किस संघ के जंतुओं के पैर संधियुक्त होते हैं?
- A.मोलस्का
- B.निमेटोडा
- C.आर्थ्रोपोडा
- D.इकाइनोडर्मेटा
सही उत्तर
C. आर्थ्रोपोडा
व्याख्या
सही उत्तर है C, आर्थ्रोपोडा। नाम में ही उत्तर छिपा है - ग्रीक में आर्थ्रोस का अर्थ संधि और पोडोस का अर्थ पैर है, इसलिए आर्थ्रोपोडा वे जंतु हैं जिनके पैर संधियुक्त होते हैं। इनके शरीर पर काइटिन का कठोर बाह्य कंकाल होता है, शरीर खंडों में बँटा रहता है और परिसंचरण तंत्र खुला होता है। बढ़ने के लिए ये अपना कंकाल उतारते हैं, जिसे निर्मोचन कहते हैं। आर्थ्रोपोडा जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ है, जिसमें कीट, मकड़ी, बिच्छू, केकड़ा, झींगा, कनखजूरा आदि आते हैं; ज्ञात जंतु जातियों में लगभग अस्सी प्रतिशत इसी संघ की हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि घोंघा, ऑक्टोपस और सीपी जैसे मोलस्का का शरीर कोमल होता है, जिसमें पेशीय पाद और प्रायः कवच होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि एस्केरिस जैसे निमेटोड बिना खंड वाले गोल कृमि हैं, जिनके पैर होते ही नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि तारा मछली और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म काँटेदार त्वचा वाले समुद्री जंतु हैं, जो नाल पाद से चलते हैं। परीक्षा टिप: आर्थ्रोपोडा सबसे बड़ा संघ, मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किस पादप वर्ग के पौधों को शैवाल (एल्गी) कहा जाता है?
- A.आवृतबीजी
- B.टेरिडोफाइटा
- C.ब्रायोफाइटा
- D.थैलोफाइटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. थैलोफाइटा
व्याख्या
सही उत्तर है D, थैलोफाइटा। शैवाल थैलोफाइटा वर्ग में आते हैं, जो पादप जगत का सबसे सरल समूह है। इनका शरीर थैलस कहलाता है, अर्थात वह जड़, तना और पत्ती में विभाजित नहीं होता, और इनमें संवहन ऊतक भी नहीं होते। अधिकांश शैवाल जल में रहते हैं, प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन बनाते हैं और बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं; स्पाइरोगायरा, यूलोथ्रिक्स, कारा और वॉल्वॉक्स इसके सामान्य उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि आवृतबीजी पुष्पीय पौधे हैं, जिनके बीज फल के भीतर बंद रहते हैं और जो सबसे विकसित समूह हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि टेरिडोफाइटा, जैसे फर्न, पहले ऐसे पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक होते हैं, यद्यपि इनमें बीज नहीं बनते। विकल्प C गलत है, क्योंकि ब्रायोफाइटा, जैसे मॉस और मार्केंशिया, पादप जगत के उभयचर कहलाते हैं और थैलोफाइटा से एक पायदान ऊपर हैं। परीक्षा टिप: क्रम है - थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी और आवृतबीजी।
निम्नलिखित में से किसमें कणों के बीच सबसे प्रबल आकर्षण बल होता है?
- A.जल
- B.लोहे की छड़
- C.ऐल्कोहॉल
- D.ऑक्सीजन गैस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लोहे की छड़
व्याख्या
सही उत्तर है B, लोहे की छड़। लोहे की छड़ ठोस है, और कणों के बीच आकर्षण बल ठोस अवस्था में सर्वाधिक प्रबल होता है।
ठोस में कण एक दूसरे के अत्यंत निकट निश्चित स्थानों पर रहते हैं और केवल कंपन कर सकते हैं, इसलिए ठोस का आकार निश्चित रहता है, आयतन निश्चित होता है और वह लगभग असंपीड्य होता है। द्रव में आकर्षण कम होता है, अतः कण एक दूसरे पर सरक सकते हैं और द्रव आयतन बनाए रखते हुए पात्र का आकार ले लेता है। गैस में आकर्षण सबसे कम होता है और कण तेज गति से स्वतंत्र भ्रमण करते हैं, इसलिए गैस पूरे पात्र में फैल जाती है और सरलता से संपीडित हो जाती है। इसी क्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि ठोस का घनत्व सर्वाधिक और गैस का सबसे कम होता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि जल द्रव है, जिसमें आकर्षण मध्यम होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि ऐल्कोहॉल भी द्रव है और जल से अधिक तेजी से वाष्पित होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि ऑक्सीजन गैस है, जिसमें कणों के बीच आकर्षण सबसे दुर्बल होता है।
परीक्षा टिप: आकर्षण बल ठोस > द्रव > गैस, और कणों की स्वतंत्रता इसका उल्टा क्रम रखती है।
40 किग्रा की एक लड़की 5 मीटर ऊँची सीढ़ियाँ 4 सेकंड में चढ़ती है। उसके द्वारा विकसित शक्ति होगी ________। (g = 10 मी/से² लें)
- A.100 W
- B.200 W
- C.500 W
- D.2000 W
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 500 W
व्याख्या
सही उत्तर है C, 500 W। गुरुत्व के विरुद्ध किया गया कार्य mgh = 40 × 10 × 5 = 2000 जूल है, और शक्ति = कार्य ÷ समय, अर्थात 2000 ÷ 4 = 500 वाट।
शक्ति कार्य करने की दर है, जिसका मात्रक वाट है और एक वाट का अर्थ एक जूल प्रति सेकंड है। सीढ़ियाँ चढ़ने में उपयोगी कार्य स्थितिज ऊर्जा की वृद्धि mgh होता है, जिसमें केवल ऊर्ध्वाधर ऊँचाई गिनी जाती है, सीढ़ी की लंबाई का महत्व नहीं होता। यदि वही लड़की 2 सेकंड में चढ़ती तो कार्य 2000 जूल ही रहता, परंतु शक्ति दोगुनी होकर 1000 वाट हो जाती, जिससे स्पष्ट है कि शक्ति इस पर निर्भर करती है कि कार्य कितनी तेजी से हुआ।
विकल्प A गलत है क्योंकि 100 वाट गलत राशि से भाग देने पर आता है। विकल्प B गलत है क्योंकि 200 वाट के लिए 10 सेकंड चाहिए। विकल्प D गलत है क्योंकि 2000 जूल कार्य है, वाट में शक्ति नहीं।
परीक्षा टिप: कार्य = mgh, शक्ति = कार्य ÷ समय, और एक अश्व शक्ति लगभग 746 वाट।
निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया सबसे अच्छी तरह दर्शाती है कि पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल होता है?
- A.स्पंज को दबाना
- B.जल में चीनी घोलना
- C.चॉक की छड़ तोड़ना
- D.बर्फ को गर्म करके जल बनाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चॉक की छड़ तोड़ना
व्याख्या
सही उत्तर है C, चॉक की छड़ तोड़ना। चॉक तोड़ने के लिए बल लगाना पड़ता है, क्योंकि उसके कण एक दूसरे को थामे रखते हैं, और यही खिंचाव कणों के बीच का आकर्षण बल है।
प्रत्येक पदार्थ कणों से बना है जो एक दूसरे को आकर्षित करते हैं, और इस आकर्षण की प्रबलता ही तय करती है कि किसी वस्तु को तोड़ना कितना कठिन है। यह आकर्षण ठोस में सर्वाधिक, द्रव में कम और गैस में सबसे कम होता है, इसी कारण लोहे की छड़ के लिए हथौड़ा चाहिए, जल को उँगली से अलग किया जा सकता है और वायु कोई प्रतिरोध नहीं करती। विद्यालय की वह क्रिया, जिसमें पहले चॉक, फिर पेंसिल और फिर लोहे की कील तोड़ने का प्रयास किया जाता है, विभिन्न ठोसों में इस बल का अंतर दिखाती है।
विकल्प A गलत है क्योंकि स्पंज दबाने से केवल उसके छिद्रों की वायु बाहर निकलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि चीनी घुलना विसरण तथा कणों के बीच रिक्त स्थान दर्शाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि बर्फ गर्म करना अवस्था परिवर्तन दिखाता है।
परीक्षा टिप: कणों के बीच आकर्षण ठोस में सर्वाधिक, द्रव में कम और गैस में सबसे कम।
एक वस्तु उत्तर दिशा में नियत वेग से चल रही है। वस्तु पर लगने वाला कुल बल होगा
- A.दक्षिण की ओर
- B.पूर्व की ओर
- C.शून्य
- D.उत्तर की ओर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. शून्य
व्याख्या
सही उत्तर है C, शून्य। नियत वेग का अर्थ है त्वरण शून्य, और न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार बल = द्रव्यमान × त्वरण होता है, इसलिए कुल बल शून्य ही होगा।
न्यूटन का प्रथम नियम कहता है कि कोई वस्तु विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है, जब तक उस पर बाह्य बल न लगे। इसी कारण नियत चाल और नियत दिशा में चलती वस्तु को गति बनाए रखने के लिए बल की आवश्यकता नहीं होती। बल केवल चाल या दिशा बदलने के लिए चाहिए। सीधी सड़क पर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की नियत चाल से चलती कार की भी यही स्थिति है, क्योंकि इंजन का बल केवल घर्षण और वायु प्रतिरोध को संतुलित करता है, अतः कुल बल शून्य रहता है। ऐसी वस्तु संतुलन की अवस्था में कही जाती है।
विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि किसी भी दिशा में कुल बल होने पर त्वरण उत्पन्न होता और वेग बदल जाता, जो नियत वेग की दी गई शर्त के विरुद्ध है।
परीक्षा टिप: नियत वेग यानी त्वरण शून्य और कुल बल शून्य, बल का पूर्ण अभाव नहीं।