भारत में चेक के नीचे छपे एमआईसीआर कोड में कितने अंक होते हैं?
- A.6
- B.9
- C.11
- D.15
सही उत्तर
B. 9
व्याख्या
सही उत्तर B, 9 है। एमआईसीआर का अर्थ है मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन, वह तकनीक जिसमें अक्षर चुंबकीय स्याही से छापे जाते हैं ताकि मशीन उन्हें तब भी पढ़ ले जब कागज पर मुहर लगी हो या हस्ताक्षर हो गए हों। भारतीय चेक पर एमआईसीआर कोड तीन-तीन अंकों के तीन खंडों में नौ अंकों का होता है, पहले तीन अंक नगर बताते हैं और वे उसके डाक सूचकांक के पहले तीन अंकों से मिलते हैं, अगले तीन बैंक और अंतिम तीन शाखा बताते हैं। इससे चेक का निपटान तेज होता है और भूल कम होती है।
विकल्प A, छह केवल आईएफएससी के शाखा वाले भाग से मेल खाता है। विकल्प C, ग्यारह इलेक्ट्रॉनिक अंतरण में प्रयुक्त पूरे आईएफएससी की लंबाई है। विकल्प D, पंद्रह भारतीय बैंकिंग में किसी कोड की लंबाई नहीं है। याद रखने योग्य जोड़ा है, एमआईसीआर नौ अंक और आईएफएससी ग्यारह अक्षर।
पूरा लेख पढ़ें: बैंकिंग शब्दावली और संक्षिप्ताक्षर: पूरे रूप और अर्थ
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंबैंकिंग में आरटीजीएस का पूरा रूप क्या है?
- A.रैपिड ट्रांसफर ग्रॉस स्कीम
- B.रैपिड ट्रांसफर ग्रॉस सेटलमेंट
- C.रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट
- D.रियल टाइम ग्रॉस स्कीम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट
व्याख्या
सही उत्तर C, रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट है। आरटीजीएस वह प्रणाली है जिसमें धन भेजने का निर्देश अलग से और तत्काल निपटाया जाता है, उसे रोककर दूसरों से समायोजित नहीं किया जाता। रियल टाइम का अर्थ है कि निर्देश मिलते ही उस पर कार्रवाई होती है, और ग्रॉस का अर्थ है कि हर निर्देश अपने आप में निपटता है। यह बड़ी राशि भेजने के लिए है, जिसमें न्यूनतम दो लाख रुपये की सीमा है और भारतीय रिजर्व बैंक ने कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की है, तथा यह सभी दिन चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है।
विकल्प A, B और D शब्दों को इस प्रकार मिलाते हैं कि वे जाने-पहचाने लगें। A और D में आया स्कीम शब्द ही संकेत है कि उत्तर गलत है, क्योंकि आरटीजीएस रिजर्व बैंक द्वारा चलाई जाने वाली निपटान प्रणाली है, कोई योजना नहीं। विकल्प B में अंतिम शब्द सही है पर रियल टाइम की जगह रैपिड ट्रांसफर रख दिया गया है। याद रखने योग्य अंतर यह है कि एनईएफटी आधे-आधे घंटे के बैच में निपटता है और आरटीजीएस एक-एक निर्देश के रूप में।
निम्न में से कौन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रयुक्त मौद्रिक नीति का उपकरण है? I. एसएलआर II. एमएसएस III. कॉरिडोर
- A.I और II
- B.II और III
- C.I, II और III
- D.I और III
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I, II और III
व्याख्या
सही उत्तर C, I, II और III है। तीनों ही भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के उपकरण हैं। एसएलआर अर्थात सांविधिक तरलता अनुपात जमा का वह भाग है जिसे बैंक को अपने पास नकद, सोने या स्वीकृत प्रतिभूतियों में रखना होता है, और इसे घटाने-बढ़ाने से यह तय होता है कि बैंक कितना ऋण दे सकता है। एमएसएस अर्थात बाजार स्थिरीकरण योजना के अंतर्गत रिजर्व बैंक विशेष खजाना बिल और प्रतिभूतियाँ जारी करके टिकाऊ अतिरिक्त तरलता खींच लेता है। कॉरिडोर नीति रेपो दर के चारों ओर स्थायी सुविधाओं की दरों से बना वह दायरा है जिसके भीतर एक रात की माँग मुद्रा दर के रहने की अपेक्षा की जाती है।
विकल्प A, B और D में से हर एक तीनों में से किसी एक को छोड़ देता है। ये यह परखते हैं कि अभ्यर्थी कॉरिडोर को केवल विवरण मानता है या वास्तविक उपकरण, और यह भी कि बाजार स्थिरीकरण योजना याद है या नहीं, क्योंकि उसका प्रयोग तभी होता है जब तरलता लंबे समय तक अधिक बनी रहे।
मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रयुक्त गुणात्मक उपकरण कौन सा है?
- A.बैंक दर
- B.नैतिक दबाव
- C.खुले बाजार की क्रियाएँ
- D.नकद आरक्षित अनुपात
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नैतिक दबाव
व्याख्या
सही उत्तर B, नैतिक दबाव है। रिजर्व बैंक के उपकरण दो भागों में बँटे हैं, मात्रात्मक उपकरण जो व्यवस्था में कुल साख की मात्रा बदलते हैं, और गुणात्मक या चयनात्मक उपकरण जो यह बदलते हैं कि वह साख किस दिशा में जाए। नैतिक दबाव वही गुणात्मक उपकरण है जिसके द्वारा रिजर्व बैंक पत्र, बैठक और परामर्श के माध्यम से बैंकों को समझाता है, जैसे किसी सट्टेबाजी वाले क्षेत्र को कम ऋण देने के लिए, और इसके लिए कोई बाध्यकारी आदेश जारी नहीं करता। अन्य गुणात्मक उपकरण मार्जिन आवश्यकता, चयनात्मक साख नियंत्रण, साख की राशनिंग और प्रत्यक्ष कार्रवाई हैं।
विकल्प A, बैंक दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक बिना गिरवी के बैंकों को उधार देता है, और इसके बदलने से सबके लिए साख की लागत बदल जाती है, अतः यह मात्रात्मक है। विकल्प C, खुले बाजार की क्रियाएँ सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदकर या बेचकर धन घटाती-बढ़ाती हैं, यह भी मात्रात्मक है। विकल्प D, नकद आरक्षित अनुपात भी मात्रात्मक उपाय है।
बैंकों का आंतरिक नियंत्रण सुधारने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को 30 अप्रैल 2018 तक क्या करने को कहा था?
- A.स्विफ्ट को अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ना
- B.आरटीजीएस को अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ना
- C.एनईएफटी को अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ना
- D.एमआईसीआर को अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्विफ्ट को अपने कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ना
व्याख्या
सही उत्तर A, स्विफ्ट को कोर बैंकिंग सॉल्यूशन से जोड़ना है। स्विफ्ट वह अंतरराष्ट्रीय संदेश प्रणाली है जिससे बैंक सीमा पार भुगतान और गारंटी के निर्देश भेजते हैं। जब इसे कोर बैंकिंग सॉल्यूशन से अलग रखा जाता है, तो संदेश बाहर चला जाता है और बैंक की बहियों में कोई प्रविष्टि नहीं दिखती। इसी खाई का उपयोग 2018 में सामने आई एक बड़ी धोखाधड़ी में हुआ था। इसीलिए रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया कि 30 अप्रैल 2018 तक स्विफ्ट टर्मिनल को कोर बैंकिंग सॉल्यूशन से जोड़ दिया जाए, जिससे हर बाहर जाने वाला संदेश खातों में निशान छोड़े।
विकल्प B, C और D क्रमशः आरटीजीएस, एनईएफटी और एमआईसीआर बताते हैं। आरटीजीएस और एनईएफटी रिजर्व बैंक की घरेलू भुगतान प्रणालियाँ हैं जो पहले से बैंक की प्रणाली से चलती हैं, और एमआईसीआर तो केवल चेक पर छपा एक कोड है। इनमें से कोई भी सीमा पार निर्देश नहीं ले जाता, इसलिए निर्देश का विषय भी नहीं था।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक धन अंतरण में प्रयुक्त आईएफएससी कोड में कितने अक्षर होते हैं?
- A.9
- B.11
- C.13
- D.16
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 11
व्याख्या
सही उत्तर B, 11 है। इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड ग्यारह अक्षरों और अंकों वाला कोड है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों में भाग लेने वाली किसी एक बैंक शाखा की पहचान करता है। पहले चार अक्षर बैंक का नाम बताते हैं, पाँचवाँ अक्षर सदा अंक शून्य होता है और भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया है, तथा अंतिम छह अक्षर शाखा की पहचान कराते हैं। सही आईएफएससी के बिना एनईएफटी, आरटीजीएस या आईएमपीएस का निर्देश सही शाखा तक नहीं पहुँच सकता।
विकल्प A, नौ चेक के नीचे छपे एमआईसीआर कोड की लंबाई है, जिसमें तीन-तीन अंक नगर, बैंक और शाखा बताते हैं। विकल्प C, तेरह भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में किसी कोड से मेल नहीं खाता। विकल्प D, सोलह डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर छपे अंकों की सामान्य संख्या है। ग्यारह अक्षरों के आईएफएससी और नौ अंकों के एमआईसीआर में भ्रम ही इस प्रश्न की सबसे आम भूल है।