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तवांग मठ में बुद्ध अवशेषों के दर्शन को पहुंचे 21,000+ श्रद्धालु

तवांग मठ में शाक्यमुनि बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों के दर्शन 21,000 से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं; ये अवशेष 13 वर्ष बाद अरुणाचल प्रदेश पहुंचे हैं।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 1 मिनट
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तवांग मठ में बुद्ध अवशेषों के दर्शन को पहुंचे 21,000+ श्रद्धालु

चर्चा में क्यों

संस्कृति मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को बताया कि तवांग मठ में 13 वर्ष बाद प्रदर्शित शाक्यमुनि बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों के दर्शन 21,000 से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, जिसका औपचारिक नाम गादेन नामग्याल ल्हात्से है, में शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए अब तक 21,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। संस्कृति मंत्रालय ने 6 नवंबर 2026 को यह जानकारी दी। तवांग और आसपास के इलाकों से लोग लगातार मठ आ रहे हैं। यहां प्रदर्शनी 7 नवंबर 2026 तक आम लोगों के लिए खुली है।

यह प्रदर्शनी खास क्यों

ये अवशेष पूरे 13 वर्ष के अंतराल के बाद अरुणाचल प्रदेश लौटे हैं। सामान्य रूप से ये राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में रखे जाते हैं और वहीं से इन्हें इस यात्रा के लिए लाया गया है। पूर्वी हिमालय के भिक्षुओं, भिक्षुणियों और आम श्रद्धालुओं के लिए यह बुद्ध से जुड़ी धरोहर को निकट से देखने का दुर्लभ अवसर है।

अवशेष कहां मिले थे

इन अवशेषों की खोज वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में हुई थी। बौद्ध धर्म के पुरातात्विक इतिहास में इस खोज को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। तब से राष्ट्रीय संग्रहालय इन्हें सहेजे हुए है।

मठ में दो प्रदर्शनियां

  • अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) की प्रदर्शनी 'अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपरहवा' बताती है कि ये अवशेष कैसे मिले और इनका ऐतिहासिक महत्व क्या है।
  • राष्ट्रीय संग्रहालय की प्रदर्शनी 'क्रॉसरोड्स ऑफ धम्मा' बौद्ध धर्म के इतिहास, कला और संस्कृति को सामने रखती है।

आगे की यात्रा

स्थानतिथि (2026)
तवांग मठ7 नवंबर तक
टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला8 से 13 नवंबर
गोल्डन पैगोडा, नामसाई14 से 20 नवंबर
राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली वापसी21 नवंबर

आयोजक

यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किया है। सरकार इसे भारत की बौद्ध विरासत को सहेजने और शांति, करुणा, ज्ञान तथा विश्व बंधुत्व के बुद्ध के संदेश को फैलाने की पहल बताती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

स्थानतवांग मठ (गादेन नामग्याल ल्हात्से), अरुणाचल प्रदेश
अब तक श्रद्धालु21,000 से अधिक
अवशेषशाक्यमुनि बुद्ध के
खोजपिपरहवा, उत्तर प्रदेश, वर्ष 1898
संरक्षण स्थलराष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
अरुणाचल में वापसी13 वर्ष बाद
अगले पड़ावटीजीएल मठ, बोमडिला (8–13 नवंबर); गोल्डन पैगोडा, नामसाई (14–20 नवंबर 2026)
आयोजकसंस्कृति मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, अरुणाचल प्रदेश सरकार

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: मठ का औपचारिक नाम (गादेन नामग्याल ल्हात्से), राज्य (अरुणाचल प्रदेश), खोज का स्थान और वर्ष (पिपरहवा, उत्तर प्रदेश, 1898), अवशेष कहां रखे जाते हैं (राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली), 13 वर्ष का अंतराल, अगले पड़ाव (बोमडिला, नामसाई) और आयोजक।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयमध्यम

नवंबर 2026 में तवांग मठ में प्रदर्शित शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेष मूल रूप से कहां खोजे गए थे?

  1. A.सांची, मध्य प्रदेश
  2. B.पिपरहवा, उत्तर प्रदेश
  3. C.सारनाथ, उत्तर प्रदेश
  4. D.वैशाली, बिहार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पिपरहवा, उत्तर प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ में जिन शाक्यमुनि बुद्ध के अवशेषों के दर्शन हो रहे हैं, वे वर्ष 1898 में पिपरहवा में खोजे गए थे।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

तवांग मठ, जहां नवंबर 2026 में 21,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने बुद्ध अवशेषों के दर्शन किए, किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?

  1. A.गादेन नामग्याल ल्हात्से
  2. B.रुमटेक मठ
  3. C.हेमिस गोम्पा
  4. D.ताबो मठ
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गादेन नामग्याल ल्हात्से

यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ का औपचारिक नाम है। संस्कृति मंत्रालय ने इसी नाम के साथ बताया कि यहां शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए 21,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।

Q3.राष्ट्रीयआसान

तवांग के बाद बुद्ध अवशेषों को किस स्थान के गोल्डन पैगोडा ले जाने का कार्यक्रम है?

  1. A.बोमडिला
  2. B.ईटानगर
  3. C.नामसाई
  4. D.जीरो
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. नामसाई

संस्कृति मंत्रालय के कार्यक्रम के अनुसार शाक्यमुनि बुद्ध के अवशेष 7 नवंबर 2026 तक तवांग मठ में रहेंगे। इसके बाद 8 से 13 नवंबर तक उन्हें बोमडिला के टीजीएल मठ, जिसे लोअर गोम्पा भी कहते हैं, में रखा जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तवांग में प्रदर्शित बुद्ध अवशेष कहां मिले थे?

उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में, वर्ष 1898 में। ये राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित हैं।

अवशेष कितने वर्ष बाद अरुणाचल प्रदेश लौटे हैं?

13 वर्ष बाद। 6 नवंबर 2026 तक 21,000 से अधिक श्रद्धालु तवांग मठ में दर्शन कर चुके थे।

तवांग के बाद अवशेष कहां जाएंगे?

8 से 13 नवंबर तक बोमडिला के टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा) और 14 से 20 नवंबर 2026 तक नामसाई के गोल्डन पैगोडा; 21 नवंबर को वे नई दिल्ली लौटेंगे।

स्रोत

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