जीवाणु स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस द्वारा दांतों की सड़न का एक महत्वपूर्ण कारण उसकी यह क्षमता है कि वह किससे चिपचिपी परत बनाकर दांतों की सतह से चिपक जाता है?
- A.शर्करा
- B.ऐल्कोहॉल
- C.लार
- D.टाइकोइक अम्ल
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, शर्करा। स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस भोजन की शर्करा, विशेषकर सुक्रोज, को एक चिपचिपी परत में बदल देता है जो उसे दांतों से चिपका देती है।
यह जीवाणु ग्लूकोसिलट्रांसफरेज नामक एंजाइम बनाता है, जो सुक्रोज की ग्लूकोज इकाइयों को जोड़कर ग्लूकन नाम की चिपचिपी श्रृंखलाएं बनाते हैं। इनकी मदद से जीवाणु इनेमल से चिपकते हैं और दंत प्लाक बनाते हैं। प्लाक के अंदर जीवाणु और शर्करा का किण्वन कर लैक्टिक अम्ल बनाते हैं, और जब दांत की सतह का pH लगभग 5.5 से नीचे जाता है तो इनेमल घुलने लगता है। इसी से कैविटी शुरू होती है, और इसीलिए बार-बार मीठा खाना दांतों के लिए अधिक हानिकारक है।
B, ऐल्कोहॉल से यह जीवाणु अपनी चिपचिपी परत नहीं बनाता।
C, लार तो भोजन के कण बहाकर और अम्ल को उदासीन करके दांतों की रक्षा करती है।
D, टाइकोइक अम्ल ग्राम-पॉजिटिव जीवाणुओं की कोशिका भित्ति का हिस्सा है, चिपचिपी परत का कच्चा माल नहीं।
Exam tip: स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस और सुक्रोज से चिपचिपे ग्लूकन और लैक्टिक अम्ल बनते हैं; pH 5.5 से नीचे इनेमल घुलता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमानव शरीर में कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के अवशोषण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा हॉर्मोन आवश्यक है?
- A.GH
- B.TSH
- C.इंसुलिन
- D.कॉर्टिसोल
उत्तर देखें
इंसुलिन ग्लूकोज को रक्त से निकलकर शरीर की कोशिकाओं, खासकर पेशी और वसा कोशिकाओं, में जाने देता है और इस तरह रक्त में शर्करा का स्तर घटाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →स्तनधारियों का हृदय पेशीजनित (मायोजेनिक) होता है और तंत्रिकाओं द्वारा नियंत्रित होता है। हृदय की धड़कन कहाँ से उत्पन्न होती है?
- A.शिरा-आलिंद नोड (साइनोएट्रियल नोड)
- B.QRS तरंग
- C.T तरंग
- D.यकृत निवाहिका तंत्र
उत्तर देखें
SA नोड दाएँ आलिंद की दीवार में विशेष पेशियों का एक छोटा भाग है, जो हर धड़कन शुरू करने वाला विद्युत आवेग पैदा करता है, इसीलिए इसे हृदय का पेसमेकर कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →Ba(OH)2 का तुल्यांकी भार कितना है? (दिया है, Ba का परमाणु भार 137.3 है)
- A.85.7
- B.137.3
- C.154.3
- D.171.3
उत्तर देखें
किसी क्षार का तुल्यांकी भार उसके अणु भार को उसकी अम्लता से भाग देकर मिलता है, और अम्लता का अर्थ है एक अणु में बदले जा सकने वाले हाइड्रॉक्साइड आयनों की संख्या।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऐलुमिनियम के साथ Fe2O3 की अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं? 1. इसे 'थर्मिट अभिक्रिया' कहा जाता है। 2. निकलने वाली ऊष्मा का उपयोग वेल्डिंग के लिए किया जाता है। 3. ऐलुमिनियम धातु ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करती है। 4. अभिक्रिया के अंत में पिघला हुआ Fe और Al बनते हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.1 और 2
- B.1 और 3
- C.2 और 4
- D.1 और 4
उत्तर देखें
जब आयरन (III) ऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ गरम किया जाता है, तो ऐलुमिनियम उससे ऑक्सीजन ले लेता है और इतनी अधिक ऊष्मा निकलती है कि बना हुआ लोहा पिघली अवस्था में मिलता है: Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 + ऊष्मा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यदि किसी अज्ञात दुर्घटना से किसी व्यक्ति की आमाशय भित्ति की अम्ल स्रावित करने वाली कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाएँ, तो निम्नलिखित में से किस जैव-अणु का पाचन सबसे अधिक प्रभावित होगा?
- A.केवल प्रोटीन
- B.लिपिड
- C.केवल कार्बोहाइड्रेट
- D.प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट
उत्तर देखें
आमाशय की अम्ल स्रावित करने वाली कोशिकाएँ, जिन्हें ऑक्सिन्टिक या पार्श्विक कोशिकाएँ कहते हैं, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल छोड़ती हैं, जिस पर आमाशय में प्रोटीन का पाचन निर्भर करता है।
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