केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने समुद्र तटों की सफाई और विकास के लिए जो पायलट परियोजना शुरू की है, उसका नाम क्या है?
- A.स्वच्छ भारत
- B.ग्रीन फ्लैग
- C.क्लीन इंडिया
- D.ब्लू फ्लैग
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, ब्लू फ्लैग। 2018 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने चुने हुए समुद्र तटों को साफ और विकसित करने की पायलट परियोजना शुरू की, ताकि वे ब्लू फ्लैग पा सकें। ब्लू फ्लैग एक अंतरराष्ट्रीय इको-लेबल है, जिसे डेनमार्क के कोपेनहेगन स्थित फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन (FEE) देता है; इसकी शुरुआत 1985 में फ्रांस से हुई थी। इसके लिए तट को पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण शिक्षा, सुरक्षा व सुविधाओं और पर्यावरण प्रबंधन के कड़े मानक पूरे करने होते हैं। भारत में इसके लिए BEAMS (बीच एनवायरनमेंट एंड एस्थेटिक्स मैनेजमेंट सर्विसेज़) कार्यक्रम चलता है और 2020 में गुजरात का शिवराजपुर ब्लू फ्लैग पाने वाले पहले भारतीय तटों में था। A गलत है क्योंकि स्वच्छ भारत 2014 में शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन है, समुद्र तटों का लेबल नहीं। B गलत है क्योंकि ग्रीन फ्लैग एक अलग पुरस्कार है, जो ब्रिटेन में अच्छी तरह रखे गए पार्कों और हरित स्थलों को मिलता है। C गलत है क्योंकि क्लीन इंडिया तो स्वच्छ भारत अभियान का ही अंग्रेज़ी नाम है। परीक्षा टिप: ब्लू फ्लैग = FEE (डेनमार्क) का समुद्र तट इको-लेबल; भारत की योजना = BEAMS; पहले आठ भारतीय तटों को 2020 में यह प्रमाणन मिला।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में शामिल नहीं है?
- A.सल्फर
- B.नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
- C.सीसा (लेड)
- D.मीथेन
उत्तर देखें
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना में मीथेन शामिल नहीं है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था और इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
उत्तर देखें
गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
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