गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलबन (1265-1286 ई.) ने ________ की उपाधि धारण की।
- A.नूर-अल-दीन (आस्था का प्रकाश)
- B.नूरमहल (महल का प्रकाश)
- C.ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)
- D.जहाँपनाह (संसार का रक्षक)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)
व्याख्या
सही उत्तर है C, ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)। बलबन ने यह उपाधि लेकर यह दावा किया कि सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर की छाया के रूप में शासन करता है, और इस दावे ने उसे अपने अमीरों से बहुत ऊपर खड़ा कर दिया। गद्दी पर बैठने से पहले वह सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के पीछे की असली शक्ति था, और वह इल्बरी या तथाकथित गुलाम वंश का सबसे सशक्त शासक था। उसने चालीस तुर्की अमीरों के गुट चहलगानी की ताकत तोड़ी, दरबार में सिजदा यानी सुल्तान के सामने झुकना और पाइबोस यानी उसके पैर चूमने की फारसी प्रथाएँ चलाईं, और जासूसों का अलग तंत्र रखा। उसने सैन्य विभाग दीवान-ए-अर्ज़ भी संगठित किया। A गलत है क्योंकि नूर-अल-दीन उसकी उपाधि नहीं थी। B गलत है क्योंकि नूरमहल जहाँगीर की बेगम नूरजहाँ की उपाधि थी। D गलत है क्योंकि जहाँपनाह मुहम्मद बिन तुगलक से जुड़ा है, जिसने दिल्ली में इस नाम का नगर बसाया। परीक्षा टिप: बलबन – ज़िल-ए-इलाही, सिजदा और पाइबोस, दीवान-ए-अर्ज़।