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प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना को 53,428 करोड़ रुपये मंजूर

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना; 2030-31 तक पाँच वर्ष के लिए 53,428 करोड़ रुपये के परिव्यय से जारी रहेगा।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना को 53,428 करोड़ रुपये मंजूर

चर्चा में क्यों

22 अक्टूबर 2026 के पीआईबी पृष्ठभूमि दस्तावेज में 14 अक्टूबर 2026 के मंत्रिमंडल निर्णय का ब्यौरा आया, जिसमें राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया गया, इसे 2030-31 तक 53,428 करोड़ रुपये से जारी रखा गया और दिव्यांगता पेंशन का दायरा बढ़ाया गया।

देश के सबसे पुराने सामाजिक सहायता कार्यक्रम को नया नाम और बड़ा दायरा मिला है। 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्ष और चलेगा और इसके लिए 53,428 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। कार्यक्रम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कहलाएगा और इसकी चारों उप-योजनाओं के नाम भी बदले गए हैं।

चार नए नाम

  • वृद्धावस्था पेंशन → प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना
  • विधवा पेंशन → प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना
  • दिव्यांगता पेंशन → प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना
  • परिवार लाभ योजना → प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना

वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और घर के मुख्य कमाने वाले की मृत्यु पर मिलने वाला एकमुश्त पारिवारिक लाभ पहले की तरह ही जारी रहेंगे। असली बदलाव दिव्यांगता पेंशन में हुआ है।

दिव्यांगता पेंशन में क्या बदला

पात्रता अब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता पर तय होगी, जो राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 से ली गई 80 प्रतिशत गंभीर दिव्यांगता की पुरानी शर्त की जगह लेगी। 18 वर्ष की न्यूनतम आयु की शर्त हटा दी गई है, इसलिए पात्रता जन्म से ही शुरू हो जाएगी। केंद्रीय सहायता 0 से 79 वर्ष की आयु के लिए 300 रुपये से बढ़कर 375 रुपये मासिक और 80 वर्ष तथा उससे अधिक आयु पर 500 रुपये से बढ़कर 625 रुपये मासिक हो गई है। इस उप-योजना के लाभार्थी 8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख हो गए हैं। संशोधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएँगे।

कार्यक्रम का स्वरूप

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ था और यह संविधान के अनुच्छेद 41 को मूर्त रूप देता है, जो राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता की स्थिति में सार्वजनिक सहायता देने का निर्देश देता है। यह पूर्णतः केंद्र-पोषित केंद्र प्रायोजित योजना है और इसमें 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलती है। यह ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में लागू है और सामान्य शर्त यह है कि परिवार गरीबी रेखा से नीचे हो। राज्य तथा संघ राज्यक्षेत्र इसे मुख्यतः अपने सामाजिक कल्याण विभागों से चलाते हैं; लाभार्थियों की पहचान में ग्राम पंचायतें और नगरपालिकाएँ भाग लेती हैं और भुगतान बड़े पैमाने पर सीधे लाभ हस्तांतरण से होता है।

पहले लाभार्थीलगभग 3.09 करोड़
स्वीकृत लाभार्थी3.20 करोड़, सभी 36 राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में
आवंटन 2025-269,652 करोड़ रुपये, जिसमें दिव्यांगता पेंशन के लिए 290 करोड़ रुपये
राज्यों का अतिरिक्त अंश50 से 5,700 रुपये मासिक; औसत पेंशन लगभग 1,100 रुपये

केंद्रीय दर वह न्यूनतम आधार है जिस पर हर राज्य अपना अंश जोड़ता है। जनगणना 2011 में देश में 2.68 करोड़ दिव्यांगजन गिने गए थे, जो आबादी के 2.21 प्रतिशत थे, और 2016 के अधिनियम की अनुसूची में 21 प्रकार की दिव्यांगता सूचीबद्ध है। 19 अप्रैल 2017 को यह अधिनियम लागू होने के बाद से इसका बेंचमार्क उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी तथा भूमि और आवास में दिव्यांगजन के हक तय करता रहा है; मंत्रिमंडल के निर्णय से फरवरी 2009 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना के रूप में शुरू हुई यह पेंशन भी उसी मानक पर आ गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य

नया नामप्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना (पहले राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम)
मंजूरी14 अक्टूबर 2026, केंद्रीय मंत्रिमंडल
अवधिपाँच वर्ष, 2026-27 से 2030-31
परिव्यय53,428 करोड़ रुपये
प्रस्तावक विभागग्रामीण विकास विभाग
दिव्यांगता मानकदिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता, पहले 80 प्रतिशत
न्यूनतम आयुसमाप्त; पात्रता जन्म से
नई दरें0 से 79 वर्ष पर 375 रुपये मासिक; 80 वर्ष और अधिक पर 625 रुपये
दिव्यांग लाभार्थी8.33 लाख से बढ़कर 27.48 लाख
कुल लाभार्थी36 राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में 3.20 करोड़
शुरुआत15 अगस्त 1995; संविधान के अनुच्छेद 41 को मूर्त रूप
वित्तपोषण100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें — नया नाम और चारों उप-योजनाओं के नए नाम, 2026-27 से 2030-31 के लिए 53,428 करोड़ रुपये का परिव्यय, मंत्रिमंडल की तिथि 14 अक्टूबर 2026, 80 प्रतिशत गंभीर दिव्यांगता से 2016 अधिनियम की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता पर बदलाव, 18 वर्ष की आयु शर्त का हटना, 375 और 625 रुपये की दरें, लाभार्थियों की 8.33 लाख से 27.48 लाख तक वृद्धि, 15 अगस्त 1995 की शुरुआत और संविधान का अनुच्छेद 41।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के लिए 2026-27 से 2030-31 तक कितना परिव्यय मंजूर हुआ है?

  1. A.9,652 करोड़ रुपये
  2. B.35,428 करोड़ रुपये
  3. C.53,428 करोड़ रुपये
  4. D.73,428 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 53,428 करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पाँच वर्ष जारी रखने और उसका नाम प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करने के साथ यही परिव्यय स्वीकृत किया।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

संशोधित दिव्यांगता पेंशन में पात्रता अब किस दिव्यांगता मानक से तय होती है?

  1. A.दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता
  2. B.राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 की 80 प्रतिशत गंभीर दिव्यांगता
  3. C.दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की 50 प्रतिशत दिव्यांगता
  4. D.राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 की 60 प्रतिशत दिव्यांगता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता

उस अधिनियम की धारा 2(r) बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करती है जिसमें प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित किसी विनिर्दिष्ट दिव्यांगता का 40 प्रतिशत से कम न हो, और 14 अक्टूबर 2026 के मंत्रिमंडल निर्णय ने पेंशन को इसी मानक पर ला दिया।

Q3.सरकारी योजनाएंकठिन

यह सामाजिक सहायता कार्यक्रम संविधान के किस अनुच्छेद को मूर्त रूप देता है?

  1. A.अनुच्छेद 21
  2. B.अनुच्छेद 39
  3. C.अनुच्छेद 41
  4. D.अनुच्छेद 47
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 41

15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ और अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कहलाने वाला यह कार्यक्रम अनुच्छेद 41 को मूर्त रूप देता है, जो राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता की दशा में सार्वजनिक सहायता देने का निर्देश देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नया नाम क्या है?

प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर 2026 को नाम परिवर्तन के साथ इसे 2026-27 से 2030-31 तक पाँच वर्ष जारी रखने और 53,428 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी।

दिव्यांगता पेंशन में क्या बदलाव हुआ है?

अब 80 प्रतिशत गंभीर दिव्यांगता की जगह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की 40 प्रतिशत बेंचमार्क दिव्यांगता लागू है, 18 वर्ष की न्यूनतम आयु की शर्त हट गई है और सहायता बढ़कर 375 तथा 625 रुपये मासिक हो गई है।

दिव्यांगता पेंशन अब कितने लाभार्थियों तक पहुँचेगी?

27.48 लाख तक, जो पहले 8.33 लाख थे। नाम बदलकर बनी प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना उन तक पहुँचेगी, जबकि पूरे कार्यक्रम के लिए सभी 36 राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में 3.20 करोड़ लाभार्थी स्वीकृत हैं।

यह कार्यक्रम कब शुरू हुआ और किस संवैधानिक प्रावधान को पूरा करता है?

यह 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ और संविधान के अनुच्छेद 41 को मूर्त रूप देता है, जो राज्य को बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी तथा दिव्यांगता की दशा में सार्वजनिक सहायता देने का निर्देश देता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS