जब सोडियम क्लोरीन से अभिक्रिया करता है, तो किस प्रकार का यौगिक बनता है?
- A.आयनिक यौगिक
- B.सहसंयोजक यौगिक
- C.उपसहसंयोजक यौगिक
- D.धात्विक यौगिक
सही उत्तर
A. आयनिक यौगिक
व्याख्या
सही उत्तर है A, आयनिक यौगिक। सोडियम एक धातु है जो सरलता से इलेक्ट्रॉन त्याग देती है और क्लोरीन एक अधातु है जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेती है, इसलिए दोनों मिलकर सोडियम क्लोराइड नामक आयनिक यौगिक बनाते हैं। सोडियम परमाणु के बाहरतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिसे खोकर वह धनावेशित सोडियम आयन बन जाता है; क्लोरीन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, जिसे पाकर वह ऋणावेशित क्लोराइड आयन बन जाता है। विपरीत आवेश प्रबलता से एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और यही स्थिरवैद्युत आकर्षण साधारण नमक NaCl में आयनिक बंध है। B गलत है क्योंकि सहसंयोजक यौगिक दो अधातुओं के इलेक्ट्रॉन साझा करने से बनता है, जैसे जल या मेथेन में। C गलत है क्योंकि उपसहसंयोजक बंध के लिए एकाकी युग्म का दान आवश्यक है, जो यहाँ नहीं होता। D गलत है क्योंकि धात्विक बंध केवल धातु परमाणुओं के बीच बनता है और क्लोरीन धातु नहीं है। परीक्षा टिप: धातु और अधातु मिलकर आयनिक यौगिक बनाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक शॉट्की और फ्रेंकेल, दोनों दोष दर्शाता है?
- A.AgF
- B.AgBr
- C.AgCl
- D.NaCl
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. AgBr
व्याख्या
सही उत्तर है B, AgBr। सिल्वर ब्रोमाइड उस आयनिक क्रिस्टल का मानक उदाहरण है जिसमें दोनों प्रकार के बिंदु दोष एक साथ पाए जाते हैं। शॉट्की दोष में एक धनायन रिक्तिका और एक ऋणायन रिक्तिका की जोड़ी गायब होती है, इसलिए क्रिस्टल विद्युत उदासीन रहता है पर द्रव्यमान घटने से उसका घनत्व गिर जाता है; यह दोष वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों का आकार लगभग समान और समन्वय संख्या अधिक हो। फ्रेंकेल दोष में छोटा आयन, आमतौर पर धनायन, अपने जालक स्थान से निकलकर अंतरकाशी स्थान में बैठ जाता है, इसलिए द्रव्यमान और घनत्व अपरिवर्तित रहते हैं; यह वहाँ मिलता है जहाँ दोनों आयनों के आकार में बड़ा अंतर हो। सिल्वर ब्रोमाइड में छोटा सिल्वर आयन अंतरकाशी स्थान में जा सकता है और रिक्तिका युग्म भी बनते हैं, इसलिए दोनों दोष दिखते हैं। A गलत है क्योंकि AgF में आयनों का आकार लगभग समान होने से केवल शॉट्की दोष होता है। C गलत है क्योंकि AgCl फ्रेंकेल दोष दर्शाता है। D गलत है क्योंकि NaCl शॉट्की दोष का उत्कृष्ट उदाहरण है। परीक्षा टिप: शॉट्की दोष घनत्व घटाता है, फ्रेंकेल नहीं, और AgBr दोनों दर्शाता है।
थर्मोप्लास्ट (तापसुघट्य प्लास्टिक)
- A.में बहुलकीकरण सभी दिशाओं में बढ़ने के कारण प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल होता है
- B.लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं
- C.में तापमान बढ़ने पर प्लास्टिक रूप से विकृत होने की क्षमता घटती जाती है
- D.में द्वितीयक बंध होते हैं और ताप ऊर्जा बढ़ने पर भी ये द्वितीयक बंध कभी नहीं टूटते
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं
व्याख्या
सही उत्तर है B, लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं। थर्मोप्लास्टिक में बहुलक लंबी रेखीय या हल्की शाखित शृंखलाओं के रूप में रहता है, और एक शृंखला दूसरी से केवल वान्डरवाल्स जैसे कमजोर द्वितीयक बलों द्वारा जुड़ी होती है। ताप से इन कमजोर बंधों को ढीला करने भर की ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए पदार्थ मुलायम हो जाता है, नया आकार ले लेता है और ठंडा होने पर फिर कठोर हो जाता है; यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है, इसीलिए थर्मोप्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण संभव है। पॉलिथीन, पॉलीप्रोपिलीन, पीवीसी, पॉलीस्टाइरीन और नायलॉन इसी वर्ग में आते हैं। A गलत है क्योंकि प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल बेकेलाइट जैसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक का लक्षण है, जो एक बार जमने पर फिर नहीं ढाला जा सकता। C गलत है क्योंकि तापमान बढ़ने पर विकृत होने की क्षमता घटती नहीं, बढ़ती है। D गलत है क्योंकि ताप ऊर्जा बढ़ने पर द्वितीयक बंध टूटते हैं, और इसी कारण प्लास्टिक मुलायम होता है। परीक्षा टिप: थर्मोप्लास्टिक में कमजोर द्वितीयक बंध और पुनः ढलाई, थर्मोसेटिंग में तिर्यकबंधित प्राथमिक बंध।
निम्नलिखित में से किन जंतुओं के पाचन तंत्र में एक ही छिद्र होता है जो मुँह और गुदा दोनों का काम करता है?
- A.अरैक्निड
- B.इकाइनोडर्म
- C.प्लैटीहेल्मिंथीज
- D.आर्थ्रोपोड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्लैटीहेल्मिंथीज
व्याख्या
सही उत्तर है C, प्लैटीहेल्मिंथीज। चपटे कृमियों के संघ प्लैटीहेल्मिंथीज में पाचन तंत्र अपूर्ण होता है और उसमें केवल एक ही छिद्र रहता है, इसलिए वही मुँह भोजन भीतर लेता है और अपशिष्ट बाहर निकालता है। उनकी आहारनाल एक बंद थैली जैसी होती है जिसमें गुदा नहीं होती। प्लेनेरिया, यकृत पर्णाभ कृमि और फीताकृमि इसी संघ में आते हैं, और फीताकृमि में तो आहारनाल ही नहीं होती, वह अपने शरीर की सतह से भोजन सोखता है। चपटे कृमि त्रिकोरकी, अप्रगुही और द्विपार्श्व सममित होते हैं, और इनमें से अनेक परजीवी हैं। अलग मुँह और गुदा वाला पूर्ण पाचन तंत्र गोल कृमियों से आगे दिखाई देता है। A गलत है क्योंकि मकड़ी और बिच्छू जैसे अरैक्निड आर्थ्रोपोड हैं और उनमें पूर्ण आहारनाल होती है। B गलत है क्योंकि तारामीन और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म में मुँह और गुदा दोनों होते हैं। D गलत है क्योंकि जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ आर्थ्रोपोडा पूर्ण आहारनाल रखता है। परीक्षा टिप: सीलेंटरेटा और प्लैटीहेल्मिंथीज में एक छिद्र, ऐस्केहेल्मिंथीज से आगे दो छिद्र।
वायु में f फोकस दूरी वाले एक उत्तल दर्पण को 4/3 अपवर्तनांक वाले द्रव में डुबोया जाता है। द्रव में इस दर्पण की फोकस दूरी क्या होगी?
- A.(4/3) f
- B.(3/4) f
- C.(7/3) f
- D.f
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. f
व्याख्या
सही उत्तर है D, f। दर्पण की फोकस दूरी उसके चारों ओर के माध्यम पर निर्भर नहीं करती, इसलिए वायु में f फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण की फोकस दूरी द्रव में भी f ही रहती है। दर्पण परावर्तन के नियम से काम करता है और गोलीय दर्पण के लिए f = R/2 होता है, जहाँ R उसकी सतह की वक्रता त्रिज्या है। R केवल दर्पण की बनावट से तय होता है, इसलिए वायु के स्थान पर जल, तेल या कोई भी द्रव आ जाए, फोकस दूरी नहीं बदलती। लेंस का मामला इसके उलट है, क्योंकि वह अपवर्तन से काम करता है - उसकी फोकस दूरी काँच के अपवर्तनांक और आसपास के माध्यम के अनुपात पर निर्भर करती है, इसलिए द्रव में लेंस की फोकस दूरी बदल जाती है। A गलत है क्योंकि f को 4/3 से गुणा करना दर्पण को लेंस मान लेने जैसा है। B भी इसी कारण गलत है, वहाँ केवल गुणक उलट दिया गया है। C गलत है क्योंकि 7/3 का यहाँ कोई आधार नहीं है। परीक्षा टिप: दर्पण की फोकस दूरी R/2 होती है और हर माध्यम में वही रहती है, लेंस की नहीं।
समय के साथ ताँबा हरा पड़ जाने का मुख्य कारण क्या है?
- A.हाइड्रोजन भंगुरता
- B.वायु से नाइट्रोजन का अवशोषण
- C.पराबैंगनी प्रकाश से अभिक्रिया
- D.ऑक्साइड की परत बनना
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. ऑक्साइड की परत बनना
व्याख्या
सही उत्तर है D, ऑक्साइड की परत बनना। ताँबा हरा इसलिए पड़ता है कि उसकी सतह धीरे-धीरे हवा से अभिक्रिया करके संक्षारण उत्पादों की परत से ढक जाती है, और वह परत हरे रंग की होती है। नम हवा में ताँबे पर पहले गहरे रंग का कॉपर ऑक्साइड बनता है; फिर कार्बन डाइऑक्साइड और नमी मिलकर उसे क्षारीय कॉपर कार्बोनेट में बदल देते हैं, जो पुरानी ताँबे की छतों, मंदिरों के गुंबदों और स्टैचू ऑफ लिबर्टी पर दिखने वाली हरी पर्त है। यह परत धातु से चिपकी रहती है और भीतर की धातु की रक्षा करती है, इसीलिए ताँबा लोहे की तरह जंग खाकर नष्ट नहीं होता। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन भंगुरता धातु को भुरभुरा और दरारयुक्त बनाती है, उसका रंग नहीं बदलती। B गलत है क्योंकि ताँबा हवा से नाइट्रोजन नहीं सोखता, नाइट्रोजन साधारण ताप पर लगभग निष्क्रिय रहती है। C गलत है क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश ताँबे से अभिक्रिया कर हरी परत नहीं बनाता। परीक्षा टिप: ताँबे की हरी परत क्षारीय कॉपर कार्बोनेट है, और इमली या नींबू का अम्ल इसी परत को घोलकर बर्तन साफ करता है।