अजंता और महाबलीपुरम के नाम से जाने जाने वाले दो ऐतिहासिक स्थलों में क्या समान है/हैं? 1. दोनों एक ही काल में बनाए गए थे। 2. दोनों एक ही धार्मिक संप्रदाय से संबंधित हैं। 3. दोनों में शैलकृत स्मारक हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 3
- C.केवल 1 और 3
- D.ऊपर दिया गया कोई भी कथन सही नहीं है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, केवल 3। अजंता और महाबलीपुरम दोनों में चट्टान काटकर बनाए गए स्मारक हैं, पर ये अलग-अलग काल में और अलग-अलग धर्मों के लिए बने।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित अजंता की लगभग 30 बौद्ध गुफाएँ दो चरणों में बनीं, पहले दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से और फिर पाँचवीं शताब्दी ईस्वी में वाकाटकों के समय। ये जातक कथाओं के भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। चेन्नई के पास महाबलीपुरम या मामल्लपुरम पल्लवों का बंदरगाह था। यहाँ के रथ, गुफा मंदिर और 'अर्जुन की तपस्या' नामक विशाल उभरी नक्काशी मुख्यतः सातवीं-आठवीं शताब्दी में नरसिंहवर्मन प्रथम और उनके उत्तराधिकारियों के समय बने। ये हिंदू स्मारक हैं, जो शिव और विष्णु को समर्पित हैं। दोनों यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं।
A गलत है क्योंकि दोनों स्थल काल और धर्म दोनों में अलग हैं। C गलत है क्योंकि ये एक ही काल में नहीं बने। D गलत है क्योंकि कथन 3 सत्य है।
Exam tip: अजंता = बौद्ध, वाकाटक चरण; महाबलीपुरम = हिंदू, पल्लव; दोनों शैलकृत।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंअंतरीय मौर्य काल में लोगों द्वारा पहना जाने वाला एक वस्त्र था। यह क्या था?
- A.शरीर पर लपेटा जाने वाला बिना सिला कपड़े का एक लंबा टुकड़ा।
- B.बाजू वाले अंगरखे से बना एक सिला हुआ वस्त्र।
- C.केवल स्त्रियों द्वारा प्रयुक्त सिर ढकने का वस्त्र।
- D.एक साथ सिली पट्टियों से बना, जिसे कमर पर डोरी से बांधा जाता था
उत्तर देखें
अंतरीय प्राचीन भारत का अधोवस्त्र था, सूती या महीन कपड़े का लंबा टुकड़ा जिसे कूल्हों और पैरों पर लपेटकर खोंसा जाता था, लगभग बाद की धोती की तरह।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जहांगीर को सफवी शासक शाह अब्बास को गले लगाते हुए दिखाने वाली प्रसिद्ध मुगल चित्रकृति निम्नलिखित में से किस मुगल चित्रकार ने बनाई थी?
- A.अब्दुस्समद
- B.अबुल हसन
- C.दसवंत
- D.बिशनदास
उत्तर देखें
जहांगीर को फारस के शाह अब्बास को गले लगाते दिखाने वाला प्रतीकात्मक चित्र, जो लगभग 1618 में बना और अब वॉशिंगटन की फ्रीयर गैलरी में है, अबुल हसन की कृति है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में प्राचीन हिंदू धातु प्रतिमाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चोल काल अपनी धातु मूर्तिकला की सौंदर्यात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है। 2. चोल धातु प्रतिमाओं की प्रतिमा-विधान और शैली उनकी पाषाण प्रतिमाओं के समान थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
चोल कांस्य प्रतिमाएं अपनी सुंदरता और ढलाई के कौशल के लिए प्रसिद्ध हैं, और ये उसी काल की पाषाण मूर्तियों जैसे प्रतिमा-विधान और शैली का पालन करती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आरंभिक बौद्ध मूर्तिकारों ने बुद्ध को मानव रूप में नहीं दिखाया। आरंभिक मूर्तिकारों ने निम्नलिखित में से किन प्रतीकों के माध्यम से बुद्ध की उपस्थिति दर्शाई?
- A.केवल खाली आसन और स्तूप
- B.केवल चक्र और वृक्ष
- C.केवल चक्र, वृक्ष और स्तूप
- D.खाली आसन, चक्र, वृक्ष और स्तूप
उत्तर देखें
साँची, भरहुत और अमरावती जैसे स्थलों की आरंभिक मूर्तिकला में बुद्ध को मनुष्य के रूप में नहीं उकेरा गया; उनकी उपस्थिति प्रतीकों से दिखाई गई, और हर प्रतीक उनके जीवन की किसी घटना से जुड़ा था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रधानमंत्री ने हाल ही में वेरावल में सोमनाथ मंदिर के पास नए सर्किट हाउस का उद्घाटन किया। सोमनाथ मंदिर के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
1. सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग तीर्थों में से एक है।
2. सोमनाथ मंदिर का वर्णन अल-बिरूनी ने किया था।
3. सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (वर्तमान मंदिर की स्थापना) राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन ने की थी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है और अल-बिरूनी ने इसका वर्णन किया, पर वर्तमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी, एस. राधाकृष्णन ने नहीं।
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