क्यूएनयू लैब्स की क्वांटम परियोजना में टीडीबी सहायता और कुल लागत कितनी है?
- A.250 करोड़ रुपये की परियोजना में 100 करोड़ रुपये की सहायता
- B.300 करोड़ रुपये की परियोजना में 150 करोड़ रुपये की सहायता
- C.400 करोड़ रुपये की परियोजना में 200 करोड़ रुपये की सहायता
- D.500 करोड़ रुपये की परियोजना में 250 करोड़ रुपये की सहायता
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 300 करोड़ रुपये की परियोजना में 150 करोड़ रुपये की सहायता है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से परियोजना लागत का आधा हिस्सा दे रहा है और यह सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से मिलेगी। परियोजना का उद्देश्य भारत के क्वांटम सुरक्षित एवं संवेदन नेटवर्क के लिए संपूर्ण स्वदेशी क्वांटम सुरक्षा तथा संवेदन ढांचे का विकास, एकीकरण और सत्यापन करना है, जिससे अभी चार और पांच स्तर पर मौजूद तकनीकें उच्चतम तैयारी स्तर तक पहुंच सकें। विकल्प A, C और D में दिए आंकड़े समझौते से मेल नहीं खाते, इसलिए गलत हैं। जिन्हें केवल एक आंकड़ा याद है वे भी इन्हें हटा सकते हैं, क्योंकि बोर्ड का हिस्सा कुल लागत का ठीक आधा है। काम पहचान सुरक्षा, स्थिति अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय अखंडता पर केंद्रित है।
पूरा लेख पढ़ें: टीडीबी और क्यूएनयू लैब्स में 150 करोड़ रुपये का क्वांटम समझौता
अभ्यास प्रश्न
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने क्वांटम सुरक्षित प्रौद्योगिकी सहायता के लिए किस कंपनी से समझौता किया?
- A.क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
- B.क्यूपीआई एआई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे
- C.बोसोनक्यू साई प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल
- D.क्वांटम इकोसिस्टम प्रौद्योगिकी परिषद
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कर्नाटक की इस कंपनी के साथ अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से वित्तीय सहायता का समझौता किया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →टीडीबी समर्थित क्वांटम कार्यक्रम के चार स्तंभों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?
- A.पहचान सुरक्षा
- B.स्थिति अखंडता
- C.समय अखंडता
- D.जलवायु सहनशीलता
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कार्यक्रम के चार स्तंभ पहचान सुरक्षा, स्थिति अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय अखंडता हैं। पहचान सुरक्षा के अंतर्गत क्वांटम सुरक्षित भौतिक अननुकरणीय फलन तथा क्वांटम सुरक्षित विश्वसनीय प्लेटफॉर्म मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे, जिससे उपकरण की पहचान हार्डवेयर स्तर पर पक्की हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस अध्ययन में जिप्सम वाला कौन सा मंगल सदृश रेगिस्तान भारत से बाहर है?
- A.अटाकामा रेगिस्तान, चिली
- B.सहारा रेगिस्तान, अफ्रीका
- C.गोबी रेगिस्तान, मंगोलिया
- D.कालाहारी रेगिस्तान, बोत्सवाना
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वहां और तमिलनाडु के अर्ध-शुष्क भूवैज्ञानिक एवं पुराजलवायु क्षेत्र तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स में जिप्सम की पहचान हुई, इसलिए दोनों स्थान अतीत की जल गतिविधि के अध्ययन के लिए मंगल सदृश स्थल माने गए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर से मंगल सदृश स्थलों की पहचान किस संस्थान के दल ने की?
- A.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद
- B.केरल विश्वविद्यालय, भूविज्ञान विभाग
- C.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु
- D.राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र
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इस शोध में प्रयुक्त लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर इसी विभाग में डीएसटी-फिस्ट कार्यक्रम के तहत उपलब्ध है, और शोध दल का नेतृत्व डीएसटी-फिस्ट के परियोजना समन्वयक डॉ. सजिन कुमार के. एस. ने किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तमिलनाडु के नेवेली को मंगल सदृश स्थल सिद्ध करने में किस खनिज की पहचान सहायक रही?
- A.मेलेंटेराइट
- B.जिप्सम
- C.हेमेटाइट
- D.ओलिवीन
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नेवेली में यह खनिज लिग्नाइट की परत में मौजूद मार्कासाइट से सल्फाइड ऑक्सीकरण के जरिये बनता है और अल्पकालिक आर्द्र, अम्लीय तथा ऑक्सीकारक परिस्थितियों को दर्ज करता है।
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