ध्वनि तरंगों के उत्पादन और संचरण के अध्ययन को क्या कहा जाता है?
- A.प्रकाशिकी
- B.फोटोनिकी
- C.खगोल भौतिकी
- D.ध्वनिकी
सही उत्तर
D. ध्वनिकी
व्याख्या
सही उत्तर है D, ध्वनिकी। ध्वनिकी भौतिकी की वह शाखा है जो बताती है कि ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है, कैसे आगे बढ़ती है और कैसे सुनी या अवशोषित की जाती है। इसका अंग्रेजी नाम ग्रीक मूल से आया है, जिसका अर्थ है 'सुनना'। ध्वनि यांत्रिक तरंग है, इसलिए इसे माध्यम की जरूरत होती है और यह निर्वात में नहीं चल सकती; कमरे के ताप पर हवा में इसकी चाल लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड होती है और पानी तथा इस्पात में इससे कई गुना अधिक। ध्वनिकी का उपयोग सभागारों और स्टूडियो की बनावट में होता है, ताकि प्रतिध्वनि और शोर पर काबू रहे, तथा सोनार, अल्ट्रासाउंड जाँच और श्रवण यंत्रों में भी होता है। A गलत है क्योंकि प्रकाशिकी प्रकाश, उसके परावर्तन, अपवर्तन तथा लेंस व दर्पण के काम का अध्ययन है। B गलत है क्योंकि फोटोनिकी फोटॉनों के उत्पादन, नियंत्रण और संसूचन से जुड़ी है, जैसे लेजर और प्रकाशिक तंतुओं में। C गलत है क्योंकि खगोल भौतिकी तारों, आकाशगंगाओं तथा ब्रह्मांड की भौतिकी पढ़ती है। परीक्षा टिप: ध्वनिकी – ध्वनि; प्रकाशिकी – प्रकाश; फोटोनिकी – फोटॉन; भूकंप विज्ञान – भूकंपीय तरंगें।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एलईडी) की संरचना बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.गैलियम फॉस्फाइड
- B.इंडियम गैलियम नाइट्राइड
- C.जर्मेनियम
- D.गैलियम आर्सेनाइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जर्मेनियम
व्याख्या
सही उत्तर है C, जर्मेनियम। जर्मेनियम से प्रकाश उत्सर्जक डायोड नहीं बनाए जाते, क्योंकि यह अप्रत्यक्ष ऊर्जा अंतराल वाला अर्धचालक है, इसलिए अंतराल पार करके लौटता इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा प्रकाश के रूप में नहीं, बल्कि क्रिस्टल में ऊष्मा के रूप में छोड़ता है। इसका ऊर्जा अंतराल भी बहुत छोटा, लगभग 0.66 इलेक्ट्रॉन वोल्ट है, जो दृश्य प्रकाश पैदा करने के लिए बहुत कम है। इसी कारण एलईडी प्रत्यक्ष ऊर्जा अंतराल वाले यौगिकों से बनाए जाते हैं, जिनका अंतराल मनचाहे रंग के अनुसार बदला जा सकता है। A गलत है क्योंकि गैलियम फॉस्फाइड हरे और पीले डायोड में काम आता है। B गलत है क्योंकि इंडियम गैलियम नाइट्राइड से नीले और सफेद डायोड बनते हैं, जिन्होंने आधुनिक प्रकाश व्यवस्था संभव बनाई और जिसके लिए 2014 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार दिया गया। D गलत है क्योंकि गैलियम आर्सेनाइड लाल और अवरक्त डायोड का मानक पदार्थ है, जिसमें टीवी के रिमोट वाले डायोड भी शामिल हैं। परीक्षा टिप: एलईडी के लिए प्रत्यक्ष अंतराल वाले पदार्थ – गैलियम आर्सेनाइड, गैलियम फॉस्फाइड, इंडियम गैलियम नाइट्राइड; सिलिकॉन और जर्मेनियम अप्रत्यक्ष हैं।
पृष्ठ तनाव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.पृष्ठ तनाव को सामान्यतः डाइन प्रति सेंटीमीटर में मापा जाता है।
- B.पानी की बूँद का आकार पृष्ठ तनाव के कारण गोलाकार होता है।
- C.कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है।
- D.द्रव के अणुओं के बीच की संसक्ति बल ही पृष्ठ तनाव नामक परिघटना के लिए उत्तरदायी हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है।
व्याख्या
सही उत्तर है C, कमरे के ताप पर पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से कम होता है। यही कथन गलत है, क्योंकि पानी का पृष्ठ तनाव एथिल ऐल्कोहॉल से बहुत अधिक होता है। लगभग बीस डिग्री सेल्सियस पर पानी का मान करीब बहत्तर डाइन प्रति सेंटीमीटर होता है, जबकि एथिल ऐल्कोहॉल का केवल बाईस के आसपास, क्योंकि पानी के अणुओं के बीच हाइड्रोजन आबंध ऐल्कोहॉल के कमजोर बलों की तुलना में बहुत जोर से खींचते हैं। इसी कारण ऐल्कोहॉल सतह पर पतली परत बनकर फैल जाता है, जबकि पानी बूँदों में सिमट जाता है। A कथन सही है, क्योंकि पृष्ठ तनाव पुरानी इकाई पद्धति में डाइन प्रति सेंटीमीटर और एसआई पद्धति में न्यूटन प्रति मीटर में व्यक्त किया जाता है। B सही है, क्योंकि सतह पर भीतर की ओर लगने वाला खिंचाव स्वतंत्र बूँद को उसके आयतन के लिए सबसे कम क्षेत्रफल वाला आकार, यानी गोला, दे देता है। D सही है, क्योंकि पृष्ठ तनाव द्रव के अणुओं के बीच के संसक्ति बलों से ही उत्पन्न होता है। परीक्षा टिप: पानी लगभग 72 डाइन प्रति सेंटीमीटर, ऐल्कोहॉल लगभग 22; ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव घटता है।
निम्नलिखित में से कौन परिसंचरण तंत्र का भाग नहीं है?
- A.केशिकाएँ
- B.रसांकुर (विलाई)
- C.शिराएँ
- D.धमनियाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रसांकुर (विलाई)
व्याख्या
सही उत्तर है B, रसांकुर। रसांकुर या विलाई छोटी आँत की भीतरी दीवार पर बनी अंगुली जैसी छोटी-छोटी वलनें हैं, इसलिए वे पाचन तंत्र का भाग हैं। इनका काम उस सतह को बढ़ाना है जिससे पचा हुआ भोजन अवशोषित होता है। हर रसांकुर के भीतर एक केशिका और एक लसीका वाहिनी होती है, पर रसांकुर स्वयं परिसंचरण तंत्र का अंग नहीं है। मानव परिसंचरण तंत्र हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाओं से बना होता है। A गलत है क्योंकि केशिकाएँ सबसे पतली वाहिकाएँ हैं, जहाँ रक्त और ऊतकों के बीच गैसों तथा पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है। C गलत है क्योंकि शिराएँ रक्त को हृदय की ओर लौटाती हैं और उनमें कपाट होते हैं जो रक्त को पीछे बहने से रोकते हैं। D गलत है क्योंकि धमनियाँ रक्त को हृदय से बाहर ले जाती हैं और दबाव सहने के लिए उनकी दीवारें मोटी तथा लचीली होती हैं। परीक्षा टिप: रसांकुर छोटी आँत में भोजन अवशोषित करते हैं; हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाएँ परिसंचरण तंत्र बनाती हैं।
आमाशय द्वारा स्रावित श्लेष्मा (म्यूकस) की क्या भूमिका है?
- A.आमाशय की भीतरी परत की रक्षा करना
- B.वसा का पाचन करना
- C.भोजन के कीटाणुओं को मारना
- D.प्रोटीन का पाचन करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आमाशय की भीतरी परत की रक्षा करना
व्याख्या
सही उत्तर है A, आमाशय की भीतरी परत की रक्षा करना। आमाशय की दीवार में स्थित जठर ग्रंथियाँ तीन चीजें छोड़ती हैं — हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन नामक एंजाइम और श्लेष्मा। अम्ल आमाशय के भीतर के पदार्थ को तेज अम्लीय बना देता है, जिससे पेप्सिन काम कर सके, और श्लेष्मा भीतरी दीवार पर एक मोटी चिकनी परत बना देता है, ताकि यह अम्ल और एंजाइम आमाशय के अपने ही ऊतक को न पचा दें। जब श्लेष्मा की यह परत टूट जाती है, तो अम्ल दीवार पर आघात करता है और घाव या अल्सर बन जाता है; इसका एक सामान्य कारण हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक जीवाणु है। B गलत है क्योंकि वसा का पाचन लाइपेज से होता है, जिसमें यकृत से आया पित्त सहायता करता है, और यह मुख्यतः छोटी आँत में होता है। C गलत है क्योंकि भोजन के कीटाणु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मारता है, श्लेष्मा नहीं। D गलत है क्योंकि प्रोटीन आमाशय में पेप्सिन और आगे ट्रिप्सिन द्वारा तोड़ा जाता है। परीक्षा टिप: जठर रस — HCl अम्लता के लिए, पेप्सिन प्रोटीन के लिए, श्लेष्मा सुरक्षा के लिए।
सौर सेल के उपयोग का एक प्रमुख लाभ निम्नलिखित में से कौन है?
- A.यह दोलन गति दर्शाता है।
- B.इसके बाहरी भाग में धातु होती है।
- C.इसमें गतिशील पुर्जे होते हैं।
- D.इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता।
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता।
व्याख्या
सही उत्तर है D, इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता। सौर सेल प्रकाश-वैद्युत (फोटोवोल्टाइक) प्रभाव से सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत में बदल देता है। यह प्रभाव अर्धचालक की संधि पर होता है, जो सामान्यतः सिलिकॉन की बनी होती है, इसलिए इसके भीतर कुछ भी घूमता या खिसकता नहीं है। गतिशील पुर्जे न होने के कारण इसे लगभग कोई रखरखाव नहीं चाहिए, यह शोर नहीं करता और एक बार लग जाने पर दशकों चलता है। इसी कारण सौर पैनल उपग्रहों, प्रकाश-स्तंभों और ग्रिड से दूर बसे गाँवों के घरों में काम आते हैं। एक सिलिकॉन सेल लगभग 0.5 से 0.6 वोल्ट देता है, इसलिए सेलों को जोड़कर मॉड्यूल और मॉड्यूल जोड़कर पैनल बनाए जाते हैं। A गलत है क्योंकि सौर सेल में दोलन गति नहीं होती; यह एक स्थिर युक्ति है। B गलत है क्योंकि बाहरी भाग की धातु केवल संपर्कों का विवरण है, लाभ नहीं। C गलत है क्योंकि गतिशील पुर्जे होना सेल की वास्तविक खूबी के ठीक उलट है। परीक्षा टिप: सौर सेल — सिलिकॉन में फोटोवोल्टाइक प्रभाव, कोई गतिशील पुर्जा नहीं, लगभग 0.5 वोल्ट प्रति सेल।