इंडिया गेट को मूल रूप से निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता था?
- A.एंग्लो-अफ़गान युद्ध स्मारक
- B.अखिल भारतीय युद्ध स्मारक
- C.दिल्ली का मेहराब
- D.सभी ब्रिटिश सैनिकों का युद्ध स्मारक
सही उत्तर
B. अखिल भारतीय युद्ध स्मारक
व्याख्या
सही उत्तर है B, अखिल भारतीय युद्ध स्मारक। इंडिया गेट को 'ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल' के रूप में बनाया गया था, ताकि प्रथम विश्व युद्ध और 1919 के तीसरे आंग्ल-अफ़गान युद्ध में जान गँवाने वाले ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों को सम्मान दिया जा सके। इसका डिज़ाइन नई दिल्ली के मुख्य वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने तैयार किया था। ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने 1921 में इसकी नींव रखी और यह 1931 में बनकर तैयार हुआ। इसकी दीवारों पर हज़ारों सैनिकों के नाम खुदे हैं। 1971 के युद्ध के बाद 1972 में इसके मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति जोड़ी गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि अफ़गान युद्ध उन युद्धों में से सिर्फ़ एक है जिनकी याद इसमें है, और यह इसका नाम कभी नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि 'दिल्ली का मेहराब' केवल एक वर्णन है, कोई आधिकारिक नाम नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह स्मारक ब्रिटिश भारतीय सेना के भारतीय सैनिकों को सम्मान देता है, केवल ब्रिटिश सैनिकों को नहीं। परीक्षा टिप: इंडिया गेट = अखिल भारतीय युद्ध स्मारक, डिज़ाइन लुटियंस का, निर्माण 1921–1931।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकोणार्क का सूर्य मंदिर लोकप्रिय रूप से __________ के नाम से जाना जाता है।
- A.श्वेत पैगोडा
- B.ब्लैक पैगोडा
- C.स्वर्ण पैगोडा
- D.कांस्य पैगोडा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ब्लैक पैगोडा
व्याख्या
सही उत्तर है B, ब्लैक पैगोडा। यूरोपीय नाविक कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पैगोडा अर्थात काला पैगोडा कहते थे, क्योंकि इसका गहरे रंग के पत्थर से बना शिखर ओडिशा के समुद्र तट पर दूर से दिखाई देता था और उनके लिए दिशासूचक चिह्न का काम करता था; इसके विपरीत पुरी के सफेद पुते जगन्नाथ मंदिर को वे श्वेत पैगोडा कहते थे। इस मंदिर का निर्माण तेरहवीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने कलिंग शैली में कराया था। पूरा मंदिर सूर्य देव के रथ के आकार में बना है, जिसमें पहियों के बारह जोड़े उकेरे गए हैं और सात घोड़े उसे खींचते दिखाए गए हैं; ये पहिए धूपघड़ी का काम भी करते हैं। यूनेस्को ने 1984 में इसे विश्व धरोहर सूची में रखा। A गलत है क्योंकि श्वेत पैगोडा नाविकों द्वारा पुरी के मंदिर को दिया गया नाम था। C और D गलत हैं क्योंकि कोणार्क के लिए ऐसे कोई नाम प्रचलित नहीं रहे। परीक्षा टिप: कोणार्क = ब्लैक पैगोडा, नरसिंहदेव प्रथम, कलिंग शैली, 1984 से यूनेस्को धरोहर।
पट्टचित्र शैली की चित्रकला निम्नलिखित में से किस राज्य की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय कला शैलियों में से एक है?
- A.आंध्र प्रदेश
- B.राजस्थान
- C.ओडिशा
- D.बिहार
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सही उत्तर: C. ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर है C, ओडिशा। पट्टचित्र ओडिशा की प्राचीन कपड़े पर बनने वाली चित्रकला है और इसका नाम ही इसका अर्थ बता देता है — पट्ट यानी कपड़ा और चित्र यानी तस्वीर। चित्रकार कहे जाने वाले कलाकार कपड़े पर खड़िया और इमली की लेई चढ़ाते हैं, फिर प्राकृतिक रंगों और बारीक कूँची से देवी-देवताओं तथा कथाओं के दृश्य उकेरते हैं और चारों ओर सजी हुई किनारी बनाते हैं। अधिकांश चित्रों में पुरी के जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा, कृष्ण लीला या महाकाव्यों के प्रसंग दिखाए जाते हैं। पुरी के पास बसा रघुराजपुर गाँव इस कला के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा पट्टचित्र को जीआई टैग भी मिला है। A गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश कलमकारी के लिए जाना जाता है। B गलत है क्योंकि राजस्थान फड़ चित्रकला तथा किशनगढ़, मेवाड़ और बूँदी की लघु चित्र शैलियों के लिए प्रसिद्ध है। D गलत है क्योंकि बिहार की पहचान मधुबनी या मिथिला चित्रकला है। परीक्षा टिप: पट्टचित्र ओडिशा, मधुबनी बिहार, कलमकारी आंध्र प्रदेश और वारली महाराष्ट्र की शैली है।
खासी लोगों का धन्यवाद नृत्य का शाद नोंगक्रेम किस राज्य में किया जाता है?
- A.मेघालय
- B.मिजोरम
- C.असम
- D.सिक्किम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेघालय
व्याख्या
सही उत्तर A, मेघालय है। नोंगक्रेम खासी लोगों का फसल के लिए धन्यवाद नृत्य है, जो शिलांग के पास ख्यरिम प्रमुखता के केंद्र स्मित में कई दिनों तक चलता है, जहाँ अविवाहित युवतियाँ भारी चाँदी और सोने के आभूषणों में बीच में नृत्य करती हैं और पुरुष उनके चारों ओर तलवार और चँवर लेकर घूमते हैं। इसी राज्य के गारो अपनी फसल के अंत में वांगला, सौ ढोलों का उत्सव, मनाते हैं।
विकल्प B, मिजोरम में चेराव यानी बाँस नृत्य और खुआल्लम होते हैं। विकल्प C, असम में असमिया नववर्ष पर बिहू और चाय बागान समुदायों का झूमुर मिलता है। विकल्प D, सिक्किम में हिम सिंह नृत्य सिंघी छाम और मारुनी होते हैं। खासी समुदाय और स्मित गाँव का उल्लेख मेघालय की पहचान है, और प्रश्न प्रायः राज्य के बजाय जनजाति का नाम देता है।
बैसाखी के फसल पर्व पर ढोल की ताल पर किया जाने वाला भांगड़ा किस राज्य का लोक नृत्य है?
- A.हिमाचल प्रदेश
- B.जम्मू और कश्मीर
- C.पंजाब
- D.उत्तराखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पंजाब
व्याख्या
सही उत्तर C, पंजाब है। भांगड़ा पंजाब की फसल का पुरुष नृत्य है, जो अप्रैल में बैसाखी पर ढोल की ताल पर छलांगों, कंधों की गति और उठी हुई भुजाओं के साथ किया जाता है। इसका स्त्री रूप गिद्दा है, जिसमें कदमों के बीच बोलियाँ गाई और तालियों पर कही जाती हैं।
विकल्प A, हिमाचल प्रदेश में कुल्लू और पहाड़ी जिलों की लंबी शृंखला वाली नाटी तथा नामजेन होते हैं। विकल्प B, जम्मू और कश्मीर में आमने-सामने पंक्तियों में स्त्रियों का रउफ, ऊँची टोपी पहने वट्टल पुरुषों का दमहाल, हिकत और लोक नाट्य भांड पाथर मिलते हैं। विकल्प D, उत्तराखंड में कुमाऊँ की बारातों का तलवार नृत्य छोलिया, झोड़ा, लंगवीर नृत्य तथा चमोली का रम्माण पर्व है, जिसे यूनेस्को ने 2009 में सूची में लिया। ढोल और बैसाखी मिलकर भांगड़ा को पंजाब से बाँध देते हैं।
यूनेस्को द्वारा 2010 में सूचीबद्ध कालबेलिया नृत्य किस राज्य का है?
- A.राजस्थान
- B.गुजरात
- C.पंजाब
- D.हरियाणा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर A, राजस्थान है। कालबेलिया राजस्थान के कालबेलिया समुदाय की गीत और नृत्य परम्परा है, जो परंपरागत रूप से सपेरे रहे हैं, और काले लहराते घाघरे में नर्तकी बीन तथा खंजरी की ध्वनि पर सर्प की गति का अनुकरण करती है। यूनेस्को ने कालबेलिया के गीत और नृत्य को 2010 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया, उसी वर्ष जिसमें छऊ और मुडियेट्टु शामिल हुए।
विकल्प B, गुजरात का गरबा बहुत बाद में, 2023 में सूची में आया। विकल्प C, पंजाब के भांगड़ा और गिद्दा इस सूची में नहीं हैं, यद्यपि पंजाब के जंडियाला गुरु के ठठेरों का शिल्प 2014 में शामिल हुआ था। विकल्प D, हरियाणा के खोरिया, धमाल और लूर की कोई यूनेस्को प्रविष्टि नहीं है। 2010 का वर्ष छऊ, कालबेलिया और मुडियेट्टु तीनों के लिए एक साथ याद रखें।