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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास क्विज: संगम युग और प्रारंभिक तमिल राज्य

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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास के अंतर्गत "संगम युग और प्रारंभिक तमिल राज्य" विषय पर यह क्विज़ 10 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 1 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

10 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 18 May, 2023, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन दक्षिण भारत के पांड्य वंश का प्रसिद्ध शासक था?

  1. A.नेडुन्जेलियन द्वितीय
  2. B.करिकाल
  3. C.अशोक
  4. D.निजाम शाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नेडुन्जेलियन द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर A, नेडुन्जेलियन द्वितीय है, जो मदुरै का पांड्य राजा था और जिसे संगम कविता में तलैयालंगानम के युद्ध के विजेता के रूप में स्मरण किया जाता है; कहा जाता है कि उसने इस युद्ध में चेर तथा चोल राजाओं और पांच छोटे सरदारों के संघ को पराजित किया। विकल्प B, करिकाल, गलत है क्योंकि वह चोल वंश का था; उसने वेण्णि का युद्ध जीता, कावेरी के मुहाने पर पुहार बसाया और उसी नदी पर बांध बनवाने का श्रेय उसे दिया जाता है। विकल्प C, अशोक, गलत है क्योंकि वह मगध का मौर्य सम्राट था, यद्यपि उसके शिलालेख दो और तेरह में पांड्यों का उल्लेख सीमावर्ती जनों के रूप में मिलता है। विकल्प D, निजाम शाह, गलत है क्योंकि निजामशाही वंश ने मध्यकाल में दक्कन के अहमदनगर पर शासन किया, जो संगम युग के एक हजार वर्ष बाद था।

Q2.भारतीय इतिहासआसान

संगम युग का साहित्य किस भाषा में रचा गया था?

  1. A.संस्कृत
  2. B.प्राकृत
  3. C.तमिल
  4. D.पालि
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. तमिल

व्याख्या

सही उत्तर C, तमिल है। संगम साहित्य तमिल का सबसे प्राचीन उपलब्ध भंडार है, जिसमें व्याकरण ग्रंथ तोल्काप्पियम, आठ संग्रह, दस आदर्श काव्य और अठारह लघु रचनाएं सम्मिलित हैं, और ये सब तमिल में हैं। विकल्प A, संस्कृत, गलत है क्योंकि संस्कृत उत्तर के वैदिक तथा शास्त्रीय साहित्य और दक्षिण के बाद के अभिलेखों की भाषा थी, संगम कविताओं की नहीं, यद्यपि उनमें संस्कृत शब्द मिलते हैं। विकल्प B, प्राकृत, गलत है क्योंकि प्राकृत का प्रयोग अशोक के अभिलेखों तथा पश्चिमी भारत के जैन आगम ग्रंथों में हुआ। विकल्प D, पालि, गलत है क्योंकि पालि श्रीलंका के बौद्ध त्रिपिटक और थेरवाद परंपरा की भाषा थी। पुगलूर जैसे स्थलों के समकालीन तमिल-ब्राह्मी अभिलेख इस क्षेत्र में तमिल के प्रयोग की पुष्टि करते हैं। संगम कविताओं की भाषा को प्राचीन तमिल कहा जाता है और उसी से बाद की तमिल भाषा तथा साहित्य की परंपरा विकसित हुई।

Q3.भारतीय इतिहासमध्यम

संगम कालीन राज्य और उसकी राजधानी का सही युग्म चुनिए।

  1. A.चेर – मदुरै
  2. B.चोल – उरैयूर
  3. C.पांड्य – वंजि
  4. D.चेर – पुहार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चोल – उरैयूर

व्याख्या

सही उत्तर B, चोल – उरैयूर है। आरंभिक चोल कावेरी तट पर उरैयूर से शासन करते थे और बाद में पुहार, जिसे कावेरीपट्टनम भी कहा गया, उनकी राजधानी तथा प्रमुख बंदरगाह बना; उनका राजचिह्न बाघ था। विकल्प A गलत है क्योंकि मदुरै पांड्यों की राजधानी थी, चेरों की नहीं, और पांड्य राजचिह्न मछली था। विकल्प C गलत है क्योंकि वंजि, जिसकी पहचान करूर से की जाती है, चेरों की राजधानी थी और चेर राजचिह्न धनुष-बाण था। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि पुहार चोलों का था, जबकि चेरों के बंदरगाह पश्चिमी तट पर मुजिरिस और तोंडी थे। परीक्षा में इन युग्मों को याद रखने का सबसे सुरक्षित तरीका यह श्रृंखला है: चेर–वंजि–धनुष, चोल–उरैयूर–बाघ और पांड्य–मदुरै–मछली। चोलों की राजधानी बाद में तट पर इसलिए गई क्योंकि कावेरी और समुद्र के संगम पर स्थित पुहार रोम तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से होने वाले व्यापार का केंद्र था।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

तमिल साहित्य की सबसे प्राचीन उपलब्ध रचना कौन है, जो व्याकरण और काव्यशास्त्र से संबंधित है?

  1. A.तिरुक्कुरल
  2. B.तोल्काप्पियम
  3. C.शिलप्पदिकारम्
  4. D.पुरनानूरु
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तोल्काप्पियम

व्याख्या

सही उत्तर B, तोल्काप्पियम है, जिसकी रचना तोल्काप्पियर ने की। यह तीन अधिकारों में विभाजित तमिल व्याकरण और काव्यशास्त्र का ग्रंथ है, और चूंकि इसके काव्य-परंपरा वाले भाग भूमि, जनों तथा उनके व्यवसायों का वर्णन करते हैं, इतिहासकार इसे संगम कालीन समाज का स्रोत मानते हैं, जिसमें भूमि का कुरिंजि, मुल्लै, मरुदम, नेइदल और पालै में पांच भागों वाला विभाजन भी आता है। विकल्प A, तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल, गलत है क्योंकि वह बाद की नैतिक रचना है और अठारह लघु रचनाओं में गिनी जाती है। विकल्प C, इलंगो अडिगल का शिलप्पदिकारम्, गलत है क्योंकि वह जुड़वां महाकाव्यों में से एक है और संगम युग के बाद रचा गया। विकल्प D, पुरनानूरु, गलत है क्योंकि वह आठ संग्रहों में से एक वीरगाथा संग्रह है, व्याकरण नहीं।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तिरुक्कुरल में कितने दोहे हैं?

  1. A.1,008
  2. B.1,330
  3. C.2,000
  4. D.133
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1,330

व्याख्या

सही उत्तर B, 1,330 दोहे हैं, जो दस-दस दोहों के 133 अध्यायों में व्यवस्थित हैं और धर्म, अर्थ तथा काम इन तीन भागों में विभाजित हैं। यह रचना पतिनेनकीलकनक्कु अर्थात् अठारह लघु रचनाओं में आती है और तमिल साहित्य का सर्वाधिक उद्धृत ग्रंथ है। विकल्प A, 1,008, गलत है; यह भक्ति सूचियों से जुड़ी गोल संख्या है, कुरल से नहीं। विकल्प C, 2,000, गलत है क्योंकि कुरल का कोई भाग इस संख्या तक नहीं पहुंचता। विकल्प D, 133, गलत है क्योंकि वह अध्यायों की संख्या है, दोहों की नहीं, और परीक्षक उसे जानबूझकर सही आंकड़े के साथ रख देते हैं। 133 अध्याय और 1,330 दोहे की जोड़ी एक साथ याद रखने से यह भ्रम समाप्त हो जाता है। कुरल की यह सर्वग्राह्यता ही एक कारण है कि वह यूरोपीय भाषाओं में अनूदित होने वाले आरंभिक भारतीय ग्रंथों में था।

Q6.भारतीय इतिहासकठिन

संगम युग का कौन चोल शासक वेण्णि के युद्ध और पुहार की स्थापना से जुड़ा है?

  1. A.सेंगुट्टुवन
  2. B.करिकाल
  3. C.मुदुकुडुमि
  4. D.एलार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. करिकाल

व्याख्या

सही उत्तर B, करिकाल है, जो संगम युग का सर्वाधिक प्रसिद्ध चोल शासक था। कविताएं उसे वेण्णि की विजय का श्रेय देती हैं, जिसने चेर और पांड्य गठबंधन की शक्ति तोड़ दी, तथा कावेरी के मुहाने पर पुहार के विकास और उसी नदी पर बांध बनवाने का श्रेय भी देती हैं। विकल्प A, सेंगुट्टुवन, गलत है क्योंकि वह चेर राजाओं में सबसे महान था, जिसे लाल चेर कहा गया, और वह उत्तर की ओर अभियान तथा शिलप्पदिकारम् की नायिका की पूजा के लिए स्मरण किया जाता है। विकल्प C, मुदुकुडुमि, गलत है क्योंकि मुदुकुडुमि पेरुवलुदि अपने यज्ञों के लिए प्रसिद्ध पांड्य राजा था। विकल्प D, एलार, गलत है क्योंकि एलार श्रीलंका में शासन करने वाला चोल राजकुमार था और उसका वर्णन उस द्वीप के इतिवृत्तों में मिलता है।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

तोल्काप्पियम के अनुसार निम्नलिखित में से कौन तिणै पहाड़ी प्रदेश को दर्शाती है?

  1. A.कुरिंजि
  2. B.मुल्लै
  3. C.मरुदम
  4. D.नेइदल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. कुरिंजि

व्याख्या

सही उत्तर A, कुरिंजि है, जो पहाड़ी और वनाच्छादित प्रदेश था और जिसके निवासी शिकार तथा संग्रह पर जीते थे। विकल्प B, मुल्लै, गलत है क्योंकि वह वन और झाड़ियों वाला पशुचारण प्रदेश है जहां गोपालन होता था। विकल्प C, मरुदम, गलत है क्योंकि वह नदी घाटियों का सिंचित मैदान है, जो स्थायी कृषि और बड़ी बस्तियों का क्षेत्र था। विकल्प D, नेइदल, गलत है क्योंकि वह मछुआरों तथा नमक बनाने वालों का समुद्रतटीय प्रदेश है। पांचवीं तिणै पालै है, जो शुष्क ऊबड़ प्रदेश है और लूटपाट तथा पशु हरण से जुड़ी है। ये नाम काव्य-स्थितियों के भी नाम हैं, क्योंकि तमिल काव्यशास्त्र में प्रत्येक तिणै का अपना पुष्प, देवता और भाव था, और इसी कारण यह वर्गीकरण व्याकरण ग्रंथ में आया। प्रत्येक तिणै से जुड़े पुष्प और भाव के कारण तमिल कविता में प्रेम तथा वीरता के वर्णन इन्हीं पांच पृष्ठभूमियों में रखे जाते थे।

Q8.भारतीय इतिहासकठिन

तमिल प्रदेश का कौन रोमन कालीन बंदरगाह, जिसका उत्खनन आज के पुदुच्चेरी के निकट हुआ, अरेटाइन मृद्भांड और एम्फोरा के लिए प्रसिद्ध है?

  1. A.मुजिरिस
  2. B.कोरकई
  3. C.अरिकामेडु
  4. D.तोंडी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अरिकामेडु

व्याख्या

सही उत्तर C, अरिकामेडु है, जो आज के पुदुच्चेरी के निकट अरियनकुप्पम नदी पर स्थित है और जहां उत्खनन में अरेटाइन मृद्भांड, मदिरा तथा तेल रखने वाले एम्फोरा के टुकड़े और गोदामों के अवशेष मिले, जो उसे ईसा की आरंभिक शताब्दियों का व्यापारिक केंद्र सिद्ध करते हैं। विकल्प A, मुजिरिस, गलत है, यद्यपि वह चेर तट का प्रसिद्ध काली मिर्च बंदरगाह था; उसका ज्ञान मुख्यतः यूनानी तथा रोमन लेखों और पट्टिनप्पालै से होता है, इस प्रकार के रोमन मृद्भांडों से नहीं। विकल्प B, कोरकई, गलत है क्योंकि वह मोती मत्स्यन के लिए प्रसिद्ध पांड्य बंदरगाह था। विकल्प D, तोंडी, गलत है क्योंकि वह चेर तट का दूसरा बंदरगाह था। तमिल प्रदेश में मिले रोमन सिक्कों के ढेर इस चित्र की पुष्टि करते हैं। इन खोजों के साथ पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी, प्लिनी तथा टॉलेमी के विवरण मिलाकर इस व्यापार का पूरा चित्र बनता है।

Q9.भारतीय इतिहासकठिन

संगम युग के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कर सही कथन चुनिए।

1. अशोक के शिलालेखों में चोल, पांड्य, सतियपुत्र और केरलपुत्र का उल्लेख है।
2. तीनों संगमों की रचनाएं सुरक्षित बची हैं।
3. कलभ्र आक्रमण संगम युग के अंत से जुड़ा है।

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.केवल 2 और 3
  4. D.1, 2 और 3 सभी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर B, केवल 1 और 3 है। कथन 1 सही है, क्योंकि अशोक के शिलालेख दो और तेरह में चोल, पांड्य, सतियपुत्र तथा केरलपुत्र का उल्लेख मौर्य साम्राज्य की दक्षिणी सीमा के जनों के रूप में हुआ है, और यही इस अध्याय की सबसे पक्की आरंभिक तिथि है। कथन 2 गलत है, क्योंकि परंपरा तीन संगमों की बात करती है, जो तेन मदुरै, कपाटपुरम् और मदुरै में हुए, परंतु केवल तृतीय संगम की रचनाएं हम तक पहुंची हैं। कथन 3 सही है, क्योंकि युग के अंत के बाद कलभ्रों ने तमिल देश पर अधिकार कर लिया और बाद के पल्लव तथा पांड्य अभिलेख उस अंतराल को अंधकार युग कहते हैं। इसलिए विकल्प A, C और D गलत हैं, क्योंकि उनमें कथन 2 सम्मिलित है।

Q10.भारतीय इतिहासमध्यम

जुड़वां महाकाव्य शिलप्पदिकारम् और मणिमेखलै के रचनाकार क्रमशः कौन थे?

  1. A.इलंगो अडिगल और सत्तनार
  2. B.तिरुवल्लुवर और तोल्काप्पियर
  3. C.सत्तनार और इलंगो अडिगल
  4. D.अव्वैयार और कपिलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. इलंगो अडिगल और सत्तनार

व्याख्या

सही उत्तर A, इलंगो अडिगल और सत्तनार है। शिलप्पदिकारम् अर्थात् पायल की कथा का रचनाकार इलंगो अडिगल माना जाता है, जिन्हें परंपरा चेर राजा सेंगुट्टुवन का भाई कहती है, और मणिमेखलै, जो उसी कथा को बौद्ध परिवेश में आगे बढ़ाती है, सत्तनार की रचना मानी जाती है, जिन्हें चीतलै चात्तनार भी कहा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल और तोल्काप्पियर ने तोल्काप्पियम लिखा। विकल्प C गलत है क्योंकि वह दोनों रचनाकारों के नाम उलट देता है, जो इस प्रश्न में सबसे आम भूल है। विकल्प D गलत है क्योंकि अव्वैयार और कपिलर संग्रहों के प्रसिद्ध कवि थे, महाकाव्यकार नहीं; अव्वैयार इस युग की सबसे प्रसिद्ध कवयित्री हैं। दोनों महाकाव्य प्रायः संगम युग के कुछ बाद के माने जाते हैं। दोनों महाकाव्य सामाजिक इतिहास के लिए भी मूल्यवान हैं, क्योंकि शिलप्पदिकारम् पुहार तथा मदुरै के व्यापारी मोहल्लों का वर्णन करता है और मणिमेखलै तमिल में बौद्ध सिद्धांत प्रस्तुत करता है।

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