मोपला, अर्थात मुस्लिम किसानों ने एक शक्तिशाली जमींदार-विरोधी आंदोलन कहाँ खड़ा किया था?
- A.तमिलनाडु
- B.बंगाल
- C.केरल
- D.उत्तर प्रदेश
सही उत्तर
C. केरल
व्याख्या
सही उत्तर है C, केरल। मोपला या मापिला उत्तरी केरल के मालाबार क्षेत्र के मुस्लिम किसान थे और जेनमी जमींदारों के विरुद्ध उनका लंबा संघर्ष 1921 के मालाबार या मोपला विद्रोह में बदल गया। इन काश्तकारों को जोत की कोई सुरक्षा नहीं थी और उन्हें भारी लगान तथा पट्टा नवीनीकरण शुल्क देना पड़ता था, इसलिए जब 1920-21 का खिलाफत और असहयोग आंदोलन मालाबार पहुँचा तो यह रोष एरनाड और वल्लुवनाड तालुकों में सशस्त्र विद्रोह बन गया। ब्रिटिश सेना ने विद्रोह को कुचल दिया और नवंबर 1921 की वैगन त्रासदी में बंद मालगाड़ी के डिब्बे में दम घुटने से दर्जनों बंदी मारे गए। A गलत है क्योंकि तमिलनाडु में मोपला आंदोलन नहीं हुआ। B गलत है क्योंकि बंगाल के किसान संघर्ष पाबना आंदोलन और बाद का तेभागा आंदोलन थे। D गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलन अवध किसान सभा और एका आंदोलन थे। परीक्षा टिप: मोपला विद्रोह - केरल का मालाबार, वर्ष 1921, खिलाफत आंदोलन और वैगन त्रासदी से जुड़ा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने फ्रांसीसियों से पांडिचेरी (पुदुचेरी) को किस वर्ष छीना था?
- A.1674
- B.1699
- C.1738
- D.1761
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1761
व्याख्या
सही उत्तर है D, 1761। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने तीसरे कर्नाटक युद्ध के दौरान 1761 में फ्रांसीसियों से पांडिचेरी छीन लिया था। इससे पहले 1760 में वांडीवाश के युद्ध में सर आयर कूट ने दक्षिण भारत में फ्रांसीसी शक्ति को तोड़ दिया था। 1763 की पेरिस संधि से यह नगर फ्रांस को लौटा दिया गया, परंतु फ्रांसीसियों पर किलेबंदी करने और सेना रखने की रोक लगा दी गई, इसलिए यह केवल व्यापारिक बस्ती बनकर रह गया और भारत की होड़ अंग्रेजों के पक्ष में तय हो गई। पांडिचेरी 1954 में भारत को सौंपे जाने तक फ्रांस के अधिकार में रहा। A गलत है क्योंकि 1674 में फ्रांसुआ मार्टिन के नेतृत्व में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी ने पांडिचेरी की स्थापना की थी। B गलत है क्योंकि 1699 में ऐसा कोई अधिकार नहीं हुआ। C गलत है क्योंकि 1738 कर्नाटक युद्धों के आरंभ (1746) से भी पहले पड़ता है। परीक्षा टिप: वांडीवाश युद्ध 1760, पांडिचेरी पर कब्जा 1761, पेरिस संधि 1763 और भारत में विलय 1954।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की और नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया?
- A.गोपाल
- B.वासुदेव
- C.श्रीगुप्त
- D.धर्मपाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. धर्मपाल
व्याख्या
सही उत्तर है D, धर्मपाल। बंगाल और बिहार के पाल वंश के दूसरे तथा सबसे प्रतापी शासक धर्मपाल ने आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विक्रमशिला महाविहार और विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज के बिहार के भागलपुर जिले में स्थित था। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को भी फिर से संवारा और उसे संरक्षण दिया। विक्रमशिला तांत्रिक बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र बना और यहीं के विद्वान अतीश दीपंकर तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार करने गए। पाल शासक पूर्वी भारत में बौद्ध धर्म के अंतिम बड़े संरक्षक थे और लगभग 1200 ईस्वी में बख्तियार खिलजी ने दोनों विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया। A गलत है क्योंकि गोपाल ने पाल वंश तथा ओदंतपुरी विहार की स्थापना की थी, विक्रमशिला की नहीं। B गलत है क्योंकि वासुदेव उत्तर-पश्चिम का कुषाण शासक था और बहुत पहले हुआ। C गलत है क्योंकि श्रीगुप्त ने गुप्त वंश की नींव रखी और पालों से सदियों पहले हुए। परीक्षा टिप: नालंदा - कुमारगुप्त प्रथम, पुनरुद्धार धर्मपाल; ओदंतपुरी - गोपाल; विक्रमशिला - धर्मपाल।
दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में दीवान-ए-अर्ज नामक विभाग निम्नलिखित में से किसका कार्य देखता था?
- A.वित्त और भू-राजस्व
- B.सेना
- C.शाही पत्राचार
- D.न्याय और अपील
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सेना
व्याख्या
सही उत्तर B, सेना है। दीवान-ए-अर्ज दिल्ली सल्तनत का सैन्य विभाग था, जिसका प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक होता था, जो सैनिकों की भर्ती करता, गिनती कराता, घोड़ों तथा साज-सामान का निरीक्षण करता और वेतन की व्यवस्था करता था। बलबन ने इसे अलग विभाग के रूप में स्थापित किया और अलाउद्दीन खिलजी ने दाग तथा चेहरा की जाँच व्यवस्थाओं से इसे मजबूत किया। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्त और भू-राजस्व दीवान-ए-विजारत के अधीन थे, जिसका प्रमुख वजीर राज्य का सबसे वरिष्ठ अधिकारी था। विकल्प C गलत है क्योंकि शाही पत्राचार और आदेशों का लेखन दीवान-ए-इंशा का कार्य था, जिसका प्रमुख दबीर-ए-खास होता था। विकल्प D गलत है क्योंकि न्याय काजी-उल-कुजात के अधीन दीवान-ए-कजा से होता था, जबकि दीवान-ए-रिसालत धार्मिक विषय, अनुदान और सुल्तान के नाम पर अपील देखता था। इस विषय के प्रश्न आमतौर पर विभाग और उसके प्रमुख की जोड़ी बनाकर पूछे जाते हैं, इसलिए चारों जोड़ियाँ एक साथ याद रखें: विजारत के साथ वजीर, अर्ज के साथ आरिज-ए-मुमालिक, इंशा के साथ दबीर-ए-खास और कजा के साथ काजी-उल-कुजात।
खातौली के युद्ध (1517) में मेवाड़ के राणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान ______ लोदी को हराकर बंदी बनाया और फिर फिरौती लेकर छोड़ दिया।
- A.बहलोल खान
- B.कुतुबुद्दीन
- C.इब्राहीम
- D.सिकंदर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इब्राहीम
व्याख्या
सही उत्तर C, इब्राहीम है। इब्राहीम लोदी 1517 में गद्दी पर बैठा और लगभग तुरंत ही राजस्थान की सीमा के निकट खातौली में मेवाड़ के राणा सांगा का सामना करना पड़ा, जहाँ लोदी सेना हारी और सुल्तान की सेनाएँ पीछे हटा दी गईं। इस विजय ने राणा सांगा को उस समय की सबसे शक्तिशाली राजपूत शक्ति बना दिया, और बाद में उसने 1527 में खानवा में बाबर से युद्ध किया। विकल्प A गलत है क्योंकि वंश के संस्थापक बहलोल खान लोदी की मृत्यु 1489 में, इस युद्ध से बहुत पहले हो गई थी। विकल्प B गलत है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक गुलाम वंश का था और उसकी मृत्यु 1210 में हुई। विकल्प D गलत है क्योंकि इब्राहीम के पिता सिकंदर लोदी की मृत्यु 1517 में हुई और वह 1504 में आगरा बसाने के लिए जाना जाता है, खातौली के लिए नहीं। अंत में इब्राहीम लोदी 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में मारा गया।
एक सुल्तान के अपने शासन और नीतियों का विवरण देने वाली फुतूहात-ए-फिरोजशाही निम्नलिखित में से किसने लिखी?
- A.जियाउद्दीन बरनी
- B.अमीर खुसरो
- C.फिरोजशाह तुगलक
- D.मिन्हाज-उस-सिराज
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. फिरोजशाह तुगलक
व्याख्या
सही उत्तर C, फिरोजशाह तुगलक है। फुतूहात-ए-फिरोजशाही आत्मकथात्मक विवरण है, जिसमें 1351 से 1388 तक शासन करने वाले फिरोजशाह तुगलक ने अपने कार्य और आदेश लिखे, जिनमें उसकी नहरें, दान विभाग दीवान-ए-खैरात, उसका चिकित्सालय और उसकी धार्मिक नीति सम्मिलित हैं। यह सल्तनतकाल के उन थोड़े स्रोतों में है जो किसी शासक के विषय में नहीं, बल्कि स्वयं शासक द्वारा लिखे गए। विकल्प A गलत है क्योंकि जियाउद्दीन बरनी ने तारीख-ए-फिरोजशाही और फतवा-ए-जहांदारी लिखीं, जो सुल्तानों के विषय में हैं, किसी सुल्तान द्वारा नहीं लिखी गईं। विकल्प B गलत है क्योंकि तूती-ए-हिंद कहे जाने वाले कवि अमीर खुसरो ने खजाइन-उल-फुतूह, तुगलकनामा तथा अन्य काव्य लिखे। विकल्प D गलत है क्योंकि मिन्हाज-उस-सिराज ने तबकात-ए-नासिरी लिखी, जो नासिरुद्दीन महमूद के शासन तक गुलाम वंश का मुख्य इतिहास-ग्रंथ है और उसी सुल्तान को समर्पित है। परीक्षा में इन चारों को अलग रखने का सरल तरीका यह है कि विकल्पों में केवल एक ही शासक है, और फुतूहात के शीर्षक में उसी शासक का नाम आता है।