मेयोनीज़ किस प्रक्रिया द्वारा तैयार की जाती है?
- A.कैरेमेलीकरण
- B.पायसीकरण
- C.मेलार्ड अभिक्रिया
- D.ऑक्सीकरण
सही उत्तर
B. पायसीकरण
व्याख्या
सही उत्तर है B, पायसीकरण। मेयोनीज़ एक पायस यानी इमल्शन है: तेल की अत्यंत सूक्ष्म बूँदें अंडे की जर्दी, सिरका या नींबू रस वाले जलीय द्रव में फेंटकर मिलाई जाती हैं, और ये बूँदें अलग परत बनाने के बजाय पूरे मिश्रण में फैली रहती हैं। तेल और पानी स्वयं नहीं मिलते, इसलिए ऐसे मिश्रण को पायसकारी कारक की आवश्यकता होती है, और यहाँ वह अंडे की जर्दी का लेसिथिन है, जिसके अणु का एक सिरा जल को पसंद करता है और दूसरा तेल को, इसलिए वे प्रत्येक बूँद को ढककर उसे दूसरी बूँदों से अलग रखते हैं। दूध जल में वसा का प्राकृतिक पायस है और मक्खन वसा में जल का पायस है। विकल्प A गलत है क्योंकि कैरेमेलीकरण तेज गर्म करने पर शर्करा का भूरा होना है। विकल्प C गलत है क्योंकि मेलार्ड अभिक्रिया प्रोटीन और अपचायक शर्करा के बीच होती है, जिससे रोटी की पपड़ी और भुने मांस का रंग आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि वसा का ऑक्सीकरण उसे विकृतगंधी बना देता है। परीक्षा टिप: मेयोनीज़ जल में तेल का पायस है, जिसे अंडे की जर्दी का लेसिथिन स्थिर रखता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किन जंतुओं के पाचन तंत्र में एक ही छिद्र होता है जो मुँह और गुदा दोनों का काम करता है?
- A.अरैक्निड
- B.इकाइनोडर्म
- C.प्लैटीहेल्मिंथीज
- D.आर्थ्रोपोड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्लैटीहेल्मिंथीज
व्याख्या
सही उत्तर है C, प्लैटीहेल्मिंथीज। चपटे कृमियों के संघ प्लैटीहेल्मिंथीज में पाचन तंत्र अपूर्ण होता है और उसमें केवल एक ही छिद्र रहता है, इसलिए वही मुँह भोजन भीतर लेता है और अपशिष्ट बाहर निकालता है। उनकी आहारनाल एक बंद थैली जैसी होती है जिसमें गुदा नहीं होती। प्लेनेरिया, यकृत पर्णाभ कृमि और फीताकृमि इसी संघ में आते हैं, और फीताकृमि में तो आहारनाल ही नहीं होती, वह अपने शरीर की सतह से भोजन सोखता है। चपटे कृमि त्रिकोरकी, अप्रगुही और द्विपार्श्व सममित होते हैं, और इनमें से अनेक परजीवी हैं। अलग मुँह और गुदा वाला पूर्ण पाचन तंत्र गोल कृमियों से आगे दिखाई देता है। A गलत है क्योंकि मकड़ी और बिच्छू जैसे अरैक्निड आर्थ्रोपोड हैं और उनमें पूर्ण आहारनाल होती है। B गलत है क्योंकि तारामीन और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म में मुँह और गुदा दोनों होते हैं। D गलत है क्योंकि जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा पूर्ण आहारनाल रखता है। परीक्षा टिप: सीलेंटरेटा और प्लैटीहेल्मिंथीज में एक छिद्र, ऐस्केहेल्मिंथीज से आगे दो छिद्र।
वायु में f फोकस दूरी वाले एक उत्तल दर्पण को 4/3 अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया जाता है। द्रव में इस दर्पण की फोकस दूरी क्या होगी?
- A.(4/3) f
- B.(3/4) f
- C.(7/3) f
- D.f
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. f
व्याख्या
सही उत्तर है D, f। दर्पण की फोकस दूरी उसके चारों ओर के माध्यम पर निर्भर नहीं करती, इसलिए वायु में f फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण की फोकस दूरी द्रव में भी f ही रहती है। दर्पण परावर्तन के नियम से काम करता है और गोलीय दर्पण के लिए f = R/2 होता है, जहाँ R उसकी सतह की वक्रता त्रिज्या है। R केवल दर्पण की बनावट से तय होता है, इसलिए वायु के स्थान पर जल, तेल या कोई भी द्रव आ जाए, फोकस दूरी नहीं बदलती। लेंस का मामला इसके उलट है, क्योंकि वह अपवर्तन से काम करता है - उसकी फोकस दूरी काँच के अपवर्तनांक और आसपास के माध्यम के अनुपात पर निर्भर करती है, इसलिए द्रव में लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है। A गलत है क्योंकि f को 4/3 से गुणा करना दर्पण को लेंस मान लेने जैसा है। B भी इसी कारण गलत है, वहाँ केवल गुणक उलट दिया गया है। C गलत है क्योंकि 7/3 का यहाँ कोई आधार नहीं है। परीक्षा टिप: दर्पण की फोकस दूरी R/2 होती है और हर माध्यम में वही रहती है, लेंस की नहीं।
समय के साथ ताँबा हरा पड़ जाने का मुख्य कारण क्या है?
- A.हाइड्रोजन भंगुरता
- B.वायु से नाइट्रोजन का अवशोषण
- C.पराबैंगनी प्रकाश से अभिक्रिया
- D.ऑक्साइड की परत बनना
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. ऑक्साइड की परत बनना
व्याख्या
सही उत्तर है D, ऑक्साइड की परत बनना। ताँबा हरा इसलिए पड़ता है कि उसकी सतह धीरे-धीरे हवा से अभिक्रिया करके संक्षारण उत्पादों की परत से ढक जाती है, और वह परत हरे रंग की होती है। नम हवा में ताँबे पर पहले गहरे रंग का कॉपर ऑक्साइड बनता है; फिर कार्बन डाइऑक्साइड और नमी मिलकर उसे क्षारीय कॉपर कार्बोनेट में बदल देते हैं, जो पुरानी ताँबे की छतों, मंदिरों के गुंबदों और स्टैचू ऑफ लिबर्टी पर दिखने वाली हरी पर्त है। यह परत धातु से चिपकी रहती है और भीतर की धातु की रक्षा करती है, इसीलिए ताँबा लोहे की तरह जंग खाकर नष्ट नहीं होता। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन भंगुरता धातु को भुरभुरा और दरारयुक्त बनाती है, उसका रंग नहीं बदलती। B गलत है क्योंकि ताँबा हवा से नाइट्रोजन नहीं सोखता, नाइट्रोजन साधारण ताप पर लगभग निष्क्रिय रहती है। C गलत है क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश ताँबे से अभिक्रिया कर हरी परत नहीं बनाता। परीक्षा टिप: ताँबे की हरी परत क्षारीय कॉपर कार्बोनेट है, और इमली या नींबू का अम्ल इसी परत को घोलकर बर्तन साफ करता है।
निम्नलिखित में से कौन अभिक्रिया की दर को धीमा करता है?
- A.उत्प्रेरक वर्धक (प्रोमोटर)
- B.समांगी उत्प्रेरक
- C.विषमांगी उत्प्रेरक
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. इनमें से कोई नहीं
व्याख्या
सही उत्तर है D, इनमें से कोई नहीं। दिए गए तीनों पदार्थों में से कोई भी अभिक्रिया की दर को धीमा नहीं करता; दर घटाने वाले पदार्थ को ऋणात्मक उत्प्रेरक या अवरोधक कहा जाता है। उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो स्वयं खर्च हुए बिना अभिक्रिया की दर बदल देता है, और यह सक्रियण ऊर्जा घटाकर काम करता है। धनात्मक उत्प्रेरक दर बढ़ाता है, जबकि ऋणात्मक उत्प्रेरक दर घटा देता है, जैसे ग्लिसरॉल हाइड्रोजन परॉक्साइड के विघटन को धीमा कर देता है। A गलत है क्योंकि उत्प्रेरक वर्धक उत्प्रेरक की सक्रियता बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है, इसलिए वह दर बढ़ाता है। B गलत है क्योंकि समांगी उत्प्रेरक अभिकारकों की ही अवस्था में रहता है और अभिक्रिया को तेज करता है। C गलत है क्योंकि विषमांगी उत्प्रेरक भिन्न अवस्था में रहता है, जैसे हैबर प्रक्रम में लोहा, और वह भी दर बढ़ाता है। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - वर्धक उत्प्रेरक की सक्रियता बढ़ाता है, विष या अवरोधक उसे घटाता है।
शुष्क बर्फ (ड्राई आइस) का रासायनिक नाम क्या है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.नाइट्रोजन ऑक्साइड
- C.ऑक्सिडेन
- D.सल्फर डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कार्बन डाइऑक्साइड
व्याख्या
सही उत्तर है A, कार्बन डाइऑक्साइड। शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है। साधारण दाब पर यह पिघलकर द्रव नहीं बनती, बल्कि लगभग शून्य से 78.5 डिग्री सेल्सियस नीचे सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है; इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। चूँकि इससे कोई द्रव नहीं बचता, इसलिए यह सूखी रहती है और इसी कारण इसका नाम शुष्क बर्फ पड़ा। इसका उपयोग आइसक्रीम, जमे हुए खाद्य पदार्थ, टीके और रक्त के नमूनों को ढोते समय ठंडा रखने में होता है, और मंच पर बनने वाला सफेद कोहरा ठंडी कार्बन डाइऑक्साइड गैस से हवा की नमी के संघनन से बनता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन के ऑक्साइड गैसें हैं, जिनमें नाइट्रस ऑक्साइड को हँसाने वाली गैस कहा जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि ऑक्सिडेन जल का व्यवस्थित नाम है, जिसका ठोस रूप साधारण बर्फ है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सल्फर डाइऑक्साइड तीखी गंध वाली गैस है, जो परिरक्षक और विरंजक के रूप में काम आती है। परीक्षा टिप: शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है और यह पिघलती नहीं, ऊर्ध्वपातित होती है।