जल जीवन मिशन 2.0 में जनजातीय गांवों के लिए 5,000 करोड़ रुपये
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय गांवों में नल जल कवरेज की समीक्षा की, जिसके लिए जल जीवन मिशन 2.0 में 5,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

चर्चा में क्यों
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के गांवों में नल जल की संपूर्ण उपलब्धता पर दूसरी अनुवर्ती बैठक की, जिसके लिए जल जीवन मिशन 2.0 में 5,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत जनजातीय गांवों में पेयजल की कमी दूर करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है। यह जानकारी जल शक्ति मंत्रालय के अधीन काम करने वाले पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की दूसरी अनुवर्ती समीक्षा एवं अभिसरण बैठक में राज्यों के सामने रखी गई।
दो जनजातीय अभियान
पहला अभियान है प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान, जिसे संक्षेप में पीएम-जनमन कहा जाता है। दूसरा है धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान। दोनों का उद्देश्य जनजातीय बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को पूरा करना है और इनका पेयजल हिस्सा जल जीवन मिशन के माध्यम से पहुंचाया जाना है।
बैठक में कौन शामिल हुआ
बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की। इसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जनजातीय कार्य मंत्रालय, राज्यों के ग्रामीण जल आपूर्ति तथा जन स्वास्थ्य अभियंत्रण विभागों और राज्यों के जनजातीय कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह बैठक पहले हुए विभागीय सम्मेलन की उन प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने के लिए हुई, जिनमें राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों ने दोनों अभियानों के हर पात्र गांव में नल जल की संपूर्ण उपलब्धता का वादा किया था।
राज्यों के लिए चार प्राथमिकताएं
- जनजातीय कल्याण विभागों तथा मिशन के आंकड़ों का मिलान, जिससे एक ही मान्य सूची बने
- अब तक छूट गए गांवों तथा बस्तियों की पहचान
- सत्यापित स्थानीय सरकार निर्देशिका कोड के साथ तकनीकी रूप से सही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना
- पहले से पूरी हो चुकी उपलब्धता का संयुक्त सत्यापन तथा प्रमाणन
जमीन पर नलों की जांच
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने सर्वेसेतु नाम से राज्यवार अभ्यास चलाया है, जिसमें कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति घर-घर जाकर परखी जाती है। राज्यों से कहा गया है कि वे इसके निष्कर्ष उपायुक्त या जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाले जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के समक्ष संयुक्त रूप से रखें तथा किसी भी अंतर को क्षेत्रीय जांच से सुलझाएं।
राज्यों की स्थिति
आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल तथा मणिपुर से कोड सत्यापन, परियोजना रिपोर्ट के दस्तावेज, सेवा स्तर और प्रति नल कनेक्शन लागत से जुड़ी टिप्पणियों का उत्तर देने को कहा गया। बिहार, तमिलनाडु तथा असम से पहले भेजी गई टिप्पणियों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। लद्दाख, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ ने बताया कि उनके प्रस्ताव अक्तूबर 2026 में विभाग को मिल जाएंगे। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन ने कहा कि जल आपूर्ति तथा जनजातीय कल्याण विभागों को प्रस्ताव संयुक्त रूप से तैयार करने होंगे और उन्हें दोनों सचिवों की सह-अध्यक्षता वाली समिति के सामने रखना होगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| निर्धारित राशि | जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत 5,000 करोड़ रुपये |
|---|---|
| विभाग | पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय |
| अध्यक्षता | अशोक के. के. मीना, सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग |
| पीएम-जनमन | प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान |
| डीए-जेजीयूए | धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान |
| सर्वेक्षण अभ्यास | सर्वेसेतु, जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा, कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन की जांच |
| जिला मंच | जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, अध्यक्षता उपायुक्त या जिलाधिकारी |
परीक्षा की दृष्टि से
निर्धारित राशि (जल जीवन मिशन 2.0 में 5,000 करोड़ रुपये), विभाग (पेयजल एवं स्वच्छता) तथा उसका मंत्रालय (जल शक्ति), पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के पूरे नाम, सर्वेसेतु चलाने वाला मंत्रालय (जनजातीय कार्य) तथा यह बात याद रखें कि जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं।
अभ्यास प्रश्न
पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के गांवों में पेयजल की कमी दूर करने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 में कितनी राशि निर्धारित की गई है?
- A.2,500 करोड़ रुपये
- B.5,000 करोड़ रुपये
- C.7,500 करोड़ रुपये
- D.12,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 5,000 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 5,000 करोड़ रुपये है। यह राशि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत उन जनजातीय गांवों के लिए विशेष प्रावधान के रूप में रखी गई है, जो प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के दायरे में आते हैं। यह आंकड़ा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की दूसरी अनुवर्ती समीक्षा एवं अभिसरण बैठक में राज्यों के सामने रखा गया। यह विभाग जल शक्ति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। बैठक पहले हुए विभागीय सम्मेलन की उन प्रतिबद्धताओं पर आधारित थी, जिनमें राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों ने हर पात्र गांव में नल जल की संपूर्ण उपलब्धता का वादा किया था। विकल्प A, C तथा D में दी गई राशियां इन दोनों जनजातीय अभियानों के लिए घोषित प्रावधान से मेल नहीं खातीं, इसलिए वे तीनों गलत हैं।
कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति जांचने वाला सर्वेसेतु अभ्यास कौन सा मंत्रालय चला रहा है?
- A.जल शक्ति मंत्रालय
- B.ग्रामीण विकास मंत्रालय
- C.जनजातीय कार्य मंत्रालय
- D.पंचायती राज मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जनजातीय कार्य मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर जनजातीय कार्य मंत्रालय है। इसी मंत्रालय ने सर्वेसेतु नाम से राज्यवार अभ्यास चलाया है, जिसमें कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति हर घर के स्तर पर परखी जाती है। राज्यों से कहा गया है कि वे जल आपूर्ति विभागों, जनजातीय कल्याण विभागों तथा सर्वेक्षण एजेंसी के माध्यम से इसके निष्कर्ष जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के समक्ष संयुक्त रूप से रखें और किसी भी अंतर को क्षेत्रीय जांच से दूर करें, जिससे जिला स्तर पर अंतिम मान्य आंकड़े तैयार हों। विकल्प A में दिया जल शक्ति मंत्रालय वह मंत्रालय है जिसके विभाग ने यह बैठक बुलाई और जो नल कनेक्शन के लिए धन देता है, परंतु यह सर्वेक्षण उसका नहीं है। विकल्प B तथा D में दिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की इस सर्वेक्षण में कोई भूमिका नहीं है, अतः वे गलत हैं।
डीए-जेजीयूए का सही पूरा नाम कौन सा है?
- A.धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
- B.धरती आबा जल ग्राम उड़ान अभियान
- C.दीन दयाल आदिवासी जनजाति ग्रामीण उन्नति अभियान
- D.धरती आबा जनजाति ग्राम उज्ज्वल अभियान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान
व्याख्या
सही उत्तर धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान है। यह उन दो जनजातीय अभियानों में से एक है, जिनके पेयजल की जरूरतों की समीक्षा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने की; दूसरा अभियान पीएम-जनमन अर्थात प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान है। दोनों का लक्ष्य संपूर्ण उपलब्धता है, अर्थात हर पात्र जनजातीय गांव के हर पात्र घर में कार्यशील नल कनेक्शन, जिसे संयुक्त सत्यापन के बाद प्रमाणित किया जाता है। विकल्प B में गांव के उत्कर्ष के स्थान पर जल और उड़ान जोड़ दिया गया है, जो नाम में नहीं है। विकल्प C में दीन दयाल तथा ग्रामीण उन्नति पर आधारित एक अलग ही नाम गढ़ा गया है। विकल्प D में उत्कर्ष के स्थान पर उज्ज्वल कर दिया गया है और जनजातीय शब्द का सही रूप हटा दिया गया है। चूंकि केवल विकल्प A आधिकारिक नाम दोहराता है, वही सही है।
जिला स्तर पर पेयजल उपलब्धता के सत्यापन का मुख्य मंच कौन सा है और उसकी अध्यक्षता कौन करता है?
- A.जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, अध्यक्षता जिलाधिकारी
- B.जिला योजना समिति, अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष
- C.जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी
- D.जिला जल नियामक बोर्ड, अध्यक्षता मंडलायुक्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, अध्यक्षता जिलाधिकारी
व्याख्या
सही उत्तर जिला जल एवं स्वच्छता मिशन, अध्यक्षता जिलाधिकारी है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने जोर देकर कहा कि दोनों जनजातीय अभियानों के गांवों की नियमित समीक्षा इसी निकाय की बैठकों से होनी चाहिए, जिसकी अध्यक्षता जिले के उपायुक्त या जिलाधिकारी करते हैं। यह निकाय विभागों के बीच समन्वय, सर्वेक्षण के निष्कर्षों के सत्यापन तथा उन वास्तविक कमियों की पहचान का मुख्य मंच माना गया है, जहां काम करने की जरूरत है। विकल्प B में दी गई जिला योजना समिति जिला योजनाओं का काम देखती है, नल जल सत्यापन का नहीं। विकल्प C में दिया जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ग्रामीण योजनाएं लागू करता है, परंतु उसे यह भूमिका नहीं दी गई। विकल्प D में मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाला जिला जल नियामक बोर्ड बताया गया है, जो इस व्यवस्था में मौजूद ही नहीं है। अतः विकल्प A सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनजातीय गांवों के लिए जल जीवन मिशन 2.0 में कितनी राशि रखी गई है?
पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के गांवों में पेयजल की कमी दूर करने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत 5,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान रखा गया है।
पीएम-जनमन तथा डीए-जेजीयूए के पूरे नाम क्या हैं?
पीएम-जनमन का पूरा नाम प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान है तथा डीए-जेजीयूए का पूरा नाम धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान है। दोनों जनजातीय कल्याण अभियान हैं और इनका पेयजल हिस्सा जल जीवन मिशन से पूरा किया जाता है।
सर्वेसेतु क्या है?
सर्वेसेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय का राज्यवार अभ्यास है, जिसमें कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति घर के स्तर पर जांची जाती है। इसके निष्कर्ष सत्यापन के लिए जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के सामने रखे जाते हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2317450 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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