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GK24
रक्षामध्यम

आईएनएस मंगरोल पनडुब्बीरोधी उथले पानी के पोतों की किस श्रेणी का तीसरा पोत है?

  1. A.अर्नाला श्रेणी
  2. B.महे श्रेणी
  3. C.कामोर्ता श्रेणी
  4. D.अभय श्रेणी

सही उत्तर

B. महे श्रेणी

व्याख्या

सही उत्तर महे श्रेणी है। पी82 पेनेंट वाला आईएनएस मंगरोल इस श्रेणी का तीसरा पनडुब्बीरोधी उथले पानी का पोत है, जो भारतीय नौसेना की सेवा में आया है। इस प्रकार के पोत उथले तटीय क्षेत्र के लिए बनाए जाते हैं, जहां बड़े युद्धपोत कम प्रभावी रहते हैं। ये पनडुब्बीरोधी युद्ध, पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले सामुद्रिक अभियान और बारूदी सुरंग युद्ध से जुड़े कार्यों के लिए सुसज्जित होते हैं। विकल्प A यानी अर्नाला श्रेणी इस पोत की श्रेणी नहीं है। विकल्प C यानी कामोर्ता श्रेणी बड़े पनडुब्बीरोधी कोरवेट से जुड़ी है, उथले पानी के इन छोटे पोतों से नहीं। विकल्प D यानी अभय श्रेणी भी गलत है। अभ्यर्थियों को श्रेणी का नाम और यह तथ्य दोनों याद रखने चाहिए कि मंगरोल श्रेणी का तीसरा पोत है, क्योंकि प्रश्न अक्सर क्रम पर आधारित होते हैं।

पूरा लेख पढ़ें: नौसेना में शामिल हुआ पनडुब्बीरोधी पोत आईएनएस मंगरोल

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Q1.रक्षाआसान

अक्टूबर 2026 में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए आईएनएस मंगरोल का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया?

  1. A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
  2. B.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता
  3. C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
  4. D.हिंदुस्तान शिपयार्ड, विशाखापत्तनम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि

व्याख्या

सही उत्तर कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि है। इस पोत का डिजाइन भारत में तैयार हुआ और निर्माण इसी शिपयार्ड ने किया। पोत में स्वदेशी सामग्री का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है, जिसे नौसेना युद्धपोत के डिजाइन, निर्माण और प्रणालियों के एकीकरण में देश की क्षमता का प्रमाण मानती है। मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह में शिपयार्ड तथा उद्योग साझेदारों के प्रतिनिधि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े लोग उपस्थित थे। विकल्प A यानी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई का शिपयार्ड है, लेकिन इस पोत से उसका संबंध नहीं है। विकल्प B यानी कोलकाता का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स भी इस पोत का निर्माता नहीं है। विकल्प D यानी विशाखापत्तनम का हिंदुस्तान शिपयार्ड भी गलत है। इसलिए केवल विकल्प C सही है और अभ्यर्थियों को पोत तथा निर्माता शिपयार्ड का यह संबंध याद रखना चाहिए।

Q2.रक्षामध्यम

आईएनएस मंगरोल का नाम गुजरात के किस जिले के तटीय कस्बे पर रखा गया है?

  1. A.जूनागढ़
  2. B.पोरबंदर
  3. C.देवभूमि द्वारका
  4. D.वलसाड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जूनागढ़

व्याख्या

सही उत्तर जूनागढ़ है। मंगरोल गुजरात के जूनागढ़ जिले का तटीय कस्बा और जाना-पहचाना मछली पकड़ने का बंदरगाह है, और नया युद्धपोत इसी नाम को धारण करता है। भारतीय नौसेना प्रसिद्ध पोतों के नाम नए पोतों को देने की परंपरा निभाती है, इसलिए इस नाम का इतिहास भी है। एम85 पेनेंट वाला पुराना आईएनएस मंगरोल एक माइनस्वीपर था, जिसने अप्रैल 2004 तक सेवा दी और नया पोत उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। विकल्प B यानी पोरबंदर गुजरात का तटीय जिला है, लेकिन इस पोत के नाम से उसका संबंध नहीं है। विकल्प C यानी देवभूमि द्वारका भी गुजरात का तटीय जिला है और यहां गलत है। विकल्प D यानी वलसाड दक्षिण गुजरात में है और सही नहीं है। अभ्यर्थियों को पोत, कस्बा, जिला और राज्य को एक साथ जोड़कर याद रखना चाहिए।

Q3.रक्षाकठिन

मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में आईएनएस मंगरोल के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता किसने की?

  1. A.नौसेना प्रमुख
  2. B.फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान
  3. C.फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान
  4. D.रक्षा सचिव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान

व्याख्या

सही उत्तर फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान है। इस पद पर तैनात वाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में हुए समारोह की अध्यक्षता की, और यह डॉकयार्ड पश्चिमी नौसेना कमान के क्षेत्र में आता है। अपने संबोधन में उन्होंने सामुद्रिक निगरानी और पनडुब्बीरोधी क्षमता को मजबूत करने में स्वदेशी युद्धपोतों के महत्व तथा रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। विकल्प A यानी नौसेना प्रमुख नौसेना के मुखिया हैं, पर इस अवसर पर उन्होंने अध्यक्षता नहीं की। विकल्प C में दक्षिणी नौसेना कमान का उल्लेख है, जिसका मुख्यालय कहीं और है और जिसके प्रमुख ने यह समारोह नहीं कराया। विकल्प D यानी रक्षा सचिव रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं; मंत्रालय के अधिकारी समारोह में उपस्थित थे, पर कमीशनिंग की अध्यक्षता सेवारत फ्लैग अधिकारी करते हैं। इसलिए विकल्प B सही है।

Q4.रक्षाकठिन

माउंट मुकुट अभियान के बाद देहरादून में भारतीय तटरक्षक बल के दल का स्वागत किसने किया?

  1. A.उत्तराखंड के राज्यपाल
  2. B.उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
  3. C.भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक
  4. D.रक्षा मंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री

व्याख्या

सही उत्तर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं। इस पद पर आसीन पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित समारोह में सत्रह सदस्यीय दल का स्वागत किया, पर्वतारोहियों के असाधारण साहस एवं सहनशक्ति की सराहना की और इस उपलब्धि को हिम्मत तथा राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया। विकल्प A में राज्य के राज्यपाल का नाम है, जिन्होंने यह समारोह नहीं कराया। विकल्प C में तटरक्षक बल के प्रमुख का उल्लेख है; इस आयोजन में बल की ओर से अपर महानिदेशक आनंद प्रकाश बडोला उपस्थित थे, जिन्होंने दल को बधाई दी। विकल्प D यानी रक्षा मंत्री भी सही नहीं है। अभ्यर्थियों को स्वागत समारोह, नगर और स्वागत करने वाले पद को जोड़कर याद रखना चाहिए। ऐसे प्रश्नों में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच भ्रम पैदा किया जाता है, इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि इस आयोजन में राज्य के मुख्यमंत्री ने दल का स्वागत किया था।

Q5.रक्षामध्यम

माउंट मुकुट की चढ़ाई भारतीय तटरक्षक बल के किस आयोजन से जुड़े एवरेस्ट अभियान की तैयारी थी?

  1. A.वर्ष 2027 में स्वर्ण जयंती
  2. B.वर्ष 2028 में प्लैटिनम जयंती
  3. C.वर्ष 2030 में हीरक जयंती
  4. D.वर्ष 2032 में शताब्दी समारोह
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वर्ष 2027 में स्वर्ण जयंती

व्याख्या

सही उत्तर विकल्प A में दिया गया स्वर्ण जयंती वर्ष है। माउंट मुकुट की चढ़ाई उसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाए गए 18 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम का पांचवां और अंतिम चरण थी, और इससे मिला परिचालन अनुभव तथा सीख एवरेस्ट अभियान की अंतिम तैयारियों में सहायक होगी। विकल्प B में प्लैटिनम जयंती, विकल्प C में हीरक जयंती और विकल्प D में शताब्दी समारोह का उल्लेख है, पर प्रस्तावित एवरेस्ट अभियान इनमें से किसी अवसर से नहीं जुड़ा है। अभ्यर्थियों को याद रखना चाहिए कि स्वर्ण जयंती का अर्थ पचास वर्ष पूरे होना है, और माउंट मुकुट का शिखर तथा देहरादून का स्वागत समारोह दोनों उसी तैयारी का हिस्सा हैं। परीक्षा में जयंती के प्रकार और उससे जुड़े वर्ष को मिलाकर प्रश्न बनाए जाते हैं, इसलिए दोनों तथ्यों को साथ याद रखना अधिक उपयोगी रहता है।