गलत है: बलुआ पत्थर कुछ मूर्तियों, जैसे हड़प्पा के धड़, में प्रयुक्त हुआ, मुहरों में नहीं।
B गलत है: अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शाँ से आने वाला लाजवर्द मनकों और आभूषणों में लगता था।
C गलत है: सूर्यकांत भी मनकों का पत्थर था, मुहरों का सामान्य पदार्थ नहीं।
परीक्षा टिप: हड़प्पा मुहरें = सेलखड़ी; नर्तकी की मूर्ति = कांसा; पुरोहित-राजा = सेलखड़ी।
कथन I : भारत शासन अधिनियम, 1935 ने केंद्र में द्वैध शासन लागू किया। कथन II : प्रांतों को प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की गई।
- A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
- D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, दोनों कथन सत्य हैं, पर कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता। अधिनियम ने केंद्र में द्वैध शासन और प्रांतों में स्वायत्तता, दो अलग-अलग सुधार किए।
भारत शासन अधिनियम, 1935 ने 1919 के अधिनियम से शुरू हुआ प्रांतों का द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता दी: प्रांतों में निर्वाचित विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों की सरकारें बनीं। साथ ही इसने द्वैध शासन को केंद्र में ला दिया, जहाँ संघीय विषय आरक्षित (रक्षा, विदेश मामले) गवर्नर-जनरल के अधीन और हस्तांतरित विषय मंत्रियों के अधीन बाँटे गए। केंद्रीय व्यवस्था अखिल भारतीय संघ पर टिकी थी, जो कभी बना ही नहीं। प्रांतीय स्वायत्तता प्रांतों का सुधार था; केंद्र में द्वैध शासन का कारण नहीं।
A गलत है: दोनों सुधार साथ-साथ हैं; एक दूसरे का कारण या व्याख्या नहीं है।
C गलत है: प्रांतीय स्वायत्तता दी गई और 1937 में लागू हुई, इसलिए कथन II सत्य है।
D गलत है: अधिनियम में केंद्र में द्वैध शासन का प्रावधान था, इसलिए कथन I भी सत्य है।
परीक्षा टिप: 1919 अधिनियम = प्रांतों में द्वैध शासन; 1935 अधिनियम = प्रांतीय स्वायत्तता और केंद्र में द्वैध शासन।
निम्नलिखित में से किसकी रचना हरिषेण ने की थी?
- A.गौतमी बलश्री का नासिक अभिलेख
- B.समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति
- C.विजयसेन की देवपाड़ा प्रशस्ति
- D.खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति। हरिषेण गुप्त शासक समुद्रगुप्त के दरबारी कवि और मंत्री थे और उन्होंने यह प्रशस्ति उन्हीं के सम्मान में लिखी।
प्रयाग प्रशस्ति को इलाहाबाद स्तंभ लेख भी कहते हैं। यह सुंदर संस्कृत में है और उसी स्तंभ पर खुदी है जिस पर अशोक का एक अभिलेख भी है। इसमें उत्तर भारत में समुद्रगुप्त के अभियानों, दक्षिण के राजाओं के विरुद्ध उनके दक्षिणापथ अभियान और कर देने वाले सीमांत शासकों का वर्णन है। इन्हीं विजयों के कारण इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने उन्हें "भारत का नेपोलियन" कहा। उनके शासन का यही मुख्य स्रोत है।
A गलत है: नासिक अभिलेख सातवाहन राजा गौतमीपुत्र शातकर्णि की माता गौतमी बलश्री ने खुदवाया था।
C गलत है: देवपाड़ा प्रशस्ति बंगाल के सेन राजा विजयसेन की प्रशंसा में है और इसके रचयिता कवि उमापतिधर थे।
D गलत है: भुवनेश्वर के पास हाथीगुम्फा अभिलेख कलिंग के जैन राजा खारवेल के कार्यों का वर्णन करता है।
परीक्षा टिप: हरिषेण = समुद्रगुप्त; रविकीर्ति = पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोल अभिलेख।
लगभग 1850 के बाद हुई दूसरी औद्योगिक क्रांति में निम्नलिखित में से कौन-सा/से मुख्य उद्योग विकसित हुआ/हुए?
- A.कोयला और लोहा
- B.सूती कताई और बुनाई
- C.रसायन और विद्युत
- D.भाप इंजन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, रसायन और विद्युत। लगभग 1850 से 1914 तक चली दूसरी औद्योगिक क्रांति इस्पात, रसायन, बिजली और तेल पर टिकी थी।
पहली औद्योगिक क्रांति लगभग 1760 में ब्रिटेन में शुरू हुई थी और इसका आधार सूती वस्त्र, कोयला, लोहा और भाप इंजन थे। दूसरी लहर में ब्रिटेन के साथ जर्मनी और अमेरिका आगे रहे, और विज्ञान पर आधारित नए उद्योग पनपे। रसायन उद्योग ने कृत्रिम रंग, उर्वरक और विस्फोटक बनाए, जबकि डायनेमो, बिजली के बल्ब और बिजलीघरों से विद्युत उद्योग बढ़ा। बेसेमर विधि से सस्ता इस्पात और अंतर्दहन इंजन भी इसी दौर की देन हैं।
A गलत है: कोयला और लोहा पहली औद्योगिक क्रांति की रीढ़ थे।
B गलत है: सूत की मशीनी कताई और बुनाई (स्पिनिंग जेनी, पावर लूम) से ही पहली क्रांति शुरू हुई।
D गलत है: जेम्स वॉट का उन्नत भाप इंजन भी 18वीं सदी के अंत की, यानी पहली क्रांति की देन है।
परीक्षा टिप: पहली क्रांति = कपास, कोयला, लोहा, भाप; दूसरी क्रांति = इस्पात, रसायन, बिजली, तेल।
ऋग्वैदिक आर्यों और सिंधु घाटी के लोगों की संस्कृति के बीच अंतर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. ऋग्वैदिक आर्य युद्ध में कवच और शिरस्त्राण का उपयोग करते थे, जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने इनके उपयोग का कोई साक्ष्य नहीं छोड़ा।
2. ऋग्वैदिक आर्य सोना, चाँदी और ताँबा जानते थे, जबकि सिंधु घाटी के लोग केवल ताँबा और लोहा जानते थे।
3. ऋग्वैदिक आर्यों ने घोड़े को पालतू बना लिया था, जबकि सिंधु घाटी के लोगों को इस पशु की जानकारी होने का कोई साक्ष्य नहीं है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। ऋग्वेद में कवच और घोड़ा आर्य जीवन का अहम हिस्सा दिखते हैं, जबकि हड़प्पा के अवशेषों में न कवच मिलता है, न घोड़े के उपयोग का पक्का प्रमाण; पर हड़प्पावासी लोहा नहीं जानते थे।
कथन 1 सही है: ऋग्वेद में वर्मन (कवच) और शिरस्त्राण का उल्लेख है और आर्य घोड़ों वाले रथों से लड़ते थे, जबकि हड़प्पा स्थलों से कोई रक्षात्मक कवच नहीं मिला। कथन 3 प्रश्न के आशय में सही है: घोड़ा ऋग्वैदिक लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, पर हड़प्पा की मुहरों पर वह नहीं दिखता और हड़प्पावासियों द्वारा उसके उपयोग का ठोस साक्ष्य नहीं है। कथन 2 गलत है: सिंधु घाटी के लोग सोना, चाँदी, ताँबा, काँसा और सीसा जानते थे, पर लोहा नहीं; भारत में लोहे का उपयोग लगभग 1000 ई.पू. से शुरू हुआ।
A गलत है, क्योंकि कथन 3 भी सही है।
B गलत है, क्योंकि कथन 2 असत्य है।
D गलत है, क्योंकि हड़प्पावासी लोहा नहीं जानते थे।
परीक्षा टिप: हड़प्पा = काँस्य युग, लोहा नहीं, मुहरों पर घोड़ा नहीं; ऋग्वैदिक आर्य = घोड़ा, रथ और कवच।