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GK24
बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारतीय रिजर्व बैंक देश में भुगतान प्रणालियों को किस अधिनियम के अंतर्गत प्राधिकृत और पर्यवेक्षित करता है?

  1. A.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
  2. B.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
  3. C.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
  4. D.भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934

सही उत्तर

C. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007

व्याख्या

सही उत्तर C, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 है। इस अधिनियम के अंतर्गत रिजर्व बैंक के प्राधिकार के बिना कोई व्यक्ति भारत में भुगतान प्रणाली आरंभ या संचालित नहीं कर सकता, और इसने रिजर्व बैंक के भीतर भुगतान तथा निपटान प्रणालियों के नियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड का गठन किया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1949 का बैंककारी विनियमन अधिनियम बैंकों के लाइसेंस और कार्य को नियंत्रित करता है, भुगतान प्रणालियों को नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 1881 का परक्राम्य लिखत अधिनियम चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र से संबंधित है, जिसमें चेक अनादर का अपराध भी आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1934 का रिजर्व बैंक अधिनियम केंद्रीय बैंक की स्थापना करता है और मुद्रा निर्गम तथा मौद्रिक विषय देखता है। प्रश्न 2007 के साथ उसके अंतर्गत प्राधिकृत संचालकों को जोड़ते हैं।

पूरा लेख पढ़ें: एनपीसीआई, यूपीआई और रुपे: भारत की खुदरा भुगतान प्रणालियाँ

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Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.2005
  2. B.2008
  3. C.2012
  4. D.2016
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2008

व्याख्या

सही उत्तर B, 2008 है। एनपीसीआई की स्थापना 2008 में कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के अंतर्गत लाभ निरपेक्ष कंपनी के रूप में हुई, जिससे वह भारत की सभी खुदरा भुगतान प्रणालियों का छत्र संगठन बने, और अगले वर्ष उसने राष्ट्रीय वित्तीय स्विच अपने हाथ में लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 2005 में ऐसी कोई कंपनी नहीं बनी; सक्षम बनाने वाला कानून भी 2007 में आया। विकल्प C गलत है क्योंकि 2012 एनपीसीआई के उत्पाद रुपे के आरंभ का वर्ष है, जिसे अभ्यर्थी प्रायः कंपनी का वर्ष समझ लेते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 यूपीआई और भीम का वर्ष है, जो पुनः उत्पाद हैं, मूल संस्था नहीं। क्रम इस प्रकार याद रखें, अधिनियम 2007, कंपनी 2008, रुपे 2012 और यूपीआई 2016।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारतीय रिजर्व बैंक के साथ किस अन्य संस्था ने एनपीसीआई को प्रवर्तित किया था?

  1. A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  2. B.भारतीय बैंक संघ
  3. C.नीति आयोग
  4. D.इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारतीय बैंक संघ

व्याख्या

सही उत्तर B, भारतीय बैंक संघ है। एनपीसीआई भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर बना और दस मुख्य प्रवर्तक बैंकों ने उसकी पहली शेयरधारिता रखी, इसी कारण उसका स्वामित्व सरकार के बजाय बैंकिंग उद्योग के पास है। विकल्प A गलत है क्योंकि सेबी प्रतिभूति बाजार का नियमन करता है और खुदरा भुगतान प्रणालियों में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि नीति आयोग 2015 में बना नीति संस्थान है, अर्थात एनपीसीआई के अस्तित्व में आने के सात वर्ष बाद। विकल्प D गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देता है और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाएँ चलाता है, परंतु उसने एनपीसीआई को प्रवर्तित नहीं किया। जोड़ी को केंद्रीय बैंक और बैंकरों का संघ के रूप में याद रखें।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

एकीकृत भुगतान इंटरफेस अर्थात यूपीआई किस वर्ष आरंभ हुआ?

  1. A.2010
  2. B.2012
  3. C.2016
  4. D.2019
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2016

व्याख्या

सही उत्तर C, 2016 है। एनपीसीआई ने यूपीआई 2016 में आरंभ किया और उसी वर्ष दिसंबर में भीम ऐप आया, इसीलिए इस विषय में 2016 सबसे अधिक पूछा जाने वाला वर्ष है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2010 आईएमपीएस का वर्ष है, वही तत्काल अंतरण सेवा जिस पर बाद में यूपीआई बना। विकल्प B गलत है क्योंकि 2012 घरेलू कार्ड नेटवर्क रुपे का वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 में एनईएफटी हर समय उपलब्ध हुई और राष्ट्रीय सामान्य गतिशीलता कार्ड आरंभ हुआ, वह यूपीआई का वर्ष नहीं है। एक स्पष्ट समयरेखा पूरे प्रश्न समूह का उत्तर देती है, राष्ट्रीय वित्तीय स्विच 2009 में हस्तांतरित, आईएमपीएस 2010, रुपे 2012, यूपीआई और भीम 2016, ई रुपी 2021 और यूपीआई 123पे 2022। यह भी ध्यान रखें कि यूपीआई पहले प्रायोगिक रूप में आरंभ हुआ और उसी वर्ष बैंकों के ऐप से आम उपयोगकर्ता तक पहुँचा।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

यूपीआई किस पहले से चल रही भुगतान प्रणाली के ऊपर एक परत के रूप में बनाया गया था?

  1. A.आरटीजीएस
  2. B.एनईएफटी
  3. C.आईएमपीएस
  4. D.नैच
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आईएमपीएस

व्याख्या

सही उत्तर C, आईएमपीएस है। 2010 में शुरू हुई तत्काल भुगतान सेवा पहले से ही हर समय बैंकों के बीच तुरंत धन पहुँचाती थी और यूपीआई उसी पटरी का उपयोग करते हुए वर्चुअल भुगतान पता, अंतरप्रचालनीय ऐप तथा एक क्लिक का प्रमाणीकरण जोड़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि आरटीजीएस रिजर्व बैंक की बड़ी राशि की प्रणाली है, जिसमें प्रत्येक लेनदेन अलग निपटता है और न्यूनतम दो लाख रुपये की सीमा लागू होती है। विकल्प B गलत है क्योंकि एनईएफटी, जो भी रिजर्व बैंक चलाता है, तत्काल के बजाय बैचों में निपटती है, इसलिए वह यूपीआई के तत्काल अनुभव का आधार नहीं बन सकती थी। विकल्प D गलत है क्योंकि नैच वेतन, सब्सिडी और किस्तों के लिए थोक समाशोधन प्रणाली है, व्यक्ति से व्यक्ति अंतरण की पटरी नहीं। प्रश्न का उद्देश्य पटरी और उस पर बनी परत को अलग करना है।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

यूपीआई में वर्चुअल भुगतान पते का उपयोग इसलिए होता है कि भुगतानकर्ता को कौन सा विवरण साझा न करना पड़े?

  1. A.बैंक खाता संख्या और आईएफएससी
  2. B.आधार संख्या
  3. C.पैन
  4. D.मोबाइल हैंडसेट का नंबर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंक खाता संख्या और आईएफएससी

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी है। वर्चुअल भुगतान पता नाम और बैंक हैंडल के रूप में होता है और अंतर्निहित खाते की ओर संकेत करता है, इसलिए खाता संख्या या शाखा कोड बताए बिना भुगतान भेजा या मँगाया जा सकता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आधार संख्या आधार सक्षम भुगतान प्रणाली और आधार भुगतान पुल में प्रयुक्त पहचान है, वह विवरण नहीं जिसे यूपीआई पता छिपाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पैन कर संबंधी पहचान है और यूपीआई लेनदेन में उसकी कोई भूमिका नहीं होती। विकल्प D गलत है क्योंकि मोबाइल नंबर प्रायः उसी पते से जुड़ा होता है और यूपीआई नंबर सुविधा में उसी से धन प्राप्त किया जाता है। प्रश्न बैंक विवरण की गोपनीयता वाली बनावट की परख करता है।