टीडीबी ने प्रोजेक्ट वीरएआई को 130 करोड़ रुपये दिए
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के साथ करार कर स्वदेशी एआई विजन चिप के लिए आरडीआई कोष से 130 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की।

चर्चा में क्यों
5 अक्टूबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के साथ करार किया और प्रोजेक्ट वीरएआई के लिए आरडीआई कोष से 130 करोड़ रुपये की सहायता दी, जो सीसीटीवी और निगरानी के लिए स्वदेशी एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप बनाएगी।
भारत में अपनी ही चिप डिजाइन करने की मुहिम को 5 अक्टूबर 2026 को एक नई परियोजना मिली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने बेंगलुरु, कर्नाटक की कंपनी बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के साथ करार किया और अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष से 130 करोड़ रुपये देने का वादा किया।
प्रोजेक्ट वीरएआई क्या बनाएगा
परियोजना का नाम प्रोजेक्ट वीरएआई है। इसकी कुल लागत 260 करोड़ रुपये है, इसलिए बोर्ड की राशि आधा खर्च उठाएगी। लक्ष्य कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप तैयार करना है, यानी सिलिकॉन का एक ही टुकड़ा, जो हर तस्वीर को कहीं और भेजने के बजाय कैमरे के भीतर ही समझ ले। यह चिप एक संप्रभु प्रौद्योगिकी मंच पर बनेगी, अर्थात डिजाइन और स्वामित्व दोनों देश के भीतर रहेंगे।
बोर्ड की सहायता अनुदान के रूप में नहीं आएगी। इसे वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण के जरिये दिया जाएगा, जिसे बोर्ड आगे चलकर हिस्सेदारी में बदल सकता है।
टीआरएल-5 से टीआरएल-9 तक
यह धनराशि डिजाइन को उस खाई के पार ले जाने के लिए है, जहाँ भारत के कई हार्डवेयर विचार अटक जाते हैं। तकनीक आज प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (टीआरएल) 5 पर है और परियोजना को इसे टीआरएल 9 तक पहुँचाना है, वह चरण जहाँ उत्पाद प्रयोगशाला के बजाय वास्तविक उपयोग में खरा उतर चुका होता है। बिगएंडियन इस राशि से आगे का विकास, मान्यकरण, एकीकरण, परीक्षण और विस्तार करेगी।
चिप का उपयोग कहाँ होगा
पहला बाजार निगरानी है, खासकर भारत और ग्लोबल साउथ के सीसीटीवी तंत्र। ऐसे कैमरे अब महत्वपूर्ण ढाँचे के भीतर लगे होते हैं, इसलिए देश में बनी चिप विदेश में विकसित सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता घटाएगी तथा डेटा सुरक्षा, निजता, उपकरण-स्तर की समझ और संपर्क क्षमता चिप पर ही सँभालेगी। आगे की योजना में यह मंच रक्षा, वाहन, औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्रों तक जाएगा।
एक ही काम वाली चिप क्यों
कार्यक्रम ने जानबूझकर सामान्य प्रयोजन वाले प्रोसेसर की जगह विशिष्ट उपयोग वाली चिप चुनी है, क्योंकि सीमित उद्देश्य वाला डिजाइन बाजार में जल्दी पहुँचता है और किसी एक उद्योग की जरूरत अधिक ठीक-ठीक पूरी करता है। इससे भारत के बड़े वीएलएसआई डिजाइन इंजीनियर समूह को अपना उत्पाद भी मिलेगा। टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने सेमीकंडक्टर को लगभग हर उभरती तकनीक की नींव बताया और कहा कि आरडीआई कोष उन्हीं तकनीकों के लिए है, जिन्हें उन्नत विकास से व्यापारिक तैनाती तक पहुँचने में भारी निवेश चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| परियोजना | प्रोजेक्ट वीरएआई |
|---|---|
| सहायता | अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष से 130 करोड़ रुपये |
| कुल लागत | 260 करोड़ रुपये |
| सहायता देने वाला निकाय | प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग |
| कंपनी | बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स, बेंगलुरु, कर्नाटक |
| माध्यम | वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी) |
| तकनीकी छलांग | प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5 से स्तर 9 |
| उत्पाद | कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) |
| पहला उपयोग | भारत और ग्लोबल साउथ में सीसीटीवी तथा निगरानी |
| टीडीबी सचिव | राजेश कुमार पाठक |
| तिथि | 5 अक्टूबर 2026 |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: सहायता देने वाला निकाय (टीडीबी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन), कंपनी (बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स, बेंगलुरु, कर्नाटक), परियोजना का नाम (वीरएआई), सहायता (आरडीआई कोष से 130 करोड़ रुपये), कुल लागत (260 करोड़ रुपये), माध्यम (वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण), तकनीकी छलांग (टीआरएल-5 से टीआरएल-9), उत्पाद (कैमरे के लिए एआई विजन एसओसी) और टीडीबी सचिव राजेश कुमार पाठक।
अभ्यास प्रश्न
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्रोजेक्ट वीरएआई को आरडीआई कोष से कितनी सहायता मंजूर की है?
- A.100 करोड़ रुपये
- B.130 करोड़ रुपये
- C.260 करोड़ रुपये
- D.500 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 130 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 130 करोड़ रुपये है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स को अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से ठीक यही राशि देने पर सहमति जताई, और यह धन सीधे अनुदान के रूप में नहीं, बल्कि वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से दिया जाएगा। विकल्प C वह जाल है जिसमें अभ्यर्थी सबसे अधिक फँसते हैं, क्योंकि 260 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट वीरएआई की कुल लागत है, बोर्ड का हिस्सा नहीं; बोर्ड आधा खर्च उठा रहा है, इसलिए इन दोनों आंकड़ों को अलग-अलग याद रखना जरूरी है। विकल्प A और D गोल-मोल संख्याएँ हैं, जो किसी चिप कार्यक्रम के लिए विश्वसनीय लगती हैं, परंतु इस करार में न बोर्ड के हिस्से से और न कुल लागत से मेल खाती हैं। याद रखने का सरल तरीका यह है कि दोनों अंक जोड़े में रखें, यानी पूरी परियोजना 260 करोड़ रुपये की और बोर्ड की हिस्सेदारी 130 करोड़ रुपये की।
प्रोजेक्ट वीरएआई किस तकनीक का विकास कर रही है?
- A.डेटा सेंटर के लिए मेमोरी चिप
- B.कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप
- C.सामान्य प्रयोजन वाला मोबाइल प्रोसेसर
- D.क्वांटम कंप्यूटिंग प्रोसेसर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप
व्याख्या
सही उत्तर कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप है। प्रोजेक्ट वीरएआई सिलिकॉन का एक ऐसा टुकड़ा बना रही है, जो कैमरे को अपने भीतर ही सोचने-समझने की क्षमता दे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रोसेसिंग के साथ सुरक्षा, निजता तथा संपर्क क्षमता एक ही संप्रभु प्रौद्योगिकी मंच पर जोड़ दे। इसका पहला बाजार भारत और ग्लोबल साउथ के सीसीटीवी तथा निगरानी तंत्र हैं, और उसके बाद रक्षा, वाहन, औद्योगिक तथा चिकित्सा क्षेत्रों की योजना है। विकल्प C विशेष रूप से ध्यान देने योग्य गलती है, क्योंकि कार्यक्रम ने जानबूझकर सामान्य प्रयोजन वाले प्रोसेसर की जगह विशिष्ट उपयोग वाली चिप चुनी है, जिससे डिजाइन बाजार में जल्दी पहुँचे और किसी एक उद्योग की जरूरत ठीक-ठीक पूरी करे। विकल्प A गलत है, क्योंकि परियोजना का मेमोरी या डेटा भंडारण से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि क्वांटम कंप्यूटिंग पूरी तरह अलग क्षेत्र है और इस करार का हिस्सा नहीं है।
प्रोजेक्ट वीरएआई को तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5 से किस स्तर तक पहुँचाना है?
- A.टीआरएल-6
- B.टीआरएल-7
- C.टीआरएल-8
- D.टीआरएल-9
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. टीआरएल-9
व्याख्या
सही उत्तर टीआरएल-9 है। करार के अनुसार परियोजना को तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5, जहाँ वह आज खड़ी है, से उठाकर प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 9 तक पहुँचाना है, यानी उस चरण तक जहाँ उत्पाद प्रयोगशाला के बजाय वास्तविक उपयोग में खरा उतर चुका होता है। बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स बोर्ड से मिली राशि आगे के विकास, मान्यकरण, एकीकरण, परीक्षण और विस्तार पर इसी छलांग के लिए खर्च करेगी। विकल्प A, B और C उन बीच के पायदानों के नाम हैं, जिनसे तकनीक रास्ते में गुजरेगी, परंतु इनमें से कोई भी करार में लिखा गंतव्य नहीं है, इसलिए ये अधूरे हैं। लक्ष्य के पीछे का तर्क भी याद रखने योग्य है, क्योंकि अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष उन्हीं तकनीकों के लिए बना है, जिन्हें उन्नत विकास से व्यापारिक तैनाती तक की अंतिम दूरी तय करने में भारी निवेश चाहिए।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड किस विभाग के अधीन काम करता है?
- A.इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- B.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- C.भारी उद्योग मंत्रालय
- D.दूरसंचार विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
व्याख्या
सही उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, जिसने बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के साथ करार किया और जो अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष का संचालन करता है, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करता है। इसके सचिव राजेश कुमार पाठक हैं, जिन्होंने सेमीकंडक्टर को लगभग हर उभरती तकनीक की नींव बताया। विकल्प A सबसे सावधानी मांगने वाला विकल्प है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी चिप से जुड़ी योजनाएँ चलाता है, परंतु वह इस बोर्ड का मूल विभाग नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारी उद्योग मंत्रालय पूंजीगत वस्तुओं और वाहन निर्माण नीति से जुड़ा है, इस प्रकार के अनुसंधान वित्तपोषण से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि दूरसंचार विभाग दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम देखता है। परीक्षा के लिए तीन नाम एक साथ जोड़कर रखें, यानी टीडीबी, आरडीआई कोष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रोजेक्ट वीरएआई क्या है?
प्रोजेक्ट वीरएआई भारत की एक सेमीकंडक्टर परियोजना है, जो संप्रभु प्रौद्योगिकी मंच पर कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप विकसित करेगी। इसकी कुल लागत 260 करोड़ रुपये है और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड आरडीआई कोष से 130 करोड़ रुपये की सहायता दे रहा है।
टीडीबी ने बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स को कितनी सहायता दी है?
130 करोड़ रुपये, जो अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण के रूप में दिए जाएंगे। बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है।
परियोजना किस प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तक पहुँचेगी?
तकनीक अभी प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5 पर है और परियोजना को इसे स्तर 9 तक पहुँचाना है। इसके लिए आगे का विकास, मान्यकरण, एकीकरण, परीक्षण और विस्तार किया जाएगा।
यह चिप पहले कहाँ उपयोग होगी?
भारत और ग्लोबल साउथ के सीसीटीवी तथा निगरानी तंत्र में। आगे की योजना में यह मंच रक्षा, वाहन, औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्रों तक ले जाया जाएगा।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319038 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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