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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 37

  • 20 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 37) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 20 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: दिल्ली सल्तनत, भारत के वायसराय (1858–1947) और प्रमुख घटनाएं, मुगल साम्राज्य और अन्य। इनमें से 18 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 25 July 2022, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा वंश सैयद वंश के तुरंत बाद दिल्ली पर शासन करता था?

  1. A.खलजी वंश
  2. B.लोदी वंश
  3. C.राजपूत वंश
  4. D.तुगलक वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लोदी वंश

व्याख्या

सही उत्तर है B, लोदी वंश। दिल्ली में सैयद वंश के बाद लोदी वंश आया। सरहिंद का सूबेदार रहा अफ़ग़ान सरदार बहलोल लोदी 1451 में गद्दी पर बैठा, जब अंतिम सैयद शासक आलम शाह ने दिल्ली छोड़कर बदायूँ में रहना स्वीकार कर लिया। लोदी दिल्ली सल्तनत का अंतिम वंश था और इसका एकमात्र अफ़ग़ान वंश भी। बहलोल के बाद सिकंदर लोदी ने राजधानी आगरा ले जाई, जिस नगर की स्थापना उसने 1504 में की थी। उसके बाद इब्राहिम लोदी आया, जो 1526 के पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर के हाथों मारा गया; इसी से सल्तनत का अंत और मुगल शासन का आरंभ हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि खलजी वंश बहुत पहले 1290 से 1320 तक, गुलाम वंश और तुगलक वंश के बीच शासन कर चुका था। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1192 के बाद दिल्ली पर कोई राजपूत वंश नहीं रहा। विकल्प D गलत है, क्योंकि तुगलक वंश सैयदों से पहले का है। परीक्षा टिप: गुलाम, खलजी, तुगलक, सैयद, लोदी और फिर 1526 से मुगल।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 5 Oct 2021, Shift 2आसान

ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल का विभाजन किस वर्ष किया था?

  1. A.1905
  2. B.1901
  3. C.1907
  4. D.1911
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1905

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1905। लॉर्ड कर्ज़न ने 19 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की और यह 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ, जिससे प्रांत मुस्लिम-बहुल पूर्वी हिस्से और शेष बंगाल में बँट गया। सार्वजनिक रूप से कारण यह बताया गया कि बंगाल प्रशासन के लिए बहुत बड़ा हो गया है, पर असली मकसद हिंदू-मुसलमानों को बाँटकर वहाँ बढ़ते राष्ट्रीय आंदोलन को कमज़ोर करना था। इसके विरोध से स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें विदेशी कपड़े जलाए गए और भारतीय सामान, स्कूल तथा बैंक बढ़ावा पाए; रवींद्रनाथ टैगोर का गीत 'आमार सोनार बांग्ला' इन्हीं दिनों का है। विरोध इतना व्यापक था कि 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया और उसी साल राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई गई। B गलत है क्योंकि 1901 में महारानी विक्टोरिया का निधन हुआ था। C गलत है क्योंकि 1907 कांग्रेस के सूरत विभाजन का वर्ष है। D गलत है क्योंकि 1911 में विभाजन रद्द हुआ था, हुआ नहीं था। परीक्षा टिप: 1905 में कर्ज़न ने घोषित किया, 1911 में हार्डिंग के समय रद्द हुआ।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 20 Sept 2018, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से किसने दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना की थी?

  1. A.अकबर
  2. B.शाहजहाँ
  3. C.जहाँगीर
  4. D.बाबर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अकबर

व्याख्या

सही उत्तर है A, अकबर। अकबर ने 1582 में दीन-ए-इलाही की स्थापना की, जो कई धर्मों के विचारों को लेकर बनाया गया एक छोटा आध्यात्मिक पंथ था। इससे पहले 1575 में उसने फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना बनवाया था, जहाँ इस्लाम, हिंदू, जैन, पारसी और ईसाई विद्वान उसके सामने शास्त्रार्थ करते थे, और इन्हीं बैठकों से यह नया पंथ निकला। दीन-ए-इलाही का कोई ग्रंथ, कोई पुरोहित वर्ग और अपना कोई कर्मकांड नहीं था; इसमें केवल पवित्र जीवन और बादशाह के प्रति निष्ठा की अपेक्षा थी, और हिंदू दरबारियों में बीरबल का नाम ही इसमें शामिल होने वालों में गिना जाता है। इसके अनुयायी बहुत कम रहे और अकबर की मृत्यु के बाद यह पंथ समाप्त हो गया। B गलत है क्योंकि शाहजहाँ को ताजमहल और मुगल स्थापत्य के लिए याद किया जाता है, किसी नए धर्म के लिए नहीं। C गलत है क्योंकि जहाँगीर अपने बारह अध्यादेशों और न्याय की जंजीर के लिए जाना जाता है। D गलत है क्योंकि बाबर ने 1526 में मुगल साम्राज्य की नींव रखी। परीक्षा टिप: इबादतखाना 1575 और दीन-ए-इलाही 1582, दोनों अकबर के।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 11 April 2022, Shift 2मध्यम

प्राचीन भारत में निम्नलिखित में से कौन एक मछुआरों की बस्ती थी, जिसका उपयोग रोमनों और यूनानी-रोमनों के साथ व्यापार के बंदरगाह के रूप में किया जाता था?

  1. A.बादामी
  2. B.अरिकामेडु
  3. C.लोथल
  4. D.तुलापुरुषदान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अरिकामेडु

व्याख्या

सही उत्तर है B, अरिकामेडु। कोरोमंडल तट पर पुडुचेरी के निकट अरियनकुप्पम नदी के किनारे बसा अरिकामेडु पहले मछुआरों की छोटी बस्ती था, जो ईसा की पहली शताब्दियों में रोमनों और यूनानी-रोमन जगत के साथ व्यापार करने वाला व्यस्त बंदरगाह बन गया। वहाँ की खुदाई में शराब और जैतून का तेल ढोने वाले रोमन अंफोरा, लाल चमकदार ऐरेटाइन मृद्भांड, काँच और पत्थर के मनके, दीपक तथा रोमन सिक्के मिले हैं, साथ ही स्थानीय रूलेटेड मृद्भांड भी। इसी कारण इस स्थल को “पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी” में वर्णित “पोडुके” माना जाता है। A गलत है क्योंकि कर्नाटक का बादामी चालुक्यों की भीतरी राजधानी थी, जो शैलकृत गुफा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। C गलत है क्योंकि गुजरात का लोथल गोदी वाला हड़प्पाकालीन स्थल है, जो बहुत पुराना है और पश्चिमी तट पर स्थित है। D गलत है क्योंकि तुलापुरुषदान सोने के बराबर स्वयं को तौलकर दान करने की एक रस्म थी, कोई स्थान नहीं। परीक्षा टिप: अरिकामेडु (पुडुचेरी के पास) = रोमन व्यापार का पोडुके; लोथल = गुजरात की हड़प्पा गोदी।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: CDS · 04 Sep 2022कठिन

19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अफगानिस्तान के प्रति ब्रिटिश नीति का उद्देश्य क्या था?

  1. A.रूस के विरुद्ध अवरोधक के रूप में अफगानिस्तान को मजबूत बनाना।
  2. B.अफगानिस्तान में रूसी प्रभाव को कमजोर करना, परंतु एक शक्तिशाली अफगानिस्तान को बढ़ावा भी न देना।
  3. C.विद्रोही कबायली सरदारों पर नियंत्रण के लिए अफगानिस्तान में रूसी प्रभाव को बढ़ावा देना।
  4. D.अफगानिस्तान को प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले ब्रिटिश क्षेत्र के रूप में मिला लेना।
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अफगानिस्तान में रूसी प्रभाव को कमजोर करना, परंतु एक शक्तिशाली अफगानिस्तान को बढ़ावा भी न देना।

व्याख्या

सही उत्तर है B। अंग्रेज चाहते थे कि काबुल में रूसी प्रभाव न पहुँचे, पर उत्तर-पश्चिम सीमा पर एक शक्तिशाली अफगान राज्य भी उन्हें नहीं चाहिए था, क्योंकि ताकतवर पड़ोसी को वश में रखना कठिन होता। यह दोहरा लक्ष्य ग्रेट गेम का हिस्सा था, यानी मध्य एशिया पर ब्रिटेन और रूस की लंबी होड़। लॉर्ड ऑकलैंड ने इसी नीति पर 1838 से 1842 के प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध में दोस्त मोहम्मद को हटाकर शाह शुजा को बैठाया; यह कब्जा काबुल से विनाशकारी वापसी में समाप्त हुआ। आगे नीति यही रही कि अफगानिस्तान कमजोर, बँटा और आश्रित बना रहे, मित्र नहीं बल्कि एक गद्दी भर। विकल्प A गलत है, क्योंकि अंग्रेजों ने अफगान शक्ति बढ़ाने से जान-बूझकर परहेज किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि रूस को दूर रखना ही इस नीति का मूल उद्देश्य था। विकल्प D गलत है, क्योंकि अफगानिस्तान कभी मिलाया नहीं गया; इस सदी के दोनों आंग्ल-अफगान युद्ध वापसी पर खत्म हुए। परीक्षा टिप: प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध 1838 से 1842, लॉर्ड ऑकलैंड, और रूस के विरुद्ध ग्रेट गेम।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 23rd Dec 2021मध्यम

'भूतपूर्व देशी रियासतों' की श्रेणी में वे राज्य आते थे A. जिनके राजा ने भारत में विलय पर सहमति दी B. जिनके राजा ने पाकिस्तान में विलय पर सहमति दी C. जिन्हें राज्य का दर्जा मिलने तक प्रशासनिक इकाइयों के रूप में रखा गया D. जिन्हें गोवा और पांडिचेरी जैसे यूरोपीय उपनिवेशों के रूप में रखा गया।

  1. A.A और B सत्य हैं। B, A का सही स्पष्टीकरण है
  2. B.B, C और D
  3. C.A, C और D
  4. D.A, B और C
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. A, B और C

व्याख्या

सही उत्तर है D, A, B और C। 1947 में अंग्रेजों के जाने पर भारत में प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन वाले प्रांतों के अलावा लगभग 565 देशी रियासतें थीं, जिनके शासकों ने ब्रिटिश सर्वोपरिता स्वीकार कर रखी थी। स्वतंत्रता के साथ यह सर्वोपरिता समाप्त हो गई और हर शासक को भारत या पाकिस्तान में विलय करना था; सरदार वल्लभभाई पटेल तथा वी. पी. मेनन ने रियासत विभाग के माध्यम से लगभग सभी से विलय पत्र पर हस्ताक्षर कराए। इस प्रकार कथन A और B दोनों रियासतों का वर्णन करते हैं। कथन C भी सही है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा जैसी कई रियासतें अलग प्रशासनिक इकाइयों के रूप में रखी गईं और बाद में पूर्ण राज्य बनीं। कथन D गलत है, क्योंकि गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली तथा पांडिचेरी फ्रांसीसी उपनिवेश थे, रियासतें नहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि उसमें कथन C छूट जाता है। विकल्प B और C गलत हैं, क्योंकि दोनों में असत्य कथन D शामिल है। परीक्षा टिप: लगभग 565 रियासतें, पटेल और वी. पी. मेनन, विलय पत्र, तथा गोवा और पांडिचेरी यूरोपीय उपनिवेश।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

कानपुर में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?

  1. A.नाना साहेब
  2. B.कुँवर सिंह
  3. C.खान बहादुर खान
  4. D.मौलवी अहमदुल्लाह शाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नाना साहेब

व्याख्या

सही उत्तर है A, नाना साहेब। वे अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और कंपनी द्वारा उनकी पेंशन रोकना विद्रोह के कारणों में गिना जाता है। कानपुर में उन्हें पेशवा घोषित किया गया, उनके सेनापति तांत्या टोपे ने वहाँ और बाद में झाँसी तथा ग्वालियर में युद्ध का नेतृत्व किया। अंत में नाना साहेब नेपाल चले गए।

विकल्प B गलत है क्योंकि जगदीशपुर के वृद्ध ज़मींदार कुँवर सिंह ने बिहार में विद्रोह का नेतृत्व किया। विकल्प C गलत है क्योंकि खान बहादुर खान रुहेलखंड के बरेली में नेता थे। विकल्प D गलत है क्योंकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह अवध के फैज़ाबाद में नेता थे। केंद्र और नेता की जोड़ियाँ दोनों दिशाओं में पूछी जाती हैं, इसलिए उन्हें सारणी के रूप में याद करें। नाना साहेब के साथ कानपुर और पेशवा की उपाधि, तथा तांत्या टोपे के साथ ग्वालियर का अभियान जोड़कर याद रखने से यह प्रश्न किसी भी रूप में पूछा जाए, उत्तर स्पष्ट रहता है।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 2nd Feb 2023आसान

निम्नलिखित में से किस स्थल पर सबसे प्राचीन गांवों के प्रमाण मिले हैं?

  1. A.हल्लूर
  2. B.चिरांद
  3. C.मेहरगढ़
  4. D.बुर्जहोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. मेहरगढ़

व्याख्या

सही उत्तर है C, मेहरगढ़। बलूचिस्तान के कच्छी मैदान में बोलन नदी के किनारे स्थित मेहरगढ़ भारतीय उपमहाद्वीप का ज्ञात सबसे प्राचीन कृषक गांव है, जहां लगभग 7000 ईसा पूर्व से बसाव मिलता है। यहां के लोग इस क्षेत्र में गेहूं और जौ उगाने तथा भेड़, बकरी और मवेशी पालने वालों में सबसे पहले थे, और यह स्थल शिकार तथा संग्रहण से स्थायी ग्रामीण जीवन की ओर हुए लंबे बदलाव को दर्ज करता है। पुरातत्वविदों को यहां कच्ची ईंटों के घर, अनाज भंडारण के गड्ढे, शवों के साथ रखी वस्तुओं वाली कब्रें तथा कपास और दांत छेदने के दुनिया के आरंभिक प्रमाण मिले हैं। मेहरगढ़ को हड़प्पा सभ्यता का पूर्ववर्ती माना जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कर्नाटक का हल्लूर दक्षिण भारतीय नवपाषाण तथा महापाषाण स्थल है, जो आरंभिक लोहे के लिए जाना जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बिहार का चिरांद मेहरगढ़ से काफी बाद का नवपाषाण स्थल है, जो हड्डी के औजारों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कश्मीर का बुर्जहोम गर्त-आवासों के लिए जाना जाता है और वह भी बाद का है। परीक्षा टिप: लगभग 7000 ईसा पूर्व का मेहरगढ़ सबसे प्राचीन गांव है, बुर्जहोम में गर्त-आवास और चिरांद में हड्डी के औजार मिले हैं।

Q9.भारतीय इतिहासआसान

जाति प्रभुत्व से लड़ने के लिए 1873 में स्थापित सत्यशोधक समाज किसने शुरू किया?

  1. A.भीमराव आंबेडकर
  2. B.ज्योतिबा फुले
  3. C.श्री नारायण गुरु
  4. D.ई वी रामासामी नायकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ज्योतिबा फुले

व्याख्या

सही उत्तर B, ज्योतिबा फुले है। उन्होंने 1873 में महाराष्ट्र में सत्यशोधक समाज, अर्थात सत्य खोजने वालों का समाज, स्थापित किया जिसका उद्देश्य निचली जातियों को ब्राह्मणवादी प्रभुत्व से मुक्त करना था, और उसी वर्ष उनकी पुस्तक गुलामगिरी ने उनकी दशा की तुलना दासों से की। सावित्रीबाई फुले के साथ उन्होंने 1848 में पुणे में कन्या विद्यालय खोल दिया था। विकल्प A गलत है क्योंकि भीमराव आंबेडकर के संगठन बहुत बाद के हैं, 1924 की बहिष्कृत हितकारिणी सभा और 1927 का महाड़ सत्याग्रह। विकल्प C गलत है क्योंकि श्री नारायण गुरु ने केरल में काम किया और 1903 में एसएनडीपी योगम बनाया। विकल्प D गलत है क्योंकि पेरियार कहे जाने वाले ई वी रामासामी नायकर ने 1925 में तमिलनाडु में आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया। फुले का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक था: उन्होंने निचली जातियों तथा स्त्रियों की शिक्षा पर बल दिया, और 1888 में बंबई की एक सार्वजनिक सभा में उन्हें महात्मा की उपाधि दी गई।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · General Studies 2013मध्यम

ब्रिटिश सरकार ने किस अधिनियम द्वारा चाय और चीन के व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार समाप्त किया?

  1. A.रेगुलेटिंग एक्ट – 1773
  2. B.पिट्स इंडिया एक्ट – 1784
  3. C.चार्टर एक्ट – 1813
  4. D.चार्टर एक्ट – 1833
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चार्टर एक्ट – 1833

व्याख्या

सही उत्तर है D, चार्टर एक्ट – 1833। इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के बचे हुए व्यापारिक अधिकार, यानी चीन के साथ व्यापार तथा चाय के व्यापार का एकाधिकार भी समाप्त कर दिया और कंपनी को केवल प्रशासन चलाने वाली संस्था बना दिया, जो ब्रिटिश ताज की ओर से भारत को न्यास (ट्रस्ट) में रखती थी। इसी अधिनियम से बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया, जिस पद पर पहले विलियम बेंटिक आए; पूरे ब्रिटिश भारत के लिए कानून बनाने की शक्ति भी उन्हीं को मिली और उनकी परिषद में एक विधि सदस्य जोड़ा गया, जिस पद पर पहले मैकाले आए और जिन्होंने एक समान विधि संहिता का काम सँभाला। A गलत है क्योंकि 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट नियंत्रण की दिशा में पहला कदम था और उसने कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय बनाया। B गलत है क्योंकि 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा द्वैध शासन की व्यवस्था दी। C गलत है क्योंकि 1813 के चार्टर एक्ट ने भारत का व्यापार सब ब्रिटिश व्यापारियों के लिए खोला, पर चीन और चाय का एकाधिकार कंपनी के पास बना रहा। परीक्षा टिप: 1813 – भारत का व्यापार खुला, चाय व चीन छोड़कर; 1833 – यह छूट भी खत्म।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: CDS · 10 April 2022आसान

मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किसमें दिया गया था?

  1. A.मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909
  2. B.मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
  3. C.सांप्रदायिक निर्णय, 1932
  4. D.भारत शासन अधिनियम, 1935
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909

व्याख्या

सही उत्तर है A, मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909। इस अधिनियम, जिसका औपचारिक नाम भारतीय परिषद अधिनियम 1909 है, ने पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन मंडल दिया, जिसमें मुस्लिम मतदाता केवल मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्रों से मुस्लिम सदस्य चुनते थे। उस समय लॉर्ड मिंटो वायसराय और जॉन मॉर्ले भारत सचिव थे, और यह कदम 1906 के शिमला शिष्टमंडल तथा उसी वर्ष मुस्लिम लीग की स्थापना के बाद आया। इसी अधिनियम ने विधान परिषदों का आकार बढ़ाया और पहली बार भारतीयों को वायसराय की कार्यकारी परिषद में स्थान दिया, जिसमें सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा पहले सदस्य थे। राष्ट्रवादियों ने इसे सांप्रदायिक कदम कहा, क्योंकि इसने धर्म को प्रतिनिधित्व का आधार बना दिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1919 के सुधारों ने पृथक निर्वाचन को केवल सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1932 के सांप्रदायिक निर्णय ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन जोड़ा। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1935 के अधिनियम ने इस व्यवस्था को जारी रखा, बनाया नहीं। परीक्षा टिप: मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है, वर्ष 1909।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 19 Oct 2020, Shift 3आसान

'दिल्ली चलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' के नारे किसने दिए?

  1. A.मोहनदास करमचंद गांधी
  2. B.जवाहरलाल नेहरू
  3. C.सुभाष चंद्र बोस
  4. D.सरदार वल्लभ भाई पटेल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सुभाष चंद्र बोस

व्याख्या

सही उत्तर है C, सुभाष चंद्र बोस। दोनों नारे नेताजी और आजाद हिंद फौज से जुड़े हैं, जिसका नेतृत्व उन्होंने 1943 से किया। दिल्ली चलो का नारा देकर उन्होंने दिल्ली की ओर बढ़ना फौज का लक्ष्य बनाया, और दक्षिण पूर्व एशिया के भारतीयों से अपनी प्रसिद्ध अपील में आजादी के बदले खून माँगा। उन्होंने जय हिंद का अभिवादन भी दिया, अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार बनाई, और महिला सैनिकों की रानी झाँसी रेजिमेंट खड़ी की। विकल्प A गलत है, क्योंकि गांधीजी के नारे 1942 में दिए गए भारत छोड़ो और करो या मरो थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि नेहरू अपने ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण के लिए याद किए जाते हैं, इन नारों के लिए नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि लौह पुरुष पटेल बारदोली आंदोलन और देशी रियासतों के विलय से जुड़े हैं। परीक्षा टिप: दिल्ली चलो, जय हिंद और खून दो, तीनों सुभाष चंद्र बोस की ओर इशारा करते हैं।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 22 Sep 2018, Shift 1मध्यम

प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?

  1. A.नरसिंहदेव प्रथम
  2. B.नागभट्ट प्रथम
  3. C.हर्षवर्धन
  4. D.रामचंद्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नागभट्ट प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है B, नागभट्ट प्रथम। नागभट्ट प्रथम ने आठवीं शताब्दी के मध्य में गुर्जर-प्रतिहार वंश की नींव रखी, जिसकी शक्ति का केंद्र पश्चिमी भारत में अवंति और उज्जैन था। उसे मुख्य रूप से सिंध की ओर से बढ़ती अरब सेनाओं को रोकने के लिए याद किया जाता है, और इस उपलब्धि के लिए प्रतिहारों की प्रशंसा बहुत समय तक होती रही। उसके उत्तराधिकारी वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय और मिहिर भोज ने इस वंश को उस युग की तीन बड़ी शक्तियों में शामिल कर दिया, और प्रतिहार, बंगाल के पाल तथा दक्कन के राष्ट्रकूट कन्नौज के लिए लंबे त्रिपक्षीय संघर्ष में उलझे रहे, जिसमें अंत में कन्नौज प्रतिहारों के हाथ रहा। A गलत है क्योंकि नरसिंहदेव प्रथम ओडिशा का पूर्वी गंग शासक था, जिसने कोणार्क का सूर्य मंदिर बनवाया। C गलत है क्योंकि हर्षवर्धन थानेसर और कन्नौज के वर्धन वंश का था। D गलत है क्योंकि रामचंद्र देवगिरि के यादव वंश का अंतिम प्रमुख शासक था। परीक्षा टिप: प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम, सबसे प्रतापी शासक मिहिर भोज।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 30th Dec 2021मध्यम

जाति-भेद के विरुद्ध चले आंदोलनों में से कौन अपने प्रभाव-क्षेत्र के साथ सही ढंग से जोड़ा गया है?

  1. A.सतनामी आंदोलन – पंजाब
  2. B.मतुआ संप्रदाय – तमिलनाडु
  3. C.सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र
  4. D.आर्य समाज – केरल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र

व्याख्या

सही उत्तर है C, सत्यशोधक समाज – महाराष्ट्र। ज्योतिराव फुले ने 1873 में पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र में जातिगत ऊँच-नीच और पुरोहित वर्ग के वर्चस्व से लड़ना था। फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई के साथ लड़कियों तथा तथाकथित निचली जातियों के बच्चों के लिए विद्यालय खोले थे और अपनी पुस्तक गुलामगिरी में शूद्रों की दशा की तुलना दासों से की थी। समाज ने ब्राह्मण पुरोहित के बिना विवाह कराए और किसानों, मजदूरों तथा महिलाओं के पक्ष में आवाज उठाई। A गलत है क्योंकि सतनामी आंदोलन गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की चर्मकार जातियों के बीच चलाया था, पंजाब में नहीं। B गलत है क्योंकि मतुआ संप्रदाय हरिचंद ठाकुर ने बंगाल के नामशूद्रों के बीच शुरू किया था, तमिलनाडु में नहीं। D गलत है क्योंकि आर्य समाज की स्थापना 1875 में दयानंद सरस्वती ने की और इसका प्रभाव पंजाब तथा उत्तर भारत में सबसे अधिक रहा, केरल में नहीं। परीक्षा टिप: फुले – सत्यशोधक समाज, पुणे 1873, गुलामगिरी; घासीदास – सतनामी, छत्तीसगढ़।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 07 Dec 2022, Shift 2आसान

तंजावुर किस वंश की राजधानी थी?

  1. A.पाल
  2. B.चोल
  3. C.वाकाटक
  4. D.परमार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चोल

व्याख्या

सही उत्तर है B, चोल। तंजावुर चोल वंश की राजधानी थी, जिसने नौवीं से तेरहवीं शताब्दी तक तमिल प्रदेश पर शासन किया। विजयालय चोल ने लगभग 850 ईस्वी में मुत्तरैयरों से तंजावुर छीनकर उसे अपनी राजधानी बनाया, और साम्राज्य के सबसे वैभवशाली वर्षों तक यही सत्ता का केंद्र रही। राजराज प्रथम ने यहीं बृहदेश्वर मंदिर बनवाया, जो द्रविड़ शैली का ग्रेनाइट से बना शिव मंदिर है, लगभग 1010 ईस्वी में पूरा हुआ और आज विश्व धरोहर स्थल है; उनके पुत्र राजेंद्र प्रथम ने बाद में गंगईकोंडचोलपुरम नई राजधानी बसाई। A गलत है क्योंकि पाल वंश बंगाल और बिहार पर शासन करता था, जिसके केंद्र पाटलिपुत्र और मुंगेर थे। C गलत है क्योंकि वाकाटक दक्कन में नंदिवर्धन और वत्सगुल्म से शासन करते थे। D गलत है क्योंकि परमार वंश मालवा पर राज करता था और उसकी राजधानी धार थी। परीक्षा टिप: तंजावुर और बृहदेश्वर मंदिर चोल शासक राजराज प्रथम से जोड़कर याद रखें।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · 10 April 2022आसान

न्क्रूमा उन पाँच नेताओं में से एक थे जिन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का मूल आधार तैयार किया। वे अफ़्रीका के किस देश के नेता थे?

  1. A.नाइजीरिया
  2. B.केन्या
  3. C.युगांडा
  4. D.घाना
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. घाना

व्याख्या

सही उत्तर है D, घाना। क्वामे न्क्रूमा घाना के नेता थे और गुटनिरपेक्ष आंदोलन के पाँच संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने 1957 में घाना को स्वतंत्रता दिलाई, जो उपनिवेशी शासन से मुक्त होने वाला उप-सहारा अफ़्रीका का पहला देश था, और वे पहले इसके प्रधानमंत्री तथा बाद में राष्ट्रपति बने। गुटनिरपेक्ष आंदोलन को पाँच नेताओं ने खड़ा किया, भारत के जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के गमाल अब्देल नासिर, यूगोस्लाविया के जोसिप ब्रोज़ टीटो, इंडोनेशिया के सुकर्णो और घाना के न्क्रूमा, जिन्होंने शीतयुद्ध के दौर में अमेरिकी या सोवियत गुट में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनके प्रयास से 1961 में बेलग्रेड में पहला गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन हुआ। A गलत है क्योंकि नाइजीरिया 1960 में स्वतंत्र हुआ और उसके आरंभिक नेता अबूबकर तफ़ावा बालेवा थे। B गलत है क्योंकि केन्या को आज़ादी की ओर जोमो केन्याटा ने ले जाया। C गलत है क्योंकि युगांडा के पहले प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोटे थे। परीक्षा टिप: गुटनिरपेक्ष आंदोलन के पाँच संस्थापक और 1961 का बेलग्रेड सम्मेलन याद रखें।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

निम्नलिखित में से किसने हैदराबाद को अपना केंद्र बनाकर निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह की उपाधि के साथ स्वयं को स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया?

  1. A.आसफ जाह द्वितीय
  2. B.बहादुर शाह
  3. C.अलीवर्दी खान
  4. D.चिन किलिच खान
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चिन किलिच खान

व्याख्या

सही उत्तर है D, चिन किलिच खान। चिन किलिच खान, जो अपनी उपाधि निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह से अधिक याद किए जाते हैं, एक मुगल अमीर थे जिन्हें मुहम्मद शाह ने दक्कन का सूबेदार नियुक्त किया। दिल्ली दरबार की साजिशों से ऊबकर वे दक्षिण लौटे, 1724 में शकर खेड़ा में अपने प्रतिद्वंद्वी मुबारिज खान को हराया और इसके बाद नाम भर के अतिरिक्त हर अर्थ में स्वतंत्र शासक की तरह दक्कन पर राज किया; उन्होंने हैदराबाद के आसफ जाही या निजाम वंश की नींव रखी, जो 1948 तक चला। उन्होंने मुगल निष्ठा का रूप बनाए रखा और बादशाह के नाम से सिक्के ढाले, पर अधिकारी स्वयं नियुक्त किए तथा युद्ध और संधि अपने निर्णय से की। विकल्प A गलत है, क्योंकि आसफ जाह द्वितीय यानी निजाम अली खान इसी वंश के बाद के शासक थे, संस्थापक नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बहादुर शाह 1707 से 1712 तक शासन करने वाला मुगल बादशाह था। विकल्प C गलत है, क्योंकि अलीवर्दी खान ने बंगाल में स्वतंत्रता कायम की थी, हैदराबाद में नहीं। परीक्षा टिप: हैदराबाद 1724 चिन किलिच खान, अवध 1722 सआदत खान, बंगाल मुर्शिद कुली खान।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 04 Aug, 2023, Shift 3मध्यम

द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध निम्नलिखित में से किस संधि पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ?

  1. A.मंगलोर की संधि
  2. B.आरकॉट की संधि
  3. C.वांडीवाश की संधि
  4. D.मद्रास की संधि
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मंगलोर की संधि

व्याख्या

सही उत्तर है A, मंगलोर की संधि। द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1780 से 1784 तक चला। हैदर अली ने मराठों और निज़ाम को साथ लेकर अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ाई लड़ी, और दिसंबर 1782 में उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र टीपू सुल्तान ने युद्ध जारी रखा तथा मार्च 1784 में मंगलोर की संधि पर हस्ताक्षर किए। इसकी शर्तों के अनुसार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से जीते क्षेत्र और बंदी वापस कर दिए, इसलिए युद्ध अनिर्णीत रहा और मैसूर की शक्ति घटी नहीं; यह अंतिम संधि थी जो कंपनी ने किसी भारतीय शक्ति के साथ बराबरी के आधार पर की। B गलत है क्योंकि आरकॉट की कोई संधि इस युद्ध का अंत नहीं करती। C गलत है क्योंकि वांडीवाश 1760 का युद्ध था जिसमें अंग्रेज़ों ने तृतीय कर्नाटक युद्ध में फ्रांसीसियों को हराया, वह संधि नहीं थी। D गलत है क्योंकि 1769 की मद्रास संधि से प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त हुआ था। परीक्षा टिप: चारों युद्धों का अंत - मद्रास 1769, मंगलोर 1784, श्रीरंगपट्टनम 1792 और 1799 में टीपू की मृत्यु।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 14 Jul 2023, Shift 1मध्यम

भारत में अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई रैयतवाड़ी राजस्व व्यवस्था किस सिद्धांत पर आधारित थी?

  1. A.स्मिथ का लगान सिद्धांत
  2. B.रिकार्डो का लगान सिद्धांत
  3. C.माल्थस का लगान सिद्धांत
  4. D.मार्क्स का लगान सिद्धांत
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रिकार्डो का लगान सिद्धांत

व्याख्या

सही उत्तर है B, रिकार्डो का लगान सिद्धांत। रैयतवाड़ी व्यवस्था डेविड रिकार्डो के लगान सिद्धांत पर खड़ी थी, जिसके अनुसार लगान वह अधिशेष है जो खेती की लागत निकालने के बाद बचता है, इसलिए राज्य उस अधिशेष को सीधे किसान से माँग सकता था। अलेक्जेंडर रीड और थॉमस मुनरो ने इसे मद्रास में लागू किया, और यह आगे बंबई, असम तथा बरार तक फैली, जिसमें ब्रिटिश भारत का लगभग आधा भाग आ गया। लगान का बंदोबस्त सीधे रैयत अर्थात किसान के साथ होता था, जिसे लगान देते रहने तक भूमि का स्वामी माना जाता था; बीच में कोई जमींदार नहीं था, माँग नकद और ऊँची रहती थी और बंदोबस्त लगभग हर तीस वर्ष में संशोधित होता था। A गलत है क्योंकि एडम स्मिथ ने श्रम विभाजन और मुक्त व्यापार पर लिखा, इस बंदोबस्त पर नहीं। C गलत है क्योंकि माल्थस अपने जनसंख्या सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं। D गलत है क्योंकि मार्क्स बाद के विचारक थे और ब्रिटिश राजस्व नीति में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। परीक्षा टिप: स्थायी बंदोबस्त - कॉर्नवालिस और बंगाल, रैयतवाड़ी - मुनरो और मद्रास, महालवाड़ी - होल्ट मैकेंजी और उत्तर-पश्चिमी प्रांत।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 09 Sept, 2024, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से किसने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा का गठन किया?

  1. A.कुँवर सिंह
  2. B.जे एम सेनगुप्ता
  3. C.जयप्रकाश नारायण
  4. D.स्वामी सहजानंद सरस्वती
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. स्वामी सहजानंद सरस्वती

व्याख्या

सही उत्तर है D, स्वामी सहजानंद सरस्वती। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की, जिसका उद्देश्य बिहार के किसानों को जमींदारों के विरुद्ध संगठित करना था। वे संन्यासी थे जो किसानों के काम में उतरे, और उनकी सभा अवैध करों तथा बेगार की समाप्ति और रैयत को काश्तकारी की सुरक्षा देने की माँग उठाती रही। बिहार में उन्होंने जो आधार खड़ा किया, वही आगे अखिल भारतीय किसान सभा बनी, जिसकी स्थापना 1936 में लखनऊ में हुई और जिसके पहले अध्यक्ष सहजानंद सरस्वती तथा महासचिव एन जी रंगा थे। A गलत है क्योंकि कुँवर सिंह ने बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया और 1858 में उनका निधन हो गया। B गलत है क्योंकि जे एम सेनगुप्ता बंगाल के कांग्रेस नेता थे और इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं थी। C गलत है क्योंकि जयप्रकाश नारायण बिहार के नेता होते हुए भी उन दिनों कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी खड़ी कर रहे थे, जिसकी स्थापना 1934 में हुई। परीक्षा टिप: बिहार प्रांतीय किसान सभा 1929 और अखिल भारतीय किसान सभा 1936 लखनऊ, दोनों सहजानंद सरस्वती से जुड़ी हैं।

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