डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवार के लिए न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि कितनी है?
- A.तीन महीने
- B.छह महीने
- C.नौ महीने
- D.बारह महीने
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर छह महीने है। योजना के पुराने ढांचे में प्लेसमेंट तभी गिना जाता था जब प्रशिक्षित उम्मीदवार कम से कम तीन महीने लगातार नौकरी में रहे, इसलिए विकल्प A पुरानी व्यवस्था बताता है, मौजूदा नहीं। सरकार ने मई 2025 में जो उन्नत दिशानिर्देश अधिसूचित किए, उन्होंने यह सीमा दोगुनी कर दी, ताकि प्रशिक्षण की सफलता टिकाऊ रोजगार से आंकी जाए, न कि कुछ हफ्तों की नौकरी से। संशोधित नियमों में वेतन वाला रोजगार, स्वरोजगार और गिग रोजगार सभी शामिल हैं तथा काम लगातार हो या रुक-रुक कर, दोनों गिने जाते हैं। विकल्प C ऐसी अवधि है जिसका उल्लेख दिशानिर्देशों में कहीं नहीं है। विकल्प D वह अवधि है जिस तक नियुक्त उम्मीदवार पर नजर रखी जाती है और जिसके बाद कौशल उन्नयन तथा पुनर्कौशल के अवसर मिलते हैं, लेकिन यह निगरानी की अवधि है, न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि नहीं, इसलिए यह उत्तर गलत है।
पूरा लेख पढ़ें: डीडीयू-जीकेवाई 2.0: न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि अब छह महीने
अभ्यास प्रश्न
डीडीयू-जीकेवाई किस तिथि को और किस मिशन के तहत शुरू की गई थी?
- A.25 सितंबर 2014, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत
- B.25 सितंबर 2015, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत
- C.2 अक्टूबर 2014, मनरेगा के तहत
- D.15 अगस्त 2016, स्किल इंडिया मिशन के तहत
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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसी तिथि को यह योजना शुरू की थी, ताकि गरीब ग्रामीण परिवारों के 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण मिल सके, और इस वर्ष योजना अपनी बारहवीं वर्षगांठ मना रही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत नियुक्त उम्मीदवार को कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है?
- A.नौकरी मिलने पर एकमुश्त 10,000 रुपये
- B.छह महीने तक 1,270 रुपये प्रति माह, कुल 7,620 रुपये
- C.छह महीने तक 2,500 रुपये प्रति माह, कुल 15,000 रुपये
- D.प्लेसमेंट के बाद कोई सहायता नहीं मिलती
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यह राशि जानबूझकर हर महीने दी जाती है और वह भी उन्हीं छह महीनों में, जो अब न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि है, ताकि पैसा उम्मीदवार को नए शहर और नई नौकरी में टिके रहने में मदद करे, न कि एक बार में मिलकर खत्म हो जाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के तहत सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर पंजीकृत ई-कचरा रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों की संख्या 38 से बढ़कर कितनी हो गई?
- A.75 से अधिक
- B.100 से अधिक
- C.200 से अधिक
- D.500 से अधिक
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पिछले अभियान में शुरू हुए ई-कचरे पर ध्यान को आगे बढ़ाते हुए विशेष अभियान 6 में डीएआरपीजी ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और रिसाइक्लिंग उद्योग के साथ मिलकर सरकारी दफ्तरों को अधिकृत रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों से जोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के दौरान कबाड़ बेचकर सबसे अधिक आय किस मंत्रालय ने अर्जित की?
- A.कोयला मंत्रालय
- B.रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड)
- C.रक्षा मंत्रालय (सैन्य मामलों का विभाग)
- D.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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इसके बाद सैन्य मामलों का विभाग 88.96 करोड़ रुपये, कोयला मंत्रालय 61.41 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 34.81 करोड़ रुपये के साथ रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 में ई-कचरे सहित कबाड़ के निपटान से कुल कितनी आय हुई?
- A.618.06 करोड़ रुपये
- B.770.50 करोड़ रुपये
- C.970.33 करोड़ रुपये
- D.1,120.40 करोड़ रुपये
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विशेष अभियान 6 पोर्टल के संकलित आंकड़ों के अनुसार सभी मंत्रालयों और विभागों ने ई-कचरे सहित कबाड़ बेचकर 970.33 करोड़ रुपये जुटाए, जो विशेष अभियान 5.0 से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।
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