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GK क्विजबैंकिंग और वित्तीय जागरूकता

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता मिश्रित क्विज: सेट 30

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता मिश्रित क्विज़ (सेट 30) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 10 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंक, लीड बैंक योजना और सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण: पीएमएलए और एफआईयू-इंडिया और अन्य। इनमें से 2 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2021, GS Paper Iकठिन

भारत में 'शहरी सहकारी बैंकों' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. उनका पर्यवेक्षण और विनियमन राज्य सरकारों द्वारा स्थापित स्थानीय बोर्डों द्वारा किया जाता है।

2. वे इक्विटी शेयर और अधिमानी शेयर जारी कर सकते हैं।

3. उन्हें 1966 में एक संशोधन के माध्यम से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के दायरे में लाया गया।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 2 और 3। शहरी सहकारी बैंकों का विनियमन RBI करता है, स्थानीय बोर्ड नहीं, और ये इक्विटी तथा अधिमानी शेयरों से पूँजी जुटा सकते हैं।

कथन 1 गलत है: शहरी सहकारी बैंक राज्य या बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियमों के तहत पंजीकृत होते हैं, पर उनके बैंकिंग कार्यों का विनियमन और पर्यवेक्षण भारतीय रिज़र्व बैंक करता है; राज्य सरकारों के कोई स्थानीय बोर्ड यह काम नहीं करते। कथन 2 सही है: बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 के बाद सहकारी बैंक RBI की अनुमति से इक्विटी शेयर, अधिमानी शेयर और अन्य प्रतिभूतियाँ जारी करके पूँजी जुटा सकते हैं। कथन 3 सही है: सहकारी बैंकों को 1 मार्च 1966 से एक संशोधन के द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के दायरे में लाया गया।

A गलत है, क्योंकि कथन 1 असत्य है।

C गलत है, क्योंकि इसमें असत्य कथन 1 है और सत्य कथन 2 छूट गया है।

D गलत है, क्योंकि कथन 1 सही नहीं है।

परीक्षा टिप: सहकारी बैंक 1966 में BR अधिनियम के दायरे में आए; 2020 के संशोधन ने उन पर RBI का नियंत्रण मज़बूत किया।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

बैंकिंग विकास का वह 'क्षेत्र दृष्टिकोण', जिससे लीड बैंक योजना बनी, किस अध्ययन दल ने सुझाया था?

  1. A.गाडगिल अध्ययन दल
  2. B.नरसिंहम समिति
  3. C.तंडन समिति
  4. D.चक्रवर्ती समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गाडगिल अध्ययन दल

व्याख्या

सही उत्तर A, गाडगिल अध्ययन दल है। सामाजिक उद्देश्यों के कार्यान्वयन के संगठनात्मक ढांचे पर राष्ट्रीय साख परिषद के अध्ययन दल, जिसके अध्यक्ष प्रोफ़ेसर डी. आर. गाडगिल थे, ने 1969 में बताया कि देश के बड़े हिस्सों में बैंकिंग सुविधा ही नहीं है और सुझाया कि साख का नियोजन क्षेत्रवार हो, जिसमें जिला इकाई बने। विकल्प B गलत है क्योंकि 1991 और 1998 की नरसिंहम समिति के प्रतिवेदन बैंकिंग क्षेत्र सुधार, पूंजी पर्याप्तता तथा विवेकपूर्ण मानदंडों से संबंधित थे। विकल्प C गलत है क्योंकि 1974 की तंडन समिति ने कार्यशील पूंजी वित्त और भंडार के मानदंड तय किए। विकल्प D गलत है क्योंकि 1985 की चक्रवर्ती समिति ने मौद्रिक प्रणाली के कार्यकरण की समीक्षा की। इस अध्याय में दो नाम अलग रखने होंगे: क्षेत्र दृष्टिकोण के लिए गाडगिल और बैंकों को जिले आवंटित करने के लिए नरीमन।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

पीएमएलए के अंतर्गत रिपोर्टिंग इकाई को उन लेनदेनों के अभिलेख कितने समय तक रखने होते हैं जिनकी रिपोर्ट देना आवश्यक है?

  1. A.लेनदेन की तारीख से तीन वर्ष
  2. B.लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष
  3. C.लेनदेन की तारीख से आठ वर्ष
  4. D.लेनदेन की तारीख से पंद्रह वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर B, लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष है। धारा 12 के अनुसार हर रिपोर्टिंग इकाई को निर्धारित प्रकार और मूल्य के सभी लेनदेनों का अभिलेख ग्राहक और इकाई के बीच लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष तक रखना होता है, तथा अपने ग्राहकों की पहचान के अभिलेख कारोबारी संबंध समाप्त होने या खाता बंद होने के पांच वर्ष बाद तक रखने होते हैं। अभिलेख ऐसे रखने होते हैं कि कोई प्राधिकारी मांगे तो किसी एक लेनदेन का पुनर्निर्माण हो सके। विकल्प A गलत है क्योंकि तीन वर्ष सांविधिक अवधि से कम है और लंबे अन्वेषणों में निशान ठंडा पड़ जाएगा। विकल्प C गलत है क्योंकि आठ वर्ष अधिनियम या नियमों में कहीं निर्धारित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि पंद्रह वर्ष आवश्यकता से बहुत अधिक है; पहले कानून में दस वर्ष निर्धारित थे, जिन्हें संशोधन से पांच वर्ष किया गया।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत का धन शोधन निवारण अधिनियम किस वर्ष से लागू हुआ?

  1. A.2002
  2. B.2003
  3. C.2005
  4. D.2012
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2005

व्याख्या

सही उत्तर C, 2005 है। धन शोधन निवारण अधिनियम संसद ने 2002 में पारित किया और उसी वर्ष के अधिनियम के रूप में उसकी संख्या है, पर वह एक जुलाई 2005 से ही लागू हुआ, और उसके साथ धन शोधन निवारण अभिलेख रखरखाव नियम 2005 भी लागू हुए, जिनमें बैंकों के रिपोर्टिंग दायित्व दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को दोनों तिथियां अलग रखनी चाहिए क्योंकि प्रश्नपत्र कोई भी एक पूछ सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 2002 अधिनियमन का वर्ष है, वही वर्ष जो अधिनियम के संक्षिप्त नाम में आता है, प्रवर्तन का वर्ष नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 2003 वह वर्ष है जब जनवरी में अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। विकल्प D गलत है क्योंकि 2012 एक बड़े संशोधन का वर्ष है, जिसने अपराध की आय की परिभाषा विस्तृत की और कुछ अनुसूचित अपराधों की पुरानी मूल्य सीमा हटाई; इसके बाद 2019 में और संशोधन हुए।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण तथा अर्ध-शहरी शाखा को सामान्यतः लगभग कितने गांव आवंटित किए जाते थे?

  1. A.5 से 10
  2. B.15 से 25
  3. C.30 से 40
  4. D.50 से 60
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 15 से 25

व्याख्या

सही उत्तर B, 15 से 25 है। किसी शाखा का सेवा क्षेत्र लगभग पंद्रह से पच्चीस गांवों से बनाया जाता था, जो निकटता और सन्निहितता की दोहरी कसौटी पर चुने जाते थे जिससे एक शाखा का कर्मचारी वर्ग उस समूह की सेवा और सर्वेक्षण वास्तव में कर सके। इसके बाद शाखा गांव सर्वेक्षण करती, साख आवश्यकताओं का अनुमान लगाती और उनके लिए सेवा क्षेत्र साख योजना बनाती, जो प्रखंड तथा जिला योजनाओं में जुड़ती। विकल्प A गलत है क्योंकि इतना छोटा समूह बहुत से गांवों को अनावंटित छोड़ देता और सार्वभौमिक कवरेज का उद्देश्य ही विफल हो जाता। विकल्प C और विकल्प D गलत हैं क्योंकि तीस से साठ गांवों के समूह का सर्वेक्षण और सेवा एक ग्रामीण शाखा के लिए असंभव होता, और रिज़र्व बैंक के अनुदेशों में इतनी बड़ी संख्या कभी तय नहीं हुई। पंद्रह से पच्चीस का आंकड़ा, निकटता-सन्निहितता की कसौटी और शहरी शाखाओं का अपवर्जन, इस दृष्टिकोण पर पूछे जाने वाले तीन बिंदु हैं।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

वर्ष 1987 में स्थापित भारत की पहली क्रेडिट रेटिंग एजेंसी कौन थी?

  1. A.इकरा
  2. B.केयर रेटिंग्स
  3. C.क्रिसिल
  4. D.ब्रिकवर्क रेटिंग्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. क्रिसिल

व्याख्या

सही उत्तर C, क्रिसिल है। क्रेडिट रेटिंग इन्फॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लिमिटेड वर्ष 1987 में भारत की पहली क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के रूप में स्थापित हुई, जिसके प्रवर्तक आईसीआईसीआई और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया थे, और आगे वैश्विक कंपनी एस एंड पी ग्लोबल उसकी बहुसंख्यक अंशधारक बनी। विकल्प A गलत है, क्योंकि इकरा, अर्थात इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटेड, चार वर्ष बाद 1991 में आईएफसीआई के प्रवर्तन से बनी और अब उसमें बहुमत मूडीज का है। विकल्प B गलत है, क्योंकि केयर, अर्थात क्रेडिट एनालिसिस एंड रिसर्च लिमिटेड, वर्ष 1993 में आईडीबीआई के प्रवर्तन से बनी। विकल्प D गलत है, क्योंकि ब्रिकवर्क रेटिंग्स बहुत बाद की प्रवेशी है। याद रखने का क्रम है 1987 क्रिसिल, 1991 इकरा और 1993 केयर। इन तीनों के वैश्विक भागीदार भी याद रखें: क्रिसिल के साथ एस एंड पी ग्लोबल, इकरा के साथ मूडीज और इंडिया रेटिंग्स के साथ फिच समूह।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारतीय रिज़र्व बैंक ने घरेलू प्रणालीगत महत्व के बैंकों से जुड़ा ढाँचा किस वर्ष जारी किया?

  1. A.2011
  2. B.2014
  3. C.2017
  4. D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2014

व्याख्या

सही उत्तर B, 2014 है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने डी-एसआईबी ढाँचा 22 जुलाई 2014 को जारी किया, जिसमें बताया गया कि नमूने के लिए बैंक कैसे चुने जाएँगे, आकार, अंतर-संबद्धता, प्रतिस्थापनीयता और जटिलता से प्रणालीगत महत्व अंक कैसे निकाला जाएगा, और हर बकेट पर कितनी अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 पूँजी लगेगी। इस ढाँचे के तहत पहले नाम अगले वर्ष घोषित हुए।

विकल्प A, 2011, वह वर्ष है जब वित्तीय स्थिरता बोर्ड ने प्रणालीगत महत्व के बैंकों की वैश्विक सूची निकालना शुरू किया; यह विश्व स्तर पर होने वाला अलग काम है, इसलिए यह जाना-पहचाना भ्रम है। विकल्प C, 2017, वह वर्ष है जब बैंकों के लिए पहले वाला त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचा जारी हुआ था, डी-एसआईबी ढाँचा नहीं। विकल्प D, 2021, संशोधित पीसीए ढाँचे का वर्ष है। इन तीन तारीखों को मिला देने पर आसान अंक चला जाता है, इसलिए याद रखें: डी-एसआईबी के लिए 2014 और संशोधित पीसीए के लिए 2021।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

डिजिटल रुपये और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस में निम्नलिखित में से कौन सा अंतर सही है?

  1. A.दोनों एनपीसीआई द्वारा संचालित भुगतान प्रणालियां हैं
  2. B.डिजिटल रुपया स्वयं केंद्रीय बैंक की मुद्रा है, जबकि यूपीआई बैंक जमा के धन को हिलाने वाली प्रणाली है
  3. C.यूपीआई वैध मुद्रा है, जबकि डिजिटल रुपया नहीं
  4. D.डिजिटल रुपये पर ब्याज मिलता है, यूपीआई शेष पर नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डिजिटल रुपया स्वयं केंद्रीय बैंक की मुद्रा है, जबकि यूपीआई बैंक जमा के धन को हिलाने वाली प्रणाली है

व्याख्या

सही उत्तर B है। डिजिटल रुपया मुद्रा है, रिज़र्व बैंक की देयता, अतः एक वॉलेट से दूसरे में अंतरण उसी क्षण अंतिम हो जाता है और उसके बाद कोई अंतर-बैंक निपटान नहीं होता। इसके विपरीत यूपीआई भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा चलाई जाने वाली भुगतान निर्देश प्रणाली है, जो उस धन को हिलाती है जो पहले से बैंक खाते में जमा के रूप में है, और बैंक आपस में निपटान बाद में करते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि डिजिटल रुपया रिज़र्व बैंक जारी करता है और वह एनपीसीआई का उत्पाद नहीं है। विकल्प C गलत है और स्थिति उलट देता है: संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अंतर्गत डिजिटल रुपया वैध मुद्रा है, जबकि यूपीआई केवल भुगतान निर्देश देने का तरीका है और वैध मुद्रा कभी नहीं हो सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि डिजिटल रुपये पर जानबूझकर ब्याज नहीं दिया जाता, जिससे बचतकर्ता बैंक जमा से न हटें।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

तृतीय पक्ष उल्लंघन की स्थिति में शून्य देयता पाने के लिए ग्राहक को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की सूचना कितने कार्य दिवसों के भीतर देनी होगी?

  1. A.एक कार्य दिवस
  2. B.तीन कार्य दिवस
  3. C.सात कार्य दिवस
  4. D.पंद्रह कार्य दिवस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन कार्य दिवस

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन कार्य दिवस है। रिज़र्व बैंक के 6 जुलाई 2017 के परिपत्र के अनुसार जहाँ दोष न बैंक का हो न ग्राहक का, बल्कि व्यवस्था में कहीं और हो, वहाँ ग्राहक की देयता शून्य है यदि अनधिकृत लेनदेन की सूचना बैंक का संदेश मिलने के तीन कार्य दिवसों के भीतर दे दी जाए। जिस दिन वह संदेश मिला वह दिन गिनती से बाहर रहता है और कार्य दिवस गृह शाखा की समय-सारणी से गिने जाते हैं।

विकल्प A, एक कार्य दिवस, नियम से कड़ा है और इससे अनेक सच्चे पीड़ित असुरक्षित रह जाएँगे। विकल्प C, सात कार्य दिवस, सीमित देयता अवधि का बाहरी छोर है, जहाँ ग्राहक एक सीमित राशि उठाता है, इसलिए यह सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। विकल्प D, पंद्रह कार्य दिवस, इस ढाँचे में कहीं नहीं है; सात कार्य दिवसों के बाद दी गई सूचना बैंक की बोर्ड अनुमोदित नीति से निपटाई जाती है। जोड़ी याद रखें: शून्य देयता के लिए तीन दिन, सीमित देयता के लिए चार से सात दिन।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC CGL · 20 Aug 2021, Shift 3मध्यम

'इकोरैप रिपोर्ट' मई 2020 में निम्नलिखित में से किस बैंक द्वारा प्रकाशित की गई थी?

  1. A.आरबीआई
  2. B.एसबीआई
  3. C.एचडीएफसी बैंक
  4. D.आईसीआईसीआई बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एसबीआई

व्याख्या

सही उत्तर है B, एसबीआई। इकोरैप भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट है, जिसे उसका आर्थिक अनुसंधान विभाग प्रकाशित करता है।

इकोरैप एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार की टीम तैयार करती है और इसमें वृद्धि दर, मुद्रास्फीति, बैंक ऋण, सरकारी वित्त तथा परिवारों की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी रहती है। समाचार पत्रों में इसका खूब उल्लेख होता है, क्योंकि यह अक्सर सरकारी आँकड़े आने से पहले ही सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि या राजकोषीय स्थिति का अनुमान दे देती है। मई 2020 के अंक में कोविड-19 लॉकडाउन से आय और आर्थिक गतिविधियों को हुए नुकसान का अध्ययन किया गया था। एसबीआई देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है और इसका मुख्यालय मुंबई में है।

A गलत है: रिज़र्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट, वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट और वार्षिक रिपोर्ट निकालता है, इकोरैप नहीं। C गलत है: एचडीएफसी बैंक इस नाम की कोई रिपोर्ट नहीं निकालता। D गलत है: आईसीआईसीआई बैंक भी ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं निकालता।

परीक्षा टिप: इकोरैप एसबीआई रिसर्च की है, जबकि रिज़र्व बैंक की प्रसिद्ध रिपोर्टें वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट और मौद्रिक नीति रिपोर्ट हैं।

Q11.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

धन शोधन पर वैश्विक मानक निर्धारक वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की स्थापना किस वर्ष हुई?

  1. A.1974
  2. B.1989
  3. C.1995
  4. D.2001
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1989

व्याख्या

सही उत्तर B, 1989 है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल 1989 में पेरिस में हुए सात औद्योगिक देशों के समूह के शिखर सम्मेलन में बना, और उसका सचिवालय पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुख्यालय में है। यह धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर चालीस सिफारिशें जारी करता है और पारस्परिक मूल्यांकन से सदस्य देशों की समीक्षा करता है, तथा कमजोर क्षेत्राधिकारों को बढ़ी निगरानी की सूची, यानी अनौपचारिक ग्रे सूची, या कार्रवाई के आह्वान की सूची, यानी अनौपचारिक ब्लैक सूची, में रखता है। भारत जून 2010 में पूर्ण सदस्य बना। विकल्प A गलत है क्योंकि 1974 में बैंकिंग पर्यवेक्षण की बासल समिति बनी थी, जो विवेकपूर्ण विनियमन से जुड़ा भिन्न निकाय है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1995 में ब्रुसेल्स में वित्तीय आसूचना इकाइयों का एग्मोंट समूह बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 2001 में कार्य बल ने अपना दायरा आतंकवाद के वित्तपोषण तक बढ़ाया, वह उसकी स्थापना का वर्ष नहीं है।

Q12.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

1993 की मल्होत्रा समिति किस क्षेत्र के सुधार से संबंधित थी?

  1. A.बीमा
  2. B.म्यूचुअल फंड
  3. C.वस्तु बाजार
  4. D.सहकारी बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बीमा

व्याख्या

सही उत्तर A, बीमा है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर आर. एन. मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने 1993 में बीमा क्षेत्र के सुधार पर रिपोर्ट दी; उसने इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और स्वतंत्र नियामक बनाने की सिफारिश की, जिससे दशक के अंत में बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण स्थापित हुआ। विकल्प B, म्यूचुअल फंड, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अंतर्गत आते हैं, जिसे 1992 के अधिनियम से सांविधिक शक्तियां मिलीं। विकल्प C, वस्तु बाजार, का नियमन वायदा बाजार आयोग करता था, जिसे बाद में सेबी में मिला दिया गया। विकल्प D, सहकारी बैंक, रिजर्व बैंक के कई अलग कार्य समूहों का विषय रहे हैं। मल्होत्रा को बीमा के साथ उसी तरह याद करें जैसे नरसिंहम को बैंकिंग और तारापोर को परिवर्तनीयता के साथ।

Q13.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

2004 में रिज़र्व बैंक ने सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण के प्रतिबंधात्मक प्रावधान हटा दिए, जो केवल किसके लिए बने रहे?

  1. A.सरकार प्रायोजित योजनाएं
  2. B.निर्यात साख
  3. C.स्वर्ण ऋण
  4. D.आवास ऋण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सरकार प्रायोजित योजनाएं

व्याख्या

सही उत्तर A, सरकार प्रायोजित योजनाएं है। हर गांव को एक शाखा से बांधकर सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण ने उधारकर्ता का विकल्प छीन लिया था: जिस किसान की सेवा उसकी सेवा क्षेत्र शाखा ठीक से न करे, वह अपना खाता अन्यत्र नहीं ले जा सकता था, और शाखाओं के बीच प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई। अतः दिसंबर 2004 में रिज़र्व बैंक ने प्रतिबंधात्मक प्रावधान हटा दिए और उधारकर्ताओं को अपनी पसंद की किसी भी शाखा में जाने की छूट दी, जबकि सरकार प्रायोजित योजनाओं के लिए प्रतिबंध बना रखा, जहां गांव को किसी विशेष शाखा से जोड़ना आवश्यक है जिससे सब्सिडी और लाभार्थी सूचियां मिलाई जा सकें। विकल्प B गलत है क्योंकि निर्यात साख रिज़र्व बैंक के पृथक दिशानिर्देशों से संचालित होती है और सेवा क्षेत्र प्रतिबंध का हिस्सा कभी नहीं थी। विकल्प C गलत है क्योंकि स्वर्ण ऋण सामान्य प्रतिभूत अग्रिम है, जिसमें क्षेत्र प्रतिबंध नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि आवास ऋण मुख्यतः शहरी उत्पाद है और शहरी शाखाएं सदैव इस दृष्टिकोण से बाहर थीं। शाखाओं के सर्वेक्षण तथा नियोजन के कर्तव्य 2004 के बाद भी बने रहे।

Q14.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

आठवें निर्गम के राष्ट्रीय बचत पत्र की परिपक्वता अवधि कितनी है?

  1. A.3 वर्ष
  2. B.5 वर्ष
  3. C.7 वर्ष
  4. D.10 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 5 वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर B, 5 वर्ष है। राष्ट्रीय बचत पत्र का आठवाँ निर्गम पाँच वर्ष का प्रमाणपत्र है, जिस पर ब्याज वार्षिक चक्रवृद्धि होता है और परिपक्वता पर मूलधन के साथ दिया जाता है, तथा इसमें की गई जमा धारा 80सी की कटौती के योग्य है। विकल्प A, तीन वर्ष, गलत है; तीन वर्ष डाकघर सावधि जमा की उपलब्ध अवधियों में एक है, एनएससी की नहीं। विकल्प C, सात वर्ष, गलत है और यह प्रमाणपत्र के बंद किए गए नवें निर्गम की याद दिलाता है, जो लंबी अवधि का था। विकल्प D, दस वर्ष, गलत है क्योंकि वर्तमान में कोई लघु बचत प्रमाणपत्र दस वर्ष का नहीं है। पाँच वर्ष का यह खंड याद रखने योग्य है क्योंकि एनएससी, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, मासिक आय योजना और आवर्ती जमा सभी में यही अवधि है।

Q15.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के संशोधित त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे में लाभप्रदता की जगह किस मानक ने ली?

  1. A.तरलता
  2. B.उत्तोलन
  3. C.ऋण वृद्धि
  4. D.प्रावधान कवरेज
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उत्तोलन

व्याख्या

सही उत्तर B, उत्तोलन है। 2017 का ढाँचा पूँजी, आस्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता देखता था, जिसमें लाभप्रदता का सूचक आस्तियों पर प्रतिफल था। 2 नवंबर 2021 को अधिसूचित और 1 जनवरी 2022 से प्रभावी संशोधित ढाँचा पूँजी और आस्ति गुणवत्ता रखता है, पर लाभप्रदता हटाकर तीसरे मुख्य क्षेत्र के रूप में उत्तोलन लाता है, जिसे टियर 1 लीवरेज अनुपात से मापा जाता है। संशोधित ढाँचे से यही बिंदु सबसे अधिक पूछा जाता है।

विकल्प A, तरलता, तरलता कवरेज अनुपात और शुद्ध स्थिर निधीयन अनुपात से संभाली जाती है, पीसीए मानकों से नहीं। विकल्प C, ऋण वृद्धि, पर्यवेक्षक अन्य तरीकों से नज़र रखता है, पर यह पीसीए का ट्रिगर नहीं है। विकल्प D, प्रावधान कवरेज, बताता है कि बैंक ने फँसे ऋणों के लिए कितना अलग रखा है; यह पर्यवेक्षी अपेक्षा है, पीसीए मानक नहीं। इसलिए याद रखने योग्य तीन क्षेत्र हैं: पूँजी, आस्ति गुणवत्ता और उत्तोलन।

Q16.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण किस वर्ष के अधिनियम से सांविधिक निकाय बना?

  1. A.2003
  2. B.2008
  3. C.2013
  4. D.2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2013

व्याख्या

सही उत्तर C, 2013 है। पीएफआरडीए सबसे पहले 2003 में सरकार के संकल्प से अंतरिम प्राधिकरण के रूप में बना, ताकि नई अंशदायी पेंशन व्यवस्था की निगरानी हो सके, और उसने एक दशक तक बिना अधिनियम के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली चलाई; पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 2013 ने उसे सांविधिक दर्जा दिया। विकल्प A, 2003, इसलिए उसके अंतरिम निकाय के रूप में गठन का वर्ष है और इस प्रश्न का स्पष्ट जाल है। विकल्प B, 2008, गलत है; उस वर्ष राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली आम नागरिकों के लिए खोली गई तथा केंद्रीय अभिलेखपाल अभिकरण और पेंशन निधियाँ नियुक्त हुईं, पर कोई अधिनियम पारित नहीं हुआ। विकल्प D, 2016, गलत है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का है, जिसके अंतर्गत आईबीबीआई ने 1 अक्टूबर 2016 को काम शुरू किया। अधिनियमों का क्रम 1934, 1992, 1999, 2013 और 2016 के रूप में याद रखना सरल है।

Q17.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

बुनियादी बचत बैंक जमा खाते में चार से सात कार्य दिवसों में तृतीय पक्ष उल्लंघन की सूचना देने वाले ग्राहक की अधिकतम देयता कितनी है?

  1. A.5,000 रुपये
  2. B.10,000 रुपये
  3. C.25,000 रुपये
  4. D.हर स्थिति में शून्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 5,000 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर A, 5,000 रुपये है। रिज़र्व बैंक की देयता तालिका सबसे कम सीमा बुनियादी बचत बैंक जमा खातों के लिए रखती है, जो वित्तीय समावेशन के लिए खोले जाने वाले सुविधाहीन खाते हैं, क्योंकि उनके धारक नुकसान सहने में सबसे कम समर्थ होते हैं। ग्राहक लेनदेन का मूल्य या पाँच हज़ार रुपये, जो कम हो, देता है, इसलिए दो हज़ार रुपये की धोखाधड़ी में ग्राहक को दो हज़ार ही देना होगा, पाँच नहीं।

विकल्प B, 10,000 रुपये, सामान्य बचत खातों, प्रीपेड भुगतान उपकरणों और उपहार कार्डों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के चालू या ओवरड्राफ़्ट खातों, पच्चीस लाख रुपये तक सीमा वाले व्यक्तिगत चालू खातों तथा पाँच लाख रुपये तक सीमा वाले क्रेडिट कार्डों की सीमा है। विकल्प C, 25,000 रुपये, अन्य चालू, नकद उधार और ओवरड्राफ़्ट खातों तथा पाँच लाख से ऊपर सीमा वाले क्रेडिट कार्डों की सीमा है। विकल्प D गलत है क्योंकि शून्य देयता के लिए तीन कार्य दिवसों में सूचना चाहिए।

Q18.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

वित्तीय आसूचना इकाई भारत किस निकाय को रिपोर्ट करती है?

  1. A.केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद
  2. B.केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
  3. C.भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति
  4. D.प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद

व्याख्या

सही उत्तर A है। वित्तीय आसूचना इकाई भारत वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करती है और आर्थिक अपराधों के शीर्ष निकाय आर्थिक आसूचना परिषद को रिपोर्ट करती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। यह परिषद आर्थिक अपराध से जुड़ी प्रवर्तन और आसूचना एजेंसियों के काम में समन्वय करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड आयकर का प्रशासन करता है और उसी विभाग के अधीन सहोदर निकाय है, इकाई का रिपोर्टिंग प्राधिकारी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए नीतिगत ब्याज दर तय करती है और उसका वित्तीय आसूचना से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D दो कारणों से गलत है: वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद समष्टि-विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण तथा अंतर-नियामक समन्वय से जुड़ी है, और उसकी अध्यक्षता भी केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, प्रधानमंत्री नहीं।

Q19.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

लीड बैंक योजना की समीक्षा के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त उच्च स्तरीय समिति, जिसने 2009 में प्रतिवेदन दिया, किसकी अध्यक्षता में थी?

  1. A.उषा थोरात
  2. B.सी. रंगराजन
  3. C.रघुराम राजन
  4. D.दीपक मोहंती
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उषा थोरात

व्याख्या

सही उत्तर A, उषा थोरात है। रिज़र्व बैंक ने चार दशक बाद लीड बैंक योजना की समीक्षा के लिए अपनी उप गवर्नर उषा थोरात की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की, और समिति ने 2009 में प्रतिवेदन दिया। उसने पाया कि मंच औपचारिक बैठकें बन गए हैं, और सुझाया कि वे वित्तीय समावेशन पर ध्यान दें, साख योजनाएं राज्य सरकार की अपनी योजनाओं को ध्यान में रखकर बनें, योजना महानगरीय क्षेत्रों तक बढ़ाई जाए, और बैंक बिना बैंकिंग वाले गांवों तक सेवा पहुंचाने के लिए रोडमैप बनाएं। विकल्प B गलत है क्योंकि सी. रंगराजन ने वित्तीय समावेशन तथा गरीबी मापन पर समितियों की अध्यक्षता की और वे रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे। विकल्प C गलत है क्योंकि रघुराम राजन ने 2008 की वित्तीय क्षेत्र सुधार समिति की अध्यक्षता की और बाद में गवर्नर बने। विकल्प D गलत है क्योंकि दीपक मोहंती ने वित्तीय समावेशन के मध्यम अवधि पथ पर समिति की अध्यक्षता की। नाम मिलते-जुलते हैं, इसलिए प्रत्येक को उसके विषय से जोड़ें।

Q20.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

रिज़र्व बैंक के बैंकों के लिए त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे में कितनी जोखिम सीमाएँ हैं?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.पाँच
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन है। पीसीए ढाँचा उल्लंघनों को तीन जोखिम सीमाओं में बाँटता है, हर अगली पिछली से गंभीर, और हर सीमा से अनिवार्य सुधारात्मक कार्रवाइयाँ जुड़ी हैं। जोखिम सीमा 1 पर लाभांश बाँटने पर रोक लगती है और मालिकों से पूँजी लाने की अपेक्षा होती है। जोखिम सीमा 2 पर देश और विदेश में शाखा विस्तार पर रोक जुड़ती है। जोखिम सीमा 3 पर पूँजीगत व्यय की सीमा जुड़ती है, जिसमें बोर्ड से स्वीकृत प्रौद्योगिकी उन्नयन छोड़ दिया जाता है।

विकल्प A, दो, ढाँचे को कम करके बताता है। विकल्प C, चार, आकर्षक लगता है क्योंकि अभ्यर्थी तीन सीमाओं को पीसीए से बाहर आने के लिए ज़रूरी चार तिमाही परिणामों से मिला देते हैं। विकल्प D, पाँच, डी-एसआईबी ढाँचे के बकेट की संख्या है, पीसीए सीमाओं की नहीं, इसलिए यह विषयों के बीच का आम जाल है। जोड़ी याद रखें: डी-एसआईबी में पाँच बकेट, पीसीए में तीन सीमाएँ।

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