मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) का निर्णय मुख्य रूप से किस अनुच्छेद के विस्तार के लिए जाना जाता है?
- A.अनुच्छेद 19
- B.अनुच्छेद 21
- C.अनुच्छेद 32
- D.अनुच्छेद 368
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, अनुच्छेद 21। यह मुकदमा पासपोर्ट जब्त किए जाने से उठा था और न्यायालय ने कहा कि जिस प्रक्रिया से राज्य प्राण या वैयक्तिक स्वतंत्रता छीनता है वह न्यायपूर्ण, उचित और युक्तियुक्त होनी चाहिए, जिससे अनुच्छेद 21 में उचित प्रक्रिया का सार आ गया और 1950 के ए के गोपालन का संकुचित मत समाप्त हो गया। विकल्प A गलत है क्योंकि वाक् स्वातंत्र्य, संचरण और निवास से जुड़े अनुच्छेद 19 की चर्चा केवल यह दिखाने के लिए हुई कि उसे अनुच्छेद 14 और 21 के साथ स्वर्ण त्रिकोण के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। विकल्प C गलत है क्योंकि संवैधानिक उपचारों का अनुच्छेद 32 वह मार्ग था जिससे याचिका न्यायालय पहुँची, विस्तारित अधिकार नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 368 संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है और यहाँ विचाराधीन नहीं था। जीविका, विधिक सहायता और निजता के बाद के निर्णय इसी विस्तृत अनुच्छेद 21 से निकले।
पूरा लेख पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय और सिद्धांत
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसंविधान के आधारभूत ढाँचे का सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय ने किस मुकदमे में दिया?
- A.गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- B.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- C.मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
- D.शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ
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यह निर्णय 24 अप्रैल 1973 को तेरह न्यायाधीशों की पीठ ने दिया, जो उच्चतम न्यायालय की अब तक की सबसे बड़ी पीठ थी, और सात के विरुद्ध छह के बहुमत ने कहा कि संसद संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन कर सकती है, परंतु उसके आधारभूत ढाँचे को क्षति…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस मुकदमे में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के अर्थ में विधि है और मूल अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती?
- A.सज्जन सिंह बनाम राजस्थान राज्य
- B.आई सी गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
- C.वामन राव बनाम भारत संघ
- D.आई आर कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य
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वर्ष 1967 में ग्यारह न्यायाधीशों की पीठ ने छह के विरुद्ध पाँच के बहुमत से कहा कि संविधान संशोधन अनुच्छेद 13 के प्रयोजन से विधि है, इसलिए संसद मूल अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती, और पुराने संशोधनों को बचाने के लिए भावी अभिभावी निर्णय का सिद्धांत लागू किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए उपबंध रद्द किए?
- A.चौबीसवां संशोधन
- B.उनतालीसवां संशोधन
- C.बयालीसवां संशोधन
- D.चौवालीसवां संशोधन
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इस संशोधन ने अनुच्छेद 368 में यह जोड़ा था कि किसी संशोधन को किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती और संशोधन शक्ति पर कोई सीमा नहीं है; न्यायालय ने वे उपबंध शून्य ठहराए क्योंकि न्यायिक पुनर्विलोकन तथा मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों का संतुलन आधारभूत ढाँचे का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग और निन्यानबेवां संविधान संशोधन सर्वोच्च न्यायालय ने किस वर्ष रद्द किया?
- A.2013
- B.2014
- C.2015
- D.2017
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चतुर्थ न्यायाधीश मामले के नाम से प्रसिद्ध इस निर्णय में न्यायालय ने चार के विरुद्ध एक के बहुमत से कहा कि यह आयोग कार्यपालिका को न्यायाधीशों की नियुक्ति में प्रभाव देगा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता आधारभूत ढाँचे का अंग है, और इसलिए कॉलेजियम व्यवस्था पुनर्जीवित हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आरक्षण पर पचास प्रतिशत की सीमा और क्रीमी लेयर को बाहर रखने का सिद्धांत किस निर्णय में दिया गया?
- A.मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन
- B.इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ
- C.एम नागराज बनाम भारत संघ
- D.मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य
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नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 1992 में केंद्रीय सेवाओं में अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण को मान्य रखा, कुल आरक्षण पर सामान्यतः पचास प्रतिशत की सीमा नियत की और निर्देश दिया कि पिछड़े वर्गों में संपन्न लोग, यानी क्रीमी लेयर, बाहर रखे जाएँ।
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