कथन I : दमनकारी अधिनियमों (कोअर्सिव एक्ट्स) के पारित होने से ब्रिटेन और उसके अमेरिकी उपनिवेशों के बीच सुलह लगभग असंभव हो गई। कथन II : ब्रिटिश संसद ने 1765 में स्टाम्प अधिनियम जारी करने के बाद में उसे निरस्त कर दिया।
- A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
- D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B। दोनों कथन सत्य हैं, पर स्टाम्प अधिनियम का निरस्त होना यह नहीं समझाता कि दमनकारी अधिनियमों ने सुलह की आशा क्यों समाप्त कर दी।
1774 के दमनकारी अधिनियम, जिन्हें उपनिवेशवासी "असहनीय अधिनियम" कहते थे, 1773 की बोस्टन टी पार्टी की सज़ा के रूप में मैसाचुसेट्स पर लगाए गए थे। इनसे बोस्टन बंदरगाह बंद हुआ, उपनिवेश का स्वशासन घटा और ब्रिटिश सैनिकों को निजी इमारतों में ठहराने की छूट मिली। जवाब में 1774 में पहली कॉन्टिनेंटल कांग्रेस हुई और 1775 में लेक्सिंगटन व कॉनकॉर्ड में लड़ाई छिड़ गई, इसलिए कथन I सत्य है। 1765 का स्टाम्प अधिनियम छपे काग़ज़ों पर कर था; "प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं" के नारे वाले विरोध के बाद संसद ने इसे 1766 में निरस्त कर दिया, इसलिए कथन II भी सत्य है। यह ब्रिटेन का पहले का पीछे हटना था, बाद के अलगाव का कारण नहीं।
A गलत है क्योंकि कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता। C गलत है क्योंकि कथन II सत्य है। D गलत है क्योंकि कथन I सत्य है।
परीक्षा टिप: स्टाम्प अधिनियम 1765, निरस्त 1766; बोस्टन टी पार्टी 1773; दमनकारी अधिनियम 1774; स्वतंत्रता की घोषणा 4 जुलाई 1776।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभू-राजस्व में रैयतवाड़ी प्रयोग किसने शुरू किया था?
- A.हेनरी डुंडास
- B.अलेक्ज़ेंडर रीड
- C.डेविड रिकार्डो
- D.माउंटस्टुअर्ट एल्फ़िंस्टन
उत्तर देखें
कैप्टन अलेक्ज़ेंडर रीड ने 1792 में टीपू सुल्तान से लिए गए बारामहल क्षेत्र में रैयतवाड़ी प्रयोग शुरू किया, और थॉमस मुनरो उनके सहायकों में से एक थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को किसने पढ़ा (उनका अर्थ निकाला)?
- A.पियदस्सी
- B.कॉलिन मैकेंज़ी
- C.अलेक्ज़ेंडर कनिंघम
- D.जेम्स प्रिंसेप
उत्तर देखें
ईस्ट इंडिया कंपनी की टकसाल के अधिकारी और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के सचिव प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि को पढ़ा और खरोष्ठी को पढ़ने में भी निर्णायक सफलता पाई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जस्टिस पार्टी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसने गैर-ब्राह्मणों के लिए उसी प्रकार के पृथक सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की ज़ोरदार मांग की, जैसा मॉर्ले-मिंटो सुधारों द्वारा मुसलमानों को दिया गया था।
- B.इसे मुख्य रूप से धनी भूस्वामी और शहरी मध्यवर्गीय गैर-ब्राह्मणों का संरक्षण प्राप्त था।
- C.इसने मॉन्टेग्यू-चेम्सफ़ोर्ड सुधारों में गैर-ब्राह्मणों के लिए 28 आरक्षित सीटों का प्रावधान करवाने में सफलता पाई।
- D.इसने 1920 में चुनावों के बहिष्कार के कांग्रेस के आह्वान का समर्थन किया।
उत्तर देखें
जस्टिस पार्टी 1920 के चुनावों के कांग्रेस के बहिष्कार में शामिल नहीं हुई; उसने चुनाव लड़ा, मद्रास विधान परिषद में बहुमत जीता और नए सुधारों के तहत पहला मंत्रिमंडल बनाया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1915 में हरिद्वार कुंभ मेले में कौन-सा संगठन शुरू किया गया था?
- A.सनातन धर्म सभा
- B.देव समाज
- C.ब्राह्मण सभा
- D.हिंदू महासभा
उत्तर देखें
अखिल भारतीय हिंदू महासभा का स्थापना अधिवेशन 1915 के कुंभ मेले के दौरान हरिद्वार में हुआ, जिसमें 1909 से पहले पंजाब और फिर दूसरे प्रांतों में बनी हिंदू सभाएं एक साथ आईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ (ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेज़ एसोसिएशन) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ का गठन नागपुर में हुआ और एम. सी. राजा इसके पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने।
- B.1926 में डॉ. बी. आर. आंबेडकर अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ में शामिल नहीं हुए।
- C.आंबेडकर ने अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ से त्यागपत्र देकर 1930 में अपनी अखिल भारतीय दलित वर्ग कांग्रेस बनाई।
- D.अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की आंबेडकर की मांग का समर्थन किया।
उत्तर देखें
अखिल भारतीय दलित वर्ग संघ ने पृथक निर्वाचन मंडल की आंबेडकर की मांग का समर्थन नहीं किया; एम. सी. राजा के नेतृत्व में उसने दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों वाले संयुक्त निर्वाचन मंडल का समर्थन किया।
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