किसका नियम कहता है कि विद्युत परिपथ के किसी संधि (जंक्शन) पर, संधि में आने वाली धाराओं का योग संधि से बाहर जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है?
- A.माइकल फैराडे
- B.जॉर्ज साइमन ओम
- C.विक्टर फ्रांसिस हेस
- D.गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ
सही उत्तर
D. गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ
व्याख्या
सही उत्तर है D, गुस्ताव रॉबर्ट किरचॉफ। यह किरचॉफ का पहला नियम है, जिसे धारा नियम या संधि नियम कहते हैं और जिसे उन्होंने 1845 में दिया। इसके अनुसार किसी संधि पर आने वाली कुल धारा वहाँ से जाने वाली कुल धारा के बराबर होती है, क्योंकि आवेश किसी बिंदु पर न जमा हो सकता है, न गायब। यानी यह असल में आवेश संरक्षण का नियम है, जिसे परिपथ की संधि पर लागू किया गया है। किरचॉफ का दूसरा नियम, वोल्टता नियम या लूप नियम, कहता है कि किसी बंद लूप में विभवांतरों का बीजगणितीय योग शून्य होता है, जो ऊर्जा संरक्षण से निकलता है। A गलत है क्योंकि फैराडे के नियम विद्युत चुंबकीय प्रेरण और विद्युत अपघटन से जुड़े हैं, संधि से नहीं। B गलत है क्योंकि ओम का नियम एक चालक में वोल्टता, धारा और प्रतिरोध का संबंध बताता है (V = IR)। C गलत है क्योंकि विक्टर हेस ने कॉस्मिक किरणों की खोज की और 1936 का भौतिकी नोबेल पाया। परीक्षा टिप: किरचॉफ धारा नियम = संधि पर आवेश संरक्षण; किरचॉफ वोल्टता नियम = लूप में ऊर्जा संरक्षण।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक वस्तु को जमीन से कुछ ऊँचाई से छोड़ा जाता है। जमीन को छूते ही उसमें ______ होगी।
- A.ऊष्मा ऊर्जा
- B.रासायनिक ऊर्जा
- C.गतिज ऊर्जा
- D.स्थितिज ऊर्जा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गतिज ऊर्जा
व्याख्या
सही उत्तर है C, गतिज ऊर्जा। ऊँचाई पर वस्तु के पास केवल स्थितिज ऊर्जा होती है; गिरते समय यह ऊर्जा लगातार गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है, और जमीन छूते ही लगभग पूरी ऊर्जा गतिज रह जाती है। स्थितिज ऊर्जा mgh होती है और गतिज ऊर्जा आधा mv का वर्ग, तथा गुरुत्व के अंतर्गत मुक्त पतन में इन दोनों का योग स्थिर रहता है, जिसे यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते हैं। जमीन छूने के क्षण ऊँचाई शून्य होती है, इसलिए स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाती है, जबकि चाल सबसे अधिक होती है, इसलिए गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है। A गलत है क्योंकि ऊष्मा टकराव के बाद घर्षण और विकृति से पैदा होती है, छूने के क्षण नहीं। B गलत है क्योंकि रासायनिक ऊर्जा बंधों में संचित रहती है और गिरती वस्तु में इसकी कोई भूमिका नहीं। D गलत है क्योंकि जमीन के स्तर पर स्थितिज ऊर्जा घटकर शून्य हो चुकी होती है। परीक्षा टिप: गिरती वस्तु में स्थितिज ऊर्जा घटती है, गतिज ऊर्जा बढ़ती है, और कुल यांत्रिक ऊर्जा वही रहती है।
पौधों में कार्बन डाइऑक्साइड अपशिष्ट उत्पाद के रूप में कब बनती है?
- A.श्वसन के दौरान
- B.श्वसन और प्रकाश संश्लेषण दोनों के दौरान
- C.प्रकाश संश्लेषण के दौरान
- D.वाष्पोत्सर्जन के दौरान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. श्वसन के दौरान
व्याख्या
सही उत्तर है A, श्वसन के दौरान। पौधे दिन और रात दोनों समय श्वसन करते हैं, जिसमें ग्लूकोज के विघटन से ऊर्जा मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड अपशिष्ट के रूप में निकलती है। प्रकाश संश्लेषण इसका उलटा है: पौधा कार्बन डाइऑक्साइड और जल लेता है और क्लोरोफिल द्वारा पकड़ी गई सूर्य की ऊर्जा से ग्लूकोज बनाता है, जबकि अपशिष्ट के रूप में ऑक्सीजन छोड़ता है। दिन में प्रकाश संश्लेषण की दर श्वसन से अधिक होती है, इसलिए कुल मिलाकर हरा पौधा ऑक्सीजन देता है; रात में केवल श्वसन चलता है, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। इन गैसों का आना-जाना पत्तियों के रंध्रों और काष्ठीय तनों के वातरंध्रों से होता है। B गलत है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण कार्बन डाइऑक्साइड बनाता नहीं, खर्च करता है। C भी इसी कारण गलत है, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण का अपशिष्ट ऑक्सीजन है। D गलत है क्योंकि वाष्पोत्सर्जन में पौधे से जलवाष्प निकलती है, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं। परीक्षा टिप: श्वसन - ऑक्सीजन लेता है, कार्बन डाइऑक्साइड देता है; प्रकाश संश्लेषण - कार्बन डाइऑक्साइड लेता है, ऑक्सीजन देता है।
निम्नलिखित स्थितियों में प्रेरित विभवांतर के परिमाण और दिशा पर विचार करें: (a) एक चुंबक अपने उत्तरी ध्रुव को स्थिर कुंडली की ओर करके 1 मी/से की चाल से चलता है। (b) वही चुंबक अपने दक्षिणी ध्रुव को उसी स्थिर कुंडली की ओर करके 1 मी/से की चाल से चलता है। इन दोनों स्थितियों में प्रेरित विभवांतर ______ परिमाण के होते हैं और उनके चिह्न ______ होते हैं।
- A.समान, समान
- B.समान, विपरीत
- C.भिन्न, विपरीत
- D.भिन्न, समान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समान, विपरीत
व्याख्या
सही उत्तर है B, समान, विपरीत। दोनों स्थितियों में वही चुंबक उसी चाल से चल रहा है, इसलिए कुंडली से जुड़े चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर बराबर रहती है और प्रेरित विभवांतर का परिमाण समान होता है। परंतु कुंडली की ओर दूसरा ध्रुव करने पर कुंडली से गुजरने वाले क्षेत्र की दिशा उलट जाती है, इसलिए प्रेरित विभवांतर का चिह्न विपरीत हो जाता है। यह फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण नियम से निकलता है, जिसके अनुसार प्रेरित विद्युतवाहक बल फ्लक्स परिवर्तन की दर के बराबर होता है, और लेंज के नियम से, जो दिशा तय करता है कि प्रेरित धारा उस परिवर्तन का विरोध करे जिससे वह उत्पन्न हुई। A गलत है क्योंकि ध्रुव बदलने पर चिह्न अवश्य बदलेगा। C गलत है क्योंकि चाल और इसलिए फ्लक्स परिवर्तन की दर वही है, अतः परिमाण बराबर रहेंगे। D दोनों बातों में गलत है। परीक्षा टिप: चाल से परिमाण तय होता है और क्षेत्र की दिशा से चिह्न - परिमाण के लिए फैराडे, दिशा के लिए लेंज।
निम्नलिखित में से कौन द्विबीजपत्री पौधों का लक्षण नहीं है?
- A.मूसला जड़
- B.जालिकावत शिरा-विन्यास
- C.दो बीजपत्र
- D.रेशेदार जड़ें
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. रेशेदार जड़ें
व्याख्या
सही उत्तर है D, रेशेदार जड़ें। रेशेदार या झकड़ा जड़ें एकबीजपत्री पौधों की पहचान हैं, जैसे गेहूँ, मक्का, धान और घासें; ये द्विबीजपत्री पौधों का लक्षण नहीं हैं। द्विबीजपत्री बीज में दो बीजपत्र होते हैं और उसके अंकुर से एक मजबूत प्राथमिक जड़ निकलती है, जो मोटी होकर मूसला जड़ बनती है और उससे छोटी पार्श्व जड़ें फूटती हैं; चना, मटर, सरसों, नीम और आम इसके जाने-पहचाने उदाहरण हैं। द्विबीजपत्री पत्तियों में जालिकावत शिरा-विन्यास होता है, फूलों में प्रायः चार या पाँच पंखुड़ियाँ होती हैं, और संवहन बंडल कैम्बियम के साथ एक वलय में सजे रहते हैं, जिससे तना वर्ष-दर-वर्ष मोटा होता जाता है। A गलत है क्योंकि मूसला जड़ तो द्विबीजपत्री का ही लक्षण है। B गलत है क्योंकि जालिकावत शिरा-विन्यास द्विबीजपत्री का गुण है, एकबीजपत्री में समांतर शिरा-विन्यास होता है। C गलत है क्योंकि दो बीजपत्र होना ही द्विबीजपत्री की परिभाषा है। परीक्षा टिप: द्विबीजपत्री - दो बीजपत्र, मूसला जड़, जालिकावत शिरा; एकबीजपत्री - एक बीजपत्र, रेशेदार जड़, समांतर शिरा।
16 V विभवांतर वाले दो बिंदुओं के बीच 5 C आवेश ले जाने में कितना कार्य होता है?
- A.65 J
- B.45 J
- C.40 J
- D.80 J
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 80 J
व्याख्या
सही उत्तर है D, 80 J। विभवांतर के आर-पार आवेश ले जाने में किया गया कार्य W = QV होता है, इसलिए W = 5 × 16 = 80 जूल। विभवांतर की परिभाषा ही यह है कि एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक इकाई आवेश ले जाने में कितना कार्य करना पड़ता है, इसीलिए एक वोल्ट का अर्थ है प्रति कूलॉम आवेश पर एक जूल कार्य। यहाँ पाँच कूलॉम आवेश सोलह वोल्ट के आर-पार ले जाया गया है, अतः स्रोत को 80 जूल ऊर्जा देनी पड़ेगी। A गलत है क्योंकि 5 C और 16 V से किसी भी सही गणना में 65 J नहीं आता। B गलत है क्योंकि इतने ही आवेश पर 45 J के लिए विभवांतर 9 V चाहिए होता। C गलत है क्योंकि 40 J के लिए 16 V पर 2.5 C या 8 V पर 5 C आवेश चाहिए होता। परीक्षा टिप: V = W/Q याद रखें, इसलिए W = QV; इस अध्याय में जूल का अर्थ कूलॉम गुणा वोल्ट ही है।