नवंबर 2026 में हुए संशोधित भारतनेट समझौते के तहत तेलंगाना की कितनी ग्राम पंचायतें शामिल हैं?
- A.10,787
- B.12,769
- C.1,946
- D.14,500
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 12,769 है। तेलंगाना में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम का कुल दायरा यही है, जो तीन हिस्सों से बनता है: पहले चरण की 1,946 ग्राम पंचायतें, जिनका नेटवर्क अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में उन्नयन होगा; दूसरे चरण की 10,787 ग्राम पंचायतें, जिन्हें नए सिरे से कवर किया जाएगा; और 36 नवगठित ग्राम पंचायतें। विकल्प A यानी 10,787 केवल दूसरे चरण का हिस्सा है और बाकी दो समूहों को छोड़ देता है। विकल्प C यानी 1,946 केवल पहले चरण की उन पंचायतों की संख्या है जिनका रिंग उन्नयन होगा। विकल्प D यानी 14,500 समझौते में कहीं नहीं है। इस पूरे दायरे के लिए भारत सरकार ने 3,189 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है, और राज्य की एजेंसी टीआरआईआईसीएल राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल के तहत काम करेगी। परीक्षा में कुल संख्या के साथ उसका बंटवारा भी पूछा जा सकता है।
पूरा लेख पढ़ें: संशोधित भारतनेट: तेलंगाना की 12,769 पंचायतों के लिए 3,189 करोड़
अभ्यास प्रश्न
तेलंगाना भारतनेट समझौता करने वाली डिजिटल भारत निधि को पहले किस नाम से जाना जाता था?
- A.यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ)
- B.भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड
- C.नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क
- D.टेलीकॉम डेवलपमेंट फंड
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इस निधि की स्थापना भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 1 अप्रैल 2002 से प्रभावी रूप में हुई थी, और दूरसंचार अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुसार इसका नाम डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) हो गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को किस तारीख को मंजूरी दी थी?
- A.15 अगस्त 2021
- B.4 अगस्त 2023
- C.1 अप्रैल 2002
- D.6 नवंबर 2026
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इसी दिन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी थी, ताकि मौजूदा भारतनेट नेटवर्क का उन्नयन, सुदृढ़ीकरण और विस्तार करके सभी ग्राम पंचायतों और मांग के आधार पर गांवों तक मजबूत तथा भविष्य के अनुरूप ब्रॉडबैंड पहुंचाया जा सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के तहत सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर पंजीकृत ई-कचरा रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों की संख्या 38 से बढ़कर कितनी हो गई?
- A.75 से अधिक
- B.100 से अधिक
- C.200 से अधिक
- D.500 से अधिक
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पिछले अभियान में शुरू हुए ई-कचरे पर ध्यान को आगे बढ़ाते हुए विशेष अभियान 6 में डीएआरपीजी ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और रिसाइक्लिंग उद्योग के साथ मिलकर सरकारी दफ्तरों को अधिकृत रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों से जोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के दौरान कबाड़ बेचकर सबसे अधिक आय किस मंत्रालय ने अर्जित की?
- A.कोयला मंत्रालय
- B.रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड)
- C.रक्षा मंत्रालय (सैन्य मामलों का विभाग)
- D.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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इसके बाद सैन्य मामलों का विभाग 88.96 करोड़ रुपये, कोयला मंत्रालय 61.41 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 34.81 करोड़ रुपये के साथ रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 में ई-कचरे सहित कबाड़ के निपटान से कुल कितनी आय हुई?
- A.618.06 करोड़ रुपये
- B.770.50 करोड़ रुपये
- C.970.33 करोड़ रुपये
- D.1,120.40 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
विशेष अभियान 6 पोर्टल के संकलित आंकड़ों के अनुसार सभी मंत्रालयों और विभागों ने ई-कचरे सहित कबाड़ बेचकर 970.33 करोड़ रुपये जुटाए, जो विशेष अभियान 5.0 से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।
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