नौसेना में शामिल हुआ पनडुब्बीरोधी पोत आईएनएस मंगरोल
कोचीन शिपयार्ड में बना महे श्रेणी का तीसरा पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत आईएनएस मंगरोल मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में नौसेना में शामिल किया गया।

चर्चा में क्यों
12 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना ने महे श्रेणी के तीसरे पनडुब्बीरोधी उथले पानी के पोत आईएनएस मंगरोल (पी82) को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में अपने बेड़े में शामिल किया।
भारतीय नौसेना ने आईएनएस मंगरोल को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। पी82 पेनेंट नंबर वाला यह पोत महे श्रेणी का तीसरा पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत है, जिसे अंग्रेजी में एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी कहा जाता है। समारोह मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुआ और इसकी अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन ने की। इस अवसर पर सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी तथा निर्माता शिपयार्ड और उद्योग साझेदारों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
पोत किसने बनाया
इस पोत का डिजाइन भारत में तैयार हुआ और निर्माण कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया। पोत में स्वदेशी सामग्री का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है। नौसेना इसे युद्धपोत के डिजाइन, निर्माण और प्रणालियों के एकीकरण में देश की बढ़ती क्षमता का प्रमाण मानती है। निर्माण में निजी कंपनियों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का योगदान रहा और पोत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया का उदाहरण बताया गया है।
पोत की क्षमताएं
यह पोत तटीय और उथले पानी में काम करने के लिए बनाया गया है, जहां बड़े युद्धपोतों को कठिनाई होती है। इसके कार्यों में पनडुब्बीरोधी युद्ध, पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले सामुद्रिक अभियान तथा बारूदी सुरंग युद्ध से जुड़े काम शामिल हैं। पोत पर लगे सोनार, संवेदक और हथियार प्रणालियां पानी के नीचे के खतरों को खोजने, उनका पीछा करने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम हैं। इसकी प्रणोदन व्यवस्था खास है, क्योंकि तीन डीजल इंजन वॉटरजेट इकाइयों को चलाते हैं, जिससे संकरे पानी में तेज गतिशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया मिलती है।
नाम कहां से आया
मंगरोल गुजरात के जूनागढ़ जिले का तटीय कस्बा और जाना-पहचाना मछली पकड़ने का बंदरगाह है। यह नाम पहले भी एक युद्धपोत पर रहा है। एम85 पेनेंट वाला पुराना आईएनएस मंगरोल एक माइनस्वीपर था, जिसने अप्रैल 2004 तक सेवा दी। नौसेना प्रसिद्ध पोतों के नाम नए पोतों को देकर उन्हें जीवित रखती है।
परीक्षा की दृष्टि से
पोत की श्रेणी, निर्माता शिपयार्ड, स्वदेशी सामग्री का हिस्सा और नाम का स्रोत रक्षा तथा सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्रों में बार-बार पूछे जाते हैं। अभ्यर्थियों को श्रेणी में पोत का क्रम, अध्यक्षता करने वाले अधिकारी की कमान और प्रणोदन व्यवस्था भी याद रखनी चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पोत | आईएनएस मंगरोल (पेनेंट पी82) |
|---|---|
| श्रेणी | महे श्रेणी, श्रेणी का तीसरा पोत |
| प्रकार | पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) |
| निर्माता | कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि |
| स्वदेशी सामग्री | 80 प्रतिशत से अधिक |
| स्थान | नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई |
| अध्यक्षता | वाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान |
| प्रणोदन | तीन डीजल इंजन से चलने वाली वॉटरजेट इकाइयां |
| नाम | मंगरोल, जूनागढ़ जिला, गुजरात का तटीय कस्बा और मछली बंदरगाह |
| पुराना पोत | आईएनएस मंगरोल (एम85), माइनस्वीपर, अप्रैल 2004 तक सेवा में |
परीक्षा की दृष्टि से
पेनेंट नंबर (पी82), श्रेणी (महे) और श्रेणी में क्रम (तीसरा), निर्माता (कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि), स्वदेशी सामग्री (80 प्रतिशत से अधिक), स्थान (नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई), अध्यक्षता करने वाली कमान (पश्चिमी नौसेना कमान), वॉटरजेट प्रणोदन और नाम से जुड़े गुजरात के कस्बे को याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अक्टूबर 2026 में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए आईएनएस मंगरोल का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया?
- A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
- B.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता
- C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
- D.हिंदुस्तान शिपयार्ड, विशाखापत्तनम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि है। इस पोत का डिजाइन भारत में तैयार हुआ और निर्माण इसी शिपयार्ड ने किया। पोत में स्वदेशी सामग्री का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है, जिसे नौसेना युद्धपोत के डिजाइन, निर्माण और प्रणालियों के एकीकरण में देश की क्षमता का प्रमाण मानती है। मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह में शिपयार्ड तथा उद्योग साझेदारों के प्रतिनिधि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े लोग उपस्थित थे। विकल्प A यानी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई का शिपयार्ड है, लेकिन इस पोत से उसका संबंध नहीं है। विकल्प B यानी कोलकाता का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स भी इस पोत का निर्माता नहीं है। विकल्प D यानी विशाखापत्तनम का हिंदुस्तान शिपयार्ड भी गलत है। इसलिए केवल विकल्प C सही है और अभ्यर्थियों को पोत तथा निर्माता शिपयार्ड का यह संबंध याद रखना चाहिए।
आईएनएस मंगरोल पनडुब्बीरोधी उथले पानी के पोतों की किस श्रेणी का तीसरा पोत है?
- A.अर्नाला श्रेणी
- B.महे श्रेणी
- C.कामोर्ता श्रेणी
- D.अभय श्रेणी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर महे श्रेणी है। पी82 पेनेंट वाला आईएनएस मंगरोल इस श्रेणी का तीसरा पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत है, जो भारतीय नौसेना की सेवा में आया है। इस प्रकार के पोत उथले तटीय क्षेत्र के लिए बनाए जाते हैं, जहां बड़े युद्धपोत कम प्रभावी रहते हैं। ये पनडुब्बीरोधी युद्ध, पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले सामुद्रिक अभियान और बारूदी सुरंग युद्ध से जुड़े कार्यों के लिए सुसज्जित होते हैं। विकल्प A यानी अर्नाला श्रेणी इस पोत की श्रेणी नहीं है। विकल्प C यानी कामोर्ता श्रेणी बड़े पनडुब्बीरोधी कोरवेट से जुड़ी है, उथले पानी के इन छोटे पोतों से नहीं। विकल्प D यानी अभय श्रेणी भी गलत है। अभ्यर्थियों को श्रेणी का नाम और यह तथ्य दोनों याद रखने चाहिए कि मंगरोल श्रेणी का तीसरा पोत है, क्योंकि प्रश्न अक्सर क्रम पर आधारित होते हैं।
आईएनएस मंगरोल का नाम गुजरात के किस जिले के तटीय कस्बे पर रखा गया है?
- A.जूनागढ़
- B.पोरबंदर
- C.देवभूमि द्वारका
- D.वलसाड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर जूनागढ़ है। मंगरोल गुजरात के जूनागढ़ जिले का तटीय कस्बा और जाना-पहचाना मछली पकड़ने का बंदरगाह है, और नया युद्धपोत इसी नाम को धारण करता है। भारतीय नौसेना प्रसिद्ध पोतों के नाम नए पोतों को देने की परंपरा निभाती है, इसलिए इस नाम का इतिहास भी है। एम85 पेनेंट वाला पुराना आईएनएस मंगरोल एक माइनस्वीपर था, जिसने अप्रैल 2004 तक सेवा दी और नया पोत उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। विकल्प B यानी पोरबंदर गुजरात का तटीय जिला है, लेकिन इस पोत के नाम से उसका संबंध नहीं है। विकल्प C यानी देवभूमि द्वारका भी गुजरात का तटीय जिला है और यहां गलत है। विकल्प D यानी वलसाड दक्षिण गुजरात में है और सही नहीं है। अभ्यर्थियों को पोत, कस्बा, जिला और राज्य को एक साथ जोड़कर याद रखना चाहिए।
मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में आईएनएस मंगरोल के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता किसने की?
- A.नौसेना प्रमुख
- B.फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान
- C.फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान
- D.रक्षा सचिव
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान है। इस पद पर तैनात वाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह की अध्यक्षता की, और यह डॉकयार्ड पश्चिमी नौसेना कमान के क्षेत्र में आता है। अपने संबोधन में उन्होंने सामुद्रिक निगरानी और पनडुब्बीरोधी क्षमता को मजबूत करने में स्वदेशी युद्धपोतों के महत्व तथा रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। विकल्प A यानी नौसेना प्रमुख नौसेना के मुखिया हैं, पर इस अवसर पर उन्होंने अध्यक्षता नहीं की। विकल्प C में दक्षिणी नौसेना कमान का उल्लेख है, जिसका मुख्यालय कहीं और है और जिसके प्रमुख ने यह समारोह नहीं कराया। विकल्प D यानी रक्षा सचिव रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं; मंत्रालय के अधिकारी समारोह में उपस्थित थे, पर कमीशनिंग की अध्यक्षता सेवारत फ्लैग अधिकारी करते हैं। इसलिए विकल्प B सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आईएनएस मंगरोल का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया है?
कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने इसका डिजाइन और निर्माण किया है। पोत में स्वदेशी सामग्री 80 प्रतिशत से अधिक है और यह महे श्रेणी का तीसरा पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत है।
आईएनएस मंगरोल का नाम किस पर रखा गया है?
गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय कस्बे और मछली पकड़ने के बंदरगाह मंगरोल पर। इसी नाम का पुराना माइनस्वीपर, जिसका पेनेंट एम85 था, अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना में सेवा दे चुका है।
यह पोत कौन से कार्य करेगा?
तटीय और उथले पानी में पनडुब्बीरोधी युद्ध, पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले सामुद्रिक अभियान और बारूदी सुरंग युद्ध से जुड़े कार्य, जिनके लिए इसमें सोनार, संवेदक और हथियार प्रणालियां लगी हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322494 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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