डॉ. जितेंद्र सिंह ने आरडीआई कोष पर किस संस्था के स्थापना दिवस पर बात की?
- A.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- B.प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड
- C.विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
- D.विज्ञान एवं इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड
सही उत्तर
B. प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड
व्याख्या
सही उत्तर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड है, जिसे संक्षेप में टीडीबी कहा जाता है और जिसका 30वां स्थापना दिवस इस संबोधन का अवसर था। बोर्ड की स्थापना इसी उद्देश्य से हुई थी कि प्रौद्योगिकियां प्रयोगशालाओं में सीमित न रहें, बल्कि ऐसे उत्पादों, समाधानों और उद्यमों में बदलें जो नागरिकों का जीवन सुगम बनाएं, आजीविका दें और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करें। मंत्री ने प्रयोगशाला से बाजार तक के सफर में बोर्ड की भूमिका की सराहना की और सीमित क्षेत्रों से आगे बढ़कर दी गई सहायता के उदाहरण में स्काईरूट तथा बॉटलैब का नाम लिया। उन्होंने यह भी कहा कि आरडीआई कोष के तहत प्रस्ताव पेश करने में टीडीबी सबसे पहले रहा और अब उसे प्रारंभिक तथा बाद के, दोनों चरणों में सहयोग देना चाहिए। बाकी विकल्प विज्ञान तंत्र की वास्तविक संस्थाएं हैं, पर इस विज्ञप्ति में आयोजक के रूप में उनका नाम नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: एक लाख करोड़ के आरडीआई कोष पर जागरूकता का आह्वान
अभ्यास प्रश्न
अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष का आकार कितना है?
- A.10,000 करोड़ रुपये
- B.50,000 करोड़ रुपये
- C.1 लाख करोड़ रुपये
- D.2 लाख करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1 लाख करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 1 लाख करोड़ रुपये है। विज्ञप्ति में आरंभ से अंत तक 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष का उल्लेख है, और इसी आकार के कारण मंत्री का प्रचार-प्रसार का आह्वान आवश्यक हो जाता है: हजारों आवेदन आ रहे हैं और इनमें कुछ ऐसे आवेदकों के हैं जिन्हें कोष का उद्देश्य समझ में नहीं आया। उन्होंने आगाह किया कि इसे वित्त का एक और स्रोत या पारंपरिक ऋण सुविधा समझना ठीक नहीं होगा, और कहा कि इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी विकास तथा अनुसंधान को इस तरह सहारा देना है जिससे विज्ञान की प्रगति और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का विकास जुड़े। गलत विकल्प ऐसे गोल आंकड़े हैं जो अलग-अलग योजनाओं से जुड़े होते हैं, पर इस कोष के लिए याद रखने वाली संख्या एक लाख करोड़ रुपये है। यह भी ध्यान रखें कि कोष बाद के चरण में, टीआरएल 4 स्तर पर सहायता देता है।
मंत्री के अनुसार भारत के कितने स्टार्टअप छोटे शहरों से आते हैं?
- A.लगभग एक-चौथाई
- B.लगभग एक-तिहाई
- C.आधे से अधिक
- D.दसवें हिस्से से कम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आधे से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर आधे से अधिक है। मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप केवल बेंगलुरु या हैदराबाद तक सीमित नहीं हैं और 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप छोटे शहरों से आते हैं; यह आंकड़ा उन्होंने उद्यमिता से जुड़ी प्रचलित भ्रांतियां दूर करने की मांग करते हुए दिया। उन्होंने एक और भ्रांति भी गिनाई, कि उद्यमिता केवल युवाओं का क्षेत्र है, और इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी भी रेखांकित की। बाकी विकल्प इस हिस्से को कम करके बताते हैं और परीक्षार्थी को इस बारे में उलटी धारणा दे देंगे कि भारत में उद्यम कहां खड़े हो रहे हैं। इसी हिस्से में एक और बात याद रखने योग्य है: अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और परमाणु जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी का रास्ता खोला गया है, और संस्थानों तथा हितधारकों के बीच संसाधनों का एकत्रीकरण इकोसिस्टम मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
मंत्री के अनुसार आरडीआई कोष किस प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर पर सहायता देता है?
- A.टीआरएल 1
- B.टीआरएल 4
- C.टीआरएल 7
- D.टीआरएल 9
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टीआरएल 4
व्याख्या
सही उत्तर टीआरएल 4 है। भविष्य की योजनाओं पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि आरडीआई कोष बाद के चरण में, टीआरएल 4 स्तर पर सहायता दे रहा है, और इस कोष के तहत अपने प्रस्ताव पेश करने में प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड सबसे पहले रहा। उनका तर्क था कि बोर्ड को प्रारंभिक चरण और इस बाद के चरण, दोनों में प्रौद्योगिकी विकास का सहयोग करना चाहिए, ताकि अच्छा काम किसी भी छोर पर सहारे के बिना न रह जाए। बाकी विकल्प इसी प्रौद्योगिकी तैयारी पैमाने के स्तर हैं और यह परखने के लिए रखे गए हैं कि विशेष स्तर ध्यान से पढ़ा गया या अनुमान से भरा गया। इस तथ्य के साथ संबोधन की दो और बातें जोड़कर याद रखें: टीडीबी ने सार्वजनिक से निजी क्षेत्र में बदलाव और तकनीकी आत्मनिर्भरता का मॉडल खड़ा किया है, और मंत्री ने भारत की तकनीकी क्षमता को विकासशील देशों के बीच देश की स्थिति से जोड़ा।
बद्री ओपीयू-आईवीएफ कार्यक्रम किन दो संस्थाओं ने चलाया?
- A.आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
- B.आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय
- C.एनबीएजीआर, करनाल और कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल
- D.आईसीएआर-सीआईआरसी, मेरठ और दून विश्वविद्यालय, देहरादून
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
व्याख्या
सही उत्तर आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी. बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर है। यह कार्यक्रम इन्हीं दोनों के सहयोग से चला, जिसमें हल्दी स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद ने आर्थिक मदद दी। इसकी शुरुआत 2023 में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एम. एस. चौहान की पहल पर हुई और अगले तीन वर्षों में दोनों टीमों ने इस नस्ल के लिए ओवम पिक-अप, भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं स्थापित कीं। आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि ऐसी उन्नत प्रजनन तकनीकें बेहतरीन मादा जर्मप्लाज्म को तेजी से बढ़ा सकती हैं और व्यवस्थित नस्ल सुधार कार्यक्रमों में मदद करती हैं। बाकी विकल्पों में क्षेत्र की ऐसी वास्तविक संस्थाएं और विश्वविद्यालय मिलाए गए हैं जो इस काम में साझेदार नहीं थे।
बद्री प्रजनन कार्यक्रम में बद्री भ्रूण किस नस्ल की प्राप्तकर्ता गाय में प्रत्यारोपित किया गया?
- A.गिर
- B.थारपारकर
- C.साहीवाल
- D.लाल सिंधी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. साहीवाल
व्याख्या
सही उत्तर साहीवाल है। कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप द्वारा अंडे लिए गए, उन्हें परिपक्व कर प्रयोगशाला में बेहतर बद्री सांड के वीर्य से निषेचित किया गया और भ्रूणों को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित किया गया। ऐसा ही एक बद्री भ्रूण एक समन्वित साहीवाल प्राप्तकर्ता गाय में रखा गया, जिसने बाद में स्वस्थ बद्री बछिया को जन्म दिया। प्राप्तकर्ता गाय केवल गर्भ धारण करती है, इसलिए बछिया की आनुवंशिकी बद्री दाता और बद्री सांड की ही रहती है, जन्म देने वाली गाय की नहीं। विकल्प A, B और D भारत की अन्य प्रसिद्ध देशी गाय नस्लें हैं और सिद्धांत रूप में इनमें से कोई भी प्राप्तकर्ता बन सकती थी, इसीलिए ये अच्छे भ्रामक विकल्प हैं। एक और संकर गाय से भी जल्द बद्री बछड़े के जन्म की उम्मीद जताई गई थी।