निजता को अनुच्छेद 21 से निकलने वाला मूल अधिकार किस मुकदमे में घोषित किया गया?
- A.श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ
- B.डी के बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य
- C.के एस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ
- D.ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, के एस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ। नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 2017 में सर्वसम्मति से कहा कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के प्राण और वैयक्तिक स्वतंत्रता तथा भाग तीन की स्वतंत्रताओं में अंतर्निहित है, और एम पी शर्मा तथा खड़क सिंह मामलों के पुराने मत को पलट दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि श्रेया सिंघल ने 2015 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66क को वाक् स्वातंत्र्य पर अनुचित प्रतिबंध मानकर रद्द किया था। विकल्प B गलत है क्योंकि डी के बसु ने 1997 में गिरफ्तारी और निरोध के समय पालन किए जाने वाले सुरक्षा उपाय निर्धारित किए थे। विकल्प D गलत है क्योंकि ओल्गा टेलिस ने 1985 में बॉम्बे के पटरी निवासियों के मुकदमे में जीविका के अधिकार को प्राण के अधिकार का अंग माना था। तीनों विकल्प पुट्टस्वामी की तरह अनुच्छेद 21 के मुकदमे हैं, इसीलिए वे अच्छे भ्रमकारक बनते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय और सिद्धांत
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसंविधान के आधारभूत ढाँचे का सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय ने किस मुकदमे में दिया?
- A.गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- B.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- C.मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
- D.शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
उत्तर देखें
यह निर्णय 24 अप्रैल 1973 को तेरह न्यायाधीशों की पीठ ने दिया, जो उच्चतम न्यायालय की अब तक की सबसे बड़ी पीठ थी, और सात के विरुद्ध छह के बहुमत ने कहा कि संसद संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन कर सकती है, परंतु उसके आधारभूत ढाँचे को क्षति…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस मुकदमे में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ में विधि है और मूल अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती?
- A.सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
- B.आई सी गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- C.वामन राव बनाम भारत संघ
- D.आई आर कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
उत्तर देखें
वर्ष 1967 में ग्यारह न्यायाधीशों की पीठ ने छह के विरुद्ध पाँच के बहुमत से कहा कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के प्रयोजन से विधि है, इसलिए संसद मूल अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती, और पुराने संशोधनों को बचाने के लिए भावी अभिभावी निर्णय का सिद्धांत लागू किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) का निर्णय मुख्य रूप से किस अनुच्छेद के विस्तार के लिए जाना जाता है?
- A.अनुच्छेद 19
- B.अनुच्छेद 21
- C.अनुच्छेद 32
- D.अनुच्छेद 368
उत्तर देखें
यह मुकदमा पासपोर्ट जब्त किए जाने से उठा था और न्यायालय ने कहा कि जिस प्रक्रिया से राज्य प्राण या वैयक्तिक स्वतंत्रता छीनता है वह न्यायपूर्ण, उचित और युक्तियुक्त होनी चाहिए, जिससे अनुच्छेद 21 में उचित प्रक्रिया का सार आ गया और 1950 के ए के गोपालन का संकुचित मत…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए उपबंध रद्द किए?
- A.चौबीसवां संशोधन
- B.उनतालीसवां संशोधन
- C.बयालीसवां संशोधन
- D.चौवालीसवां संशोधन
उत्तर देखें
इस संशोधन ने अनुच्छेद 368 में यह जोड़ा था कि किसी संशोधन को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती और संशोधन शक्ति पर कोई सीमा नहीं है; न्यायालय ने वे उपबंध शून्य ठहराए क्योंकि न्यायिक पुनर्विलोकन तथा मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों का संतुलन आधारभूत ढाँचे का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग और निन्यानबेवां संविधान संशोधन सर्वोच्च न्यायालय ने किस वर्ष रद्द किया?
- A.2013
- B.2014
- C.2015
- D.2017
उत्तर देखें
चतुर्थ न्यायाधीश मामले के नाम से प्रसिद्ध इस निर्णय में न्यायालय ने चार के विरुद्ध एक के बहुमत से कहा कि यह आयोग कार्यपालिका को न्यायाधीशों की नियुक्ति में प्रभाव देगा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता आधारभूत ढाँचे का अंग है, और इसलिए कॉलेजियम व्यवस्था पुनर्जीवित हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →