भारतीय मानक समय का वैज्ञानिक संरक्षक कौन-सी संस्था है?
- A.सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला
- B.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
- C.भारतीय सर्वेक्षण विभाग
- D.भारत मौसम विज्ञान विभाग
सही उत्तर
A. सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला
व्याख्या
सही उत्तर सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला है। यह भारत का राष्ट्रीय माप विज्ञान संस्थान है, जिसका काम प्राथमिक राष्ट्रीय मानक स्थापित करना और उनका प्रसार करना है। वह राष्ट्रीय परमाणु समय स्केल बनाए रखती है, परमाणु घड़ियों के समूह और प्राथमिक आवृत्ति मानक से आईएसटी तैयार करती है और उसे अंतरराष्ट्रीय बाट और माप ब्यूरो के समन्वित सार्वभौमिक समय से कुछ नैनोसेकंड के भीतर जोड़े रखती है। नए नियमों में विधिक मापविज्ञान विभाग नियामक और प्रवर्तन प्राधिकरण है जबकि वैज्ञानिक आधार यही प्रयोगशाला देती है, इसलिए दोनों भूमिकाओं को अलग-अलग याद रखें। विकल्प बी, सी और डी असली राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाएं हैं, जो क्रमशः खगोल विज्ञान, मानचित्रण और मौसम से जुड़ी हैं, पर इनमें से किसी का नाम विज्ञप्ति में नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित
अभ्यास प्रश्न
विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 राजपत्र में प्रकाशन के कितने दिन बाद लागू होंगे?
- A.30 दिन
- B.90 दिन
- C.180 दिन
- D.365 दिन
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सही उत्तर: C. 180 दिन
व्याख्या
सही उत्तर 180 दिन है। इन नियमों को उपभोक्ता मामले विभाग ने 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया और 29 अगस्त 2026 को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया गया। विज्ञप्ति के अनुसार ये प्रकाशन की तारीख से 180 दिन बाद लागू होंगे। इस अंतराल से दूरसंचार नेटवर्क, वित्तीय प्रणालियों, पावर ग्रिड, परिवहन, डेटा केंद्रों और सरकारी सूचना प्रणालियों को कानूनी बाध्यता शुरू होने से पहले किसी भरोसेमंद स्रोत से तालमेल बिठाने का समय मिल जाता है। विकल्प ए, बी और डी विज्ञप्ति में कहीं नहीं हैं और केवल इसलिए रखे गए हैं कि भारत में नियम अक्सर तीस या नब्बे दिन बाद लागू किए जाते हैं। दोनों तारीखें भी ध्यान से याद रखें, क्योंकि अधिसूचना और राजपत्र प्रकाशन में दो दिन का अंतर है और गिनती प्रकाशन से होती है।
आईएसटी से जुड़ी माध्यमिक समय-सीमा कितने शहरों की क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं में बनाई गई है?
- A.तीन
- B.पांच
- C.सात
- D.नौ
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सही उत्तर: B. पांच
व्याख्या
सही उत्तर पांच है। सीएसआईआर-एनपीएल, इसरो और विधिक मापविज्ञान विभाग ने मिलकर अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी की क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं में माध्यमिक समय-सीमा स्थापित की है। इनमें से हर एक सीएसआईआर-एनपीएल के आईएसटी से लगातार जुड़ी रहती है, जिससे समय के प्रसार का एक वितरित राष्ट्रीय ढांचा बनता है। इस बिखराव का मकसद मजबूती है। अगर प्रसार किसी एक जगह पर निर्भर होता तो एक ही खराबी देश को भरोसेमंद समय संदर्भ से वंचित कर देती। ये पांच प्रयोगशालाएं, इसरो की नाविक प्रणाली और एनपीएल तथा एनआईसी का ढांचा मिलकर अतिरिक्त क्षमता और भौगोलिक विविधता देते हैं। विकल्प ए, सी और डी विज्ञप्ति से मेल नहीं खाते। याद रखने का तरीका यह है कि ये शहर देश के पश्चिम, दक्षिण, पूर्व, उत्तर और पूर्वोत्तर में फैले हैं।
भारतीय मानक समय के उपग्रह-आधारित प्रसार के लिए किस प्रणाली का उपयोग होता है?
- A.गगन
- B.नाविक
- C.गैलीलियो
- D.ग्लोनास
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सही उत्तर: B. नाविक
व्याख्या
सही उत्तर नाविक है। सीएसआईआर-एनपीएल इसरो को नाविक प्रणाली के लिए भारतीय मानक समय की ट्रेसेबिलिटी देती है, जिससे समय उपग्रह के जरिए फैलाया जा सकता है और राष्ट्रीय समय सेवाओं की उपलब्धता तथा मजबूती दोनों बढ़ती हैं। विज्ञप्ति में नाविक के साथ नेटवर्क आधारित एनटीपी और पीटीपी तथा ऑप्टिकल फाइबर वाली व्हाइट रैबिट जैसी तकनीकों का भी उल्लेख है, जिनका परीक्षण अभी चल रहा है। विकल्प ए यानी गगन भारत की उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली है, जो मुख्यतः नागरिक उड्डयन में नौवहन की सटीकता बढ़ाती है, और उसका नाम यहां नहीं है। विकल्प सी और डी यूरोप तथा रूस की वैश्विक नौवहन प्रणालियां हैं, जिनका भारत के कानूनी समय के प्रसार से कोई संबंध नहीं है। तीनों माध्यमों को उनके वाहक के साथ जोड़कर याद करें।
भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों पर राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन की अध्यक्षता किसने की?
- A.शोभा करंदलाजे
- B.मनसुख मांडविया
- C.चंद्र भूषण कुमार
- D.भूपेंद्र यादव
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सही उत्तर: B. मनसुख मांडविया
व्याख्या
सही उत्तर मनसुख मांडविया है, जो केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री हैं और जिन्होंने सम्मेलन के पहले दिन की अध्यक्षता की। विकल्प A यानी शोभा करंदलाजे श्रम और रोजगार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री हैं और उसी सत्र में मौजूद थीं, पर अध्यक्षता उन्होंने नहीं की, इसलिए यही सबसे नजदीकी भ्रामक विकल्प है। विकल्प C यानी डॉ. चंद्र भूषण कुमार श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव हैं और उन्होंने दूसरे दिन की शुरुआत की, जहां उन्होंने कौशल इकोसिस्टम, श्रमिक की गरिमा, राज्यों और देशों के बीच श्रमिकों की आवाजाही, पेशेगत सेहत तथा कल्याणकारी उपायों में बीमांकिक विश्लेषण के उपयोग की बात रखी। विकल्प D में दूसरा विभाग संभालने वाले मंत्री का नाम है। मंत्री, राज्यमंत्री और सचिव को अलग-अलग याद रखना ही ऐसे प्रश्न का उद्देश्य है।
बीओसीडब्ल्यू सम्मेलन में डिजिटल लेबर चौक से जुड़ा अनुभव किस राज्य ने साझा किया?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.बिहार
- C.राजस्थान
- D.असम
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सही उत्तर: C. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर राजस्थान है। नई श्रम संहिताओं के आलोक में बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्डों की भूमिका और जिम्मेदारियों वाले सत्र में कई राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी पहलें प्रस्तुत कीं। राजस्थान ने डिजिटल लेबर चौक का अनुभव रखा, जो उस पारंपरिक चौक को डिजिटल रूप देता है जहां दिहाड़ी श्रमिक काम की प्रतीक्षा में जुटते हैं, ताकि श्रमिक और नियोक्ता एक-दूसरे तक आसानी से पहुंच सकें। विकल्प A यानी उत्तर प्रदेश ने भवन निर्माण श्रमिकों के कौशल विकास पर अपना काम रखा। विकल्प B यानी बिहार ने श्रम सेवा सुविधा केंद्रों पर प्रकाश डाला। विकल्प D यानी असम ने निर्माण सखी पोर्टल पेश किया। चारों प्रस्तुतियां एक ही सत्र की हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग तथ्य के बजाय एक मिलान सूची की तरह याद करना बेहतर है।