तमिलनाडु की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली किस टोल प्लाजा पर शुरू की गई है?
- A.चोर्यासी टोल प्लाजा
- B.घरौंडा टोल प्लाजा
- C.परनूर टोल प्लाजा
- D.मनोहरपुरा टोल प्लाजा
सही उत्तर
C. परनूर टोल प्लाजा
व्याख्या
सही उत्तर परनूर टोल प्लाजा है। यह एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर स्थित है और तमिलनाडु का वह पहला स्थल बन गया है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बैरियर के बिना टोल वसूलता है, यानी वाहन चलते रहते हैं और कैमरे तथा फास्टैग मिलकर शुल्क निपटा देते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि चोर्यासी प्लाजा एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात में पड़ता है, तमिलनाडु में नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि घरौंडा प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि मनोहरपुरा एनएच-48 के दिल्ली-जयपुर खंड पर राजस्थान के तीन प्लाजा में से एक है, बाकी दो शाहजहांपुर और दौलतपुरा हैं। ये तीनों पहले ही फ्री फ्लो प्रणाली में बदले गए थे, लेकिन इनमें कोई तमिलनाडु में नहीं है, इसलिए यहां पूछे गए प्रश्न का उत्तर केवल परनूर ही है।
पूरा लेख पढ़ें: परनूर में तमिलनाडु का पहला बैरियर-मुक्त एमएलएफएफ टोल शुरू
अभ्यास प्रश्न
मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली गुजरते वाहन की पहचान मुख्य रूप से किस तकनीक से करती है?
- A.ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
- B.हर वाहन की उपग्रह आधारित जीपीएस निगरानी
- C.चेसिस नंबर का रेडियो प्रसारण
- D.टोल कर्मचारियों द्वारा नंबर हाथ से दर्ज करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
व्याख्या
सही उत्तर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन है, जिसे संक्षेप में एएनपीआर कहा जाता है। प्लाजा पर लगे कैमरे हर गुजरते वाहन की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और फिर फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन उस वाहन से जुड़े खाते से शुल्क काट लेता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि परनूर में लागू फ्री फ्लो व्यवस्था नंबर प्लेट पढ़ने और फास्टैग पर टिकी है, अलग-अलग वाहनों की उपग्रह निगरानी पर नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस व्यवस्था में चेसिस नंबर का कोई प्रसारण नहीं होता, चेसिस नंबर निर्माण से जुड़ी पहचान है और टोल वसूली में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि बदलाव का मकसद इसका उलट है, फ्री फ्लो प्रणाली वसूली में मानवीय हस्तक्षेप घटाने के लिए है, इसलिए कर्मचारी गुजरते वाहनों के नंबर टाइप नहीं करते। एएनपीआर और फास्टैग मिलकर बिना रुके शुल्क लेना संभव बनाते हैं।
परनूर टोल प्लाजा किस राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर स्थित है?
- A.एनएच-48 का सूरत-भरूच खंड
- B.एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
- C.एनएच-44 का पानीपत-जालंधर खंड
- D.दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
व्याख्या
सही उत्तर एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड है। यह खंड तमिलनाडु में पड़ता है और एनएचएआई ने यहीं से राज्य में फ्री फ्लो टोल वसूली की शुरुआत की है। परनूर टोल प्लाजा इसी खंड पर खड़ा है और यही वह हिस्सा है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने तमिलनाडु को उसकी पहली बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था दी है। विकल्प A गलत है, क्योंकि एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात का चोर्यासी प्लाजा पड़ता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा का घरौंडा प्लाजा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला प्लाजा है। ये तीनों असली फ्री फ्लो स्थल हैं, इसी कारण ये अच्छे भ्रमकारी विकल्प बनते हैं, लेकिन प्रश्न विशेष रूप से परनूर के बारे में है और वह प्लाजा तमिलनाडु में एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड का हिस्सा है।
संशोधित छूट वाले फास्टैग ढांचे के बारे में कौन सा कथन सही नहीं है?
- A.वैधता दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत पर निर्भर करती है
- B.यूडीआईडी कार्ड मान्य रिकॉर्ड में शामिल है
- C.छूट वाले फास्टैग का नवीनीकरण अब भी हर साल जरूरी है
- D.दिव्यांगजन स्वामित्व श्रेणी में पंजीकृत वाहन भी शामिल हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. छूट वाले फास्टैग का नवीनीकरण अब भी हर साल जरूरी है
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि छूट वाले फास्टैग का नवीनीकरण अब भी हर साल जरूरी है, क्योंकि यही शर्त इस संशोधन ने हटाई है। पहले के दिशा-निर्देशों में वार्षिक नवीनीकरण अनिवार्य था, जबकि नया ढांचा वैधता को दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत से तय करता है, जिससे लाभार्थियों को बार-बार औपचारिकता से छुटकारा मिलता है। विकल्प A सही कथन है, इसलिए उत्तर नहीं है, क्योंकि पांच साल और तीन साल की श्रेणियां सीधे दर्ज प्रतिशत से निकलती हैं। विकल्प B भी सही है, क्योंकि प्रतिशत साबित करने के लिए वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान कार्ड या अन्य लागू रिकॉर्ड मान्य हैं। विकल्प D भी सही है, क्योंकि छूट शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से बने वाहनों और दिव्यांगजन श्रेणी में पंजीकृत वाहनों, दोनों पर लागू होती है।
दिव्यांगजन के छूट वाले फास्टैग से जुड़े संशोधित दिशा-निर्देश किस तारीख से प्रभावी होंगे?
- A.1 अक्टूबर 2026
- B.2 अक्टूबर 2026
- C.1 नवंबर 2026
- D.1 अप्रैल 2027
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2 अक्टूबर 2026
व्याख्या
सही उत्तर 2 अक्टूबर 2026 है। मंत्रालय ने संशोधन की घोषणा करते हुए बताया कि नए दिशा-निर्देश इसी तारीख से प्रभावी होंगे और ये पात्र दिव्यांगजन के लिए छूट वाले फास्टैग जारी करने तथा नवीनीकरण दोनों पर लागू होंगे। विकल्प A गलत है, क्योंकि उस दिन घोषणा सार्वजनिक हुई थी, व्यवस्था लागू नहीं हुई थी। परीक्षाओं में घोषणा की तारीख और लागू होने की तारीख को आपस में बदलकर पूछना आम है, इसलिए दोनों को अलग-अलग याद रखना चाहिए। विकल्प C और विकल्प D गलत हैं, क्योंकि ऐसी कोई मोहलत नहीं दी गई, मंत्रालय ने शुरुआत को नवंबर या अगले वित्त वर्ष तक नहीं टाला। तारीख के साथ यह भी याद रखें कि यह बदलाव अनिवार्य वार्षिक नवीनीकरण के स्थान पर दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत आधारित वैधता लाता है।
संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्ति को जारी छूट वाला फास्टैग कितने समय तक वैध रहेगा?
- A.एक साल
- B.तीन साल
- C.पांच साल
- D.दस साल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पांच साल
व्याख्या
सही उत्तर पांच साल है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संशोधित ढांचे में छूट वाले फास्टैग की वैधता दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत से जुड़ी है और 70 से 100 प्रतिशत की ऊंची श्रेणी में यह वैधता पांच साल की है। विकल्प A गलत है, क्योंकि हर साल नवीनीकरण पहले की व्यवस्था थी, जिसे इस संशोधन ने समाप्त कर दिया है और अब यह किसी भी श्रेणी पर लागू नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि तीन साल की वैधता निचली श्रेणी यानी 40 से 70 प्रतिशत से कम दर्ज दिव्यांगता के लिए है, इसलिए आंकड़ा सही है लेकिन गलत समूह से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इन दिशा-निर्देशों में दस साल की कोई श्रेणी नहीं है। वैधता समाप्त होने पर टैग का नवीनीकरण कराया जा सकता है, बशर्ते धारक पात्र हो और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 की शर्तें पूरी हों।