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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 44

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 44) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 18 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: दिल्ली सल्तनत, संगम युग और प्रारंभिक तमिल राज्य, कांग्रेस: नरमपंथी और गरमपंथी और अन्य। इनमें से 18 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 5 July 2022, Shift 1मध्यम

गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलबन (1265-1286 ई.) ने ________ की उपाधि धारण की।

  1. A.नूर-अल-दीन (आस्था का प्रकाश)
  2. B.नूरमहल (महल का प्रकाश)
  3. C.ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)
  4. D.जहाँपनाह (संसार का रक्षक)
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)

व्याख्या

सही उत्तर है C, ज़िल-ए-इलाही (ईश्वर की छाया)। बलबन ने यह उपाधि लेकर यह दावा किया कि सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर की छाया के रूप में शासन करता है, और इस दावे ने उसे अपने अमीरों से बहुत ऊपर खड़ा कर दिया। गद्दी पर बैठने से पहले वह सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के पीछे की असली शक्ति था, और वह इल्बरी या तथाकथित गुलाम वंश का सबसे सशक्त शासक था। उसने चालीस तुर्की अमीरों के गुट चहलगानी की ताकत तोड़ी, दरबार में सिजदा यानी सुल्तान के सामने झुकना और पाइबोस यानी उसके पैर चूमने की फारसी प्रथाएँ चलाईं, और जासूसों का अलग तंत्र रखा। उसने सैन्य विभाग दीवान-ए-अर्ज़ भी संगठित किया। A गलत है क्योंकि नूर-अल-दीन उसकी उपाधि नहीं थी। B गलत है क्योंकि नूरमहल जहाँगीर की बेगम नूरजहाँ की उपाधि थी। D गलत है क्योंकि जहाँपनाह मुहम्मद बिन तुगलक से जुड़ा है, जिसने दिल्ली में इस नाम का नगर बसाया। परीक्षा टिप: बलबन – ज़िल-ए-इलाही, सिजदा और पाइबोस, दीवान-ए-अर्ज़।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 3मध्यम

पुहार या कावेरीपट्टिनम निम्नलिखित में से किस राजवंश का बंदरगाह था?

  1. A.चेर
  2. B.चोल
  3. C.पांड्य
  4. D.वाकाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चोल

व्याख्या

सही उत्तर है B, चोल। पुहार, जिसे कावेरीपट्टिनम भी कहा जाता है, संगम युग के आरंभिक चोलों का प्रमुख बंदरगाह था।

यह नगर वहाँ बसा था जहाँ कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है, और इसके विकास का श्रेय आरंभिक चोल शासक करिकाल को दिया जाता है। संगम साहित्य तथा तमिल महाकाव्य शिल्पादिकारम में इसके गोदामों, विदेशी व्यापारियों के अलग मोहल्ले और रोम तथा दक्षिण पूर्व एशिया के साथ काली मिर्च, मोती एवं महीन वस्त्रों के व्यापार का वर्णन मिलता है। उरैयूर आरंभिक चोलों की भीतरी राजधानी थी, जबकि पुहार तटवर्ती राजधानी और बंदरगाह के रूप में काम करता था।

A गलत है: केरल तट के चेरों के बंदरगाह मुज़िरिस और तोंडी थे। C गलत है: पांड्य मदुरै से शासन करते थे और उनका बंदरगाह कोरकई था, जो मोतियों के लिए प्रसिद्ध था। D गलत है: वाकाटक दक्कन में शासन करते थे और इस तट पर उनका कोई बंदरगाह नहीं था।

परीक्षा टिप: जोड़ी बनाकर याद रखें, चोल के पुहार और उरैयूर, चेर के मुज़िरिस और वंजी, पांड्य के कोरकई और मदुरै।

Q3.भारतीय इतिहासमध्यम

सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना 1905 में किस नेता ने की?

  1. A.गोपाल कृष्ण गोखले
  2. B.महादेव गोविंद रानाडे
  3. C.फिरोजशाह मेहता
  4. D.दिनशा वाचा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. गोपाल कृष्ण गोखले

व्याख्या

सही उत्तर A, गोपाल कृष्ण गोखले है, वे नरमपंथी नेता जिन्हें गांधी अपना राजनीतिक गुरु कहते थे। उन्होंने 1905 में पूना में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी बनाई, जिसका उद्देश्य ऐसे कार्यकर्ता तैयार करना था जो थोड़े भत्ते पर जीवन भर लोकसेवा करें, और वे इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में बजट, प्राथमिक शिक्षा तथा गिरमिटिया मजदूरों की दशा पर काम करते रहे। विकल्प B गलत है क्योंकि गोखले के ही गुरु महादेव गोविंद रानाडे ने पूना सार्वजनिक सभा तथा भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन बनाए और सोसाइटी बनने से पहले 1901 में उनका देहांत हो गया। विकल्प C गलत है क्योंकि बंबई के सिंह कहे जाने वाले फिरोजशाह मेहता बंबई नगर निगम और कांग्रेस के नरमपंथी गुट पर छाए रहे, पर उन्होंने ऐसी कोई संस्था नहीं बनाई। विकल्प D गलत है क्योंकि दिनशा वाचा वित्त के जानकार नरमपंथी नेता थे, जो नौरोजी के साथ आर्थिक आलोचना में जुड़े थे।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 13 Oct 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' की स्थापना की थी?

  1. A.गोपाल कृष्ण गोखले
  2. B.जॉर्ज यूल
  3. C.व्योमेश चंद्र बनर्जी
  4. D.दादाभाई नौरोजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दादाभाई नौरोजी

व्याख्या

सही उत्तर है D, दादाभाई नौरोजी। दादाभाई नौरोजी ने 1866 में लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीय प्रश्नों को ब्रिटिश जनता और संसद सदस्यों के सामने रखना था; इसकी शाखाएँ जल्द ही बंबई, कलकत्ता और मद्रास में खुल गईं। एक वर्ष पहले उन्होंने लंदन इंडियन सोसाइटी भी शुरू की थी। 'भारत के वयोवृद्ध पुरुष' कहे जाने वाले नौरोजी ने 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' लिखी, जिसमें भारत से ब्रिटेन जाने वाले धन के निष्कासन (ड्रेन थ्योरी) को समझाया। वे 1892 में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय बने और तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी बनाई। विकल्प B गलत है, क्योंकि जॉर्ज यूल 1888 के इलाहाबाद अधिवेशन में कांग्रेस के पहले अंग्रेज़ अध्यक्ष बने। विकल्प C गलत है, क्योंकि व्योमेश चंद्र बनर्जी 1885 में कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे। परीक्षा टिप: लंदन इंडियन सोसाइटी 1865 और ईस्ट इंडिया एसोसिएशन 1866 — दोनों दादाभाई नौरोजी की।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया?

  1. A.कलकत्ता, 1928
  2. B.लाहौर, 1929
  3. C.कराची, 1931
  4. D.फैजपुर, 1936
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लाहौर, 1929

व्याख्या

सही उत्तर B, 1929 का लाहौर अधिवेशन है। दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया, सविनय अवज्ञा आरंभ करने की अनुमति दी और जनता से 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया; इसी कारण आगे चलकर संविधान के प्रारंभ के लिए यही तिथि चुनी गई। विकल्प A गलत है क्योंकि 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट स्वीकार हुई और सरकार को औपनिवेशिक स्वराज देने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1931 के कराची अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन तथा मूल अधिकारों और आर्थिक कार्यक्रम के प्रस्ताव पारित हुए। विकल्प D गलत है क्योंकि 1936 का फैजपुर अधिवेशन किसी गाँव में हुआ पहला कांग्रेस अधिवेशन माना जाता है, जिसकी अध्यक्षता भी जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

दक्कन सल्तनतों और उनके संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

  1. A.निजाम शाही : बीजापुर
  2. B.बरीद शाही : बीदर
  3. C.कुतुब शाही : गोलकुंडा
  4. D.इमाद शाही : बरार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. निजाम शाही : बीजापुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, निजाम शाही : बीजापुर, क्योंकि यही युग्म गलत सुमेलित है। निजाम शाही वंश अहमदनगर से शासन करता था, जिसकी नींव 1490 में मलिक अहमद ने रखी थी, जबकि बीजापुर यूसुफ आदिल शाह के आदिल शाही वंश का था। पाँचों दक्कन सल्तनतें लगभग 1490 से 1518 के बीच बहमनी राज्य के विघटन से निकलीं और उनमें से चार ने मिलकर 1565 में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर को कुचल दिया। बीजापुर गोल गुंबज के लिए, गोलकुंडा अपने किले और हीरों के लिए तथा अहमदनगर मुगलों के विरुद्ध चाँद बीबी की रक्षा के लिए याद किया जाता है। विकल्प B सही युग्म है, क्योंकि बरीद शाही वंश के पास बीदर था, जो बहमनी राज्य की अंतिम राजधानी थी। विकल्प C सही युग्म है, क्योंकि कुली कुतुब शाह के कुतुब शाही वंश ने गोलकुंडा पर शासन किया और बाद में हैदराबाद की नींव रखी। विकल्प D सही युग्म है, क्योंकि इमाद शाही वंश के पास बरार था, जो सबसे पहले अलग हुआ और सबसे पहले अहमदनगर में मिला लिया गया। परीक्षा टिप: अहमदनगर निजाम शाही, बीजापुर आदिल शाही, गोलकुंडा कुतुब शाही, बीदर बरीद शाही, बरार इमाद शाही।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 9 Nov 2022, Shift 1मध्यम

अगस्त 1907 में मैडम भीकाजी कामा विदेशी भूमि पर भारतीय ध्वज फहराने वाली पहली व्यक्ति कहां बनीं?

  1. A.जर्मनी
  2. B.बेल्जियम
  3. C.पोलैंड
  4. D.स्वीडन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जर्मनी

व्याख्या

सही उत्तर A, जर्मनी है। भीकाजी कामा ने 1907 में जर्मनी के स्टटगार्ट में हुई अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में भारतीय स्वतंत्रता का ध्वज फहराया और प्रतिनिधियों से भारत के पक्ष में समर्थन की अपील की। श्यामजी कृष्ण वर्मा और एस. आर. राणा की सहायता से बने इस ध्वज पर वंदे मातरम् अंकित था और इसे राष्ट्रीय ध्वज का प्रारंभिक रूप माना जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बेल्जियम का इस घटना से संबंध नहीं है, चाहे ब्रसेल्स में उस काल की अन्य समाजवादी बैठकें हुई हों। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1907 में पोलैंड स्वतंत्र देश नहीं था और वहां ऐसी कोई कांग्रेस नहीं हुई। विकल्प D गलत है, क्योंकि स्टटगार्ट को स्टॉकहोम समझने की भूल से स्वीडन विकल्प में रखा जाता है, और यही इस प्रश्न का जाल है। श्रृंखला याद रखें: स्टटगार्ट, 1907, भीकाजी कामा और पेरिस से निकलने वाला उनका पत्र वंदे मातरम्।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 11 Oct 2021, Shift 3मध्यम

रानी रुद्रमादेवी निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित थीं?

  1. A.चोल
  2. B.वाकाटक
  3. C.पश्चिमी गंग
  4. D.काकतीय
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. काकतीय

व्याख्या

सही उत्तर है D, काकतीय। रुद्रमादेवी ने तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वारंगल, जिसे तब ओरुगल्लु कहा जाता था, से काकतीय राज्य पर शासन किया; यह क्षेत्र आज तेलंगाना में है। उनके पिता गणपतिदेव को कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने रुद्रमादेवी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने स्वतंत्र शासक के रूप में राज किया, अभिलेखों में रुद्रदेव जैसा पुरुष नाम धारण किया और स्वयं सेना का नेतृत्व करते हुए विद्रोही सामंतों तथा देवगिरि के यादवों का सामना किया। उनके बाद उनका पौत्र प्रतापरुद्र द्वितीय अंतिम काकतीय शासक बना, जिसके समय वारंगल दिल्ली की सेनाओं के हाथ पड़ा। विकल्प A गलत है, क्योंकि चोल तमिल क्षेत्र में तंजावुर से शासन करते थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि वाकाटक तीसरी से पाँचवीं शताब्दी के दक्कन के शासक थे, जिनका गुप्तों से वैवाहिक संबंध था। विकल्प C गलत है, क्योंकि पश्चिमी गंग कर्नाटक में तलकाड से राज करते थे और श्रवणबेलगोला की गोम्मटेश्वर प्रतिमा उनसे जुड़ी है। परीक्षा टिप: काकतीय यानी वारंगल, गणपतिदेव, रुद्रमादेवी और हनमकोंडा का हज़ार खंभों वाला मंदिर।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 16 March, 2023, Shift 4आसान

प्रांतीय स्वायत्तता लागू करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कौन-सा अधिनियम पारित किया?

  1. A.भारतीय परिषद अधिनियम, 1892
  2. B.भारत शासन अधिनियम, 1935
  3. C.चार्टर अधिनियम, 1853
  4. D.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारत शासन अधिनियम, 1935

व्याख्या

सही उत्तर है B, भारत शासन अधिनियम, 1935। इस अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त किया और उन्हें स्वायत्त इकाइयाँ बनाया, जिनमें निर्वाचित प्रांतीय विधानमंडलों के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमंडल थे; इसके अंतर्गत पहले चुनाव 1937 में हुए और अधिकांश प्रांतों में कांग्रेस के मंत्रिमंडल बने। विकल्प A गलत है क्योंकि 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम ने केवल परिषदों का विस्तार किया, बजट पर चर्चा की अनुमति दी और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने दिया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1853 का चार्टर अधिनियम कंपनी शासन का है और विधायी तथा कार्यपालिका कार्यों के पृथक्करण एवं सिविल सेवा की खुली प्रतियोगिता के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1947 के अधिनियम ने प्रांतों में सुधार नहीं किया, बल्कि ब्रिटिश शासन समाप्त कर दो डोमिनियन बनाए। जोड़ी याद रखिए: 1919 प्रांतों में द्वैध शासन लाया और 1935 ने उसकी जगह प्रांतीय स्वायत्तता दी।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 22 Sep 2018, Shift 1मध्यम

प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?

  1. A.नरसिंहदेव प्रथम
  2. B.नागभट्ट प्रथम
  3. C.हर्षवर्धन
  4. D.रामचंद्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नागभट्ट प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है B, नागभट्ट प्रथम। नागभट्ट प्रथम ने आठवीं शताब्दी के मध्य में गुर्जर-प्रतिहार वंश की नींव रखी, जिसकी शक्ति का केंद्र पश्चिमी भारत में अवंति और उज्जैन था। उसे मुख्य रूप से सिंध की ओर से बढ़ती अरब सेनाओं को रोकने के लिए याद किया जाता है, और इस उपलब्धि के लिए प्रतिहारों की प्रशंसा बहुत समय तक होती रही। उसके उत्तराधिकारी वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय और मिहिर भोज ने इस वंश को उस युग की तीन बड़ी शक्तियों में शामिल कर दिया, और प्रतिहार, बंगाल के पाल तथा दक्कन के राष्ट्रकूट कन्नौज के लिए लंबे त्रिपक्षीय संघर्ष में उलझे रहे, जिसमें अंत में कन्नौज प्रतिहारों के हाथ रहा। A गलत है क्योंकि नरसिंहदेव प्रथम ओडिशा का पूर्वी गंग शासक था, जिसने कोणार्क का सूर्य मंदिर बनवाया। C गलत है क्योंकि हर्षवर्धन थानेसर और कन्नौज के वर्धन वंश का था। D गलत है क्योंकि रामचंद्र देवगिरि के यादव वंश का अंतिम प्रमुख शासक था। परीक्षा टिप: प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम, सबसे प्रतापी शासक मिहिर भोज।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · 2nd July 2017आसान

भारत के विभाजन से संबंधित 'माउंटबेटन योजना' की घोषणा कब की गई थी?

  1. A.3 जून, 1947
  2. B.14 जून, 1947
  3. C.31 मार्च, 1947
  4. D.20 फरवरी, 1947
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 3 जून, 1947

व्याख्या

सही उत्तर है A, 3 जून, 1947। अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी विभाजन योजना 3 जून 1947 को घोषित की थी, इसी कारण इसे तीन जून योजना भी कहा जाता है। इसमें प्रांतों को विकल्प दिया गया: ब्रिटिश भारत का विभाजन भारत और पाकिस्तान में होगा और दोनों डोमिनियन बनेंगे, बंगाल तथा पंजाब की विधानसभाएँ अपने प्रांत के विभाजन पर मतदान करेंगी, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और सिलहट में जनमत संग्रह होगा, और देशी रियासतें किसी भी डोमिनियन में शामिल होने के लिए स्वतंत्र रहेंगी। इस योजना को 18 जुलाई 1947 को पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम से कानूनी रूप मिला। B गलत है क्योंकि 14 जून 1947 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने योजना स्वीकार की थी, यह घोषणा की तिथि नहीं थी। C गलत है क्योंकि उस तिथि को ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। D गलत है क्योंकि 20 फरवरी 1947 प्रधानमंत्री एटली का वह वक्तव्य है जिसमें जून 1948 तक भारत छोड़ने की बात कही गई थी। परीक्षा टिप: 20 फरवरी 1947 एटली की घोषणा, 3 जून 1947 माउंटबेटन योजना, 18 जुलाई 1947 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

निम्नलिखित में से किसने हैदराबाद को अपना केंद्र बनाकर निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह की उपाधि के साथ स्वयं को स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया?

  1. A.आसफ जाह द्वितीय
  2. B.बहादुर शाह
  3. C.अलीवर्दी खान
  4. D.चिन किलिच खान
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चिन किलिच खान

व्याख्या

सही उत्तर है D, चिन किलिच खान। चिन किलिच खान, जो अपनी उपाधि निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह से अधिक याद किए जाते हैं, एक मुगल अमीर थे जिन्हें मुहम्मद शाह ने दक्कन का सूबेदार नियुक्त किया। दिल्ली दरबार की साजिशों से ऊबकर वे दक्षिण लौटे, 1724 में शकर खेड़ा में अपने प्रतिद्वंद्वी मुबारिज खान को हराया और इसके बाद नाम भर के अतिरिक्त हर अर्थ में स्वतंत्र शासक की तरह दक्कन पर राज किया; उन्होंने हैदराबाद के आसफ जाही या निजाम वंश की नींव रखी, जो 1948 तक चला। उन्होंने मुगल निष्ठा का रूप बनाए रखा और बादशाह के नाम से सिक्के ढाले, पर अधिकारी स्वयं नियुक्त किए तथा युद्ध और संधि अपने निर्णय से की। विकल्प A गलत है, क्योंकि आसफ जाह द्वितीय यानी निजाम अली खान इसी वंश के बाद के शासक थे, संस्थापक नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बहादुर शाह 1707 से 1712 तक शासन करने वाला मुगल बादशाह था। विकल्प C गलत है, क्योंकि अलीवर्दी खान ने बंगाल में स्वतंत्रता कायम की थी, हैदराबाद में नहीं। परीक्षा टिप: हैदराबाद 1724 चिन किलिच खान, अवध 1722 सआदत खान, बंगाल मुर्शिद कुली खान।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 24 November 2020, Shift 1आसान

हैदराबाद की रियासत को भारतीय संघ के अधीन वर्ष ______ में लाया गया।

  1. A.1948
  2. B.1950
  3. C.1952
  4. D.1963
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1948

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1948। हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और 1947 में केवल यथास्थिति समझौता किया, इसलिए सितंबर 1948 में भारत सरकार ने ऑपरेशन पोलो नाम की पुलिस कार्रवाई के तहत सेना भेजी और यह रियासत भारतीय संघ में मिल गई। यह कार्रवाई लगभग पांच दिन चली और इसका कारण रजाकार मिलिशिया की जनता पर हिंसा थी। गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल तथा वी. पी. मेनन ने रियासतों के विलय का कार्य संभाला, जिनमें हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर कठिन मामले थे। B, C और D गलत हैं क्योंकि उन वर्षों तक हैदराबाद भारत का हिस्सा बन चुका था; 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम से इसके तेलुगु क्षेत्र आंध्र प्रदेश में गए। परीक्षा टिप: जूनागढ़ और हैदराबाद दोनों 1948 में मिले, जूनागढ़ जनमत संग्रह से और हैदराबाद ऑपरेशन पोलो से।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 3आसान

महमूद गज़नवी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया?

  1. A.5
  2. B.15
  3. C.17
  4. D.7
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 17

व्याख्या

सही उत्तर है C, 17। महमूद गज़नवी, जिसने 998 से 1030 तक गज़नवी राज्य पर शासन किया, ने लगभग 1000 से 1027 के बीच भारत पर सत्रह बार आक्रमण किए, ऐसा उल्लेख मिलता है। उसका उद्देश्य लूट था, स्थायी शासन नहीं, इसलिए वह धन-संपत्ति लूटकर ले जाता रहा और पंजाब के पूर्व में कोई व्यवस्थित प्रशासन नहीं छोड़ा। इनमें सबसे चर्चित आक्रमण 1025 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर का विध्वंस था; इससे पहले उसने 1001 में हिंदूशाही वंश के जयपाल को हराया और मथुरा, थानेसर तथा कन्नौज के समृद्ध मंदिर-नगरों को लूटा। किताब-उल-हिंद लिखने वाला विद्वान अल-बरूनी और कवि फ़िरदौसी उसके दरबार से जुड़े थे। A गलत है क्योंकि पाँच वास्तविक संख्या से बहुत कम है। B गलत है क्योंकि पंद्रह वह संख्या है जिससे सबसे अधिक भ्रम होता है। D गलत है क्योंकि सात भी मान्य संख्या नहीं है। परीक्षा टिप: महमूद गज़नवी ने 17 आक्रमण किए और 1025 में सोमनाथ पर चढ़ाई की, जबकि मुहम्मद ग़ोरी की 1192 की तराईन विजय से तुर्क शासन शुरू हुआ।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 21 Feb, 2024, Shift 3मध्यम

प्राचीन भारत में तमिल क्षेत्र में साधारण हलवाहों को ________ कहा जाता था।

  1. A.उझवर
  2. B.अदिमै
  3. C.कडैसियर
  4. D.वेल्लालर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उझवर

व्याख्या

सही उत्तर है A, उझवर। प्राचीन भारत के तमिल क्षेत्र में साधारण हलवाहों, यानी वे लोग जो वास्तव में खेत जोतते थे, उन्हें उझवर कहा जाता था।

अभिलेख और संगम कविताएँ वहाँ की श्रेणीबद्ध ग्राम व्यवस्था दिखाती हैं। सबसे ऊपर वेल्लालर थे, यानी बड़े भूस्वामी; उनके नीचे उझवर आते थे, यानी हलवाहे या छोटे किसान; और सबसे नीचे भूमिहीन मजदूर थे, जिनमें दास भी शामिल थे। ये शब्द लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी तक के प्रारंभिक तमिल साहित्य, यानी संगम युग से आते हैं, जिसकी कविताएँ चोल, चेर और पांड्य सरदारियों का वर्णन करती हैं और उनके शासकों को मुवेंदर, यानी तीन मुकुटधारी राजा कहती हैं।

B गलत है: अदिमै का अर्थ दास है, यानी वे लोग जो दूसरों की संपत्ति माने जाते थे। C गलत है: कडैसियर वे भूमिहीन मजदूर थे जो दूसरों के खेतों में काम करते थे। D गलत है: वेल्लालर बड़े भूस्वामी थे, गाँव का सबसे संपन्न वर्ग।

परीक्षा टिप: तमिल गाँव का क्रम — वेल्लालर बड़े भूस्वामी, उझवर हलवाहे, तथा कडैसियर और अदिमै भूमिहीन मजदूर और दास।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 20 Aug 2021, Shift 1आसान

दिल्ली सल्तनत की पहली और अंतिम महिला शासक कौन थी?

  1. A.सुल्ताना चाँद बीबी
  2. B.नूरजहाँ
  3. C.रजिया सुल्ताना
  4. D.रानी दुर्गावती
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रजिया सुल्ताना

व्याख्या

सही उत्तर है C, रजिया सुल्ताना। रजिया दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाली एकमात्र महिला थी, इसलिए वह सल्तनत की पहली और अंतिम महिला शासक दोनों थी। वह इल्तुतमिश की पुत्री थी, जिसने अपने पुत्रों के स्थान पर उसे चुना, और उसने 1236 से 1240 तक शासन किया। वह बिना पर्दा दरबार करती थी, हाथी पर सवारी करती थी और उसने जलालतुद्दीन रजिया की उपाधि ली। चालीसा के तुर्क सरदारों को एक महिला का शासन सहन नहीं हुआ और 1240 में उसे अपदस्थ करके मार डाला गया। A गलत है क्योंकि चाँद बीबी सोलहवीं शताब्दी में दक्कन के अहमदनगर और बीजापुर की संरक्षिका थी, दिल्ली की सुल्तान नहीं। B गलत है क्योंकि नूरजहाँ मुगल बादशाह जहाँगीर की पत्नी थी और उसके माध्यम से प्रभाव रखती थी, पर उसने स्वयं संप्रभु शासक के रूप में शासन नहीं किया। D गलत है क्योंकि रानी दुर्गावती गोंडवाना की शासिका थी और उसने 1564 में अकबर के सेनापति आसफ खान से युद्ध किया। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - इल्तुतमिश ने अपनी पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी बनाया, जिसने 1236 से 1240 तक दिल्ली पर शासन किया।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 12 July 2022, Shift 3आसान

निम्नलिखित चाहमान शासकों में से किसने 1191 में सुल्तान मुहम्मद गोरी को पराजित किया था?

  1. A.विग्रहराज III
  2. B.अजयराज II
  3. C.पृथ्वीराज III
  4. D.दुर्लभराज III
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. पृथ्वीराज III

व्याख्या

सही उत्तर है C, पृथ्वीराज III। अजमेर और दिल्ली के चाहमान यानी चौहान शासक पृथ्वीराज III ने 1191 में तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गोरी को हराया था; लोक स्मृति में वही पृथ्वीराज चौहान हैं। तराइन, आज का तरावड़ी, हरियाणा में थानेसर के निकट दिल्ली के पुराने मार्ग पर है, और उसी भूमि पर 1192 में तराइन का द्वितीय युद्ध हुआ, जिसमें गोरी ने लौटकर पृथ्वीराज को हराया और उत्तर भारत तुर्की शासन के लिए खुल गया। पृथ्वीराज रासो लिखने वाले चंदबरदाई और पृथ्वीराज विजय लिखने वाले जयानक उनके दरबार से जुड़े थे। A गलत है क्योंकि विग्रहराज III गोरी के भारत आने से बहुत पहले के चाहमान शासक थे। B गलत है क्योंकि अजयराज II बारहवीं शताब्दी में अजमेर की स्थापना के लिए याद किए जाते हैं, इस युद्ध के लिए नहीं। D गलत है क्योंकि दुर्लभराज III भी अजमेर के पुराने शासकों की श्रृंखला के हैं। परीक्षा टिप: तराइन प्रथम 1191 – पृथ्वीराज जीते, तराइन द्वितीय 1192 – गोरी जीता।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 7 Dec 2021, Shift 3कठिन

चोल अभिलेखों में विद्यालय के लिए दान में दी गई भूमि को _____ कहा गया है।

  1. A.तिरुनमत्तुक्कणि
  2. B.शालाभोग
  3. C.पल्लिच्छंदम
  4. D.वेल्लानवगई
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. शालाभोग

व्याख्या

सही उत्तर है B, शालाभोग। चोल अभिलेखों में विद्यालय के रखरखाव के लिए अलग रखी गई भूमि को शालाभोग कहा गया है।

चोल शासक नौवीं से तेरहवीं शताब्दी तक तंजावुर से राज्य करते थे और उन्होंने मंदिरों की दीवारों पर सैकड़ों अभिलेख छोड़े, जिनमें भूमि दान के विवरण हैं, और हर प्रकार के दान का अपना नाम था। शालाभोग के अलावा ब्रह्मदेय था, यानी ब्राह्मणों को दी गई भूमि; देवदान और तिरुनमत्तुक्कणि, यानी मंदिरों को दी गई भूमि; पल्लिच्छंदम, यानी जैन संस्थाओं को दी गई भूमि; और वेल्लानवगई, यानी साधारण गैर-ब्राह्मण किसान भूस्वामियों की भूमि। ये अभिलेख चोल ग्राम प्रशासन के मुख्य स्रोत हैं, जिसमें ऊर, सभा और नगरम जैसी सभाएँ होती थीं।

A गलत है: तिरुनमत्तुक्कणि मंदिर को दान में दी गई भूमि थी। C गलत है: पल्लिच्छंदम जैन संस्थाओं को दी गई भूमि थी, क्योंकि पल्लि का अर्थ जैन मंदिर है। D गलत है: वेल्लानवगई गैर-ब्राह्मण किसान भूस्वामियों के पास रहने वाली भूमि थी।

परीक्षा टिप: विद्यालय के लिए शालाभोग, ब्राह्मणों के लिए ब्रह्मदेय, मंदिरों के लिए देवदान और तिरुनमत्तुक्कणि, जैन संस्थाओं के लिए पल्लिच्छंदम।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 13 Oct 2020, Shift 3मध्यम

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) का प्रस्ताव किस तिथि को पारित किया?

  1. A.21 दिसंबर 1929
  2. B.19 दिसंबर 1929
  3. C.26 दिसंबर 1929
  4. D.15 दिसंबर 1929
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 19 दिसंबर 1929

व्याख्या

सही उत्तर है B, 19 दिसंबर 1929। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 19 दिसंबर 1929 को 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित हुआ और पूर्ण स्वतंत्रता को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया गया।

यह अधिवेशन रावी नदी के तट पर हुआ और इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की। 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को वहीं तिरंगा फहराया गया और कांग्रेस ने जनता से 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया। इसी प्रस्ताव से सविनय अवज्ञा आंदोलन का मार्ग खुला, जिसे गांधीजी ने मार्च 1930 में दांडी यात्रा से शुरू किया।

विकल्प A, 21 दिसंबर 1929, अधिवेशन के किसी निर्णय से जुड़ा नहीं है। विकल्प C, 26 दिसंबर 1929, भी गलत तिथि है। विकल्प D, 15 दिसंबर 1929, अधिवेशन शुरू होने से पहले की तिथि है।

परीक्षा टिप: लाहौर अधिवेशन 1929 — प्रस्ताव 19 दिसंबर, झंडा 31 दिसंबर, पहला स्वतंत्रता दिवस 26 जनवरी 1930।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · 12th Sept 2024मध्यम

निम्नलिखित अधिवक्ताओं में से कौन 1945-46 में दिल्ली के लाल किले में हुए आईएनए मुकदमों में पेश हुए थे?

  1. A.सरदार पटेल
  2. B.अरुणा आसफ अली
  3. C.के. एम. मुंशी
  4. D.भूलाभाई देसाई
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भूलाभाई देसाई

व्याख्या

सही उत्तर है D, भूलाभाई देसाई। लाल किले में आजाद हिंद फौज के अधिकारियों पर चले मुकदमों में बचाव पक्ष की अगुवाई भूलाभाई देसाई ने की, और उनका यह तर्क कि एक मान्यता प्राप्त सेना के सैनिक अपने देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे, इन मुकदमों को जन-मुद्दा बना दिया। नवंबर 1945 से चला पहला मुकदमा शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों के विरुद्ध था, जिन पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का आरोप था। कांग्रेस ने आईएनए डिफेंस कमेटी बनाई, जिसमें जवाहरलाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू, आसफ अली और कैलाश नाथ काटजू शामिल थे। अधिकारियों को दोषी ठहराया गया, लेकिन देशव्यापी विरोध के बाद सजाएँ माफ कर दी गईं। A गलत है क्योंकि सरदार पटेल ने सहायता और धन जुटाने का काम किया, वे अदालत में पेश नहीं हुए। B गलत है क्योंकि अरुणा आसफ अली 1942 के आंदोलन की नेता थीं, इस मुकदमे की वकील नहीं। C गलत है क्योंकि के. एम. मुंशी वकील होते हुए भी संविधान सभा में अपने कार्य के लिए जाने जाते हैं। परीक्षा टिप: लाल किला मुकदमे 1945-46, बचाव की अगुवाई भूलाभाई देसाई।

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