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GK क्विजबैंकिंग और वित्तीय जागरूकता

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता क्विज: साख पत्र (एलसी), बैंक गारंटी और व्यापार वित्त

  • 12 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता के अंतर्गत "साख पत्र (एलसी), बैंक गारंटी और व्यापार वित्त" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल द्वारा प्रकाशित कौन-सा नियम-समूह दस्तावेज़ी साख पत्रों को शासित करता है?

  1. A.इनकोटर्म्स 2020
  2. B.यूसीपी 600
  3. C.यूआरडीजी 758
  4. D.बेसल III
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यूसीपी 600

व्याख्या

सही उत्तर है ख, यूसीपी 600। दस्तावेज़ी साख के लिए एकरूप प्रथाएँ और रीतियाँ अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल की वह संहिता है जिसे दुनिया भर के बैंक अपने साख पत्रों में सम्मिलित करते हैं। इसका वर्तमान संस्करण आईसीसी प्रकाशन 600 है, जो 1 जुलाई 2007 से प्रभावी है और जिसमें उनतालीस अनुच्छेद हैं। ये अनुच्छेद साख जारी करने, दस्तावेज़ों की जाँच, विसंगतियों और श्रृंखला के प्रत्येक बैंक के कर्तव्यों को तय करते हैं।

विकल्प क, इनकोटर्म्स 2020, भी आईसीसी का प्रकाशन है, पर वह विक्रय संविदा में विक्रेता और क्रेता के बीच लागत, जोखिम और बीमा के दायित्व का बँटवारा करता है; दस्तावेज़ जाँच से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प ग, यूआरडीजी 758, मांग गारंटी के लिए आईसीसी के एकरूप नियम हैं, जो बैंक गारंटी पर लागू होते हैं, दस्तावेज़ी साख पर नहीं। विकल्प घ, बेसल III, बैंक पूँजी, उत्तोलन और नकदी पर बेसल समिति का ढाँचा है, जो विवेकपूर्ण मानक है। जोड़ी याद रखें: साख यूसीपी 600 से, गारंटी यूआरडीजी 758 से, सुपुर्दगी शर्तें इनकोटर्म्स से।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

साख पत्र के लेनदेन में जो पक्षकार अपने बैंक से साख खोलने का अनुरोध करता है, उसे क्या कहते हैं?

  1. A.लाभार्थी
  2. B.आवेदक या ओपनर
  3. C.सूचक बैंक
  4. D.परिचर्चा बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आवेदक या ओपनर

व्याख्या

सही उत्तर है ख, आवेदक या ओपनर। आवेदक वही आयातक या क्रेता होता है जो अपने बैंक के पास जाता है, विदेशी विक्रेता के पक्ष में साख जारी करने को कहता है, शर्तें और अपेक्षित दस्तावेज़ तय करता है और जारी करने का कमीशन देता है। आवेदक यह वचन भी देता है कि जब बैंक अनुपालक प्रस्तुति पर भुगतान करेगा, तब वह बैंक को प्रतिपूर्ति करेगा।

विकल्प क, लाभार्थी, सौदे का दूसरा छोर है: वह निर्यातक जिसके पक्ष में साख खुलती है और जो दस्तावेज़ प्रस्तुत करने पर धन पाता है। विकल्प ग, सूचक बैंक, लाभार्थी के देश का वह बैंक है जो साख की प्रत्यक्ष प्रामाणिकता जाँचकर उसे आगे देता है; जब तक वह साख की पुष्टि न करे, उस पर भुगतान का कोई दायित्व नहीं आता। विकल्प घ, परिचर्चा बैंक, दस्तावेज़ जाँचकर लाभार्थी को भुगतान या अग्रिम देता है और बाद में जारीकर्ता बैंक से प्रतिपूर्ति लेता है। सरल सूत्र: आवेदक आवेदन और भुगतान करता है, लाभार्थी लाभ पाता है।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

यूसीपी 600 के अनुसार दस्तावेज़ों के अनुपालन पर निर्णय लेने के लिए बैंक को अधिकतम कितना समय मिलता है?

  1. A.प्रस्तुति के दिन के बाद तीन बैंकिंग दिवस
  2. B.प्रस्तुति के दिन के बाद पाँच बैंकिंग दिवस
  3. C.प्रस्तुति से सात कैलेंडर दिवस
  4. D.प्रस्तुति से पंद्रह कैलेंडर दिवस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रस्तुति के दिन के बाद पाँच बैंकिंग दिवस

व्याख्या

सही उत्तर है ख, प्रस्तुति के दिन के बाद पाँच बैंकिंग दिवस। यूसीपी 600 का अनुच्छेद 14(ख) जारीकर्ता बैंक, पुष्टिकर्ता बैंक और किसी भी नामित बैंक को प्रस्तुति के दिन के बाद अधिकतम पाँच बैंकिंग दिवस देता है कि वह तय करे कि प्रस्तुति अनुपालक है या नहीं। प्रस्तुति का दिन स्वयं इस गणना में नहीं आता, और इस अवधि के भीतर समाप्ति तिथि आ जाने से यह अवधि छोटी नहीं होती।

विकल्प क, तीन बैंकिंग दिवस, पुरानी यूसीपी 500 की उचित समय वाली प्रथा से जुड़ी वह धारणा है जो अभ्यर्थियों को याद रह जाती है, पर वर्तमान नियमों में गलत है। विकल्प ग और विकल्प घ दो कारणों से गलत हैं: यूसीपी बैंकिंग दिवस गिनता है, कैलेंडर दिवस नहीं, और सात या पंद्रह का अंक अनुच्छेद 14(ख) में कहीं नहीं है। इस नियम का व्यावहारिक महत्व यह है कि पाँच बैंकिंग दिवस से अधिक विसंगत दस्तावेज़ दबाकर रखने वाला बैंक अस्वीकार करने का अधिकार खो देता है और उसे भुगतान करना ही पड़ता है।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

यूसीपी 600 के अनुसार, जिस साख पत्र में रद्द किए जाने के बारे में कुछ न लिखा हो, उसे कैसा माना जाता है?

  1. A.परिवर्तनीय, क्योंकि चुप्पी जारीकर्ता बैंक के पक्ष में जाती है
  2. B.अपरिवर्तनीय, चाहे ऐसा कोई उल्लेख न हो
  3. C.सूचक बैंक द्वारा स्वतः पुष्ट
  4. D.दूसरे लाभार्थी को स्वतः हस्तांतरणीय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अपरिवर्तनीय, चाहे ऐसा कोई उल्लेख न हो

व्याख्या

सही उत्तर है ख, अपरिवर्तनीय, चाहे ऐसा कोई उल्लेख न हो। यूसीपी 600 का अनुच्छेद 3 यही शब्दों में कहता है, और अनुच्छेद 10 जोड़ता है कि अपरिवर्तनीय साख में संशोधन या उसका रद्दीकरण जारीकर्ता बैंक, पुष्टिकर्ता बैंक, यदि कोई हो, और लाभार्थी की सहमति से ही हो सकता है। यह नियम निर्यातक की रक्षा करता है, जो साख के भरोसे पर माल खरीदकर लादता है।

विकल्प क यूसीपी 500 की पुरानी स्थिति बताता है, जहाँ इस विषय पर चुप साख परिवर्तनीय हो सकती थी, इसलिए यही सबसे आकर्षक गलत विकल्प है और इसी कारण प्रश्न पूछा जाता है। विकल्प ग गलत है क्योंकि पुष्टि कभी स्वतः नहीं होती: बैंक तभी पुष्टि जोड़ता है जब साख उससे ऐसा कहे और वह सहमत हो। विकल्प घ गलत है क्योंकि अनुच्छेद 38 के अनुसार साख हस्तांतरणीय तभी है जब जारीकर्ता बैंक उसे स्पष्ट रूप से हस्तांतरणीय कहे। तीनों पूर्व-निर्धारित स्थितियाँ साथ याद करें।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारत में प्रतिभूति की संविदा किस कानून से परिभाषित और शासित होती है?

  1. A.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
  2. B.भारतीय संविदा अधिनियम, 1872
  3. C.सरफेसी अधिनियम, 2002
  4. D.विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

व्याख्या

सही उत्तर है ख, भारतीय संविदा अधिनियम, 1872। इस अधिनियम की धारा 126 प्रतिभूति की संविदा को इस रूप में परिभाषित करती है कि किसी तीसरे व्यक्ति के चूक करने पर उसका वचन पूरा करने या उसकी देयता चुकाने की संविदा, और उसके तीन पक्षकार बताती है: प्रतिभू जो गारंटी देता है, मूल ऋणी जिसकी चूक ढकी जाती है, और लेनदार जिसे गारंटी दी जाती है। बैंक गारंटी ऐसी ही संविदा है जिसमें बैंक प्रतिभू होता है।

विकल्प क, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881, वचन पत्र, विनिमय पत्र और चेक से संबंधित है, जो भुगतान के लिखत हैं, प्रतिभूति की संविदा नहीं। विकल्प ग, सरफेसी अधिनियम, 2002, बैंकों को न्यायालय जाए बिना प्रतिभूति हित प्रवर्तित करने और डूबे ऋण वसूलने की शक्ति देता है। विकल्प घ, फेमा 1999, विदेशी मुद्रा और सीमा-पार लेनदेन को शासित करता है, और व्यापार कार्य संभालने के लिए बैंक को इसके अंतर्गत अधिकृत व्यापारी लाइसेंस चाहिए, पर गारंटी स्वयं संविदा अधिनियम पर ही टिकी रहती है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

बैंक के लिए बैंक गारंटी जारी करना किस प्रकार की सुविधा है?

  1. A.निधि आधारित कार्यशील पूँजी अग्रिम
  2. B.गैर-निधि आधारित सुविधा, जो आकस्मिक देयता बनाती है
  3. C.अचल संपत्ति से प्रतिभूत सावधि ऋण
  4. D.अनुमोदित प्रतिभूतियों में निवेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गैर-निधि आधारित सुविधा, जो आकस्मिक देयता बनाती है

व्याख्या

सही उत्तर है ख, गैर-निधि आधारित सुविधा, जो आकस्मिक देयता बनाती है। गारंटी जारी होने के दिन बैंक से कोई धन बाहर नहीं जाता। बैंक केवल अपना नाम उधार देता है, कमीशन के रूप में शुल्क आय कमाता है, और राशि को आकस्मिक देयता के रूप में दर्ज करता है, जो वास्तविक निकासी तभी बनेगी जब लाभार्थी गारंटी का आह्वान करे और बैंक को भुगतान करना पड़े। साख पत्र, बिलों की सह-स्वीकृति और विलंबित भुगतान गारंटी भी इसी तरह काम करती हैं।

विकल्प क गलत है क्योंकि निधि आधारित अग्रिम, जैसे नकद साख या ओवरड्राफ्ट, बैंक का धन तुरंत ग्राहक के हाथ में देता है। विकल्प ग इसी कारण गलत है, और गारंटी की पहचान वचन से होती है, ली गई प्रतिभूति से नहीं; बैंक उसके विरुद्ध मार्जिन धन या संपार्श्विक रख सकता है। विकल्प घ बैंक के कोषागार कार्य का वर्णन है। परीक्षा का बिंदु यह है कि आह्वान पर भुगतान होते ही आकस्मिक देयता निधिक जोखिम बन जाती है और बकाया दावा बैंक की पुस्तकों में अग्रिम हो जाता है।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की कौन-सी धारा कहती है कि प्रतिभू की देयता मूल ऋणी की देयता के सह-विस्तृत होती है, जब तक संविदा में अन्यथा न लिखा हो?

  1. A.धारा 124
  2. B.धारा 126
  3. C.धारा 128
  4. D.धारा 130
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. धारा 128

व्याख्या

सही उत्तर है ग, धारा 128। यह धारा निर्धारित करती है कि प्रतिभू की देयता मूल ऋणी की देयता के सह-विस्तृत होगी, जब तक संविदा में अन्यथा उपबंधित न हो। इसी कारण बिना शर्त गारंटी देने वाले बैंक से पूरी राशि मांगी जा सकती है और लेनदार को पहले अपने ग्राहक के विरुद्ध सभी उपाय आज़माने की आवश्यकता नहीं होती।

विकल्प क, धारा 124, क्षतिपूर्ति की संविदा को परिभाषित करती है, जिसमें एक पक्ष दूसरे को अपने या किसी अन्य व्यक्ति के आचरण से होने वाली हानि से बचाने का वचन देता है; क्षतिपूर्ति और प्रतिभूति संबंधित पर भिन्न हैं। विकल्प ख, धारा 126, प्रतिभूति की संविदा और उसके तीन पक्षकारों की परिभाषा है, इसलिए यही सबसे निकट का गलत उत्तर है। विकल्प घ, धारा 130, सतत गारंटी को भावी लेनदेनों के लिए सूचना देकर प्रतिसंहृत करने से संबंधित है। क्रम याद रखें: 124 क्षतिपूर्ति, 126 प्रतिभूति, 128 सह-विस्तृत देयता, 130 प्रतिसंहरण।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

विदेशी क्रेता से साख पत्र प्राप्त निर्यातक उसी साख के बल पर अपने कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता के पक्ष में नई साख खोलता है। यह कौन-सी साख है?

  1. A.घूर्णी साख
  2. B.बैक-टू-बैक साख
  3. C.रेड क्लॉज साख
  4. D.स्टैंडबाय साख पत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बैक-टू-बैक साख

व्याख्या

सही उत्तर है ख, बैक-टू-बैक साख। यहाँ बिचौलिए या निर्माता को मिली निर्यात साख को उस दूसरी, सामान्यतः छोटी, साख की प्रतिभूति बनाया जाता है जो माल या कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता के पक्ष में जारी होती है। दूसरी साख खोलने वाला बैंक पहली साख की प्राप्ति पर निर्भर रहता है, इसलिए दोनों साखों के लदान की तारीखें और दस्तावेज़ मिलाए जाते हैं और दूसरी साख पहले समाप्त होती है।

विकल्प क, घूर्णी साख, प्रत्येक आहरण के बाद अपने मूल मूल्य पर बहाल हो जाती है और एक ही संविदा के अंतर्गत बार-बार लदान के लिए उपयोगी है, आपूर्तिकर्ता के वित्तपोषण के लिए नहीं। विकल्प ग, रेड क्लॉज साख, सूचक या भुगतानकर्ता बैंक को आवेदक के जोखिम पर लाभार्थी को पूर्व-लदान अग्रिम देने की अनुमति देती है; वह धन उसी साख के अंतर्गत आता है, नई साख के अंतर्गत नहीं। विकल्प घ, स्टैंडबाय साख पत्र, साख के रूप में गारंटी है। बैक-टू-बैक को हस्तांतरणीय साख से न मिलाएँ, जिसमें वही साख आगे दी जाती है।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

निर्यात हेतु माल खरीदने, संसाधित करने और पैक करने के लिए निर्यातक को दिया जाने वाला पूर्व-लदान ऋण आमतौर पर किस नाम से जाना जाता है?

  1. A.बिल बट्टाकरण
  2. B.पैकिंग क्रेडिट
  3. C.क्रेता साख
  4. D.फॉरफेटिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पैकिंग क्रेडिट

व्याख्या

सही उत्तर है ख, पैकिंग क्रेडिट। पैकिंग क्रेडिट पुष्ट निर्यात आदेश या साख पत्र के विरुद्ध दिया गया पूर्व-लदान अग्रिम है, जिससे निर्यातक कच्चा माल खरीद सके, उत्पादन और प्रसंस्करण कर सके और खेप पैक कर सके। इसका निपटान निर्यात आय से होता है या इसे लदानोत्तर वित्त में बदल दिया जाता है, और यह विदेशी मुद्रा में पीसीएफसी के रूप में भी दिया जा सकता है।

विकल्प क, बिल बट्टाकरण, लदानोत्तर वित्त है: निर्यातक माल भेज चुका होता है और बैंक निर्यात बिल खरीदता या बट्टा करता है। विकल्प ग, क्रेता साख, आयातक के लिए जुटाया गया अल्पकालिक ऋण है जिससे वह विदेशी आपूर्तिकर्ता को भुगतान करे, अतः वह आयात का वित्तपोषण करता है। विकल्प घ, फॉरफेटिंग, मध्यम अवधि की निर्यात प्राप्य राशियों की बिना प्रत्याश्रय खरीद है, जो भी लदान के बाद होती है। समय-क्रम ध्यान रखें: लदान से पहले पैकिंग क्रेडिट, लदान के बाद बिलों की परिचर्चा, खरीद या बट्टाकरण, फैक्टरिंग या फॉरफेटिंग।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

निर्यात साख के लिए देश की शीर्ष संस्था भारतीय निर्यात-आयात बैंक ने किस वर्ष कार्य आरंभ किया?

  1. A.1964
  2. B.1972
  3. C.1982
  4. D.1992
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1982

व्याख्या

सही उत्तर है ग, 1982। भारतीय निर्यात-आयात बैंक की स्थापना संसद के 1981 के अधिनियम के अंतर्गत हुई और उसने 1982 में कार्य आरंभ किया, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक का अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण कारोबार अपने हाथ में लेते हुए। यह भारत के विदेश व्यापार का वित्तपोषण, सुगमीकरण और प्रवर्तन करता है, विदेशी सरकारों और क्रेताओं को क्रेता साख तथा साख सीमाएँ देता है, और भारतीय कंपनियों के परियोजना निर्यात को सहारा देता है।

विकल्प क, 1964, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक और यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़ा वर्ष है, एक्ज़िम बैंक से नहीं। विकल्प ख, 1972, बैंकिंग प्रश्नपत्रों में अक्सर प्रयुक्त भटकाने वाली तारीख है। विकल्प घ, 1992, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम तथा उदारीकरण के सुधारों का वर्ष है, इसलिए वह उस अभ्यर्थी को ठीक लगता है जो एक्ज़िम बैंक को अर्थव्यवस्था के खुलने से जोड़ता है। दोनों व्यापार संस्थाएँ साथ याद रखें: जुलाई 1957 से ईसीजीसी, 1982 से एक्ज़िम बैंक।

Q11.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

पंजाब नेशनल बैंक में पकड़ी गई बड़ी धोखाधड़ी के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने मार्च 2018 में आयात व्यापार साख के लिए कौन-सा साधन बंद कर दिया?

  1. A.साख पत्र
  2. B.अंडरटेकिंग पत्र
  3. C.बैंक गारंटी
  4. D.स्टैंडबाय साख पत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अंडरटेकिंग पत्र

व्याख्या

सही उत्तर है ख, अंडरटेकिंग पत्र। मार्च 2018 में रिज़र्व बैंक ने भारत में आयात से संबंधित व्यापार साख के लिए अंडरटेकिंग पत्र और कम्फर्ट पत्र जारी करना बंद कर दिया। इन साधनों में बैंक का यह वचन होता था कि वह विदेशी ऋणदाता को चुकाएगा, ये सामान्य दस्तावेज़ी अनुशासन से नहीं गुज़रते थे, और उक्त धोखाधड़ी में ये स्विफ्ट नेटवर्क से जारी हुए पर बैंक की कोर बैंकिंग प्रणाली में दर्ज ही नहीं हुए, इसलिए जोखिम वर्षों तक अदृश्य रहा।

विकल्प क, साख पत्र, और विकल्प ग, बैंक गारंटी, अनुमत बने रहे, और रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट कहा कि इनके विरुद्ध व्यापार साख जुटाई जा सकती है। विकल्प घ, स्टैंडबाय साख पत्र, गारंटी का ही एक रूप है और नियमों के भीतर उपलब्ध रहा। परीक्षकों को प्रिय अगला सबक पर्यवेक्षी है: बैंकों को निर्देश दिया गया कि वे स्विफ्ट संदेश प्रणाली को कोर बैंकिंग प्रणाली से जोड़ें, जिससे पुस्तकों में प्रविष्टि के बिना कोई सीमा-पार संदेश न जाए।

Q12.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

आईसीसी इनकोटर्म्स के अनुसार सीआईएफ शर्तों वाली संविदा में विक्रेता किसकी लागत वहन करता है?

  1. A.केवल अपने परिसर में माल उपलब्ध कराने की
  2. B.नामित गंतव्य बंदरगाह तक भाड़ा और समुद्री बीमा की
  3. C.गंतव्य पर सभी आयात शुल्क और करों की
  4. D.केवल क्रेता के देश में आंतरिक ढुलाई की
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नामित गंतव्य बंदरगाह तक भाड़ा और समुद्री बीमा की

व्याख्या

सही उत्तर है ख, नामित गंतव्य बंदरगाह तक भाड़ा और समुद्री बीमा की। सीआईएफ का अर्थ है लागत, बीमा और भाड़ा: विक्रेता माल की लागत देता है, नामित गंतव्य बंदरगाह तक भाड़े की संविदा करता और भुगतान करता है, तथा क्रेता के हित में समुद्री बीमा कराता है। किंतु जोखिम लदान बंदरगाह पर माल जहाज़ पर चढ़ने के साथ ही हस्तांतरित हो जाता है, और यही इस पद का जाल है।

विकल्प क एक्स वर्क्स का वर्णन है, जिसमें विक्रेता केवल अपने परिसर में माल क्रेता के निपटान हेतु रख देता है और उसके बाद सब व्यवस्था क्रेता करता है। विकल्प ग डीडीपी का वर्णन है, जो विक्रेता पर अधिकतम दायित्व डालता है, जिसमें आयात के लिए माल छुड़ाना और शुल्क चुकाना शामिल है। विकल्प घ कोई इनकोटर्म ही नहीं है। विक्रेता के दायित्व की सीढ़ी याद रखें: एक्स वर्क्स, एफओबी, सीएफआर, सीआईएफ, डीडीपी; और यह भी कि सीएफआर बीमा के बिना सीआईएफ है।

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