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सीबीडी कॉप-17 में भारत ने चार जैव विविधता प्रकाशन जारी किए

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया के येरेवन में सीबीडी कॉप-17 के एक साइड इवेंट में जैव विविधता से जुड़े चार प्रकाशन जारी किए हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सीबीडी कॉप-17 में भारत ने चार जैव विविधता प्रकाशन जारी किए

चर्चा में क्यों

आर्मेनिया के येरेवन में जैव विविधता संधि के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा तथा लाभ-साझाकरण पर भारत के चार प्रकाशन जारी किए।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया के येरेवन में चल रहे जैव विविधता संधि (सीबीडी) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (कॉप-17) में भारत के चार प्रकाशन जारी किए। यह कार्यक्रम पर्यावरण मंत्रालय ने भारत के राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के साथ मिलकर आयोजित किया था। साइड इवेंट का विषय था, नीति से व्यवहार तक, जिसमें नवाचार, वित्तपोषण, लाभ-साझाकरण और क्षेत्र आधारित संरक्षण उपायों पर चर्चा हुई।

चार प्रकाशन कौन से हैं

  • भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (आई-ओईसीएम) को नामित करने के दिशा-निर्देश, 2026, जो तय मानदंडों पर संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हुए संरक्षण कार्य को भी मान्यता देंगे
  • कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट, जो जैव सुरक्षा के प्रबंधन पर भारत का समय-समय पर दिया जाने वाला ब्यौरा है
  • जैव विविधता संधि पुस्तिका, जिसमें इस जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया की सरल संदर्भ सामग्री और भारतीय परिप्रेक्ष्य है
  • भारत की लाभ-साझाकरण सफलता गाथा, जो इस क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका बताती है

मंत्री ने क्या कहा

श्री यादव का पूरा जोर कार्यान्वयन पर रहा। कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी देश का दायित्व लक्ष्य तय करने पर खत्म नहीं होता, उसे क्षमता भी बनानी होती है और संसाधन भी जुटाने होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रगति का हिसाब घोषणाओं, जुटाए गए धन या चिह्नित क्षेत्रों से नहीं, बल्कि मिले लाभ और टिकाऊ संरक्षण परिणामों से होना चाहिए। उन्होंने जैव विविधता को लोगों के जीवन, ज्ञान तथा आजीविका से जुड़ा बताया और कहा कि संरक्षण एवं विकास एक-दूसरे को मजबूत करें। जिम्मेदार उपभोग के संदर्भ में उन्होंने पर्यावरण के लिए जीवनशैली, यानी लाइफ के सिद्धांत का उल्लेख किया।

लाभ-साझाकरण पर उन्होंने नागोया प्रोटोकॉल को आधार बताया, जिससे आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभ का न्यायसंगत बंटवारा होता है, और कहा कि इस सिद्धांत को पारदर्शी तथा व्यावहारिक प्रक्रिया में बदला जाना चाहिए। उनके अनुसार कोई देश अकेले वैश्विक रूपरेखा के लक्ष्य नहीं पा सकता, इसलिए उन्होंने ऐसे सहयोग का स्वागत किया जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करे और वित्त तथा प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ाए।

बिंदुविवरण
आयोजनसीबीडी कॉप-17 का साइड इवेंट
स्थानयेरेवन, आर्मेनिया
भारत का प्रतिनिधित्वकेंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
सहयोगी संस्थाएंराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और यूएनडीपी
जारी प्रकाशनचार

कौन-कौन मौजूद रहे

कार्यक्रम में सीबीडी कॉप-17 के अध्यक्ष तथा आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री हम्बार्जुम मातेवोस्यान और सीबीडी सचिवालय की लाभ-साझाकरण इकाई के प्रमुख डॉ. तौकोंदजो शिकोंगो उपस्थित रहे। दोनों ने संरक्षण तथा लाभ-साझाकरण के क्षेत्र में भारत के प्रयासों की सराहना की।

महत्वपूर्ण तथ्य

सम्मेलनजैव विविधता संधि के पक्षकारों का 17वां सम्मेलन (कॉप-17)
स्थानयेरेवन, आर्मेनिया
भारत का प्रतिनिधित्वकेंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव
साइड इवेंट का विषयनीति से व्यवहार तक: नवाचार, वित्तपोषण, लाभ-साझाकरण और ओईसीएम के माध्यम से भारत की प्रतिबद्धताएं
सहयोगी संस्थाएंराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी)
जारी प्रकाशनचार, जिनमें आई-ओईसीएम दिशा-निर्देश तथा कार्टाजेना प्रोटोकॉल की पांचवीं रिपोर्ट शामिल
कॉप-17 अध्यक्षहम्बार्जुम मातेवोस्यान, आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री
सीबीडी सचिवालयडॉ. तौकोंदजो शिकोंगो, लाभ-साझाकरण इकाई के प्रमुख
उल्लिखित दस्तावेजकुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा और नागोया प्रोटोकॉल

परीक्षा की दृष्टि से

सम्मेलन (सीबीडी कॉप-17), स्थान (येरेवन, आर्मेनिया), भारतीय मंत्री (भूपेंद्र यादव), सहयोगी संस्थाएं (एनबीए और यूएनडीपी), चारों प्रकाशन, कॉप-17 के अध्यक्ष (आर्मेनिया के हम्बार्जुम मातेवोस्यान) तथा दोनों उल्लिखित दस्तावेज, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल रूपरेखा और नागोया प्रोटोकॉल याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

जिस सीबीडी कॉप-17 में भारत ने चार प्रकाशन जारी किए, वह किस शहर में हुआ?

  1. A.येरेवन
  2. B.बाकू
  3. C.त्बिलिसी
  4. D.अस्ताना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. येरेवन

भारत ने वहां अपने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ एक साइड इवेंट किया और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने उसमें चार प्रकाशन जारी किए।

Q2.पर्यावरणमध्यम

सीबीडी कॉप-17 के साइड इवेंट में भारत द्वारा जारी चार प्रकाशनों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं था?

  1. A.आई-ओईसीएम को नामित करने के दिशा-निर्देश
  2. B.कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट
  3. C.भारत वन स्थिति रिपोर्ट
  4. D.भारत की लाभ-साझाकरण सफलता गाथा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारत वन स्थिति रिपोर्ट

साइड इवेंट में जो चार प्रकाशन सामने आए, वे इस प्रकार हैं। पहला, भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों को नामित करने के दिशा-निर्देश, जिनसे संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हुए संरक्षण कार्य को भी मान्यता मिल सकेगी।

Q3.पर्यावरणमध्यम

साइड इवेंट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिले लाभ के न्यायसंगत बंटवारे का आधार किसे बताया?

  1. A.कार्टाजेना प्रोटोकॉल
  2. B.नागोया प्रोटोकॉल
  3. C.कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा
  4. D.पेरिस समझौता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नागोया प्रोटोकॉल

लाभ-साझाकरण पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि यही प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभ के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे का आधार देता है, और उन्होंने इस सिद्धांत को व्यावहारिक, पारदर्शी तथा न्यायसंगत प्रक्रियाओं में बदलने पर बल दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीडी कॉप-17 कहां आयोजित हुआ?

आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में। वहीं एक साइड इवेंट में भारत ने जैव विविधता से जुड़े चार प्रकाशन जारी किए और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने मुख्य वक्तव्य दिया।

आनुवंशिक संसाधनों से मिले लाभ के बंटवारे का आधार कौन सा प्रोटोकॉल है?

नागोया प्रोटोकॉल, जिसे भूपेंद्र यादव ने आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभ के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे का आधार बताया।

कार्टाजेना प्रोटोकॉल से जुड़ी कौन सी रिपोर्ट जारी हुई?

कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट, जो पारदर्शी रिपोर्टिंग और जैव सुरक्षा के उत्तरदायी प्रबंधन पर भारत के जोर को दर्शाती है।

स्रोत

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