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GK क्विजभारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 39

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 39) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 10 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली और अवधारणाएं, खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एनपीए, दिवाला संहिता और बैंकिंग सुधार और अन्य। इनमें से 12 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · UPSC Civil Services (Prelims) Official Pमध्यम

प्रच्छन्न बेरोजगारी का सामान्य अर्थ है

  1. A.बहुत बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार रहते हैं
  2. B.वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध नहीं है
  3. C.श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है
  4. D.श्रमिकों की उत्पादकता कम होती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है

व्याख्या

सही उत्तर C, श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है है। प्रच्छन्न बेरोजगारी, जिसे छिपी बेरोजगारी भी कहा जाता है, वहां होती है जहां किसी काम में आवश्यकता से अधिक व्यक्ति लगे हों, इसलिए उनमें से एक को हटा देने पर उत्पादन में कोई कमी नहीं आएगी; उस श्रमिक का सीमांत योगदान शून्य है। भारतीय कृषि इसका मानक उदाहरण है, जहां पूरा परिवार उस जोत पर काम करता है जिसे दो सदस्य संभाल सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि खुली बेरोजगारी, जिसमें लोग प्रत्यक्ष रूप से काम से वंचित दिखते हैं, पूरी तरह भिन्न श्रेणी है। विकल्प B गलत है क्योंकि वैकल्पिक रोजगार का अभाव इस स्थिति का कारण है, परिभाषा नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि कम उत्पादकता खराब उपकरण, खराब भूमि या कम कौशल से भी हो सकती है, जो मात्रा का विषय है, जबकि प्रच्छन्न बेरोजगारी विशेष रूप से अतिरिक्त श्रमिक की शून्य सीमांत उत्पादकता को दर्शाती है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 8th December 2021, Shift 2मध्यम

'निर्गम मूल्य' (इश्यू प्राइस) क्या है?

  1. A.यह बाजार मूल्य के बराबर ही होता है।
  2. B.यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है।
  3. C.यह किसान द्वारा तय की गई कीमत होती है।
  4. D.यह बाजार मूल्य से अधिक कीमत होती है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है।

व्याख्या

सही उत्तर है B, यह बाजार मूल्य से कम कीमत होती है। निर्गम मूल्य वह रियायती दर है जिस पर सरकार के बफर स्टॉक का अनाज राशन दुकानों के जरिए बेचा जाता है, और इसे जानबूझकर बाजार मूल्य से नीचे रखा जाता है।

भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था तीन चरणों में चलती है। भारतीय खाद्य निगम किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदता है, उसे बफर स्टॉक में रखता है, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य की दुकानों तक पहुँचाता है। उन दुकानों पर जो दर ली जाती है, वही निर्गम मूल्य है, और सरकार जो चुकाती है तथा जो वसूलती है, उनका अंतर खाद्य सब्सिडी है। निर्गम मूल्य को नीचे रखना ही वह उपाय है जिससे गरीब परिवारों के लिए अनाज सस्ता बना रहता है।

A गलत है: यदि यह बाजार मूल्य के बराबर होता तो न सब्सिडी बचती और न राशन दुकानों की कोई जरूरत रहती। C गलत है: निर्गम मूल्य सरकार तय करती है, किसान नहीं। D गलत है: बाजार से ऊँची कीमत होने पर खरीदार राशन दुकानों से दूर ही हो जाते।

परीक्षा टिप: किसान को MSP मिलता है, राशन दुकान निर्गम मूल्य लेती है, और दोनों का अंतर खाद्य सब्सिडी है।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

किसी सावधि ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति कब वर्गीकृत किया जाता है, जब ब्याज या मूलधन कितने दिन से अधिक बकाया हो?

  1. A.30 दिन
  2. B.60 दिन
  3. C.90 दिन
  4. D.180 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 90 दिन

व्याख्या

सही उत्तर C, 90 दिन है। रिजर्व बैंक के आय निर्धारण और परिसंपत्ति वर्गीकरण संबंधी विवेकपूर्ण मानदंडों के अनुसार जब ब्याज या मूलधन की किस्त नब्बे दिन से अधिक बकाया रह जाती है, तब परिसंपत्ति निष्पादित नहीं रहती, और बैंक को उस ब्याज को आय मानना बंद करके प्रावधान करना पड़ता है। विकल्प A गलत है; तीस दिन की बकाया स्थिति खाते को केवल विशेष उल्लेख श्रेणी में डालती है, जो पूर्व चेतावनी का चरण है, एनपीए नहीं। विकल्प B इसी कारण गलत है, क्योंकि साठ दिन भी विशेष उल्लेख का एक चरण है। विकल्प D गलत है क्योंकि 180 दिन पुराना मानक था, जो 2004 से पहले चलता था, और प्रश्नपत्र उसे उन परीक्षार्थियों के लिए जाल बनाए रखते हैं जिन्होंने नियम पुरानी पुस्तक से पढ़ा है। फसल ऋणों में दिनों के स्थान पर फसल मौसम देखा जाता है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 13 Mar 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी योजना महिलाओं के लिए ब्याज में छूट वाली सूक्ष्म वित्त (माइक्रो फाइनेंस) योजना है?

  1. A.राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना
  2. B.सामाजिक सुरक्षा पायलट योजना
  3. C.महिला समृद्धि योजना
  4. D.राजराजेश्वरी महिला कल्याण योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महिला समृद्धि योजना

व्याख्या

सही उत्तर है C, महिला समृद्धि योजना। यह वही सूक्ष्म वित्त योजना है जिसमें महिलाओं को रियायती ब्याज दर पर छोटी राशि का ऋण मिलता है, इसलिए ब्याज में छूट इसी योजना का अंग है। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम चलाता है, और धन राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों तथा स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं तक पहुँचता है, मुख्य रूप से छोटे व्यापार और स्वरोजगार के लिए। अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए ऐसी ही योजना राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम चलाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना गरीब गर्भवती महिलाओं को एक बार नकद सहायता देती थी और बाद में जननी सुरक्षा योजना में मिला दी गई। विकल्प B गलत है क्योंकि वह सामाजिक सुरक्षा का प्रायोगिक कार्यक्रम है, महिलाओं की ऋण योजना नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि राजराजेश्वरी महिला कल्याण योजना महिलाओं के लिए दुर्घटना बीमा है, ऋण नहीं। परीक्षा टिप: महिला समृद्धि योजना का अर्थ है NBCFDC द्वारा महिलाओं को रियायती ब्याज पर सूक्ष्म ऋण।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 03 Dec 2022, Shift 4मध्यम

बाजार में उपलब्ध रोजगार और उपलब्ध श्रमिक के कौशल के बेमेल से उत्पन्न बेरोजगारी कहलाती है

  1. A.मौसमी
  2. B.संरचनात्मक
  3. C.आर्थिक
  4. D.घर्षणात्मक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. संरचनात्मक

व्याख्या

सही उत्तर B, संरचनात्मक बेरोजगारी है। यह तब उत्पन्न होती है जब अर्थव्यवस्था की संरचना बदल जाती है और जो रोजगार बन रहे हैं उनके लिए ऐसे कौशल चाहिए जो उपलब्ध श्रमिकों के पास नहीं हैं; यह लंबे समय तक चलती है और इसका उपाय मांग के पुनरुद्धार के स्थान पर पुनर्प्रशिक्षण तथा शिक्षा है। विकल्प A, मौसमी बेरोजगारी, गलत है क्योंकि वह उन महीनों की बेकारी है जब श्रमिक के व्यवसाय में काम नहीं होता, जैसे बोआई और कटाई के बीच कृषि में अथवा चीनी और बर्फ उद्योग में। विकल्प C, आर्थिक, गलत है क्योंकि अर्थशास्त्र में इस नाम की कोई मान्य श्रेणी नहीं है। विकल्प D, घर्षणात्मक बेरोजगारी, गलत है क्योंकि वह एक नौकरी से दूसरी में जाते लोगों की अल्पकालिक बेकारी है, जो स्वस्थ अर्थव्यवस्था में भी रहती है और जिसे खोज बेरोजगारी भी कहा जाता है।

Q6.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 13 Sept, 2024, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा सार्वजनिक क्षेत्र का उद्योग है?

  1. A.बीएचईएल
  2. B.रिलायंस
  3. C.टाटा
  4. D.अदानी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बीएचईएल

व्याख्या

सही उत्तर है A, बीएचईएल। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, अर्थात उसके अधिकांश शेयर सरकार के पास हैं और प्रबंधन पर सरकार का नियंत्रण है। वर्ष 1964 में स्थापित और नई दिल्ली में मुख्यालय वाली यह कंपनी देश में बिजलीघरों के उपकरण, जैसे बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है, और इसे महारत्न का दर्जा प्राप्त है, जो किसी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम को मिलने वाला सर्वोच्च दर्जा है। सार्वजनिक उपक्रम केवल लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए काम करते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज अंबानी परिवार द्वारा प्रवर्तित निजी कंपनी है। विकल्प C गलत है, क्योंकि जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित टाटा समूह निजी स्वामित्व वाला समूह है, चाहे उसकी कई कंपनियाँ देश के लिए महत्वपूर्ण हों। विकल्प D गलत है, क्योंकि अदानी समूह भी निजी व्यावसायिक घराना है। परीक्षा टिप: सार्वजनिक उपक्रम सरकारी होते हैं, और बीएचईएल, सेल, ओएनजीसी, गेल, एनटीपीसी तथा आईओसी महारत्न कंपनियाँ हैं।

Q7.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

जो परिसंपत्ति बारह महीने तक गैर-निष्पादित बनी रही हो, उसे किस श्रेणी में रखा जाता है?

  1. A.मानक परिसंपत्ति
  2. B.अवमानक परिसंपत्ति
  3. C.संदिग्ध परिसंपत्ति
  4. D.हानि परिसंपत्ति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अवमानक परिसंपत्ति

व्याख्या

सही उत्तर B, अवमानक परिसंपत्ति है। वर्गीकरण एक क्रम में चलता है: जो खाता अभी गैर-निष्पादित हुआ है वह पहले बारह महीने तक अवमानक रहता है, उसके बाद संदिग्ध हो जाता है, और जब वसूली की आशा नहीं रहती तब उसे हानि परिसंपत्ति कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मानक परिसंपत्ति वह है जिसमें भुगतान नियमित है और जिसमें सामान्य से अधिक जोखिम नहीं है, अर्थात वह एनपीए ही नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि परिसंपत्ति संदिग्ध तभी बनती है जब वह बारह महीने से अधिक अवमानक रह जाए, और संदिग्ध श्रेणी स्वयं प्रावधान के लिए आयु के अनुसार बांटी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि हानि परिसंपत्ति वह है जिसे बैंक, उसके आंतरिक लेखा परीक्षक या रिजर्व बैंक निरीक्षण अवसूल्य मान चुके हों, भले कुछ अवशिष्ट मूल्य बचा हो।

Q8.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 19 Sept 2022, Shift 3मध्यम

अर्थशास्त्र में निम्नलिखित में से कौन-सा वक्र उल्टे U आकार का होता है?

  1. A.सीमांत उत्पाद वक्र
  2. B.अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र
  3. C.औसत परिवर्तनशील लागत वक्र
  4. D.दीर्घकालीन औसत लागत वक्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सीमांत उत्पाद वक्र

व्याख्या

सही उत्तर है A, सीमांत उत्पाद वक्र। परिवर्तनशील साधन का सीमांत उत्पाद पहले बढ़ता है, एक ऊँचाई पर पहुँचता है और फिर घटने लगता है, इसलिए इसका वक्र उल्टे U के आकार का बनता है। इसके पीछे परिवर्ती अनुपात का नियम है। पहली अवस्था में श्रम की हर अतिरिक्त इकाई को स्थिर साधन भरपूर मिलता है, इसलिए हर इकाई पिछली इकाई से ज्यादा उत्पादन जोड़ती है; शिखर पर स्थिर साधन का सर्वोत्तम उपयोग होता है; उसके बाद हर अतिरिक्त श्रमिक के हिस्से में स्थिर साधन कम पड़ने लगता है, इसलिए उत्पादन में जुड़ने वाली मात्रा घटती जाती है और ऋणात्मक भी हो सकती है। B गलत है क्योंकि अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र U आकार का होता है, पहले घटता और फिर बढ़ता है। C गलत है क्योंकि औसत परिवर्तनशील लागत वक्र भी इसी कारण U आकार का होता है। D गलत है क्योंकि दीर्घकालीन औसत लागत वक्र अल्पकालीन वक्रों का चपटा U आकार वाला आवरण वक्र है। परीक्षा टिप: उत्पाद वक्र उल्टा U, लागत वक्र सीधा U।

Q9.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 27 Aug, 2019, Shift 3आसान

रेपो दर क्या है?

  1. A.वह अल्पकालिक दर जिस पर बैंक ग्राहकों को ऋण देता है।
  2. B.वह अल्पकालिक दर जिस पर सरकार बैंक को ऋण देती है।
  3. C.वह अल्पकालिक दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों को ऋण देता है।
  4. D.वह अल्पकालिक दर जिस पर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को ऋण देता है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वह अल्पकालिक दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों को ऋण देता है।

व्याख्या

सही उत्तर C है। रेपो दर वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों की जमानत पर पुनर्खरीद समझौते के अंतर्गत वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है, और इसी समझौते से रेपो नाम आया है; यह मौद्रिक नीति समिति द्वारा घोषित नीतिगत दर है और पूरी अर्थव्यवस्था की ब्याज दरों का संकेत है। विकल्प A गलत है क्योंकि बैंक अपने ग्राहकों से जो दर लेता है वह उसकी उधार दर है, जो अब बाह्य मानकों से जुड़ी है। विकल्प B गलत है क्योंकि सरकार बैंकों को ऋण नहीं देती; बैंकों को ऋण देना केंद्रीय बैंक का कार्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह प्रतिवर्ती रेपो दर का वर्णन करता है, जिसके अंतर्गत बैंक अपना अतिरिक्त धन रिजर्व बैंक के पास रखते हैं और उस दर को बढ़ाने से प्रणाली से तरलता अवशोषित होती है।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: CDS · 10 April 2022मध्यम

निम्नलिखित में से किसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाएगा?

  1. A.भारत के शेयर बाजारों में किसी विदेशी कंपनी द्वारा शेयर खरीदना
  2. B.किसी विदेशी देश के पेंशन कोष द्वारा भारतीय शेयर बाजारों में निवेश
  3. C.किसी विदेशी मर्चेंट बैंकर द्वारा भारतीय शेयर बाजारों से शेयर खरीदना
  4. D.किसी विदेशी संस्था द्वारा भारत में शिक्षण संस्थान की स्थापना
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. किसी विदेशी संस्था द्वारा भारत में शिक्षण संस्थान की स्थापना

व्याख्या

सही उत्तर है D। भारत में संस्थान स्थापित करने का अर्थ है वास्तविक संपत्ति में पूँजी लगाना और उसे चलाना, और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ठीक यही है। एफडीआई वह टिकाऊ निवेश है, जो किसी भारतीय उद्यम के प्रबंधन में नियंत्रण या महत्वपूर्ण भागीदारी देता है, और यह सामान्यतः नई इकाई, कारखाना, सहायक कंपनी या किसी मौजूदा कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी के रूप में आता है। इससे तकनीक, रोजगार और प्रबंधन की पद्धतियाँ भी आती हैं, तथा इसे रातोंरात निकाला नहीं जा सकता। बाकी तीनों विकल्प विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के उदाहरण हैं, जिसमें बाहरी निवेशक केवल लाभ के लिए सूचीबद्ध शेयर या बॉन्ड खरीदता है, प्रबंधन में कोई भाग नहीं लेता और किसी भी कारोबारी दिन बेच सकता है। इसलिए विकल्प A, B और C एक ही कारण से गलत हैं: शेयर बाजार से शेयर खरीदना, चाहे कंपनी करे, पेंशन कोष करे या मर्चेंट बैंकर, पोर्टफोलियो निवेश ही है। परीक्षा टिप: एफडीआई का अर्थ नियंत्रण और जमीन पर कारखाना, एफपीआई का अर्थ जल्दी निकल जाने वाला गरम धन।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता किस वर्ष अधिनियमित हुई?

  1. A.2002
  2. B.2013
  3. C.2016
  4. D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2016

व्याख्या

सही उत्तर C, 2016 है। यह संहिता दिवाला विधि सुधार समिति की सिफारिशों पर 2016 में पारित हुई और इसने बीमार औद्योगिक कंपनी अधिनियम तथा कंपनी अधिनियम के कुछ भागों जैसे बिखरे पुराने कानूनों के स्थान पर एक समयबद्ध प्रक्रिया दी, जिसमें नियंत्रण चूक करने वाले प्रवर्तक से लेनदारों के पास चला जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2002 सरफेसी अधिनियम का वर्ष है, जो समग्र दिवाला के स्थान पर प्रतिभूति के प्रवर्तन से संबंधित है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2013 कंपनी अधिनियम का वर्ष है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण का प्रावधान किया गया था। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 में केवल संशोधन हुए, जिनमें समाधान प्रक्रिया की 330 दिन की बाहरी सीमा शामिल है, संहिता का अधिनियमन नहीं। संहिता के लागू होने का वर्ष, 2016 में बने नियामक बोर्ड और 2019 के संशोधन को अलग-अलग याद रखना इस अध्याय के तिथि-आधारित प्रश्नों के लिए आवश्यक है।

Q12.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 5 July 2022, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से 1947 का कौन-सा अधिनियम ट्रेड यूनियनों तथा व्यक्तिगत श्रमिकों से संबंधित भारतीय श्रम कानून को नियंत्रित करता है?

  1. A.भारतीय परिषद अधिनियम
  2. B.चार्टर अधिनियम
  3. C.रॉलेट अधिनियम
  4. D.औद्योगिक विवाद अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. औद्योगिक विवाद अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है D, औद्योगिक विवाद अधिनियम। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में बना और यह तय करता है कि नियोक्ताओं तथा श्रमिकों के बीच के विवाद, जिनमें ट्रेड यूनियनों से जुड़े मामले और व्यक्तिगत श्रमिक के मामले दोनों आते हैं, कैसे उठाए और निपटाए जाएँगे। इसके तहत कार्य समितियाँ, सुलह अधिकारी, जाँच न्यायालय, श्रम न्यायालय, औद्योगिक अधिकरण और राष्ट्रीय अधिकरण बनाए जाते हैं; यह बताता है कि हड़ताल या तालाबंदी कब वैध है, और बड़े प्रतिष्ठानों के लिए छँटनी, ले-ऑफ या बंदी से पहले सरकार की अनुमति जरूरी करता है। इसके प्रावधान अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में समाहित कर दिए गए हैं। A गलत है क्योंकि 1861, 1892 और 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम विधान परिषदों से जुड़े थे, श्रम से नहीं। B गलत है क्योंकि चार्टर अधिनियम, जिनमें अंतिम 1853 का था, ईस्ट इंडिया कंपनी के चार्टर का नवीकरण करते थे। C गलत है क्योंकि 1919 का रॉलेट अधिनियम बिना मुकदमे नजरबंदी की छूट देता था और जलियाँवाला बाग के विरोध का कारण बना। परीक्षा टिप: औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, अब औद्योगिक संबंध संहिता 2020 का हिस्सा।

Q13.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 7 Dec 2017, Shift 1आसान

कार्यशील जनसंख्या में ______ वर्ष से ______ वर्ष की आयु के लोग सम्मिलित होते हैं।

  1. A.10, 69
  2. B.15, 59
  3. C.21, 55
  4. D.18, 65
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 15, 59

व्याख्या

सही उत्तर B, 15 और 59 है। भारतीय सांख्यिकीय व्यवहार में पंद्रह से उनसठ वर्ष की आयु के व्यक्तियों को कार्यशील आयु जनसंख्या माना जाता है, और श्रम बल उनमें से उन लोगों से बनता है जो काम कर रहे हैं अथवा काम खोज रहे हैं और उपलब्ध हैं। पंद्रह वर्ष से कम आयु के बच्चों से विद्यालय में रहने की अपेक्षा की जाती है और साठ वर्ष तथा उससे अधिक आयु के व्यक्ति वृद्ध आश्रित गिने जाते हैं, इसलिए दोनों वर्ग कार्यशील जनसंख्या से बाहर रहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि दस से उनहत्तर की सीमा बाल श्रमिकों तथा वृद्धों को गिन लेगी। विकल्प C गलत है क्योंकि पचपन वर्ष कुछ सेवाओं में सेवानिवृत्ति की आयु है, सांख्यिकीय सीमा नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अठारह वर्ष वयस्कता तथा मताधिकार की आयु है और पैंसठ सेवानिवृत्ति की।

Q14.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 18 Oct 2021, Shift 1आसान

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा के लिए प्रत्येक परिवार को ____ दिनों का मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना है।

  1. A.45
  2. B.365
  3. C.250
  4. D.100
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 100

व्याख्या

सही उत्तर है D, 100। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन के अकुशल शारीरिक श्रम का रोजगार देने की गारंटी देता है। यह योजना फरवरी 2006 में 200 जिलों से शुरू हुई, 2008 तक पूरे देश में लागू हो गई और 2009 में इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। ग्रामीण परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य काम की मांग कर सकता है; मांग के पंद्रह दिन के भीतर और गाँव से पाँच किलोमीटर के दायरे में काम देना होता है, और न देने पर राज्य को बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। कम से कम एक तिहाई श्रमिक महिलाएँ होनी चाहिए, मजदूरी बैंक या डाकघर खाते में जाती है और काम मुख्यतः जल संरक्षण, तालाब, सड़क और भूमि विकास के होते हैं। A गलत है क्योंकि 45 दिन की गारंटी नहीं है। B गलत है क्योंकि 365 दिन का मतलब पूरे साल काम होता, जो कानून में नहीं है। C गलत है क्योंकि 250 दिन का आँकड़ा कानून में नहीं आता। परीक्षा टिप: मनरेगा 2005, साल में 100 दिन, 15 दिन में काम वरना बेरोजगारी भत्ता।

Q15.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत किसी कंपनी के दिवाला का निर्णायक प्राधिकारी कौन है?

  1. A.ऋण वसूली अधिकरण
  2. B.राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण
  3. C.प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण
  4. D.संबंधित राज्य का उच्च न्यायालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण

व्याख्या

सही उत्तर B, राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण है। कंपनियों और सीमित दायित्व भागीदारी के लिए दिवाला आवेदन इस अधिकरण के समक्ष दायर होता है, जो उसे स्वीकार या अस्वीकार करता है, रोक अवधि घोषित करता है और अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त करता है; अपील राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण और फिर उच्चतम न्यायालय में जाती है। विकल्प A कंपनियों के लिए गलत है, हालांकि संहिता के अंतर्गत व्यक्तियों और भागीदारी फर्मों के लिए ऋण वसूली अधिकरण ही निर्णायक प्राधिकारी है, और यही अंतर सबसे अधिक पूछा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण बाजार नियामक के आदेशों के विरुद्ध अपील सुनता है। विकल्प D गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा समापन पुरानी कंपनी विधि व्यवस्था का भाग था, जिसे संहिता और 2013 के कंपनी अधिनियम ने बदल दिया। इसलिए यह जोड़ा याद रखें: कंपनी के लिए एनसीएलटी और व्यक्ति अथवा भागीदारी फर्म के लिए डीआरटी, और दोनों पर अपील का रास्ता अलग-अलग है।

Q16.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 1st December 2021, Shift 2आसान

अमूल दूध और दुग्ध उत्पादों में सहकारिता की एक सफल कहानी है, जो _______ से शुरू हुई और जिसने देश में श्वेत क्रांति लाई।

  1. A.दिल्ली
  2. B.कर्नाटक
  3. C.उत्तर प्रदेश
  4. D.गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. गुजरात

व्याख्या

सही उत्तर है D, गुजरात। अमूल की शुरुआत खेड़ा जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ से हुई, जो 1946 में गुजरात के आनंद में बना, जब खेड़ा जिले के किसानों ने बिचौलियों द्वारा दिए जाने वाले कम दामों के विरुद्ध संगठित होकर अपना संघ खड़ा किया। त्रिभुवनदास पटेल ने किसानों का नेतृत्व किया और वर्गीज कुरियन ने इस डेयरी को आधुनिक उद्यम का रूप दिया, जिससे लाखों छोटे उत्पादकों का दूध इकट्ठा कर, ठंडा कर, संसाधित कर एक ही ब्रांड के नाम से बेचा जा सका। 1970 से ऑपरेशन फ्लड के जरिए आनंद का यही ढाँचा पूरे देश में फैलाया गया, जिसने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनाया। कुरियन को श्वेत क्रांति के जनक के रूप में याद किया जाता है। A गलत है क्योंकि दिल्ली दूध का बाजार है, इस सहकारी संस्था का उद्गम नहीं। B गलत है क्योंकि कर्नाटक का सहकारी ब्रांड नंदिनी है। C गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश में दूध बहुत होता है, पर अमूल वहाँ से शुरू नहीं हुआ। परीक्षा टिप: अमूल — आनंद, गुजरात, 1946; ऑपरेशन फ्लड 1970, वर्गीज कुरियन।

Q17.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

सकल राष्ट्रीय उत्पाद किस प्रकार प्राप्त होता है?

  1. A.सकल घरेलू उत्पाद में विदेश से शुद्ध साधन आय जोड़कर
  2. B.सकल घरेलू उत्पाद में से मूल्यह्रास घटाकर
  3. C.शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में अप्रत्यक्ष कर जोड़कर
  4. D.सकल घरेलू उत्पाद को जनसंख्या से भाग देकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सकल घरेलू उत्पाद में विदेश से शुद्ध साधन आय जोड़कर

व्याख्या

सही उत्तर A है। सकल घरेलू उत्पाद वह गिनता है जो घरेलू क्षेत्र के भीतर उत्पादित होता है, चाहे उत्पादक कोई भी हो, जबकि सकल राष्ट्रीय उत्पाद वह गिनता है जो देश के सामान्य निवासी उत्पादित करते हैं, चाहे वे कहीं भी हों; दोनों के बीच का पुल विदेश से शुद्ध साधन आय है, अर्थात् विदेश में भारतीयों की आय में से भारत में विदेशियों की आय घटाकर। विकल्प B गलत है क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद में से मूल्यह्रास घटाने पर शुद्ध घरेलू उत्पाद मिलता है। विकल्प C गलत है क्योंकि साधन लागत और बाजार कीमत का संबंध अप्रत्यक्ष कर में से उपदान घटाने पर निर्भर करता है, जो भिन्न समायोजन है। विकल्प D गलत है क्योंकि जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति उत्पाद या आय मिलती है, जो औसत बताती है और जीवन स्तर की तुलना में प्रयुक्त होती है।

Q18.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में दिवाला पेशेवरों और सूचना उपयोगिताओं का नियमन कौन-सी संस्था करती है?

  1. A.भारतीय रिजर्व बैंक
  2. B.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  3. C.भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड
  4. D.वित्त मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड

व्याख्या

सही उत्तर C, भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड है। 2016 की संहिता के अंतर्गत बना यह बोर्ड दिवाला पेशेवरों, दिवाला पेशेवर एजेंसियों और सूचना उपयोगिताओं का पंजीकरण तथा पर्यवेक्षण करता है और वे विनियम बनाता है जिनके अंतर्गत समाधान प्रक्रिया चलती है, इसलिए यह नियामक और नियम-निर्माता दोनों है। विकल्प A गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक बैंकों का नियमन करता है और उन्हें खाते दिवाला के लिए भेजने का निर्देश दे सकता है, परंतु वह दिवाला पेशेवरों का नियमन नहीं करता। विकल्प B गलत है क्योंकि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड प्रतिभूति बाजार का नियामक है। विकल्प D गलत है क्योंकि इस संहिता का प्रशासन वित्त मंत्रालय के स्थान पर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय करता है, और किसी भी स्थिति में मंत्रालय यहां सांविधिक नियामक नहीं है।

Q19.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

निम्नलिखित में से कौन प्राथमिक घाटे की सही परिभाषा है?

  1. A.राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर
  2. B.राजस्व व्यय में से राजस्व प्राप्तियां घटाकर
  3. C.कुल व्यय में से उधार सहित कुल प्राप्तियां घटाकर
  4. D.राजस्व घाटे में से पूंजीगत परिसंपत्ति के अनुदान घटाकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर

व्याख्या

सही उत्तर A, राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाकर है। किसी वर्ष के राजकोषीय घाटे में पुराने उधार की सेवा की लागत और नया व्यय दोनों सम्मिलित रहते हैं, इसलिए ब्याज भुगतान निकाल देने पर प्राथमिक घाटा बचता है, जो बताता है कि चालू वर्ष का व्यय अपने आप में प्राप्तियों से कितना अधिक है। विकल्प B गलत है क्योंकि राजस्व व्यय में से राजस्व प्राप्तियां घटाने पर राजस्व घाटा मिलता है, जो नित्य संचालन के लिए उधार दर्शाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्राप्तियों में उधार जोड़ देने पर खाता परिभाषा से ही संतुलित हो जाएगा, और इसीलिए राजकोषीय घाटा उधार के अतिरिक्त प्राप्तियों पर परिभाषित है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह प्रभावी राजस्व घाटा है, जो यह मानकर बनाया गया कि राज्यों को पूंजीगत परिसंपत्ति के लिए दिए अनुदान परिसंपत्ति बनाते हैं।

Q20.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

विस्तार और मुकदमेबाजी के समय सहित कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया कितने दिन में पूरी होनी चाहिए?

  1. A.180 दिन
  2. B.270 दिन
  3. C.330 दिन
  4. D.365 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 330 दिन

व्याख्या

सही उत्तर C, 330 दिन है। संहिता की धारा 12 समाधान प्रक्रिया को आवेदन स्वीकार होने की तिथि से 180 दिन देती है, निर्णायक प्राधिकारी को समाधान समिति के प्रस्ताव पर उसे एक बार 90 दिन तक बढ़ाने की अनुमति देती है, और 2019 के संशोधन ने 330 दिन की बाहरी सीमा जोड़ी, जिसमें मुकदमेबाजी तथा विस्तार में लगा समय भी शामिल है। विकल्प A गलत है क्योंकि 180 दिन केवल पहली अवधि है, किसी विस्तार से पहले की। विकल्प B गलत है क्योंकि 270 दिन, अर्थात 180 और 90, 2019 के संशोधन से पहले की सीमा थी, और प्रश्नपत्र उसे पुराने नोट्स पढ़ने वाले परीक्षार्थियों के लिए जाल बनाए रखते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि संहिता बाहरी सीमा 330 दिन गिनती है, एक वर्ष नहीं। सीमा के भीतर कोई योजना स्वीकृत न हो तो कंपनी परिसमापन में जाती है।

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