पीएम-दक्ष योजना 2024-25 से पीएमकेवीवाई में समाहित
अनुसूचित जाति, ओबीसी और सफाई कर्मचारी युवाओं की कौशल योजना पीएम-दक्ष ने 1,87,305 लोगों को प्रशिक्षण दिया और 2024-25 से यह पीएमकेवीवाई में समाहित हो गई।

चर्चा में क्यों
22 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने पीएम-दक्ष योजना पर तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की, जिसमें उसकी राशि, प्रशिक्षण और रोजगार के आंकड़े तथा 2024-25 से पीएमकेवीवाई में विलय की वजह बताई गई।
पीएम-दक्ष यानी प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना थी। यह 2020-21 में शुरू हुई और इसके तहत अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विमुक्त जनजातियों तथा सफाई कर्मचारियों — इनमें कचरा बीनने वाले भी — के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाता था, ताकि वे नौकरी पा सकें या अपना काम खड़ा कर सकें। योजना पर तथ्यात्मक जानकारी 22 अक्टूबर 2026 को जारी की गई।
योजना किसने चलाई
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने खुद किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया। उसके तीन निगमों ने यह काम संभाला — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी)। विभाग इन निगमों को पैसा देता था और निगम उन संस्थानों को प्रशिक्षण की लागत लौटाते थे, जो कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के पैनल में पहले से शामिल थे। ये तीनों निगम लक्षित वर्गों के पात्र युवाओं को कर्ज भी देते हैं और परियोजना खड़ी करने में उनका साथ निभाते हैं।
रोजगार की शर्त
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्थान को अपने कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी या स्वरोजगार दिलाना जरूरी था। ऐसा न होने पर उसकी तीसरी किस्त, जो प्रशिक्षण लागत के 30 प्रतिशत के बराबर थी, जब्त हो जाती थी। संस्थानों से यह भी अपेक्षा थी कि वे संबंधित उद्योगों से रिश्ता बनाए रखें, जिससे पाठ्यक्रम पूरा करने वालों के लिए जगह निकले।
पैसा, प्रशिक्षण और रोजगार
| आवंटित राशि, 2020-21 से 2023-24 | 276.47 करोड़ रुपये |
| अब तक वास्तविक खर्च | 309.5 करोड़ रुपये |
| प्रशिक्षित उम्मीदवार | 1,87,305 |
| रोजगार पाने वाले | 96,162 |
योजना के मूल्यांकन अध्ययन में इसकी प्रासंगिकता और सीखने के असर को मजबूत पाया गया। 90 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने कहा कि प्रशिक्षण उनके कामकाजी लक्ष्यों, आसपास के श्रम बाजार की जरूरत और तय नतीजों से मेल खाता था। अध्ययन में वे लाभ भी दर्ज हुए जो पैसे में नहीं दिखते — आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान — और ये महिलाओं तथा हाशिये के समूहों में सबसे अधिक रहे। ज्यादातर लाभार्थी सीखे हुए हुनर का इस्तेमाल करते रहे और आगे आय बढ़ने की उम्मीद जताई।
विलय की वजह
2024-25 से यह योजना पीएमकेवीवाई में समाहित कर दी गई। कारण दोहराव बताया गया। पीएम-दक्ष पीएमकेवीवाई के ऊपर एक अतिरिक्त व्यवस्था थी और इसके सभी जॉब रोल स्किल इंडिया डिजिटल हब पोर्टल से लिए जाते थे, जहां से पीएमकेवीवाई भी लेती है। एक ही जमीन पर दो योजनाएं चलाने के बजाय पीएम-दक्ष को पीएमकेवीवाई के अंदर ले लिया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | पीएम-दक्ष (प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही) |
|---|---|
| प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र की योजना |
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय |
| शुरुआत | 2020-21 |
| लक्षित वर्ग | अनुसूचित जाति, ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विमुक्त जनजातियां और सफाई कर्मचारी, जिनमें कचरा बीनने वाले भी |
| कार्यान्वयन निगम | एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी और एनएसकेएफडीसी |
| प्रशिक्षण संस्थान | कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की पीएमकेवीवाई के पैनल में शामिल संस्थान |
| रोजगार की शर्त | कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षितों को रोजगार, वरना प्रशिक्षण लागत के 30 प्रतिशत के बराबर तीसरी किस्त जब्त |
| आवंटन, 2020-21 से 2023-24 | 276.47 करोड़ रुपये |
| अब तक खर्च | 309.5 करोड़ रुपये |
| प्रशिक्षण और रोजगार | 2020-21 से 2023-24 तक 1,87,305 प्रशिक्षित और 96,162 को रोजगार |
| विलय | जॉब रोल के दोहराव से बचने के लिए 2024-25 से पीएमकेवीवाई में समाहित |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें — पूरा नाम (प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही), मंत्रालय (सामाजिक न्याय और अधिकारिता), प्रकार (केंद्रीय क्षेत्र की योजना), शुरुआत (2020-21), तीन निगम (एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी, एनएसकेएफडीसी), तीसरी किस्त से जुड़ी 70 प्रतिशत रोजगार की शर्त, 1,87,305 प्रशिक्षित और 96,162 को रोजगार, 276.47 करोड़ रुपये आवंटन के मुकाबले 309.5 करोड़ रुपये खर्च, तथा स्किल इंडिया डिजिटल हब के जॉब रोल के कारण 2024-25 से पीएमकेवीवाई में विलय।
अभ्यास प्रश्न
पीएमकेवीवाई में समाहित पीएम-दक्ष किस मंत्रालय की योजना थी?
- A.कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
- B.सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
- C.ग्रामीण विकास मंत्रालय
- D.श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
उत्तर देखें
पीएम-दक्ष इसी मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना थी और इसका सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग इसे तीन निगमों एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी तथा एनएसकेएफडीसी के जरिये चलाता था, जो संस्थानों को प्रशिक्षण लागत लौटाते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →2020-21 से 2023-24 के बीच पीएम-दक्ष में कितने उम्मीदवारों को प्रशिक्षण मिला?
- A.96,162
- B.1,87,305
- C.2,76,470
- D.3,09,500
उत्तर देखें
2020-21 से 2023-24 तक पीएम-दक्ष में इतने उम्मीदवारों को प्रशिक्षण मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीएम-दक्ष में संस्थान को कम से कम कितने प्रशिक्षितों को रोजगार दिलाना जरूरी था, वरना तीसरी किस्त जब्त हो जाती थी?
- A.50 प्रतिशत
- B.60 प्रतिशत
- C.70 प्रतिशत
- D.80 प्रतिशत
उत्तर देखें
पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद प्रशिक्षण संस्थान को अपने इतने प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी या स्वरोजगार दिलाना जरूरी था। ऐसा न करने पर तीसरी किस्त, जो प्रशिक्षण लागत के 30 प्रतिशत के बराबर थी, जब्त हो जाती थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीएम-दक्ष को 2024-25 से पीएमकेवीवाई में क्यों समाहित किया गया?
- A.इसकी आवंटित राशि समाप्त हो गई थी
- B.स्किल इंडिया डिजिटल हब से लिए गए इसके जॉब रोल पीएमकेवीवाई में भी शामिल थे
- C.तीनों कार्यान्वयन निगम बंद कर दिए गए
- D.इसके लक्षित वर्ग राज्य सरकारों को सौंप दिए गए
उत्तर देखें
पीएम-दक्ष पीएमकेवीवाई के ऊपर एक अतिरिक्त व्यवस्था थी और कौशल प्रशिक्षण के लिए इसके सभी जॉब रोल स्किल इंडिया डिजिटल हब पोर्टल से लिए जाते थे, जहां से पीएमकेवीवाई भी लेती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीएम-दक्ष का पूरा नाम क्या है और इसे कौन सा मंत्रालय चलाता था?
प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही। यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना थी, जो 2020-21 में शुरू हुई और तीन निगमों एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी तथा एनएसकेएफडीसी के जरिये चलाई गई।
पीएम-दक्ष में कितने लोगों को प्रशिक्षण और रोजगार मिला?
2020-21 से 2023-24 के बीच 1,87,305 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण मिला और 96,162 को रोजगार। इन वर्षों के लिए आवंटित 276.47 करोड़ रुपये के मुकाबले अब तक 309.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
प्रशिक्षण संस्थानों पर रोजगार की क्या शर्त थी?
संस्थान को अपने कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को नौकरी या स्वरोजगार दिलाना था। ऐसा न होने पर उसकी तीसरी किस्त, जो प्रशिक्षण लागत के 30 प्रतिशत के बराबर थी, जब्त कर ली जाती थी।
पीएम-दक्ष का पीएमकेवीवाई में विलय क्यों हुआ?
दोहराव से बचने के लिए 2024-25 से इसे पीएमकेवीवाई में समाहित किया गया। पीएम-दक्ष पीएमकेवीवाई के ऊपर एक अतिरिक्त व्यवस्था थी और इसके सभी जॉब रोल स्किल इंडिया डिजिटल हब पोर्टल से लिए जाते थे, जो पीएमकेवीवाई में भी शामिल हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2326437 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
करेंट अफेयर्स 22 अक्टूबर 2026
पूरा संस्करण पढ़ें →संबंधित करेंट अफेयर्स
संबंधित GK
- मध्य प्रदेश की भाषा, बोलियां और साहित्य: नोट्स
22 अक्टूबर 2026 · मध्य प्रदेश
- हरियाणा के धार्मिक और पर्यटन स्थल: परीक्षा नोट्स
22 अक्टूबर 2026 · हरियाणा
- बिहार की भाषाएं और साहित्य: मैथिली, भोजपुरी, मगही
22 अक्टूबर 2026 · बिहार





