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GK24
सामान्य विज्ञानआसानपूछा गया: NDA · 16 April 2023

कार्बन के अपररूपों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.ग्रेफाइट विद्युत का अच्छा चालक है।
  2. B.हीरा ज्ञात सबसे कठोर पदार्थ है।
  3. C.फुलरीन कार्बन के अपररूपों में से एक है।
  4. D.हीरे के बाद ग्रेफाइट ज्ञात दूसरा सबसे कठोर पदार्थ है।

सही उत्तर

D. हीरे के बाद ग्रेफाइट ज्ञात दूसरा सबसे कठोर पदार्थ है।

व्याख्या

सही उत्तर है D, हीरे के बाद ग्रेफाइट ज्ञात दूसरा सबसे कठोर पदार्थ है। ग्रेफाइट कठोर नहीं, बल्कि मृदु और चिकना होता है, इसलिए यही कथन सही नहीं है। अपररूपों में यह अंतर कार्बन परमाणुओं के जुड़ने के ढंग से आता है। हीरे में प्रत्येक कार्बन चार अन्य कार्बन से जुड़कर दृढ़ त्रिविमीय जाल बनाता है, जिससे वह सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ बन जाता है। ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन केवल तीन अन्य से जुड़कर चपटी परतें बनाता है, और ये परतें एक-दूसरे पर सरक जाती हैं, इसलिए ग्रेफाइट इतना मृदु होता है कि उसे स्नेहक तथा पेंसिल की लीड के रूप में काम में लिया जाता है। A सही है क्योंकि ग्रेफाइट के प्रत्येक कार्बन परमाणु का चौथा इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है, जिससे ग्रेफाइट विद्युत का चालन करता है। B सही है क्योंकि हीरा वास्तव में ज्ञात सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है। C सही है क्योंकि साठ परमाणुओं वाले बकीबॉल जैसा फुलरीन कार्बन का तीसरा अपररूप है। परीक्षा टिप: तत्व एक ही पर संरचना भिन्न, इसलिए हीरा कठोर और ग्रेफाइट मृदु तथा चालक है।

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Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 6 Sep 2020आसान

प्रोकैरियोटिक जीवों में केंद्रक क्षेत्र झिल्ली से घिरा नहीं होता। इस अपरिभाषित केंद्रक क्षेत्र को क्या कहा जाता है?

  1. A.न्यूक्लिक अम्ल
  2. B.न्यूक्लिऑयड
  3. C.न्यूक्लिओलस
  4. D.न्यूक्लिओसोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. न्यूक्लिऑयड

व्याख्या

सही उत्तर है B, न्यूक्लिऑयड। प्रोकैरियोटिक कोशिका में आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में खुला पड़ा रहता है और उसके चारों ओर कोई केंद्रक झिल्ली नहीं होती, इस अस्पष्ट केंद्रक क्षेत्र को न्यूक्लिऑयड कहते हैं। बैक्टीरिया और नीले-हरे शैवाल प्रोकैरियोट हैं, और सच्चे केंद्रक के अभाव के साथ-साथ उनमें माइटोकॉन्ड्रिया, लवक या अंतर्द्रव्यी जालिका जैसे झिल्लीयुक्त कोशिकांग भी नहीं होते; उनके राइबोसोम 70S प्रकार के होते हैं और कोशिका भित्ति में पेप्टिडोग्लाइकेन रहता है। कवक, पादप तथा जंतु जैसे यूकैरियोट अपने डीएनए को केंद्रक आवरण नामक दोहरी झिल्ली के भीतर रखते हैं। A गलत है क्योंकि न्यूक्लिक अम्ल डीएनए और आरएनए का रासायनिक नाम है, कोशिका के किसी क्षेत्र का नहीं। C गलत है क्योंकि न्यूक्लिओलस सच्चे केंद्रक के भीतर का घना पिंड है जहाँ राइबोसोम जोड़े जाते हैं। D गलत है क्योंकि न्यूक्लिओसोम हिस्टोन प्रोटीन पर लिपटे डीएनए का मनका है, जो यूकैरियोट में मिलता है। परीक्षा टिप: प्रोकैरियोट का अर्थ न्यूक्लिऑयड और झिल्लीयुक्त कोशिकांगों का अभाव।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 4 Sep 2022मध्यम

जब किसी जंतु कोशिका को उससे कम जल सांद्रता वाले माध्यम से घेर दिया जाता है, तो क्या परिणाम होगा?

  1. A.कोशिका जल खोएगी
  2. B.जल की गति में कोई परिवर्तन नहीं होगा
  3. C.कोशिका जल ग्रहण करेगी
  4. D.कोशिका फूल जाएगी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कोशिका जल खोएगी

व्याख्या

सही उत्तर है A, कोशिका जल खोएगी। जिस माध्यम में कोशिका से कम जल होता है वह अतिपरासरी यानी हाइपरटोनिक माध्यम होता है, इसलिए परासरण द्वारा जल कोशिका से बाहर निकलता है और कोशिका सिकुड़ जाती है। परासरण में जल अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर अधिक जल सांद्रता वाली ओर से कम जल सांद्रता वाली ओर जाता है। जंतु कोशिका में इस जल हानि से कोशिका मुरझा जाती है, और पादप कोशिका में इसी से मिलते परिवर्तन को जीवद्रव्यकुंचन कहा जाता है, जिसमें जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से अलग हट जाता है। अल्पपरासरी यानी हाइपोटोनिक माध्यम में उलटा होता है और कोशिका फूल जाती है, इसी कारण शुद्ध जल में लाल रक्त कोशिकाएँ फट जाती हैं, जबकि समपरासरी माध्यम में जल की कोई शुद्ध गति नहीं होती। B गलत है क्योंकि दोनों ओर की सांद्रता भिन्न होने पर जल की गति होती ही है। C और D गलत हैं क्योंकि जल ग्रहण करना और फूलना अल्पपरासरी माध्यम में होता है, अतिपरासरी में नहीं। परीक्षा टिप: अतिपरासरी का अर्थ जल बाहर और सिकुड़न, अल्पपरासरी का अर्थ जल भीतर और फुलाव।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 10 April 2022आसान

निम्नलिखित में से हाइड्रोजन गैस का रंग कौन-सा है?

  1. A.हल्का पीला
  2. B.नारंगी
  3. C.काला
  4. D.रंगहीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. रंगहीन

व्याख्या

सही उत्तर है D, रंगहीन। हाइड्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है, इसलिए दिए गए किसी भी रंग से उसका मेल नहीं बैठता। यह सबसे हल्का तत्व है, जिसमें एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन होता है, और यह ब्रह्मांड में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है, जबकि पृथ्वी पर यह अधिकतर जल तथा कार्बनिक यौगिकों में संयुक्त रूप में मिलता है। हाइड्रोजन द्विपरमाणुक अणु H2 के रूप में रहती है, वायु में हल्की नीली ज्वाला के साथ जलती है और केवल जल बनाती है, इसी कारण इसे स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जाता है। इसका उपयोग हेबर विधि से अमोनिया बनाने तथा वनस्पति तेलों को वनस्पति घी में बदलने में होता है। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन का कोई सामान्य रूप पीला नहीं होता। B गलत है क्योंकि नारंगी रंग सोडियम वाष्प लैंप में दिखता है, हाइड्रोजन में नहीं। C गलत है क्योंकि यहाँ दी गई कोई गैस काली नहीं है; कार्बन का काजल रूप काला होता है, पर वह ठोस है। परीक्षा टिप: हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन तीनों रंगहीन तथा गंधहीन गैसें हैं।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 18 Sept 2016आसान

पायस (इमल्शन) किसे कहा जाता है?

  1. A.भिन्न भौतिक अवस्थाओं वाले पदार्थों का कोलॉइडी विलयन
  2. B.वास्तविक विलयन
  3. C.अल्कोहल बनाने के लिए आसवन मिश्रण
  4. D.दो द्रवों का कोलॉइडी विलयन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दो द्रवों का कोलॉइडी विलयन

व्याख्या

सही उत्तर है D, दो द्रवों का कोलॉइडी विलयन। पायस वह कोलॉइड है जिसमें एक द्रव महीन बूँदों के रूप में दूसरे ऐसे द्रव में फैला रहता है जो उससे मिलता नहीं। दूध इसका सामान्य उदाहरण है, जिसमें वसा की बूँदें जल में फैली रहती हैं, और मक्खन इसका उल्टा रूप है, जिसमें जल की बूँदें वसा में टिकी रहती हैं। साबुन और अपमार्जक पायसीकारक की तरह काम करते हैं, वे तेल की बूँदों को जल में लटका रखते हैं जिससे चिकनाई धुल जाती है। पायस में परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम दोनों द्रव होते हैं, और प्रश्न इसी बात की परख करता है। A गलत है क्योंकि वह सामान्य रूप से कोलॉइडों का वर्णन करता है, विशेष रूप से पायस का नहीं। B गलत है क्योंकि वास्तविक विलयन समांगी होता है और उसके कण अणु के आकार के होते हैं, जबकि पायस एक कोलॉइड है। C गलत है क्योंकि आसवन द्रवों को उनके क्वथनांक के आधार पर अलग करता है और उसका कोलॉइड से कोई संबंध नहीं है। परीक्षा टिप: पायस द्रव में द्रव है, जबकि ऐरोसॉल गैस में द्रव या ठोस होता है।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 21 April 2024आसान

निम्नलिखित यौगिकों में से किसमें मीठी और फलों जैसी गंध होती है?

  1. A.एथिल अल्कोहल
  2. B.एसिटिक अम्ल
  3. C.एथिल एसीटेट
  4. D.एसीटोफीनोन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एथिल एसीटेट

व्याख्या

सही उत्तर है C, एथिल एसीटेट। एथिल एसीटेट एक एस्टर है, और एस्टर कार्बनिक यौगिकों का वही वर्ग है जो मीठी तथा फलों जैसी गंध के लिए जाना जाता है। यह एथेनॉल और एसिटिक अम्ल की अभिक्रिया से थोड़े सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में बनता है, इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं, और इसका सूत्र CH3COOC2H5 है। इसी सुखद गंध के कारण एस्टर इत्र, कृत्रिम स्वादों और नेल पॉलिश हटाने वाले विलायक में काम आते हैं; पके केले और अनन्नास की गंध भी इसी प्रकार के एस्टरों से आती है। A गलत है क्योंकि एथिल अल्कोहल यानी एथेनॉल की गंध फलों जैसी नहीं, बल्कि तीखी स्पिरिट जैसी होती है। B गलत है क्योंकि एसिटिक अम्ल से सिरके की चुभने वाली गंध आती है। D गलत है क्योंकि एसीटोफीनोन एक कीटोन है जिसकी गंध भारी और लगभग बादाम जैसी होती है, एस्टर की हल्की फलों वाली गंध जैसी नहीं। परीक्षा टिप: एस्टर का अर्थ फलों जैसी गंध और एस्टरीकरण का अर्थ अल्कोहल के साथ कार्बोक्सिलिक अम्ल।