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GK क्विजभारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 40

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 40) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 11 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मूल अवधारणाएं: मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार, एनपीए, दिवाला संहिता और बैंकिंग सुधार, महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली और अवधारणाएं और अन्य। इनमें से 7 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB JE · 18 Dec 2024, Shift 3कठिन

एकाधिकारात्मक प्रतिस्पर्धा में किसी एक फर्म के उत्पाद के लिए निम्नलिखित में से किस प्रकार की माँग होती है?

  1. A.सापेक्षतः लोचदार
  2. B.पूर्णतः लोचदार
  3. C.सापेक्षतः बेलोचदार
  4. D.पूर्णतः बेलोचदार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सापेक्षतः लोचदार

व्याख्या

सही उत्तर है A, सापेक्षतः लोचदार। एकाधिकारात्मक प्रतिस्पर्धा में किसी एक फर्म के सामने सापेक्षतः लोचदार माँग वक्र होता है, जो नीचे की ओर ढालू पर काफी चपटा होता है।

इस बाजार रूप में बहुत से विक्रेता होते हैं जो मिलते जुलते पर विभेदित उत्पाद बेचते हैं, जैसे साबुन, टूथपेस्ट या भोजनालय। निकट स्थानापन्न उपलब्ध होने के कारण जो फर्म अपना मूल्य बढ़ाती है वह बिक्री का बड़ा भाग खो देती है, इसलिए माँग मूल्य के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहती है। फिर भी उसका उत्पाद दूसरों के समरूप नहीं होता, इसलिए उसके पास कुछ मूल्य निर्धारण शक्ति बची रहती है और सभी ग्राहक नहीं छूटते, अर्थात माँग पूर्णतः लोचदार नहीं होती। विज्ञापन जैसे विक्रय व्यय इस बाजार की विशेषता हैं।

विकल्प B, पूर्णतः लोचदार, पूर्ण प्रतिस्पर्धा का लक्षण है, जहाँ फर्म मूल्य स्वीकारक होती है और माँग वक्र क्षैतिज रहता है। विकल्प C और D, सापेक्षतः तथा पूर्णतः बेलोचदार, वहाँ लागू नहीं होते जहाँ स्थानापन्न सरलता से मिल जाते हैं।

परीक्षा सुझाव: पूर्ण प्रतिस्पर्धा में क्षैतिज माँग; एकाधिकारात्मक प्रतिस्पर्धा में चपटा पर ढालू वक्र।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

किसी सावधि ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति कब वर्गीकृत किया जाता है, जब ब्याज या मूलधन कितने दिन से अधिक बकाया हो?

  1. A.30 दिन
  2. B.60 दिन
  3. C.90 दिन
  4. D.180 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 90 दिन

व्याख्या

सही उत्तर C, 90 दिन है। रिजर्व बैंक के आय निर्धारण और परिसंपत्ति वर्गीकरण संबंधी विवेकपूर्ण मानदंडों के अनुसार जब ब्याज या मूलधन की किस्त नब्बे दिन से अधिक बकाया रह जाती है, तब परिसंपत्ति निष्पादित नहीं रहती, और बैंक को उस ब्याज को आय मानना बंद करके प्रावधान करना पड़ता है। विकल्प A गलत है; तीस दिन की बकाया स्थिति खाते को केवल विशेष उल्लेख श्रेणी में डालती है, जो पूर्व चेतावनी का चरण है, एनपीए नहीं। विकल्प B इसी कारण गलत है, क्योंकि साठ दिन भी विशेष उल्लेख का एक चरण है। विकल्प D गलत है क्योंकि 180 दिन पुराना मानक था, जो 2004 से पहले चलता था, और प्रश्नपत्र उसे उन परीक्षार्थियों के लिए जाल बनाए रखते हैं जिन्होंने नियम पुरानी पुस्तक से पढ़ा है। फसल ऋणों में दिनों के स्थान पर फसल मौसम देखा जाता है।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

ऊंची मुद्रास्फीति के साथ ठहरा उत्पादन और ऊंची बेरोजगारी की स्थिति क्या कहलाती है?

  1. A.अपस्फीति
  2. B.डिसइन्फ्लेशन
  3. C.स्टैगफ्लेशन
  4. D.रिफ्लेशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्टैगफ्लेशन

व्याख्या

सही उत्तर C, स्टैगफ्लेशन है, जो ठहराव और मुद्रास्फीति दोनों शब्दों से बना है। नीति के लिए यह सबसे कठिन स्थिति है, क्योंकि मुद्रास्फीति का उपाय मांग घटाना है और बेरोजगारी का उपाय मांग बढ़ाना, इसलिए कोई एक कदम दोनों को ठीक नहीं करता; इसका शास्त्रीय उदाहरण उन्नीस सौ सत्तर के दशक के तेल मूल्य आघातों के बाद देखा गया। विकल्प A, अपस्फीति, गलत है क्योंकि वह सामान्य कीमत स्तर में निरंतर गिरावट है, जिसके साथ प्रायः उत्पादन भी घटता है। विकल्प B, डिसइन्फ्लेशन, गलत है क्योंकि उसमें केवल मुद्रास्फीति की दर धीमी पड़ती है और कीमतें बढ़ती रहती हैं, जो सामान्यतः समस्या के स्थान पर नीति की सफलता मानी जाती है। विकल्प D, रिफ्लेशन, गलत है क्योंकि वह अपस्फीति में पड़ी अर्थव्यवस्था में मांग तथा कीमतें बढ़ाने का सचेत प्रयास है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 8th December 2021, Shift 2मध्यम

'निर्गम मूल्य' (इश्यू प्राइस) क्या है?

  1. A.यह बाजार मूल्य के बराबर ही होता है।
  2. B.यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है।
  3. C.यह किसान द्वारा तय की गई कीमत होती है।
  4. D.यह बाजार मूल्य से अधिक कीमत होती है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है।

व्याख्या

सही उत्तर है B, यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है। निर्गम मूल्य वह रियायती दर है जिस पर सरकार के बफर स्टॉक का अनाज राशन दुकानों के जरिए बेचा जाता है, और इसे जानबूझकर बाजार मूल्य से नीचे रखा जाता है।

भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था तीन चरणों में चलती है। भारतीय खाद्य निगम किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदता है, उसे बफर स्टॉक में रखता है, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य की दुकानों तक पहुँचाता है। उन दुकानों पर जो दर ली जाती है, वही निर्गम मूल्य है, और सरकार जो चुकाती है तथा जो वसूलती है, उनका अंतर खाद्य सब्सिडी है। निर्गम मूल्य को नीचे रखना ही वह उपाय है जिससे गरीब परिवारों के लिए अनाज सस्ता बना रहता है।

A गलत है: यदि यह बाजार मूल्य के बराबर होता तो न सब्सिडी बचती और न राशन दुकानों की कोई जरूरत रहती। C गलत है: निर्गम मूल्य सरकार तय करती है, किसान नहीं। D गलत है: बाजार से ऊँची कीमत होने पर खरीदार राशन दुकानों से दूर ही हो जाते।

परीक्षा टिप: किसान को MSP मिलता है, राशन दुकान निर्गम मूल्य लेती है, और दोनों का अंतर खाद्य सब्सिडी है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सरफेसी अधिनियम, जो प्रतिभूत लेनदार को न्यायालय की डिक्री के बिना प्रतिभूति पर कब्जा लेकर बेचने देता है, किस वर्ष पारित हुआ?

  1. A.1993
  2. B.1998
  3. C.2002
  4. D.2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2002

व्याख्या

सही उत्तर C, 2002 है। वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम 2002 प्रतिभूत लेनदार को यह अधिकार देता है कि वह चूक करने वाले ऋणी को नोटिस देकर प्रतिभूत परिसंपत्ति पर कब्जा ले और उसे न्यायालय जाने के बिना बेच दे, तथा यह परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों का भी प्रावधान करता है, जो बैंकों से डूबे ऋण खरीदती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1993 उस अधिनियम का वर्ष है जिसने ऋण वसूली अधिकरण बनाए, और इन दोनों वर्षों को बदल देना सबसे सामान्य जाल है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1998 में बैंकिंग क्षेत्र सुधार पर दूसरी नरसिम्हम समिति रिपोर्ट आई थी। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का वर्ष है, जो सरफेसी के स्थान पर नहीं, उसके साथ चलती है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 13 Mar 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी योजना महिलाओं के लिए ब्याज में छूट वाली सूक्ष्म वित्त (माइक्रो फाइनेंस) योजना है?

  1. A.राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना
  2. B.सामाजिक सुरक्षा पायलट योजना
  3. C.महिला समृद्धि योजना
  4. D.राजराजेश्वरी महिला कल्याण योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महिला समृद्धि योजना

व्याख्या

सही उत्तर है C, महिला समृद्धि योजना। यह वही सूक्ष्म वित्त योजना है जिसमें महिलाओं को रियायती ब्याज दर पर छोटी राशि का ऋण मिलता है, इसलिए ब्याज में छूट इसी योजना का अंग है। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम चलाता है, और धन राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों तथा स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं तक पहुँचता है, मुख्य रूप से छोटे व्यापार और स्वरोजगार के लिए। अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए ऐसी ही योजना राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम चलाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना गरीब गर्भवती महिलाओं को एक बार नकद सहायता देती थी और बाद में जननी सुरक्षा योजना में मिला दी गई। विकल्प B गलत है क्योंकि वह सामाजिक सुरक्षा का प्रायोगिक कार्यक्रम है, महिलाओं की ऋण योजना नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि राजराजेश्वरी महिला कल्याण योजना महिलाओं के लिए दुर्घटना बीमा है, ऋण नहीं। परीक्षा टिप: महिला समृद्धि योजना का अर्थ है NBCFDC द्वारा महिलाओं को रियायती ब्याज पर सूक्ष्म ऋण।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

प्रधानमंत्री जन धन योजना किस वर्ष आरंभ की गई थी?

  1. A.2012
  2. B.2014
  3. C.2015
  4. D.2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2014

व्याख्या

सही उत्तर B, 2014 है। प्रधानमंत्री जन धन योजना 28 अगस्त 2014 को वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन के रूप में आरंभ हुई, जिसमें शून्य शेष वाला मूल बचत बैंक जमा खाता, दुर्घटना बीमा कवर सहित रुपे डेबिट कार्ड, और संतोषजनक संचालन पर ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2012 में रुपे कार्ड नेटवर्क आरंभ हुआ और उसी वर्ष बिना अतिरिक्त शर्तों वाले खाते का नाम मूल बचत बैंक जमा खाता रखा गया। विकल्प C गलत है क्योंकि 2015 सामाजिक सुरक्षा पैकेज का वर्ष है, जब प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और मुद्रा घोषित हुईं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 में एनपीसीआई ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस आरंभ किया। परीक्षा में जन धन योजना के साथ 28 अगस्त की तिथि, रुपे कार्ड और ओवरड्राफ्ट सुविधा तीनों पूछे जाते हैं, इसलिए वर्ष के साथ ये विशेषताएँ भी याद रखनी चाहिए।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 13 Sept, 2024, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा सार्वजनिक क्षेत्र का उद्योग है?

  1. A.बीएचईएल
  2. B.रिलायंस
  3. C.टाटा
  4. D.अदानी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बीएचईएल

व्याख्या

सही उत्तर है A, बीएचईएल। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, अर्थात उसके अधिकांश शेयर सरकार के पास हैं और प्रबंधन पर सरकार का नियंत्रण है। वर्ष 1964 में स्थापित और नई दिल्ली में मुख्यालय वाली यह कंपनी देश में बिजलीघरों के उपकरण, जैसे बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है, और इसे महारत्न का दर्जा प्राप्त है, जो किसी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम को मिलने वाला सर्वोच्च दर्जा है। सार्वजनिक उपक्रम केवल लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए काम करते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज अंबानी परिवार द्वारा प्रवर्तित निजी कंपनी है। विकल्प C गलत है, क्योंकि जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित टाटा समूह निजी स्वामित्व वाला समूह है, चाहे उसकी कई कंपनियाँ देश के लिए महत्वपूर्ण हों। विकल्प D गलत है, क्योंकि अदानी समूह भी निजी व्यावसायिक घराना है। परीक्षा टिप: सार्वजनिक उपक्रम सरकारी होते हैं, और बीएचईएल, सेल, ओएनजीसी, गेल, एनटीपीसी तथा आईओसी महारत्न कंपनियाँ हैं।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Services General Studies Offमध्यम

नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (A) और दूसरा कारण (R) के रूप में। अभिकथन (A): सरकार ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) 2020-30 की अवधि के लिए शुरू की है। कारण (R): एनआईपी का उद्देश्य सभी को अवसंरचना तक समान पहुंच देना है। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए।

  1. A.(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. B.(A) और (R) दोनों सही हैं पर (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. C.(A) सही है पर (R) गलत है
  4. D.(A) गलत है पर (R) सही है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. (A) गलत है पर (R) सही है

व्याख्या

सही उत्तर D, (A) गलत है पर (R) सही है है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन की घोषणा 2019-20 के बजट भाषण में हुई और आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने इसे 2019-20 से 2024-25 के पांच वर्षों के लिए तैयार किया, जिसमें लगभग 111 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का अनुमान था। इसलिए अभिकथन में दी अवधि 2020-30 गलत है, जिससे A और B दोनों कट जाते हैं, क्योंकि वे अभिकथन को सही मानते हैं। कारण एनआईपी का उद्देश्य ठीक बताता है: रिपोर्ट का लक्ष्य हर नागरिक को विश्वस्तरीय अवसंरचना तक समान पहुंच देना है, और यह उद्देश्य वास्तविक है। C गलत है क्योंकि वह स्थिति उलट देता है, गलत अभिकथन को सही और सही कारण को गलत कहता है। ऐसे युग्मों में पहले अभिकथन की जांच करें, क्योंकि गलत अभिकथन उत्तर तुरंत तय कर देता है।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 8 Sept 2022, Shift 1मध्यम

उत्पादन की किस अवस्था में सीमांत उत्पाद वक्र ऋणात्मक हो जाता है?

  1. A.अवस्था 2
  2. B.अवस्था 3
  3. C.अवस्था 1
  4. D.अवस्था 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अवस्था 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, अवस्था 3। परिवर्ती अनुपात का नियम अल्पकालीन उत्पादन को तीन अवस्थाओं में बाँटता है। पहली अवस्था यानी बढ़ते प्रतिफल में कुल उत्पाद और सीमांत उत्पाद दोनों बढ़ते हैं, क्योंकि स्थिर साधन का पूरा उपयोग अभी नहीं हुआ है। दूसरी अवस्था यानी घटते प्रतिफल में सीमांत उत्पाद घटता है पर धनात्मक रहता है, इसलिए कुल उत्पाद बढ़ता रहता है और इसी अवस्था के अंत में अधिकतम होता है, जहाँ सीमांत उत्पाद शून्य हो जाता है। तीसरी अवस्था यानी ऋणात्मक प्रतिफल में परिवर्तनशील साधन की अतिरिक्त इकाइयाँ स्थिर साधन पर भीड़ बन जाती हैं, सीमांत उत्पाद ऋणात्मक हो जाता है और कुल उत्पाद घटने लगता है। समझदार उत्पादक इसीलिए दूसरी अवस्था में काम करता है और तीसरी अवस्था में कभी नहीं जाता। A गलत है क्योंकि दूसरी अवस्था में सीमांत उत्पाद घटता है पर धनात्मक रहता है। C गलत है क्योंकि पहली अवस्था में सीमांत उत्पाद बढ़ता है। D गलत है क्योंकि इस नियम में तीन ही अवस्थाएँ होती हैं, चौथी नहीं। परीक्षा टिप: कुल उत्पाद ठीक वहीं अधिकतम होता है जहाँ सीमांत उत्पाद शून्य हो।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

आय वितरण की असमानता मापने के लिए किस वक्र का प्रयोग होता है और उससे जुड़ा गुणांक कौन है?

  1. A.फिलिप्स वक्र और दुख सूचकांक
  2. B.लैफर वक्र और कर अनुपात
  3. C.लॉरेंज वक्र और गिनी गुणांक
  4. D.एंजेल वक्र और मांग की लोच
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लॉरेंज वक्र और गिनी गुणांक

व्याख्या

सही उत्तर C, लॉरेंज वक्र और गिनी गुणांक है। लॉरेंज वक्र जनसंख्या के संचयी हिस्से के सामने आय के संचयी हिस्से को अंकित करता है, इसलिए सीधा विकर्ण पूर्ण समानता दर्शाएगा और वक्र उस रेखा से जितना अधिक झुकेगा, असमानता उतनी अधिक होगी। गिनी गुणांक दोनों के बीच का क्षेत्र मापता है और उसका मान पूर्ण समानता के लिए शून्य से पूर्ण असमानता के लिए एक तक रहता है। विकल्प A गलत है क्योंकि फिलिप्स वक्र मुद्रास्फीति और बेरोजगारी का संबंध बताता है तथा दुख सूचकांक दोनों दरें जोड़ देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि लैफर वक्र दिखाता है कि एक बिंदु के बाद कर दर बढ़ाने पर कर राजस्व घटने लगता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एंजेल का नियम और एंजेल वक्र आय बढ़ने पर घरेलू व्यय में भोजन के घटते हिस्से से संबंधित हैं।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

2017 में अपनाई गई औद्योगिक उत्पादन सूचकांक श्रेणी का आधार वर्ष कौन सा है?

  1. A.1993-94
  2. B.2004-05
  3. C.2011-12
  4. D.2017-18
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2011-12

व्याख्या

सही उत्तर C, 2011-12 है। 2017 में आईआईपी का आधार वर्ष 2011-12 कर दिया गया, वस्तु समूह को ताज़ा करके उसमें वे वस्तुएँ ली गईं जो पिछले संशोधन के बाद महत्वपूर्ण हो चुकी थीं, और भार उसी वर्ष के सकल मूल्य वर्धन हिस्सों से फिर निकाले गए। विकल्प B, 2004-05, उस श्रेणी का आधार था जिसका स्थान 2011-12 की श्रेणी ने लिया, और वही उत्तर वह अभ्यर्थी देता है जिसने पुरानी पाठ्यपुस्तक रटी है। विकल्प A, 1993-94, उससे भी पहले का आधार था, जो 2004-05 से पूर्व प्रयोग होता था, और वह उस काल के कई अन्य भारतीय सूचकांकों का भी आधार वर्ष रहा। विकल्प D, 2017-18, केवल वह वर्ष है जिसमें संशोधन की घोषणा हुई और वह इस सूचकांक का आधार वर्ष कभी नहीं रहा। आधार वर्ष ऐसा सामान्य वर्ष चुना जाता है जिसमें कोई असाधारण उलटफेर न हो, जिससे तुलना अर्थपूर्ण रहे।

Q13.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में ऋण वसूली अधिकरण किस वर्ष के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित किए गए?

  1. A.1985
  2. B.1993
  3. C.2002
  4. D.2013
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1993

व्याख्या

सही उत्तर B, 1993 है। बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को शोध्य ऋण वसूली अधिनियम 1993 ने ऋण वसूली अधिकरण बनाए और उनके ऊपर ऋण वसूली अपीलीय अधिकरण रखे, जिससे बैंकों के वसूली वाद सामान्य दीवानी न्यायालयों से हटाए जा सकें, जहां वे वर्षों लंबित रहते थे। विकल्प A गलत है क्योंकि 1985 बीमार औद्योगिक कंपनी अधिनियम का वर्ष है, जिसके औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड का स्थान बाद में दिवाला संहिता ने लिया। विकल्प C गलत है क्योंकि 2002 सरफेसी अधिनियम का वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2013 कंपनी अधिनियम का वर्ष है। दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत यही ऋण वसूली अधिकरण व्यक्तियों और भागीदारी फर्मों के दिवाला का निर्णायक प्राधिकारी भी है। इसलिए क्रम याद रखें: 1985 बीमार कंपनी अधिनियम, 1993 ऋण वसूली अधिकरण, 2002 सरफेसी और 2016 दिवाला संहिता, क्योंकि प्रश्न इन्हीं चार वर्षों को आपस में बदलते हैं।

Q14.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

मांग की कीमत लोच शून्य होने (जीरो प्राइस इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड) का तात्पर्य है

  1. A.कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता
  2. B.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
  3. C.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक विशाल परिवर्तन होता है
  4. D.कीमत में एक बड़े परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता

व्याख्या

सही उत्तर है A, कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता। लोच बताती है कि कीमत बदलने पर मांग की मात्रा कितनी बदलती है, और शून्य लोच का अर्थ है कोई प्रतिक्रिया नहीं। मांग की कीमत लोच, मांग की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से भाग देकर निकलती है। जब यह शून्य हो, तो मांग पूर्णतः बेलोचदार होती है और मांग वक्र एक खड़ी सीधी रेखा होता है। इंसुलिन जैसी जीवनरक्षक दवाएँ इसके सबसे करीब हैं, क्योंकि मरीज़ कीमत कुछ भी हो, उतनी ही खुराक खरीदता है। दूसरे छोर पर पूर्णतः लोचदार मांग, जिसकी लोच अनंत होती है, क्षैतिज मांग वक्र देती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मांग में कितना भी छोटा परिवर्तन हो, लोच शून्य से अधिक हो जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि छोटे कीमत परिवर्तन पर बड़ी प्रतिक्रिया लोचदार मांग है, जिसकी लोच एक से अधिक होती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बड़े कीमत परिवर्तन पर छोटी प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत बेलोचदार मांग है, जिसकी लोच शून्य और एक के बीच होती है। परीक्षा टिप: शून्य लोच का वक्र खड़ा, अनंत लोच का वक्र क्षैतिज।

Q15.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

एकीकृत भुगतान इंटरफेस को कौन संगठन विकसित और संचालित करता है?

  1. A.भारतीय रिज़र्व बैंक
  2. B.भारतीय स्टेट बैंक
  3. C.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
  4. D.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम

व्याख्या

सही उत्तर C, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम है। एनपीसीआई, जो 2008 में देश के खुदरा भुगतान के शीर्ष संगठन के रूप में बना, एकीकृत भुगतान इंटरफेस के साथ रुपे, आईएमपीएस, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह तथा फास्टैग भी चलाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रिज़र्व बैंक ने भारतीय बैंक संघ के साथ एनपीसीआई को प्रवर्तित किया और भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भुगतान प्रणालियों का नियमन करता है, परंतु यूपीआई स्वयं नहीं चलाता; वह आरटीजीएस और एनईएफटी चलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक इस प्रणाली का केवल एक सदस्य बैंक है। विकल्प D गलत है क्योंकि सेबी प्रतिभूति बाजार का नियामक है और खुदरा भुगतान में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसलिए प्रश्न में नियामक और संचालक का अंतर ध्यान से देखना चाहिए: नियमन रिज़र्व बैंक करता है, संचालन एनपीसीआई करता है।

Q16.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

भारत ने रुपये की चालू खाते पर पूर्ण परिवर्तनीयता किस वर्ष अपनाई थी?

  1. A.1991
  2. B.1994
  3. C.1997
  4. D.2000
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1994

व्याख्या

सही उत्तर B, 1994 है। अगस्त 1994 में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुच्छेद आठ के दायित्व स्वीकार किए और रुपये को चालू खाते पर पूर्ण रूप से परिवर्तनीय बना दिया, जिससे व्यापार, यात्रा, शिक्षा और प्रेषण के लिए विदेशी मुद्रा बाजार दर पर स्वतंत्र रूप से मिलने लगी। विकल्प A गलत है क्योंकि 1991 भुगतान संतुलन संकट और दो चरणों वाले अवमूल्यन का वर्ष है, परिवर्तनीयता का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1997 पहली तारापोर समिति का वर्ष है, जिसने पूँजी खाता परिवर्तनीयता का खाका बनाया; वह परिवर्तनीयता आज भी केवल आंशिक है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2000 में ऐसा कुछ नहीं हुआ। क्रम याद रखें: 1991 में संकट और अवमूल्यन, 1992 में दोहरी विनिमय दर, 1993 में एकीकरण और 1994 में चालू खाता परिवर्तनीयता।

Q17.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में प्रयुक्त हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का कितना हिस्सा अनुदान के रूप में देती है?

  1. A.20 प्रतिशत
  2. B.40 प्रतिशत
  3. C.60 प्रतिशत
  4. D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 40 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 40 प्रतिशत है। टोल और वार्षिकी दोनों मॉडल अड़चन में आने के बाद सड़क निर्माण को पुनर्जीवित करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल अपनाया गया। काम चलने के दौरान प्राधिकरण बोली परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत निर्माण अनुदान के रूप में किश्तों में जारी करता है, और शेष साठ प्रतिशत रियायतग्राही अपनी पूंजी तथा ऋणदाताओं से जुटाता है। वही साठ प्रतिशत पूरा होने के बाद बैंक दर से जुड़े ब्याज के साथ वार्षिकियों की श्रृंखला में वापस मिलता है, और टोल प्राधिकरण स्वयं वसूलता है। A यानी बीस प्रतिशत केंद्रीय व्यवहार्यता अंतर निधि की सीमा है, एचएएम अनुदान नहीं। C यानी साठ प्रतिशत रियायतग्राही का हिस्सा है, इसलिए यह विकल्प बंटवारा उलट देता है। D होने पर यह भागीदारी नहीं, ईपीसी अनुबंध बन जाता।

Q18.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात में निम्नलिखित में से कौन सही अंतर है?

  1. A.नकद आरक्षित अनुपात रिजर्व बैंक के पास नकद में रखा जाता है; सांविधिक तरलता अनुपात बैंक स्वयं नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखता है
  2. B.नकद आरक्षित अनुपात बैंक स्वयं रखता है; सांविधिक तरलता अनुपात रिजर्व बैंक के पास रखा जाता है
  3. C.दोनों रिजर्व बैंक के पास नकद में रखे जाते हैं
  4. D.दोनों बैंक स्वयं सरकारी प्रतिभूतियों में रखता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नकद आरक्षित अनुपात रिजर्व बैंक के पास नकद में रखा जाता है; सांविधिक तरलता अनुपात बैंक स्वयं नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखता है

व्याख्या

सही उत्तर A है। नकद आरक्षित अनुपात बैंक की शुद्ध मांग तथा सावधि देयताओं का वह अनुपात है जो उसे भारतीय रिजर्व बैंक के पास नकद रखना होता है और जिस पर उसे कोई ब्याज नहीं मिलता, और सांविधिक तरलता अनुपात वह अनुपात है जो उसे अपने पास नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों, मुख्यतः सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में रखना होता है और जिस पर उसे प्रतिफल मिलता है। विकल्प B गलत है क्योंकि वह दोनों को उलट देता है। विकल्प C गलत है क्योंकि केवल नकद आरक्षित अनुपात केंद्रीय बैंक के पास रखा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि नकद आरक्षित अनुपात प्रतिभूतियों से पूरा नहीं किया जा सकता। दोनों मौद्रिक नीति के परिमाणात्मक उपकरण हैं और किसी एक को बढ़ाने पर बैंक के पास ऋण देने योग्य धन घट जाता है।

Q19.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

जिस समिति की 1991 की रिपोर्ट ने भारत में बैंकिंग क्षेत्र सुधारों की रूपरेखा दी, उसके अध्यक्ष कौन थे?

  1. A.एम. नरसिम्हम
  2. B.रघुराम राजन
  3. C.बिमल जालान
  4. D.उर्जित पटेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एम. नरसिम्हम

व्याख्या

सही उत्तर A, एम. नरसिम्हम है। उनकी अध्यक्षता वाली 1991 की वित्तीय प्रणाली समिति और 1998 की बैंकिंग क्षेत्र सुधार समिति ने आय निर्धारण तथा प्रावधान के विवेकपूर्ण मानदंड, जोखिम-भारित परिसंपत्तियों पर न्यूनतम पूंजी अनुपात, सांविधिक चलनिधि अनुपात तथा नकद आरक्षित अनुपात में कमी, नए निजी बैंकों के प्रवेश और बैंक बोर्डों को अधिक स्वायत्तता की सिफारिश की, और यही सुधार का आधार बने। विकल्प B गलत है क्योंकि रघुराम राजन ने 2008 की वित्तीय क्षेत्र सुधार समिति की अध्यक्षता की और बाद में गवर्नर के रूप में 2015 की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा कराई। विकल्प C गलत है क्योंकि बिमल जालान रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे और बाद में उसके आर्थिक पूंजी ढांचे पर समिति के अध्यक्ष बने। विकल्प D गलत है क्योंकि उर्जित पटेल मौद्रिक नीति ढांचे पर समिति के अध्यक्ष थे। ध्यान दें कि 1991 की समिति को वित्तीय प्रणाली समिति और 1998 की समिति को बैंकिंग क्षेत्र सुधार समिति कहा जाता है, और प्रश्न में दोनों में से कोई भी वर्ष दिया जा सकता है।

Q20.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में भुगतान बैंक को निम्नलिखित में से किस कार्य की अनुमति नहीं है?

  1. A.ग्राहकों से छोटी जमा स्वीकार करना
  2. B.ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना
  3. C.ग्राहकों को डेबिट कार्ड जारी करना
  4. D.अभिकर्ता के रूप में बीमा उत्पाद बेचना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना

व्याख्या

सही उत्तर B, ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना है। भुगतान बैंकों को नचिकेत मोर समिति की सिफारिश पर जमा तथा भुगतान की पहुँच बढ़ाने के लिए लाइसेंस दिए गए, और रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देश उन्हें ऋण देने तथा क्रेडिट कार्ड जारी करने से स्पष्ट रूप से रोकते हैं; उनका धन सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य बैंकों की जमा में लगना चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रति ग्राहक एक सीमा तक जमा लेना ही उनका मुख्य कार्य है। विकल्प C गलत है क्योंकि वे डेबिट तथा एटीएम कार्ड जारी कर सकते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि उन्हें अभिकर्ता के रूप में बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे सरल उत्पाद बेचने की अनुमति है। लघु वित्त बैंक दूसरी नई श्रेणी है और वे ऋण देते हैं।

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