प्रोजेक्ट वीरएआई किस तकनीक का विकास कर रही है?
- A.डेटा सेंटर के लिए मेमोरी चिप
- B.कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप
- C.सामान्य प्रयोजन वाला मोबाइल प्रोसेसर
- D.क्वांटम कंप्यूटिंग प्रोसेसर
सही उत्तर
B. कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप
व्याख्या
सही उत्तर कैमरे पर केंद्रित एआई विजन सिस्टम-ऑन-चिप है। प्रोजेक्ट वीरएआई सिलिकॉन का एक ऐसा टुकड़ा बना रही है, जो कैमरे को अपने भीतर ही सोचने-समझने की क्षमता दे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रोसेसिंग के साथ सुरक्षा, निजता तथा संपर्क क्षमता एक ही संप्रभु प्रौद्योगिकी मंच पर जोड़ दे। इसका पहला बाजार भारत और ग्लोबल साउथ के सीसीटीवी तथा निगरानी तंत्र हैं, और उसके बाद रक्षा, वाहन, औद्योगिक तथा चिकित्सा क्षेत्रों की योजना है। विकल्प C विशेष रूप से ध्यान देने योग्य गलती है, क्योंकि कार्यक्रम ने जानबूझकर सामान्य प्रयोजन वाले प्रोसेसर की जगह विशिष्ट उपयोग वाली चिप चुनी है, जिससे डिजाइन बाजार में जल्दी पहुँचे और किसी एक उद्योग की जरूरत ठीक-ठीक पूरी करे। विकल्प A गलत है, क्योंकि परियोजना का मेमोरी या डेटा भंडारण से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि क्वांटम कंप्यूटिंग पूरी तरह अलग क्षेत्र है और इस करार का हिस्सा नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: टीडीबी ने प्रोजेक्ट वीरएआई को 130 करोड़ रुपये दिए
अभ्यास प्रश्न
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्रोजेक्ट वीरएआई को आरडीआई कोष से कितनी सहायता मंजूर की है?
- A.100 करोड़ रुपये
- B.130 करोड़ रुपये
- C.260 करोड़ रुपये
- D.500 करोड़ रुपये
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सही उत्तर: B. 130 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 130 करोड़ रुपये है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स को अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से ठीक यही राशि देने पर सहमति जताई, और यह धन सीधे अनुदान के रूप में नहीं, बल्कि वैकल्पिक परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से दिया जाएगा। विकल्प C वह जाल है जिसमें अभ्यर्थी सबसे अधिक फँसते हैं, क्योंकि 260 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट वीरएआई की कुल लागत है, बोर्ड का हिस्सा नहीं; बोर्ड आधा खर्च उठा रहा है, इसलिए इन दोनों आंकड़ों को अलग-अलग याद रखना जरूरी है। विकल्प A और D गोल-मोल संख्याएँ हैं, जो किसी चिप कार्यक्रम के लिए विश्वसनीय लगती हैं, परंतु इस करार में न बोर्ड के हिस्से से और न कुल लागत से मेल खाती हैं। याद रखने का सरल तरीका यह है कि दोनों अंक जोड़े में रखें, यानी पूरी परियोजना 260 करोड़ रुपये की और बोर्ड की हिस्सेदारी 130 करोड़ रुपये की।
प्रोजेक्ट वीरएआई को तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5 से किस स्तर तक पहुँचाना है?
- A.टीआरएल-6
- B.टीआरएल-7
- C.टीआरएल-8
- D.टीआरएल-9
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सही उत्तर: D. टीआरएल-9
व्याख्या
सही उत्तर टीआरएल-9 है। करार के अनुसार परियोजना को तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 5, जहाँ वह आज खड़ी है, से उठाकर प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 9 तक पहुँचाना है, यानी उस चरण तक जहाँ उत्पाद प्रयोगशाला के बजाय वास्तविक उपयोग में खरा उतर चुका होता है। बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स बोर्ड से मिली राशि आगे के विकास, मान्यकरण, एकीकरण, परीक्षण और विस्तार पर इसी छलांग के लिए खर्च करेगी। विकल्प A, B और C उन बीच के पायदानों के नाम हैं, जिनसे तकनीक रास्ते में गुजरेगी, परंतु इनमें से कोई भी करार में लिखा गंतव्य नहीं है, इसलिए ये अधूरे हैं। लक्ष्य के पीछे का तर्क भी याद रखने योग्य है, क्योंकि अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष उन्हीं तकनीकों के लिए बना है, जिन्हें उन्नत विकास से व्यापारिक तैनाती तक की अंतिम दूरी तय करने में भारी निवेश चाहिए।
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड किस विभाग के अधीन काम करता है?
- A.इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- B.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- C.भारी उद्योग मंत्रालय
- D.दूरसंचार विभाग
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सही उत्तर: B. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
व्याख्या
सही उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, जिसने बिगएंडियन सेमीकंडक्टर्स के साथ करार किया और जो अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष का संचालन करता है, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करता है। इसके सचिव राजेश कुमार पाठक हैं, जिन्होंने सेमीकंडक्टर को लगभग हर उभरती तकनीक की नींव बताया। विकल्प A सबसे सावधानी मांगने वाला विकल्प है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी चिप से जुड़ी योजनाएँ चलाता है, परंतु वह इस बोर्ड का मूल विभाग नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारी उद्योग मंत्रालय पूंजीगत वस्तुओं और वाहन निर्माण नीति से जुड़ा है, इस प्रकार के अनुसंधान वित्तपोषण से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि दूरसंचार विभाग दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम देखता है। परीक्षा के लिए तीन नाम एक साथ जोड़कर रखें, यानी टीडीबी, आरडीआई कोष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग।
अपना स्वदेशी 4जी स्टैक विकसित करने वाला भारत दुनिया का कौन सा देश बना है?
- A.तीसरा
- B.चौथा
- C.पांचवां
- D.सातवां
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सही उत्तर: C. पांचवां
व्याख्या
सही उत्तर पांचवां है। अपना स्वदेशी 4जी स्टैक डिजाइन करने और बनाने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है। संचार मंत्रालय इसे दूरसंचार तकनीक गढ़ने और तैनात करने में बढ़ती आत्मनिर्भरता का सबूत मानता है। विकल्प A, B और D गलत क्रम देते हैं और ऐसे ही मिलते-जुलते विकल्प परीक्षा में तब रखे जाते हैं जब कोई पड़ाव क्रमसूचक संख्या में बताया गया हो। इस उपलब्धि के साथ देश के नेटवर्क से जुड़े ये आंकड़े भी याद रखने चाहिए: 1.01 अरब ब्रॉडबैंड उपभोक्ता और एक अरब से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता, 99.9 प्रतिशत जिलों तथा 85 प्रतिशत आबादी तक पहुंची 5जी सेवा, और 98.7 प्रतिशत गांवों में 4जी कनेक्टिविटी। ये आंकड़े यशोभूमि में दसवीं इंडिया मोबाइल कांग्रेस की तैयारियों की समीक्षा के दौरान सामने रखे गए, इसलिए क्रम और कवरेज के आंकड़े अक्सर साथ पूछे जाते हैं।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आयोजन किस स्थान पर हो रहा है?
- A.भारत मंडपम, नई दिल्ली
- B.यशोभूमि, द्वारका, नई दिल्ली
- C.प्रगति मैदान, नई दिल्ली
- D.विज्ञान भवन, नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यशोभूमि, द्वारका, नई दिल्ली
व्याख्या
सही उत्तर यशोभूमि, द्वारका, नई दिल्ली है। केंद्रीय संचार मंत्री ने दसवीं इंडिया मोबाइल कांग्रेस शुरू होने से पहले अंतिम तैयारियों का जायजा लेने के लिए इसी सम्मेलन केंद्र का दौरा किया था, और आयोजन की प्रदर्शनी, सत्र तथा निवेशक बैठकें यहीं रखी गई हैं। विकल्प A, C और D राजधानी के ऐसे दूसरे जाने-पहचाने स्थल हैं जहां सम्मेलन और प्रदर्शनियां होती रहती हैं, मगर इस संस्करण का आयोजन इनमें से किसी जगह नहीं हो रहा। यह अंतर इसलिए मायने रखता है कि शिखर सम्मेलनों पर सवाल लगभग हमेशा संस्करण, थीम और स्थान को जोड़कर पूछे जाते हैं। इस आयोजन के लिए तीनों इस तरह जुड़ते हैं: दसवां संस्करण, थीम 'स्केल विदाउट बाउंड्रीज' और स्थान यशोभूमि, द्वारका, जहां प्रधानमंत्री 8 अक्टूबर 2026 को उद्घाटन करेंगे। इसलिए केवल विकल्प B सही है।