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GK क्विजबैंकिंग और वित्तीय जागरूकता

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता क्विज: बैंकिंग और वित्त से जुड़ी प्रमुख समितियां

  • 10 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता के अंतर्गत "बैंकिंग और वित्त से जुड़ी प्रमुख समितियां" विषय पर यह क्विज़ 10 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

10 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की सिफारिश किस आयोग ने की थी?

  1. A.हिल्टन यंग आयोग
  2. B.नरसिंहम समिति
  3. C.चक्रवर्ती समिति
  4. D.मल्होत्रा समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. हिल्टन यंग आयोग

व्याख्या

सही उत्तर A, हिल्टन यंग आयोग है। भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन, जिसे अपने अध्यक्ष के नाम पर हिल्टन यंग आयोग कहा जाता है, ने 1926 में रिपोर्ट दी और भारत के लिए केंद्रीय बैंक की सिफारिश की; इस सिफारिश को 1934 के भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम से लागू किया गया, और रिजर्व बैंक ने एक अप्रैल 1935 से कार्य आरंभ किया। विकल्प B, नरसिंहम समिति, ने 1991 और 1998 में पहले से बनी बैंकिंग व्यवस्था के सुधार पर रिपोर्ट दी, और उसे रिजर्व बैंक की स्थापना का श्रेय देना इस अध्याय की सबसे आम भूल है। विकल्प C, 1985 की चक्रवर्ती समिति, ने मौद्रिक प्रणाली के कामकाज की समीक्षा की। विकल्प D, 1993 की मल्होत्रा समिति, बीमा क्षेत्र से संबंधित थी और उससे बीमा नियामक की स्थापना हुई।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

1991 की नरसिंहम समिति किस विषय से संबंधित है?

  1. A.बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली का सुधार
  2. B.बीमा क्षेत्र का सुधार
  3. C.पूंजी खाता परिवर्तनीयता
  4. D.डिजिटल भुगतान को गहरा करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली का सुधार

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली का सुधार है। 1991 की वित्तीय प्रणाली समिति, जिसके अध्यक्ष एम. नरसिंहम थे, उदारीकरण के आरंभ में आई और उसने कम सांविधिक चलनिधि तथा नकद आरक्षित अनुपात, आय निर्धारण और प्रावधान के विवेकपूर्ण मानदंड, संपत्तियों का मानक, अवमानक, संदिग्ध एवं हानि में वर्गीकरण, पूंजी पर्याप्तता की आवश्यकता तथा चार स्तरीय बैंकिंग ढांचे की सिफारिश की; 1998 की दूसरी नरसिंहम रिपोर्ट ने मजबूत बैंकों का विलय, कमजोर बैंकों के लिए संकीर्ण बैंकिंग और संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियां जोड़ीं। विकल्प B, बीमा क्षेत्र का सुधार, 1993 की मल्होत्रा समिति का विषय है। विकल्प C, पूंजी खाता परिवर्तनीयता, 1997 और 2006 की तारापोर समिति का विषय है। विकल्प D, डिजिटल भुगतान, 2019 की नंदन नीलेकणि समिति का विषय है, जो बहुत बाद की रिपोर्ट है।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में पूंजी खाता परिवर्तनीयता पर किस समिति ने रिपोर्ट दी थी?

  1. A.तारापोर समिति
  2. B.वर्मा समिति
  3. C.घोष समिति
  4. D.गोइपोरिया समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. तारापोर समिति

व्याख्या

सही उत्तर A, तारापोर समिति है। एस. एस. तारापोर की अध्यक्षता वाली समिति ने 1997 में और फिर 2006 में पूंजी खाता परिवर्तनीयता पर रिपोर्ट दी, अर्थात पूंजी लेनदेन के लिए रुपये को बदलने की स्वतंत्रता पर, और उसने राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, मुद्रास्फीति की कम दर, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था तथा अनर्जक संपत्तियों के कम स्तर जैसी पूर्व शर्तें बताईं। विकल्प B, 1999 की वर्मा समिति, ने कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्गठन की जांच की। विकल्प C, 1992 की घोष समिति, ने बैंकों में धोखाधड़ी और अनुचित व्यवहार पर रिपोर्ट दी। विकल्प D, 1991 की गोइपोरिया समिति, ने बैंकों की ग्राहक सेवा पर रिपोर्ट दी, जिस विषय को 2011 की दामोदरन समिति ने फिर देखा। रुपया चालू खाते पर पहले से परिवर्तनीय है, इसलिए इस समिति की पूरी चर्चा पूंजी खाते के विषय में है।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक किस समिति की सिफारिशों से बने?

  1. A.पी. जे. नायक समिति
  2. B.नचिकेत मोर समिति
  3. C.खान कार्य समूह
  4. D.वाघुल समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नचिकेत मोर समिति

व्याख्या

सही उत्तर B, नचिकेत मोर समिति है। छोटे व्यवसायों और कम आय वाले परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवाओं पर नचिकेत मोर की अध्यक्षता वाली समिति ने 2014 में रिपोर्ट दी और विभेदित बैंकिंग लाइसेंस का प्रस्ताव दिया; उसके कार्य से रिजर्व बैंक ने भुगतान बैंकों के दिशानिर्देश जारी किए, जो जमा ले सकते हैं परंतु ऋण नहीं दे सकते, और लघु वित्त बैंकों के भी, जो मुख्यतः छोटे ऋणियों को ऋण देते हैं। विकल्प A, 2014 की पी. जे. नायक समिति, ने बैंक बोर्डों के प्रशासन पर रिपोर्ट दी और सरकारी हिस्सेदारी के लिए बैंक निवेश कंपनी का प्रस्ताव दिया। विकल्प C, 1998 का खान कार्य समूह, विकास वित्तीय संस्थाओं और बैंकों की भूमिकाओं के सामंजस्य से संबंधित था, अर्थात सर्वांगीण बैंकिंग के विचार से। विकल्प D, 1987 की वाघुल समिति, ने मुद्रा बाजार पर रिपोर्ट दी। एक ही वर्ष की दो समितियां यहां जाल हैं, इसलिए मोर को लाइसेंस से और नायक को बोर्ड से जोड़ें।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में मौद्रिक नीति समिति और लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण किस समिति की रिपोर्ट से आया?

  1. A.उर्जित पटेल समिति
  2. B.बिमल जालान समिति
  3. C.दीपक मोहंती समिति
  4. D.टंडन समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उर्जित पटेल समिति

व्याख्या

सही उत्तर A, उर्जित पटेल समिति है। 2014 की उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति को मौद्रिक नीति ढांचे की समीक्षा और उसे मजबूत करने का कार्य दिया गया था; उसने सिफारिश की कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति को मुख्य आधार बनाया जाए, संख्यात्मक मुद्रास्फीति लक्ष्य अपनाया जाए, और नीतिगत निर्णय एक व्यक्ति के बजाय समिति द्वारा लिए जाएं, जिससे लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण और मौद्रिक नीति समिति बनी। विकल्प B, 2019 की बिमल जालान समिति, ने रिजर्व बैंक के आर्थिक पूंजी ढांचे पर रिपोर्ट दी, अर्थात केंद्रीय बैंक को कितनी पूंजी रखनी चाहिए। विकल्प C, 2015 की दीपक मोहंती समिति, ने वित्तीय समावेशन का मध्यम अवधि मार्ग बताया। विकल्प D, 1974 की टंडन समिति, ने कार्यशील पूंजी वित्त के मानदंड तय किए और वह बैंकिंग के पूरी तरह भिन्न काल की है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

नाबार्ड की स्थापना की सिफारिश किस समिति ने की थी?

  1. A.नरसिंहम कार्य समूह
  2. B.क्राफिकार्ड, अध्यक्ष बी. शिवरामन
  3. C.खुसरो समिति
  4. D.गाडगिल अध्ययन समूह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्राफिकार्ड, अध्यक्ष बी. शिवरामन

व्याख्या

सही उत्तर B, क्राफिकार्ड, अध्यक्ष बी. शिवरामन है। कृषि और ग्रामीण विकास के लिए संस्थागत ऋण व्यवस्था की समीक्षा समिति, जिसे संक्षेप में क्राफिकार्ड कहा जाता है, ने ग्रामीण तथा कृषि ऋण के लिए एक शीर्ष संस्था की सिफारिश की, और नाबार्ड जुलाई 1982 में स्थापित हुआ। विकल्प A, 1975 का नरसिंहम कार्य समूह, ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सिफारिश की, जिनमें पहला दो अक्टूबर 1975 को खुला, और यही जोड़ी नाबार्ड से सबसे अधिक भ्रमित की जाती है। विकल्प C, खुसरो समिति, ने बाद में 1989 में कृषि ऋण प्रणाली की समीक्षा की, परंतु नाबार्ड नहीं बनाया। विकल्प D, गाडगिल अध्ययन समूह, 1969 में आरंभ अग्रणी बैंक योजना से जुड़ा है, जिसमें एक बैंक किसी जिले की ऋण आवश्यकताओं का भार लेता है। शिवरामन को नाबार्ड के साथ और नरसिंहम को क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के साथ याद रखें।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

1993 की मल्होत्रा समिति किस क्षेत्र के सुधार से संबंधित थी?

  1. A.बीमा
  2. B.म्यूचुअल फंड
  3. C.वस्तु बाजार
  4. D.सहकारी बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बीमा

व्याख्या

सही उत्तर A, बीमा है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर आर. एन. मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने 1993 में बीमा क्षेत्र के सुधार पर रिपोर्ट दी; उसने इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और स्वतंत्र नियामक बनाने की सिफारिश की, जिससे दशक के अंत में बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण स्थापित हुआ। विकल्प B, म्यूचुअल फंड, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अंतर्गत आते हैं, जिसे 1992 के अधिनियम से सांविधिक शक्तियां मिलीं। विकल्प C, वस्तु बाजार, का नियमन वायदा बाजार आयोग करता था, जिसे बाद में सेबी में मिला दिया गया। विकल्प D, सहकारी बैंक, रिजर्व बैंक के कई अलग कार्य समूहों का विषय रहे हैं। मल्होत्रा को बीमा के साथ उसी तरह याद करें जैसे नरसिंहम को बैंकिंग और तारापोर को परिवर्तनीयता के साथ।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

1974 की टंडन समिति ने निम्नलिखित में से किसके मानदंड तय किए थे?

  1. A.उद्योग को कार्यशील पूंजी वित्त
  2. B.प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के लक्ष्य
  3. C.बैंकों की पूंजी पर्याप्तता
  4. D.बैंकों में ग्राहक सेवा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उद्योग को कार्यशील पूंजी वित्त

व्याख्या

सही उत्तर A, उद्योग को कार्यशील पूंजी वित्त है। पी. एल. टंडन की अध्यक्षता वाले अध्ययन समूह ने 1974 में कार्यशील पूंजी के लिए बैंक ऋण के मानदंडों पर रिपोर्ट दी, प्रत्येक उद्योग के लिए माल सूची और प्राप्य राशियों के स्वीकार्य स्तर तय किए तथा उधार देने की वे विधियां बताईं जो यह सीमित करती थीं कि बैंक ऋणी की कार्यशील पूंजी के अंतर का कितना भाग वित्तपोषित करेगा; इसके बाद 1979 की चोर समिति ने उससे बनी नकद ऋण प्रणाली की समीक्षा की। विकल्प B, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, बैंक राष्ट्रीयकरण के बाद रिजर्व बैंक द्वारा तय लक्ष्यों से चलता है, इस समिति से नहीं। विकल्प C, पूंजी पर्याप्तता, नरसिंहम रिपोर्टों और बेसल मानदंडों से आई। विकल्प D, ग्राहक सेवा, 1991 की गोइपोरिया समिति और 2011 की दामोदरन समिति का विषय है। टंडन और चोर को कार्यशील पूंजी की जोड़ी के रूप में याद रखें।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

2014 की पी. जे. नायक समिति ने किस प्रश्न की जांच की थी?

  1. A.बैंकों के बोर्ड का प्रशासन
  2. B.सूक्ष्म वित्त संस्थाएं
  3. C.दबावग्रस्त ऋणों का समाधान
  4. D.आधारभूत संरचना का वित्तपोषण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंकों के बोर्ड का प्रशासन

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंकों के बोर्ड का प्रशासन है। भारत में बैंकों के बोर्डों के प्रशासन की समीक्षा समिति, जिसके अध्यक्ष पी. जे. नायक थे, ने 2014 में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने निदेशकों की नियुक्ति की पद्धति से और सरकार की स्वामी तथा नीति निर्माता की दोहरी भूमिका से बाधित हैं, और उसने सरकारी हिस्सेदारी को बैंक निवेश कंपनी को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया। विकल्प B, सूक्ष्म वित्त संस्थाएं, 2011 की वाई. एच. मालेगम समिति का विषय थीं, जिसके बाद रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी एमएफआई श्रेणी बनाई। विकल्प C, दबावग्रस्त ऋणों का समाधान, 2020 की के. वी. कामथ समिति का विषय था, जिसने महामारी के बाद समाधान के वित्तीय मानदंड तय किए। विकल्प D, आधारभूत संरचना का वित्तपोषण, 2007 की दीपक पारेख समिति ने देखा।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

1992 की घोष समिति ने बैंकों से जुड़े किस विषय पर रिपोर्ट दी थी?

  1. A.बैंकों में धोखाधड़ी और अनुचित व्यवहार
  2. B.मुद्रा बाजार सुधार
  3. C.कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
  4. D.कृषि ऋण
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंकों में धोखाधड़ी और अनुचित व्यवहार

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंकों में धोखाधड़ी और अनुचित व्यवहार है। ए. घोष की अध्यक्षता वाली समिति ने 1992 में बैंकों में धोखाधड़ी और अनुचित व्यवहार पर रिपोर्ट दी तथा आंतरिक नियंत्रण की व्यवस्था, अलग सतर्कता तंत्र और धोखाधड़ी की रोकथाम एवं शीघ्र पहचान के नियमों की सिफारिश की। उसी वर्ष जानकीरमण समिति ने शेयर बाजार घोटाले के बाद बैंकों के प्रतिभूति लेनदेन की जांच की, इसलिए 1992 की इन दो रिपोर्टों को अलग अलग याद रखना चाहिए। विकल्प B, मुद्रा बाजार सुधार, 1987 की वाघुल समिति का विषय है। विकल्प C, कमजोर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 1999 की वर्मा समिति का विषय थे, जिसने बैंकों को उनकी वित्तीय मजबूती के अनुसार वर्गीकृत किया। विकल्प D, कृषि ऋण, की समीक्षा 1989 की खुसरो समिति ने और उससे पहले क्राफिकार्ड ने की, जिसने नाबार्ड की सिफारिश की थी।

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