मैग्नीशियम का उपयोग किसमें किया जाता है?
- A.आतिशबाज़ी में चमकीला सफ़ेद प्रकाश उत्पन्न करने के लिए
- B.आभूषणों में रत्नों के रूप में
- C.रोगी की आहार नाल की जाँच में
- D.जल के शोधन में
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, आतिशबाज़ी में चमकीला सफ़ेद प्रकाश उत्पन्न करने के लिए। मैग्नीशियम हवा में चकाचौंध करने वाली सफ़ेद लौ के साथ जलता है, इसलिए इसे आतिशबाज़ी, फुलझड़ी और फ्लेयर में डाला जाता है।
मैग्नीशियम का फीता गर्म करने पर ऑक्सीजन से क्रिया करके सफ़ेद मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है (2Mg + O2 → 2MgO) और तेज़ ऊष्मा तथा चमकीला सफ़ेद प्रकाश देता है। पटाखा बनाने वाले रंगों को चमकीला करने और सफ़ेद चिंगारियाँ पाने के लिए मैग्नीशियम या मैग्नीशियम-एल्युमिनियम मिश्रधातु का चूर्ण मिलाते हैं; पुराने फोटो-फ्लैश में भी यही गुण काम आता था। मैग्नीशियम पर्णहरित (क्लोरोफिल) का केंद्रीय परमाणु भी है और विमान व वाहनों की हल्की मिश्रधातुओं में प्रयुक्त होता है।
B गलत है: रत्न कोरंडम, बेरिल या हीरे जैसे खनिज होते हैं, मैग्नीशियम धातु नहीं।
C गलत है: आहार नाल की जाँच बेरियम मील, यानी बेरियम सल्फेट से होती है, जो एक्स-रे में दिखता है।
D गलत है: जल शोधन क्लोरीन, ब्लीचिंग पाउडर, फिटकरी या ओज़ोन से होता है।
परीक्षा टिप: मैग्नीशियम = सफ़ेद लौ और क्लोरोफिल का केंद्र; बेरियम = हरी लौ और बेरियम मील; स्ट्रॉन्शियम = लाल लौ।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें4d कक्षक के लिए कोणीय और त्रिज्य नोडों की संख्या क्रमशः है
- A.2 और 1
- B.1 और 2
- C.3 और 1
- D.4 और 0
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, 2 और 1। 4d कक्षक के लिए n = 4 और l = 2 है, इसलिए कोणीय नोड l = 2 और त्रिज्य नोड n − l − 1 = 1 होते हैं।
नोड वह क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य होती है। कोणीय नोड नाभिक से होकर जाने वाले तल या शंकु होते हैं और इनकी संख्या दिगंशी क्वांटम संख्या l के बराबर होती है। त्रिज्य नोड गोलीय कोश होते हैं और इनकी संख्या n − l − 1 होती है। कुल नोड हमेशा n − 1 होते हैं। 4d के लिए: हर d कक्षक में l = 2, अतः 2 कोणीय नोड; त्रिज्य नोड = 4 − 2 − 1 = 1; कुल = 3, जो n − 1 के बराबर है। इसी तरह 3d में 2 कोणीय और 0 त्रिज्य नोड, तथा 2s में 0 कोणीय और 1 त्रिज्य नोड होता है।
B गलत है: इसमें दोनों मान उलट दिए गए हैं।
C गलत है: 3 कोणीय नोड f कक्षक (l = 3) के होते हैं, d के नहीं।
D गलत है: 4 कोणीय नोड के लिए l = 4 (g कक्षक) चाहिए, और कुल 4 नोड n − 1 = 3 से अधिक हैं।
परीक्षा टिप: कोणीय नोड = l, त्रिज्य नोड = n − l − 1, कुल नोड = n − 1।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.जीवाणुओं में कोशिकाद्रव्य होता है, परंतु विषाणुओं में नहीं
- B.जीवाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, परंतु विषाणुओं में नहीं
- C.विषाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, परंतु जीवाणुओं में नहीं
- D.विषाणुओं में कोशिका झिल्ली होती है, परंतु जीवाणुओं में नहीं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, जीवाणुओं में कोशिकाद्रव्य होता है, परंतु विषाणुओं में नहीं। जीवाणु कोशिकाद्रव्य से भरी एक जीवित कोशिका है, जबकि विषाणु केवल प्रोटीन के आवरण में बंद आनुवंशिक पदार्थ है।
जीवाणु प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ हैं: इनमें कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, राइबोसोम युक्त कोशिकाद्रव्य और वृत्ताकार DNA होता है, पर झिल्ली से घिरा केंद्रक और झिल्लीयुक्त कोशिकांग नहीं होते। विषाणु कोशिका ही नहीं हैं। विषाणु कण DNA या RNA होता है जो प्रोटीन के कैप्सिड में लिपटा होता है, कभी-कभी परपोषी से लिया गया बाहरी आवरण भी होता है। इनमें न कोशिकाद्रव्य होता है, न राइबोसोम, न अपना उपापचय, इसलिए ये केवल जीवित कोशिका के भीतर ही गुणन करते हैं। इसी कारण एंटीबायोटिक जीवाणुओं पर असर करती हैं, विषाणुओं पर नहीं।
B गलत है: प्रोकैरियोट होने के कारण जीवाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया नहीं होते।
C गलत है: विषाणुओं में कोई कोशिकांग नहीं होता।
D गलत है: जीवाणुओं में कोशिका झिल्ली होती है, विषाणुओं में नहीं।
परीक्षा टिप: जीवाणु = प्रोकैरियोटिक कोशिका, माइटोकॉन्ड्रिया नहीं; विषाणु = न्यूक्लिक अम्ल + प्रोटीन आवरण, कोशिका नहीं।
निम्नलिखित में से कौन-सा घटक पेंट का अंग नहीं है?
- A.तारपीन का तेल (थिनर)
- B.पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल (एंटी-स्किनिंग एजेंट)
- C.थायोयूरिया (त्वरक)
- D.टाइटेनियम डाइऑक्साइड (वर्णक)
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, थायोयूरिया (त्वरक)। त्वरक रबर के वल्कनीकरण को तेज़ करते हैं; वे पेंट का हिस्सा नहीं होते।
तेल वाले पेंट में ये घटक होते हैं: रंग और ढकने की क्षमता देने वाला वर्णक, परत को बाँधने वाला वाहक या सूखने वाला तेल जैसे अलसी का तेल, फैलाने में आसानी देने वाला थिनर, जल्दी सुखाने वाला ड्रायर, गाढ़ापन देने वाले फ़िलर, और डिब्बे में ऊपर परत जमने से रोकने वाला एंटी-स्किनिंग एजेंट। टाइटेनियम डाइऑक्साइड सबसे अधिक प्रयुक्त सफ़ेद वर्णक है, तारपीन पारंपरिक थिनर है और पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल एंटी-स्किनिंग एजेंट के रूप में काम आते हैं। थायोयूरिया जैसे यौगिक रबर उद्योग से जुड़े हैं, जहाँ त्वरक सल्फ़र द्वारा रबर के क्रॉस-लिंक बनने का समय घटाते हैं।
A गलत है: तारपीन का तेल पेंट का सामान्य थिनर है।
B गलत है: पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल पेंट में एंटी-स्किनिंग एजेंट हैं।
D गलत है: टाइटेनियम डाइऑक्साइड पेंट का मुख्य सफ़ेद वर्णक है।
परीक्षा टिप: पेंट = वर्णक + वाहक (अलसी का तेल) + थिनर (तारपीन) + ड्रायर + फ़िलर + एंटी-स्किनिंग एजेंट।
निम्नलिखित में से कौन-सा कोशिकांग जंतु कोशिकाओं में नहीं पाया जाता?
- A.कोशिका झिल्ली
- B.अंतःप्रद्रव्यी जालिका
- C.कोशिका भित्ति
- D.लाइसोसोम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है C, कोशिका भित्ति। जंतु कोशिका केवल लचीली कोशिका झिल्ली से घिरी होती है; कठोर कोशिका भित्ति पौधों, कवकों और जीवाणुओं में मिलती है।
पादप कोशिका में कोशिका भित्ति कोशिका झिल्ली के बाहर होती है और मुख्यतः सेल्युलोज़ से बनी होती है। यह कोशिका को आकार, मज़बूती और पानी भरने पर फटने से सुरक्षा देती है। कवकों की भित्ति काइटिन की और जीवाणुओं की पेप्टिडोग्लाइकन की होती है। जंतु कोशिका में भित्ति न होने से वह आकार बदल सकती है, चल सकती है और मांसपेशी जैसे ऊतक बना सकती है। जंतु कोशिकाओं में सामान्यतः हरितलवक और बड़ी केंद्रीय रिक्तिका भी नहीं होती, जबकि तारककाय (सेंट्रियोल) उनकी पहचान हैं।
A गलत है: कोशिका झिल्ली हर जीवित कोशिका को घेरती है।
B गलत है: प्रोटीन और लिपिड बनाने वाली अंतःप्रद्रव्यी जालिका जंतु कोशिकाओं में होती है।
D गलत है: लाइसोसोम, जिन्हें कोशिका की आत्मघाती थैली कहते हैं, जंतु कोशिकाओं की विशेषता हैं।
परीक्षा टिप: पादप कोशिका = कोशिका भित्ति, हरितलवक, बड़ी रिक्तिका; जंतु कोशिका = तारककाय और लाइसोसोम, भित्ति नहीं।
किसी द्रव पर वायुमंडलीय दाब कम करने से
- A.द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है
- B.द्रव का क्वथनांक घट जाता है
- C.द्रव के क्वथनांक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D.उसे उबलने में लगने वाला समय बढ़ जाता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, द्रव का क्वथनांक घट जाता है। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब ऊपर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए बाहरी दाब कम होने पर वह कम ताप पर ही उबलने लगता है।
द्रव को गर्म करने पर उसका वाष्प दाब बढ़ता है। जिस ताप पर यह वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है, वहीं उबलना शुरू होता है। समुद्र तल पर लगभग 101.3 kPa दाब में पानी 100 °C पर उबलता है। ऊँचे पहाड़ों पर वायुदाब कम होने से पानी लगभग 70 से 90 °C पर ही उबल जाता है, जिससे दाल-चावल जल्दी नहीं पकते। प्रेशर कुकर इसका उल्टा करता है: दाब को लगभग दोगुना कर देता है, जिससे पानी करीब 120 °C पर उबलता है और खाना जल्दी पकता है।
A गलत है: क्वथनांक दाब बढ़ाने से बढ़ता है, घटाने से नहीं।
C गलत है: क्वथनांक सीधे बाहरी दाब पर निर्भर है।
D गलत है: क्वथनांक घटने से द्रव जल्दी उबलता है, देर से नहीं।
परीक्षा टिप: कम दाब, कम क्वथनांक (पहाड़); अधिक दाब, अधिक क्वथनांक (प्रेशर कुकर)।