भारत के संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.'पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य' पद मूल रूप से उद्देशिका में नहीं था।
- B.उद्देशिका में भारत के संविधान का मूल ढाँचा निहित है।
- C.उद्देशिका अपने आप में न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं है।
- D.सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि जहाँ भाषा अस्पष्ट हो, वहाँ उद्देशिका को संविधान की विधिक व्याख्या में सहायक नहीं माना जा सकता।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D। सर्वोच्च न्यायालय ने इसके उलट माना है: जहाँ संविधान की भाषा अस्पष्ट हो, वहाँ उद्देशिका उसकी व्याख्या में बहुत सहायक है।
बेरुबारी मामले (1960) में न्यायालय ने कहा कि उद्देशिका संविधान निर्माताओं के मन की कुंजी है और अस्पष्ट प्रावधान में मदद कर सकती है, हालाँकि उसने उद्देशिका को संविधान का भाग नहीं माना। केशवानंद भारती (1973) में न्यायालय ने यह मत बदला, उद्देशिका को संविधान का भाग माना और उससे कई मूल विशेषताएँ निकालीं। फिर भी उद्देशिका न शक्ति का स्रोत है न प्रतिबंधों का, इसलिए उसे अकेले न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता।
A सही है: मूल उद्देशिका में "संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य" था; 1976 के 42वें संशोधन ने "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष" जोड़े।
B सही है: उद्देशिका में बताई गई संप्रभुता, लोकतंत्र, पंथनिरपेक्षता और न्याय जैसी विशेषताएँ मूल ढाँचे का भाग हैं।
C सही है: उद्देशिका गैर-न्यायोचित है और अपने आप में न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं।
Exam tip: बेरुबारी (1960): उद्देशिका संविधान का भाग नहीं; केशवानंद (1973): भाग है; एलआईसी मामला (1995) ने पुष्टि की; केवल एक बार, 1976 में, संशोधित।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन ने संसद/राज्य विधानमंडलों के सदनों के अध्यक्ष/सभापति की शक्तियों को बहुत अधिक मज़बूत किया है?
- A.61वाँ संशोधन, जिसने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की
- B.52वें संशोधन के दल-बदल विरोधी प्रावधान
- C.44वें संशोधन द्वारा 42वें संशोधन के कई प्रावधानों का निरसन
- D.73वाँ संशोधन, जिसने पंचायत निकायों को व्यापक शक्तियाँ दीं
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1985 के इस संशोधन ने हर सदन के पीठासीन अधिकारी को यह तय करने वाला प्राधिकारी बनाया कि कोई सदस्य दल-बदल के कारण अयोग्य है या नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी धन विधेयक की सही विशेषता नहीं है?
- A.इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है
- B.अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर उपाध्यक्ष भी धन विधेयक को प्रमाणित कर सकते हैं
- C.कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है
- D.इसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जा सकता है
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धन विधेयक संयुक्त समिति को नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि इसमें राज्यसभा की भूमिका केवल सिफ़ारिश करने की है। अनुच्छेद 110 धन विधेयक को ऐसा विधेयक बताता है जो केवल करों, उधार, संचित निधि और इसी तरह के विषयों से जुड़ा हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.राज्य को भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को बिना किसी तर्कसंगत आधार के उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने का अधिकार नहीं है।
- B.किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने का आधार विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।
- C.बंदी प्रत्यक्षीकरण की न्यायिक रिट द्वारा व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुरक्षित की जा सकती है।
- D.ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत मत ने 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' का आविष्कार किया।
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ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (1950) में बहुमत ने 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' को अस्वीकार किया और अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या की, इसलिए यह कथन गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिक्किम भारतीय संघ का सहयोगी राज्य (एसोसिएट स्टेट) किसके द्वारा बना?
- A.संविधान (36वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975
- B.संविधान (7वाँ संशोधन) अधिनियम, 1956
- C.संविधान (35वाँ संशोधन) अधिनियम, 1974
- D.संविधान (5वाँ संशोधन) अधिनियम, 1955
उत्तर देखें
इसने सिक्किम को "सहयोगी राज्य" का विशेष दर्जा दिया, जो पूर्ण राज्य से एक कदम पहले की स्थिति थी। सिक्किम 1950 से भारत का संरक्षित राज्य था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव की तिथि निम्नलिखित में से कौन निर्धारित करता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.संसदीय कार्य मंत्री
- C.लोकसभा के महासचिव
- D.लोकसभा के उपाध्यक्ष
उत्तर देखें
लोकसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रपति द्वारा तय तिथि पर होता है। अनुच्छेद 93 कहता है कि सदन अपने दो सदस्यों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगा।
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