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GK24

जोरहाट के रेशमकीट बीज केंद्र में ग्रेनेज और शीतगृह शुरू

केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने असम के जोरहाट स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र में नया ग्रेनेज भवन और शीतगृह शुरू किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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जोरहाट के रेशमकीट बीज केंद्र में ग्रेनेज और शीतगृह शुरू

चर्चा में क्यों

8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने असम के रोवरिया, जोरहाट स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र में पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बने नए ग्रेनेज भवन तथा शीतगृह सुविधा का उद्घाटन किया।

केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने 8 अक्टूबर 2026 को असम में केंद्रीय रेशम बोर्ड के रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र, रोवरिया, जोरहाट में नवनिर्मित ग्रेनेज भवन तथा शीतगृह सुविधा का उद्घाटन किया। यह सुविधा पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बनाई गई है और इसका उद्देश्य रेशम उत्पादन के ढांचे का आधुनिकीकरण तथा क्षेत्र में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है।

सुविधा की क्षमता

नई इकाई प्रति वर्ष शहतूत संकर बीज की 30 लाख रोगमुक्त अंडोत्पत्ति (डीएफएल) तैयार कर सकती है और 1 करोड़ डीएफएल तक संरक्षित रख सकती है। किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज पहुंचना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अड़चन है, और यह उन्नयन सीधे उसी पर केंद्रित है: बीज उत्पादन की कार्यकुशलता बढ़े, क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखला मजबूत हो, रोजगार बने तथा स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और व्यापारियों को काम मिले।

भारत के रेशम नक्शे पर असम

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री ने राष्ट्रीय रेशम अर्थव्यवस्था में राज्य का महत्व बताया। असम भारत के मुगा रेशम का लगभग 84 प्रतिशत देता है, जो 73 मीट्रिक टन बैठता है, तथा एरी रेशम उत्पादन का लगभग 74 प्रतिशत, यानी 2,131 मीट्रिक टन। वर्ष 2026-27 में जुलाई तक राज्य ने शहतूत कच्चे रेशम उत्पादन का 6 प्रतिशत दर्ज किया, जो 9 मीट्रिक टन है। इसी अवधि में समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र के आंकड़े इस प्रकार रहे।

किस्मपूर्वोत्तर क्षेत्र उत्पादन
शहतूत रेशम142 मीट्रिक टन
एरी रेशम2,890 मीट्रिक टन
मुगा रेशम87 मीट्रिक टन
तसर रेशम3 मीट्रिक टन

बीज नेटवर्क और रोजगार

मंत्री ने बताया कि केंद्रीय रेशम बोर्ड का बीज उत्पादन नेटवर्क शहतूत तथा वन्या दोनों क्षेत्रों को समेटता है। बोर्ड का राष्ट्रीय रेशमकीट बीज संगठन शहतूत बीज क्षेत्र की जरूरत पूरी करता है, जबकि दो अन्य संगठन वन्या बीज क्षेत्र को सहयोग देते हैं। अनुमान है कि 2025-26 के दौरान रेशम उत्पादन लगभग 29.50 लाख व्यक्तियों को रोजगार देगा, इसीलिए बीज की गुणवत्ता का असर खेत से बहुत आगे तक जाता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक ढांचा, प्रौद्योगिकी तथा कौशल विकास मिलकर तय करते हैं कि यह क्षेत्र उत्पादक और टिकाऊ रहेगा या नहीं, और मिशन सेनेहजोरी को मुगा रेशम को वैश्विक बाजार के लिए उच्च मूल्य वाला उत्पाद बनाने का रास्ता बताया।

और क्या हुआ

उद्घाटन के साथ एक सेरी-हितधारक बैठक भी हुई, जिसमें क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ समस्याओं पर विचार किया गया। प्रगतिशील रेशम किसानों को सम्मानित किया गया और पी1 रोगमुक्त अंडोत्पत्ति सीधे किसानों को वितरित की गई। वस्त्र मंत्रालय की समर्थ योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र दिए गए। मंत्री ने केंद्रीय रेशम बोर्ड, राज्य सरकार, अनुसंधान संस्थानों, किसानों तथा उद्यमियों के बीच घनिष्ठ सहयोग पर जोर दिया और इस प्रयास को आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर तथा विकसित असम के लक्ष्यों से जोड़ा। इस अवसर पर काजीरंगा से सांसद कामाख्या प्रसाद तासा, जोरहाट से विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी, असम की रेशम उत्पादन निदेशक लखिमी दत्ता तथा केंद्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य सचिव पी. शिवकुमार उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

उद्घाटनपबित्रा मार्गेरिटा, केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री
सुविधाग्रेनेज भवन तथा शीतगृह, केंद्रीय रेशम बोर्ड रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र, रोवरिया, जोरहाट, असम
योजनापूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना (एनईआरटीपीएस)
वार्षिक क्षमताशहतूत संकर बीज की 30 लाख रोगमुक्त अंडोत्पत्ति (डीएफएल)
संरक्षण क्षमता1 करोड़ डीएफएल तक
असम का मुगा रेशम हिस्साभारत का लगभग 84 प्रतिशत, यानी 73 मीट्रिक टन
असम का एरी रेशम हिस्सालगभग 74 प्रतिशत, यानी 2,131 मीट्रिक टन
पूर्वोत्तर क्षेत्र उत्पादन142 मीट्रिक टन शहतूत, 2,890 मीट्रिक टन एरी, 87 मीट्रिक टन मुगा तथा 3 मीट्रिक टन तसर
रेशम उत्पादन में रोजगार2025-26 के दौरान लगभग 29.50 लाख व्यक्ति
उल्लिखित योजनाएंमुगा रेशम के लिए मिशन सेनेहजोरी तथा कौशल विकास के लिए समर्थ योजना
केंद्रीय रेशम बोर्ड सदस्य सचिवपी. शिवकुमार

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: उद्घाटन करने वाले (वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा), स्थान (केंद्रीय रेशम बोर्ड रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र, रोवरिया, जोरहाट, असम), योजना (पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना), क्षमता (वर्ष में 30 लाख डीएफएल, 1 करोड़ डीएफएल संरक्षण), असम का मुगा रेशम में हिस्सा (लगभग 84 प्रतिशत, 73 मीट्रिक टन) तथा एरी में (लगभग 74 प्रतिशत, 2,131 मीट्रिक टन), क्षेत्रीय उत्पादन आंकड़े, 2025-26 में 29.50 लाख रोजगार, तथा मिशन सेनेहजोरी व समर्थ योजना।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राज्य समाचारमध्यम

अक्टूबर 2026 में उद्घाटित नया ग्रेनेज भवन तथा शीतगृह किस रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र में है?

  1. A.रोवरिया, जोरहाट, असम
  2. B.लहदोईगढ़, जोरहाट, असम
  3. C.मैसूरु, कर्नाटक
  4. D.बहरामपुर, पश्चिम बंगाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. रोवरिया, जोरहाट, असम

व्याख्या

सही उत्तर रोवरिया, जोरहाट, असम है। वहां स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र में नवनिर्मित ग्रेनेज भवन तथा शीतगृह सुविधा का उद्घाटन केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत किया। विकल्प बी उसी कस्बे के पास की दूसरी जगह का नाम है और यह उस अभ्यर्थी को फंसाता है जिसे केवल जिला याद रहता है। विकल्प सी और डी देश में रेशम अनुसंधान तथा बीज कार्य से पुराने जुड़े स्थान हैं, इसी कारण इन्हें यहां रखा गया है; इस उद्घाटन से इनका कोई संबंध नहीं। यह सुविधा प्रति वर्ष शहतूत संकर बीज की 30 लाख रोगमुक्त अंडोत्पत्ति तैयार कर सकती है और 1 करोड़ तक संरक्षित रख सकती है, जिससे क्षेत्र के किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिलेगा।

Q2.राज्य समाचारकठिन

भारत के मुगा रेशम उत्पादन में असम का हिस्सा लगभग कितना है?

  1. A.54 प्रतिशत
  2. B.64 प्रतिशत
  3. C.74 प्रतिशत
  4. D.84 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 84 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 84 प्रतिशत है, जो 73 मीट्रिक टन मुगा रेशम बैठता है। यहां जाल विकल्प सी है: 74 प्रतिशत असम का एरी रेशम उत्पादन में हिस्सा है, जो 2,131 मीट्रिक टन है, और प्रश्नपत्रों में ये दोनों हिस्से आपस में बदल दिए जाते हैं, इसलिए जोड़ी को साथ याद करना चाहिए। विकल्प ए और बी गढ़े गए आंकड़े हैं। मुगा वही सुनहरा रेशम है जिसके लिए असम जाना जाता है, और मंत्री ने मिशन सेनेहजोरी को इसे वैश्विक बाजार के लिए उच्च मूल्य वाला उत्पाद बनाने का रास्ता बताया। पूर्णता के लिए यह भी जानें कि राज्य ने 2026-27 में जुलाई तक शहतूत कच्चे रेशम उत्पादन का 6 प्रतिशत यानी 9 मीट्रिक टन दर्ज किया, और इसी अवधि में पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र ने 142 मीट्रिक टन शहतूत रेशम दर्ज किया।

Q3.राज्य समाचारमध्यम

अनुमान के अनुसार 2025-26 के दौरान रेशम उत्पादन कितने व्यक्तियों को रोजगार देगा?

  1. A.लगभग 9.50 लाख व्यक्ति
  2. B.लगभग 19.50 लाख व्यक्ति
  3. C.लगभग 29.50 लाख व्यक्ति
  4. D.लगभग 39.50 लाख व्यक्ति
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लगभग 29.50 लाख व्यक्ति

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 29.50 लाख व्यक्ति है। मंत्री ने यह अनुमान यह दिखाने के लिए दिया कि कितनी आजीविका इस क्षेत्र पर टिकी है, और इसी कारण बीज की गुणवत्ता तथा आधुनिक ढांचा पालन-कक्ष से बहुत आगे तक महत्व रखते हैं। विकल्प ए, बी और डी वास्तविक आंकड़े का पहला अंक बदलकर बनाए गए हैं और रोजगार से जुड़े प्रश्नों में यही आम जाल है। इसके साथ संदर्भ भी याद रखें: केंद्रीय रेशम बोर्ड का बीज नेटवर्क शहतूत तथा वन्या दोनों क्षेत्रों को समेटता है, जिसमें राष्ट्रीय रेशमकीट बीज संगठन शहतूत पक्ष की जरूरत पूरी करता है और दो अलग संगठन वन्या बीज को सहयोग देते हैं। मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक ढांचा, प्रौद्योगिकी और कौशल विकास मिलकर क्षेत्र की उत्पादकता तय करते हैं, और उन्होंने इसे आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर से जोड़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोरहाट में नई सुविधा किस योजना के अंतर्गत बनी?

पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र प्रोत्साहन योजना (एनईआरटीपीएस) के अंतर्गत। केंद्रीय रेशम बोर्ड के रेशमकीट बीज उत्पादन केंद्र, रोवरिया, जोरहाट में ग्रेनेज भवन तथा शीतगृह का उद्घाटन 8 अक्टूबर 2026 को हुआ।

नई रेशमकीट बीज सुविधा की क्षमता क्या है?

यह प्रति वर्ष शहतूत संकर बीज की 30 लाख रोगमुक्त अंडोत्पत्ति तैयार कर सकती है और 1 करोड़ डीएफएल तक संरक्षित रख सकती है, जिससे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर उपलब्ध होगा।

भारत के मुगा रेशम उत्पादन में असम का हिस्सा कितना है?

लगभग 84 प्रतिशत, जो 73 मीट्रिक टन है। असम एरी रेशम उत्पादन का भी लगभग 74 प्रतिशत यानी 2,131 मीट्रिक टन देता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 8 अक्टूबर 2026

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