कौन सा अनुच्छेद उच्चतम न्यायालय को अपने समक्ष लंबित मामले में पूर्ण न्याय के लिए कोई भी डिक्री या आदेश देने की शक्ति देता है?
- A.अनुच्छेद 32
- B.अनुच्छेद 136
- C.अनुच्छेद 142
- D.अनुच्छेद 226
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 142 है। इसमें कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए अपने समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक ऐसी डिक्री या आदेश दे सकता है, और ऐसी डिक्री संपूर्ण भारत में प्रवर्तनीय होती है। जनहित याचिकाओं में दिए गए अनेक व्यापक निर्देश, नदी की सफाई से लेकर किसी संस्था के विनियमन तक, इसी शक्ति पर टिके हैं, और न्यायिक अतिरेक की बहस प्रायः इसी के विस्तार पर होती है। A, अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार है और स्वयं एक मौलिक अधिकार है। B, अनुच्छेद 136 विशेष अनुमति याचिका का उपबंध करता है, अर्थात किसी भी न्यायालय या अधिकरण से अपील सुनने की विवेकाधीन शक्ति। D, अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता है, जो विषयवस्तु में अनुच्छेद 32 से व्यापक है।
पूरा लेख पढ़ें: जनहित याचिका और न्यायिक सक्रियता: अनुच्छेद, प्रमुख वाद और तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन सी रिट उच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित करने के लिए जारी की जा सकती है?
- A.परमादेश
- B.अधिकार पृच्छा
- C.बंदी प्रत्यक्षीकरण
- D.प्रतिषेध
उत्तर देखें
हेबियस कॉर्पस का लैटिन में अर्थ है शरीर को प्रस्तुत करो। उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत और उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 32 के अंतर्गत यह रिट उस व्यक्ति या प्राधिकारी को जारी करता है जिसने किसी को हिरासत में रखा है, और आदेश देता है कि बंदी को न्यायालय के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की पहली जनहित याचिका सामान्यतः किस वाद को माना जाता है?
- A.एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ
- B.हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य
- C.विशाखा बनाम राजस्थान राज्य
- D.बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत संघ
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1979 में निर्णीत यह वाद बिहार के उन विचाराधीन बंदियों पर छपी समाचार रिपोर्ट से उठा था, जो अपने कथित अपराध की अधिकतम सजा से भी अधिक समय विचारण की प्रतीक्षा में जेल में बिता चुके थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →न्यायाधीश स्थानांतरण वाद के नाम से प्रसिद्ध किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने वाद योग्यता का शिथिल नियम दिया?
- A.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- B.मेनका गांधी बनाम भारत संघ
- C.एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ
- D.मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
उत्तर देखें
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जहाँ किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह के साथ विधिक अन्याय हुआ हो और वह निर्धनता, निःशक्तता या सामाजिक रूप से पिछड़ी स्थिति के कारण न्यायालय तक न पहुँच सके, वहाँ सद्भावपूर्वक कार्य करने वाला कोई भी नागरिक उसकी ओर से न्यायालय जा सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्य को निःशुल्क विधिक सहायता देने का निर्देश देता है ताकि आर्थिक अक्षमता के कारण न्याय से वंचित न होना पड़े?
- A.अनुच्छेद 38
- B.अनुच्छेद 39क
- C.अनुच्छेद 41
- D.अनुच्छेद 43क
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यह नीति निदेशक तत्व राज्य से अपेक्षा करता है कि वह ऐसी विधिक व्यवस्था सुनिश्चित करे जो समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे, और विशेष रूप से उपयुक्त विधान या योजनाओं द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता दे ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण कोई नागरिक न्याय पाने…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 39क को संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?
- A.24वाँ संशोधन अधिनियम, 1971
- B.42वाँ संशोधन अधिनियम, 1976
- C.44वाँ संशोधन अधिनियम, 1978
- D.86वाँ संशोधन अधिनियम, 2002
उत्तर देखें
इतने उपबंधों को छूने के कारण इसे लघु संविधान कहा जाता है। इसने कई नीति निदेशक तत्व जोड़े, जिनमें समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का अनुच्छेद 39क, प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी का अनुच्छेद 43क तथा पर्यावरण, वन और वन्य जीव के संरक्षण का अनुच्छेद 48क शामिल हैं।
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